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इलाहाबाद HC की टिप्पणी- सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन गलत, दिया जोधा-अकबर का उदाहरण

महज शादियों के लिए बड़ी संख्या में हो रहे धर्म परिवर्तन के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई गहरी चिंता जाहिर की है.

महज शादियों के लिए बड़ी संख्या में हो रहे धर्म परिवर्तन के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई गहरी चिंता जाहिर की है.

Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महज शादियों के लिए बड़ी संख्या में हो रहे धर्म परिवर्तन के मामलों पर जताई गहरी चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने मुगल बादशाह अकबर की जोधाबाई के साथ हुई शादी का तर्क देकर बेवजह के धर्म परिवर्तन से बचने की सलाह भी दी.

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प्रयागराज. महज शादियों के लिए बड़ी संख्या में हो रहे धर्म परिवर्तन (Religion Change) के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने जताई गहरी चिंता जाहिर की है. इस पर कोर्ट ने मुगल बादशाह अकबर की जोधाबाई के साथ हुई शादी का तर्क देकर बेवजह के धर्म परिवर्तन से बचने की सलाह भी दी. हाईकोर्ट ने कहा कि अकबर और जोधा बाई की शादी से सबक लेकर धर्म परिवर्तन की गैर जरूरी घटनाओं से बचा जा सकता है.

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के बढ़ते मामलों को लेकर छिड़े विवादों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने एटा जिले में शादी के लिए धोखे से कराए गए धर्मांतरण के मामले में फैसला सुनाते हुए अकबर और जोधाबाई के रिश्ते को उदाहरण के तौर पर पेश किया है. कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि महज शादी करने के लिए धोखे-लालच व दबाव में किया गया धर्मांतरण सही नहीं है. ऐसे धर्मांतरण में पूजा पद्धति तो बदल जाती है, लेकिन धर्म विशेष के प्रति कोई आस्था नहीं होती. इस तरह के धर्मांतरण में संबंधित व्यक्तियों के साथ ही देश व समाज पर भी बुरा असर पड़ता है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि शादी करने के लिए लड़कियों का धर्म बदलवाना पूरी तरह गलत है, क्योंकि धर्म बदले बिना भी शादी की जा सकती है. अकबर और जोधा बाई ने धर्म परिवर्तन किए बिना एक दूसरे के साथ विवाह किया, एक दूसरे का सम्मान किया और उनके धर्म व पूजा पद्धति का भी आदर किया.दोनों के विवाह और रिश्ते में धर्म कभी आड़े नहीं आया. कोर्ट ने कहा – अकबर और जोधा बाई का रिश्ता धर्म बदले बिना विवाह करना और एक दूसरे की पूजा पद्धति का सम्मान करने का सबसे बेहतरीन उदाहरण है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जोधा-अकबर के रिश्ते का उदाहरण एटा जिले के जावेद उर्फ़ जाबिद अंसारी की जमानत अर्जी पर सुनाए गए फैसले में दिया है. जावेद के खिलाफ एटा के जलेसर थाने में एक हिन्दू लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और धोखे से धर्म परिवर्तन कराकर उसके साथ निकाह करने की एफआईआर दर्ज हुई थी. पीड़ित लड़की ने मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में कहा था कि जावेद ने सादे कागजों और उर्दू में लिखे गए दस्तावेजों पर दस्तखत कराकर धोखे से उसका धर्म परिवर्तन करा दिया. इसके बाद पहले से शादीशुदा होने की जानकारी छिपाकर दबाव डालकर उससे निकाह कर लिया. वह जावेद के साथ बिल्कुल नहीं रहना चाहती.

लड़की के बयान के आधार पर जावेद को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. जावेद की जमानत अर्जी इन्हीं दलीलों के आधार पर कोर्ट ने खारिज कर दी है. जस्टिस शेखर कुमार यादव ने जमानत अर्जी पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस मामले में हिंदी में सात पन्नों का फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस मामले में संविधान रचयिता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा किए गए धर्म परिवर्तन की परिस्थितियों का भी जिक्र किया है.कोर्ट ने कहा है कि अपनी मर्जी से किसी भी धर्म व उसकी पूजा पद्धति में आस्था जताने का हर किसी को अधिकार है, लेकिन डर- दबाव -लालच व धोखाधड़ी से किया गया धर्म परिवर्तन निजी जीवन के साथ ही देश व समाज के लिए भी बेहद खतरनाक होता है. इससे कई बार समाज में विघटन की स्थिति पैदा होती है. इसी आधार पर जस्टिस शेखर कुमार यादव की सिंगल बेंच ने इस मामले में आरोपी जावेद की जमानत की अर्जी खारिज कर दी है और उसे जेल से रिहा किये जाने का आदेश दिए जाने से इंकार कर दिया है.

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क्‍या एक लड़की की फोटो रही नरेंद्र गिरि की आत्महत्या की वजह, पढ़िए सुसाइड नोट में आनंद गिरि पर लगाया क्या आरोप?

महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में स्वामी आनंद गिरि को मौत का जिम्मेदार ठहराया है.

Mahant Narendra Giri Suicide Note: महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है कि मैंने पूरा जीवन सम्मान से जिया है. अगर ये फोटो बाहर आ जाएगी तो मैं समाज में सम्मान से जी नहीं पाऊंगा. इससे बेहतर मर जाना है. सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि 13 सितंबर को भी खुदकुशी की कोशिश की थी.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 08:19 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के सुसाइड नोट (Suicide Note) से इस बात का खुलासा हुआ है कि उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम इसलिए उठाया क्योंकि उनके शिष्य स्वामी आनंद गिरि की एक फाेटो के सााथ छेड़छाड़ कर एक लड़की के साथ जोड़कर उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था. महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैंने पूरा जीवन सम्मान से जिया है. अगर ये फोटो बाहर आ जाएगी तो मैं समाज में सम्मान से जी नहीं पाऊंगा. इससे बेहतर मर जाना है. सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि 13 सितंबर को भी खुदकुशी की कोशिश की थी.

पुलिस के पास मौजूद सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है क‍ि आनंद गिरि के कारण आज मैं विचलित हो गया. हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरा फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए फोटो वायरल करने वाला है. मेरे को बदनाम करने जा रहा है. मैंने सोचा कि एक बार बदनाम हो गया तो कहां-कहां सफाई दूंगा. बदनाम हो गया तो जिस पद पर हूं उसकी गरिमा चली जाएगी. इससे अच्छा तो मर जाना ठीक है. मेरे मरने के बाद सच्चाई तो सामने आ ही जाएगी. आगे नरेंद्र गिरि ने लिखा कि मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज मैं कैसे रहूंगा, इससे अच्छा मर जाना ठीक रहेगा.

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सामने आया महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट

13 सितंबर को ही करना चाहता था सुसाइड
महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नॉट में लिखा है कि वे 13 सितंबर को ही आत्महत्या करने वाले थे. लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया. आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है. तीनों आरोपियों के नाम के साथ लिखा है कि मैं पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से प्रार्थना करता हूं कि इन तीनों के साथ कानूनी कार्रवाई की जाए जिससे मेरी आत्मा को शांती मिल सके.

बलवीर गिरि को बनाया उत्तराधिकारी
महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में शिष्य बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाया है. महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि प्रिय बलवीर ‌गिरि मठ मंदिर की व्यवस्‍था का प्रयास करना, जिस तरह से मैं किया करता था. साथ ही उन्होंने अपने कुछ शिष्यों का ध्यान रखने की भी बात कही. इसके साथ उन्होंने महंत हरी गोविंद पुरी के लिए उन्होंने लिखा कि आप से निवेदन है कि मढ़ी का महंत बलवीर गिरि को ही बनाना. साथ ही महंत रविन्द्र पुरी जी के लिए उन्होंने लिखा कि आप ने हमेशा साथ दिया है, मेरे मरने के बाद भी मठ की गरिमा को बनाए रखना.

UP News Live Updates: महंत नरेंद्र गिरि का पोस्टमॉर्टम शुरू, आज तय होगा उत्तराधिकारी का नाम

महंत नरेंद्र गिरी के समाधि कार्यक्रम के चलते शिक्षा विभाग ने बुधवार को स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया है.

Narendra Giri Death Case: जानकारी के मुताबिक पोस्टमॉर्टम के बाद आज ही महंत नरेंद्र गिरि को मठ बाघंबरी गद्दी में ही भू-समाधी दी जाएगी. अपने सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि में लिखा है कि उन्हें उनके गुरु की समाधि के बगल में ही स्थित नींबू के पेड़ के पास समाधि दी जाए.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 08:15 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के शव का पोस्टमॉर्टम (Postmortem) बुधवार को सुबह आठ बजे एसआरएन हॉस्पिटल में शुरू हो गया. पांच डॉक्टरों का पैनल द्वारा शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है. पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही यह तय हो पाएगा कि महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की थी या हत्या कर उनके शव को फंदे से टांग दिया गया था. इस बीच आज ही अखाड़ा परिषद की बैठक भी होनी है जिसमें यह तय होगा कि महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी कौन होगा। महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट के मुताबिक उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है. मिल रही जानकारी के मुताबिक पोस्टमॉर्टम के बाद आज ही महंत नरेंद्र गिरि को मठ बाघंबरी गद्दी में ही भू-समाध‍ि दी जाएगी. अपने सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि में लिखा है कि उन्हें उनके गुरु की समाधि के बगल में ही स्थित नींबू के पेड़ के पास समाधि दी जाए. हालांकि पहले यह तय हुआ था कि महंत नरेंद्र गिरि को 23 सितंबर को समाधि दी जाएगी. लेकिन पोस्टमॉर्टम के बाद बॉडी को ज्यादा देर रखना उचित नहीं होता, लिहाजा उन्हें आज ही पूरे विधि विधान के साथ समाधि दी जाएगी. महंत नरेंद्र गिरी के समाधि कार्यक्रम के चलते शिक्षा विभाग ने बुधवार को स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया है

इलाहाबाद HC का तंज, कहा- अपराधियों की रॉबिनहुड जैसी छवि बना देती हैं राजनीतिक पार्टियां

पार्टियां अपराधियों को देती हैं टिकट, इस पर अंकुश की जरूरत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Allahabad High Court: हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इन अपराधियों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिए जाते हैं. कभी कभी वे जीत भी जाते हैं, इसलिए इस रुख पर जितनी जल्दी हो सके, अंकुश लगाने की जरूरत है.

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प्रयागराज. राजनीतिक दलों में गैंगस्टर और अपराधियों का स्वागत किए जाने पर चिंता जाहिर करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है. हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इन अपराधियों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिए जाते हैं. कभी कभी वे जीत भी जाते हैं, इसलिए इस रुख पर जितनी जल्दी हो सके, अंकुश लगाने की जरूरत है. कानपुर के बिकरू कांड मामले में एसएचओ विनय कुमार तिवारी और एसआई केके शर्मा की जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी की.

उन्होंने कहा कि यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि इन आरोपियों को पुलिस कार्रवाई के बारे में पहले से जानकारी थी. उन्होंने स्पष्ट रूप से इसका खुलासा गैंगस्टर को किया. गैंगस्टर विकास दूबे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बारे में सूचना कथित तौर पर लीक करने के लिए एसएचओ विनय कुमार तिवारी और एसआई केके शर्मा को गिरफ्तार किया गया था. इस सूचना के लीक होने से तीन जुलाई, 2020 को बिकरू गांव में पुलिस पर घात लगाकर हमला किया गया जिसमें आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे.

अदालत ने कहा, “यह चिंताजनक रुख देखने में आया है कि एक या दूसरी राजनीतिक पार्टी सगंठित अपराध में शामिल गैंगस्टरों और अपराधियों का अपने यहां स्वागत करती हैं और उन्हें संरक्षण देने एवं बचाने की कोशिश करती हैं, ऐसे में उनकी राबिनहुड जैसी छवि बनाती हैं. उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जाता है और कभी कभी वे चुनाव जीत भी जाते हैं. इस रुख पर जितनी जल्दी हो सके, अंकुश लगाने की जरूरत है.”

अदालत ने कहा, “सभी राजनीतिक दलों को साथ बैठकर यह निर्णय करने की जरूरत है कि गैंगस्टरों और अपराधियों को राजनीति में आने से हतोत्साहित किया जाए और कोई भी पार्टी उन्हें टिकट न दें” अदालत ने कहा, “राजनीतिक दलों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि “मेरा अपराधी” और “उसका अपराधी” या “मेरा आदमी” और “उसका आदमी” जैसी कोई अवधारणा नहीं हो सकती, क्योंकि गैंगस्टर केवल गैंगस्टर होता है और एक दिन ये गैंगस्टर और अपराधी “भस्मासुर” बन जाएंगे और इस देश को इतनी गंभीर चोट पहुंचाएंगे जिसे ठीक नहीं किया जा सकेगा.”

अदालत ने कहा, “यहां ऐसे पुलिसकर्मी हैं भले ही उनकी संख्या बहुत कम है जो अपनी निष्ठा अपने विभाग से कहीं अधिक ऐसे गैंगस्टरों के प्रति दिखाते हैं और इसका कारण वे अच्छी तरह से जानते हैं. इन आरोपियों के कृत्य ने न केवल गैंगस्टरों को सचेत किया, बल्कि उन्हें जवाबी हमले के लिए कमर कसने की भी सहूलियत दी जिससे यह मुठभेड़ हुई जिसमें आठ पुलिसकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी. ’’

उल्लेखनीय है कि तिवारी और अन्य पुलिसकर्मी को 2020 में गिरफ्तार किया गया. इनके खिलाफ भादंसं की धारा 147, 148, 504, 323, 364, 342 और 307 एवं आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1932 की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया था.

राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि शर्मा, “विकास दूबे और उसके गिरोह के नियमित संपर्क में था और उसके जरिए एसओ विनय तिवारी भी दूबे के संपर्क में था. इन दोनों आरोपियों ने निश्चित तौर पर उनकी मदद की और गिरोह की आपराधिक गतिविधियों की हमेशा अनदेखी की.”

महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद के नाम मंजूर करवाया था पेट्रोल पंप, फिर हो गया ये विवाद और...


महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि के नाम मंजूर कराया था पेट्रोल पंप, जिसके बाद विवाद हो गया. फाइल फोटो

Mahant Narendra Giri Death Mystery: आनंद गिरि को महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच हुए विवाद हो गया. ये विवाद पेट्रोल पंप की मंजूरी को लेकर हुआ. इसके बाद उन्हें निरंजनी अखाड़े के साथ ही मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर से बेदखल कर दिया गया था.

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प्रयागराज. पंचायती अखाड़ा निरंजनी से 14 मई 2021 को निष्कासित किए गए स्वामी आनन्द गिरी (Anand Giri) अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के सबसे करीबी शिष्यों में से एक थे. उन्हें अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी के तौर भी देखा जा रहा था, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच हुए विवाद के बाद उन्हें निरंजनी अखाड़े के साथ ही मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर से बेदखल कर दिया गया था, हालांकि इस मामले में महंत नरेन्द्र गिरि ने स्वामी आनन्द गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाये जाने की खबरों से इंकार किया था.

2019 में आस्ट्रेलिया की सिडनी में जेल काट चुके हैं आनंद गिरि

स्वामी आनंद गिरि की पहचान देश विदेश में योग गुरु के रूप में थी. स्वामी आनंद गिरि का विवादों से भी नाता रहा है, लेकिन उनके साथ सबसे बड़ा विवाद आस्ट्रेलिया में 2016 और 2018 के एक पुराने मामले में जुड़ा. जबकि अपनी दो महिला शिष्याओं के साथ मारपीट और अभद्रता के मामले में वर्ष 2019 में वे सुर्खियों में आये थे. इस मामले में उन्हें मई 2019 में आस्ट्रेलिया के सिडनी में जेल भी जाना पड़ा था. हांलाकि सितम्बर माह में सिडनी कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी करते हुए पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दे दिया था. जिसके बाद ही स्वामी आनन्द गिरी की स्वदेश वापसी हो सकी थी. इस बारे में भी यह कहा जाता है कि उन्हें छुड़ाने के लिए महंत नरेंद्र गिरि ने यहां से 4 करोड़ रुपये भेजे थे.

पेट्रोल पंप को लेकर उभरे थे मतभेद

दरअसल, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि एक पेट्रोल पंप खोलना चाहते थे, लेकिन उनकी शैक्षिक योग्यता न होने के चलते उन्होंने अपने शिष्य आनन्द गिरि के नाम पेट्रोल पंप लगभग मंजूर करा भी लिया था.​ इसके लिए मठ की एक जमीन भी लीज पर आनन्द गिरि के नाम पर कर दी थी. इस बीच महंत नरेंद्र गिरि को ऐसा आभास हुआ कि उनके शिष्य आनन्द गिरि की मंशा कुछ ठीक नहीं है. जिसके बाद उन्होंने पेट्रोल पंप न लेने की बात कही. जिसको लेकर गुरु और शिष्य के बीच तकरार बढ़ गई थी. दोनों के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि महंत नरेंद्र गिरी को अपने सबसे प्रिय शिष्य को निरंजनी अखाड़े के साथ ही मठ और बड़े हनुमान मंदिर से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा.

वीडियो जारी कर दी थी सफाई

अपने निष्कासन के बाद स्वामी आनन्द गिरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई पेश की थी. उन्होंने कहा है कि उनके निष्कासन की कार्रवाई पंचायती अखाड़ा निरंजनी के पंच परमेश्वरों द्वारा की गई है. उन्होंने कहा था कि वे इस कार्रवाई से बहुत आहत हैं.

स्वामी आनन्द गिरि ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जतायी थी, लेकिन उन्होंने अपने गुरु पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव और अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी को लेकर कहा है कि उनके खिलाफ मैंने कभी कुछ नहीं कहा है और आगे भी नहीं कहेंगे. स्वामी आनन्द गिरी ने कहा है कि भले ही उन्हें अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया और उनके गुरु ने भी मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर से निष्कासित कर दिया है. लेकिन अपने गुरु के प्रति उनके मन में कोई आवेश नहीं है और महंत नरेन्द्र गिरि उनके गुरु हैं और हमेशा गुरु ही रहेंगे. उन्होंने आरोप लगाया था कि इस कार्रवाई के बाद कुछ लोग सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरें चलाकर गुरु-शिष्य को लड़ाने और गलतफहमी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. वीडियो के अंत में उन्होंने कहा है कि ये विषय लम्बा और इस मामले में इससे ज्यादा उन्हें कुछ भी नहीं कहना है.

परिवार से संबंधों पर निष्कासित हुए थे आनंद गिरि

दरअसल स्वामी आनंद गिरि पर सन्यास धारण करने के बावजूद अपने परिवार से संबंध रखने का आरोप लगाया गया था. उन पर आरोप था कि सन्यास परंपरा में आने के बाद अपने परिवार से संबंध रखते हैं, जिसके चलते उन्हें अखाड़े से निष्कासित कर दिया जाता है. स्वामी आनंद गिरि पर ये भी आरोप लगा था कि बाघम्बरी गद्दी और मंदिर से अर्जित धन वे अपने परिजनों के लिए घर भेजते थे. इस प्रकरण की महंत नरेन्द्र गिरी ने अखाड़े के पंच परमेश्वरों से जांच भी कराई थी. पंच परमेश्वरों की जांच में दोनों आरोप सही पाए जाने के बाद ये सख्त कार्रवाई की गई थी.

आनंद ने गुरू नरेंद्र गिरि पर ही लगाए थे आरोप

हालांकि बाद में एक दूसरा वीडियो जारी कर स्वामी आनंद गिरी ने अपने गुरु पर गंभीर आरोप भी लगाए थे. कुछ माह पूर्व लखनऊ में एक होटल में गुरु शिष्य का मिलन हुआ और गुरु ने इस शर्त पर कि दोनों एक दूसरे के खिलाफ कोई बयान बाजी नहीं करेंगे उनको माफ भी कर दिया था. लेकिन न ही उनकी निरंजनी अखाड़े में वापसी कराई गई थी और न ही मठ बाघमबारी गद्दी में आने पर पाबंदी हटाई गई थी.

चाय की दुकान पर काम करते मिले थे आनंद गिरि

महंत नरेंद्र गिरि ने न्यूज़ 18 को इस विवाद के बाद बताया था कि स्वामी आनंद गिरी 10 वर्ष की अवस्था में उन्हें हरिद्वार में मिले थे और वह मूल रूप से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रहने वाले हैं. अपने घर से भाग कर आए थे और चाय की दुकान पर काम करते हुए उन्हें मिले थे. महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक उन्होंने आनंद गिरि को कुछ रुपए दिए और उनको समझा बुझाकर घर जाने को कहा. जब आनंद गिरि घर नहीं गये तो उन्हें अपने साथ रख लिया और उन्हें संस्कृत की शिक्षा दिलाई.

उत्तराधिकारी की थी संभावना, अब हुए गिरफ्तार

स्वामी आनंद गिरी को महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी भी कहा जाने लगा था. आनन्द गिरि बड़े हनुमान मंदिर के छोटे महंत कह जाते थे. मठ बाघम्बरी गद्दी से लेकर बड़े हनुमान मंदिर तक स्वामी आनंद गिरी का ओहदा दूसरे नंबर का था.
बहरहाल महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनके शिष्य आनंद गिरि बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी के खिलाफ जार्ज टाउन थाने में नामजद एफ आई आर दर्ज कराई है. जिसके क्रम में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की समाधि कल, प्रयागराज में सभी स्कूल रहेंगे बंद

महंत नरेंद्र गिरी के समाधि कार्यक्रम के चलते शिक्षा विभाग ने बुधवार को स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया है.

Prayagraj News: समाधि कार्यक्रम में होने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए शिक्षा विभाग ने लिया फैसला, सभी कोचिंग संस्‍थान और स्कूल बंद रहेंगे. ऑनलाइन हो सकेगी पढ़ाई.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 22:19 IST
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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरी के समाधि कार्यक्रम को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रयागराज में बड़ा फैसला लिया है. समाधि कार्यक्रम में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी बोर्ड के विद्यालयों और कोचिंग संस्‍थानों में अवकाश रखा जाएगा. जिला विद्यालय निरीक्षक आर एन विश्वकर्मा की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि बुधवार को सभी विद्यालयों में अवकाश रहेगा, इस दौरान शिक्षण कार्य ऑनलाइन किया जा सकेगा. गौरतलब है कि बुधवार को पंच परमेश्वर की बैठक के बाद महंत नरेंद्र गिरि के शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा और इसके बाद दोपहर 12 बजे के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. महंत नरेंद्र गिरि की समाधि उनके गुरु की समाधि के बगल में ही रखी जाएगी. नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड लैटर में इस बात की इच्छा जताई थी.

इसके साथ ही सुसाइड नोट में उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर संत बलबीर गिरि का नाम लिखा था. महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि प्रिय बलवीर ‌गिरि मठ मंदिर की व्यवस्‍था का प्रयास करना, जिस तरह से मैं किया करता था. साथ ही उन्होंने अपने कुछ शिष्यों का ध्यान रखने की भी बात कही. इसके साथ उन्होंने महंत हरी गोविंद पुरी के लिए उन्होंने लिखा कि आप से निवेदन है कि मढ़ी का महंत बलवीर गिरि को ही बनाना. साथ ही महंत रविन्द्र पुरी जी के लिए उन्होंने लिखा कि आप ने हमेशा साथ दिया है, मेरे मरने के बाद भी मठ की गरिमा को बनाए रखना.

सीएम योगी भी पहुंचे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंगलवार को बाघंबरी मठ पहुंचे. यहां उन्होंने महंत नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि अर्पित की. सीएम योगी ने कहा कि इस दुखद घटना से हम सभी दुखी हैं. कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था. इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि पुलिस के चार बड़े अफसर मामले की जांच कर रहे हैं. एक-एक घटना का पर्दाफाश होगा. सीएम योगी ने कहा कि जो भी इस मामले में दोषी होगा उसे सख्त सजा दी जाएगी किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा.

Mahant Narendra Giri Death: पंच परमेश्वर की बैठक के बाद पोस्टमार्टम, फिर महंत नरेंद्र को दी जाएगी गुरु के बगल में समाधि

महंत नरेंद्र गिरी को उनके गुरु के बगल में ही समाधि दी जाएगी जैसी उन्होंने इच्छा जताई थी.

Funeral of Mehant Narendra Giri: पंच परमेश्वर की बैठक सुबह 10 बजे की जाएगी, इसके बाद महंत नरेंद्र गिरी का पोस्टमार्टम होगा और दोपहर 12 बजे के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर अब बड़ी खबर सामने आ रही है. जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह 10 बजे पंच परमेश्वर की बैठक होगी. इसके बाद महंत नरेंद्र गिरी के शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा. इसी के ठीक बाद उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार दोपहर 12 बजे के बाद किया जाएगा.

बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि को उनके गुरु की समाधि के बगल में ही समाधि दी जाएगी. गौरतलब है कि महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में भी यही इच्छा जाहिर की थी. इसके साथ ही सुसाइड नोट में उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर संत बलबीर गिरि का नाम लिखा था. महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि प्रिय बलवीर ‌गिरि मठ मंदिर की व्यवस्‍था का प्रयास करना, जिस तरह से मैं किया करता था. साथ ही उन्होंने अपने कुछ शिष्यों का ध्यान रखने की भी बात कही. इसके साथ उन्होंने महंत हरी गोविंद पुरी के लिए उन्होंने लिखा कि आप से निवेदन है कि मढ़ी का महंत बलवीर गिरि को ही बनाना. साथ ही महंत रविन्द्र पुरी जी के लिए उन्होंने लिखा कि आप ने हमेशा साथ दिया है, मेरे मरने के बाद भी मठ की गरिमा को बनाए रखना.

सीएम योगी भी पहुंचे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंगलवार को बाघंबरी मठ पहुंचे. यहां उन्होंने महंत नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि अर्पित की. सीएम योगी ने कहा कि इस दुखद घटना से हम सभी दुखी हैं. कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था. इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि पुलिस के चार बड़े अफसर मामले की जांच कर रहे हैं. एक-एक घटना का पर्दाफाश होगा. सीएम योगी ने कहा कि जो भी इस मामले में दोषी होगा उसे सख्त सजा दी जाएगी किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा.

जानिए कौन हैं संत बलबीर जिन्हें अपने सुसाइड लैटर में उत्तराधिकारी बना गए महंत नरेंद्र गिरि

सुसाइड नोट में शिष्य बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बता गए महंत नरेंद्र गिरि. फाइल फोटो

Mahant Narendra Giri suicide case: मौत को गले लगाने के पहले महंत नरेंद्र गिरि ने जो सुसाइड नोट छोड़ा है उसमें उन्होंने शिष्य बलबीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बताया है. उन्होंने लिखा कि उनकी अंतिम इच्छा यही है कि मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर का महंत बलबीर गिरि को बनाया जाये.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की संदिग्ध मौत के बाद उनके असल उत्तराधिकारी का नाम भी सामने आ गया है. मौत को गले लगाने के पहले महंत नरेंद्र गिरि ने जो सुसाइड नोट छोड़ा है उसमें उन्होंने अपने शिष्य बलबीर गिरि (Balbeer Giri) को अपना उत्तराधिकारी बताया है. मरने के पहले उन्होंने लिखा कि उनकी अंतिम इच्छा यही है कि मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर का महंत बलबीर गिरी को बनाया जाये. इसके लिए उन्होंने निरंजनी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी महराज से अनुरोध करने हुए लिखा कि जो वह अब तक उनका सहयोग करते रहे हैं, इस इच्छा को भी जरुर पूरा करेंगे.

जानिए कौन हैं बलवीर गिरि

बलबीर गिरि और आनंद गिरि करीब-करीब एक ही समय के दौरान महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य बने थे. ये करीब 30 साल पुराने शिष्य हैं. महंत नरेंद्र गिरि ने बलबीर गिरि को हरिद्वार आश्रम का प्रभारी बनाया हुआ था. इन्हीं बलबीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि ने अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया है.
एक समय बलबीर गिरि और आनंद गिरि महंत के सबसे करीब माने जाते थे, लेकिन आनंद गिरि के निष्कासन के बाद बलबीर गिरि ही मठ का पूरा कामकाज संभाल रहे थे. किसी भी प्रमुख आयोजन या वार्ता में वह महंत नरेंद्र गिरि के साथ होते थे.

पंच परमेश्वरों की की बैठक कल

माना जा रहा है कि अखाड़ा परिषद के पंच परमेश्वरों की कल सुबह 10 बजे बैठक होनी है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरी ने बताया कि 23 सितंबर को 11 बजे महंत नरेंद्र गिरी जी को भू-समाधि दी जाएगी. गंगा जमुना सरस्वती के जल से उनको स्नान कराया जाएगा. माना जा रहा है कि गुरुवार को महंत नरेंद्र गिरि का अंतिम संस्कार होने के बाद बलबीर गिरि के नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा.

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जांच के लिए SIT गठित

Mahant Narendra Giri death: महंत नरेंद्र गिरी मामले में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया.

Prayagraj News: डीआईजी, प्रयागराज ने विशेष जांच दल का गठन कर टीम का नेतृत्व डिप्टी एसपी अजीत सिंह चौहान को सौंपा है. मामले के विवेचक इंस्पेक्टर महेश भी एसआईटी में शामिल किए गए हैं.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) मामले की जांच के लिए डीआईजी, प्रयागराज ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है. डिप्टी एसपी अजीत सिंह चौहान के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है. मामले के विवेचक इंस्पेक्टर महेश भी एसआईटी में शामिल किए गए हैं.

जानकारी के अनुसार डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी द्वारा जार्जटाउन थाने में दर्ज एफआईआर की जांच के लिए जो एसआईटी गठित की गई है, उसकी अध्यक्षता सीओ अजीत सिंह चौहान करेंगे. इसमें दो सीओ समेत इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर स्तर के 18 जांच अधिकारी शामिल किए गए हैं. सीओ आस्था जायसवाल और विवेचक महेश सिंह भी एसआईटी में शामिल हैं,

बता दें मामले से जुड़े 2 वीडियो की जांच में पुलिस जुटी हुई है. एक वीडियो के आधार पर नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल करने की चर्चा है. वहीं सुसाइड नोट में भी नरेंद्र गिरि ने इस बात का जिक्र किया है. दूसरा वीडियो महंत नरेंद्र गिरि ने खुद बनाया था, जिसमें अपने खिलाफ हो रही साजिश के बारे में बताया है. दूसरा वीडियो महंत नरेंद्र गिरि के मोबाइल से मिला है. इन दोनो वीडियो की जांच से बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है. इन वीडियो के आधार पर बड़ी साजिश होने की आशंका जताई जा रही है. जांच के बाद हो सकता है मामले में बड़ा खुलासा हो.

बता दें महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में पहली एफआईआर प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाने में दर्ज की गई है. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य अमर गिरि पवन महाराज की तरफ से दर्ज करवाई गई. एफआईआर में सिर्फ उनके शिष्य आनंद गिरि को नामजद आरोपी बनाया गया है. आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है.

एसआईटी में हैं 18 सदस्य

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UP: प्रयागराज में महंत नरेंद्र गिरी मौत मामले की जांच में गठित एसआईटी के सदस्य

पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया है और उसे प्रयागराज ले आई है. पुलिस लाइन में आनंद गिरि से पूछताछ चल रही है. वहीं बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.

एफआईआर के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि सोमवार दोपहर लगभग 12:30 बजे बाघम्बरी गद्दी के कक्ष में भोजन के बाद रोज की तरह विश्राम के लिए गए थे. रोज 3 बजे दोपहर में उनके चाय का समय होता था, लेकिन चाय के लिए उन्होंने पहले मना किया था और यह कहा था जब पीना होगा तो वह स्वयं सूचित करेंगे. शाम करीब 5 बजे तक कोई सूचना न मिलने पर उन्हें फोन किया गया. लेकिन महंत नरेंद्र गिरि का फोन बंद था. इसके बाद दरवाजा खटखटाया गया तो कोई आहट नहीं मिली. जिसके बाद सुमित तिवारी, सर्वेश कुमार द्विवेदी, धनंजय आदि ने धक्का देकर दरवाजा खोला. तब नरेन्द्र गिरि पंखे में रस्सी से लटकते हुए पाए गए.

FIR में आगे लिखा हुआ है कि जीवन की संभावना को देखते हुए शिष्यों ने रस्सी काटकर नरेंद्र गिरि को नीचे उतारा, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. एफआईआर में जिक्र है कि महाराज पिछले कुछ महीने से आनंद गिरि को लेकर परेशान रहा करते थे. यह बात कभी-कभी वह स्वयं भी कहते थे कि आनंद गिरि हमें बहुत परेशान करता रहता है.

Mahant Narendra Giri Death: उत्तराधिकारी से लेकर मौत का कौन जिम्मेदार, महंत नरेंद्र गिरि ने Suicide Letter में सब बताया

महंत नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड लैटर में लिखा कि आनंद तिवारी मुझे बदनाम करने जा रहा था.

Narendra Giri Suicide: अपने सुसाइड लैटर में महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा मेरी मौत के जिम्मेदार आनंत गिरि, आद्या तिवारी, और संदीप तिवारी हैं, इन पर कानूनी कार्रवाई की जाए.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 19:15 IST
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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है. उनके कमरे से बरामद सुसाइड लैटर के सामने आने के साथ ही बाघंबरी गद्दी के उत्तराधिकारी का भी नाम सामने आ गया है. गिरि ने स्पष्‍ट शब्दों में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर बलवीर गिरि का नाम लिखा है. इसी के साथ उन्होंने ये भी साफ किया है कि उनकी मौत के जिम्मेदार सीधे तौर पर आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संतोष तिवारी हैं जो उन्हें मानसिक तौर पर परेशान कर रहे थे. उन्होंने इन तीनों आरोपियों के नाम के साथ लिखा है कि मैं पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से प्रार्थना करता हूं कि इन तीनों के साथ कानूनी कार्रवाई की जाए जिससे मेरी आत्मा को शांती मिल सके.

इसके साथ ही महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि प्रिय बलवीर ‌गिरि मठ मंदिर की व्यवस्‍था का प्रयास करना, जिस तरह से मैं किया करता था. साथ ही उन्होंने अपने कुछ शिष्यों का ध्यान रखने की भी बात कही. इसके साथ उन्होंने महंत हरी गोविंद पुरी के लिए उन्होंने लिखा कि आप से निवेदन है कि मढ़ी का महंत बलवीर गिरि को ही बनाना. साथ ही महंत रविन्द्र पुरी जी के लिए उन्होंने लिखा कि आप ने हमेशा साथ दिया है, मेरे मरने के बाद भी मठ की गरिमा को बनाए रखना.

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महंत नरेंद्र गिरि का लिखा सुसाइड नोट जिसमें उन्होंने आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है.

आनंद गिरि के कारण ही कर रहा हूं आत्महत्या
महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि आनंद गिरि के कारण आज मैं विचलित हो गया. हरिद्वार से सूयना मिली की आनंद कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरा फोटो जोड़कर गलत काम कर मेरे को बदनाम करने जा रहा है. आनंद का कहना है कि यदि मैं ने कहा तो आप सफाई देते रहोगे. आगे नरेंद्र गिरि ने लिखा कि मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज मैं कैसे रहूंगा, इससे अच्छा मर जाना ठीक रहेगा.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बलबीर ‌गिरि, जिन्हें महंत नरेंद्र गिरि ने अपना उत्तराधिकारी बताया है.

पहले ही करना चाहता था आत्महत्या
नरेंद्र गिरि ने लिखा कि आज मैं आत्महत्या कर रहा हूं जिसकी पूरी जिम्मेदारी आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी की है जिन्हें मैंने पहले ही निकाल दिया है. वैसे मैं पहले ही आत्महत्या करने जा रहा था लेकिन हिम्मत नहीं हुई. अब ये मेरे अंदर विचार आनंद गिरि ने जारी किया जिससे मेरी बदनामी हुई. आज मैं हिम्मत हार गया और आत्महत्या कर रहा हूं.

Mahant Narendra Giri Suicide Case: चेले ही नहीं ये SP नेता भी थे संपत्ति विवाद के घेरे में

पुलिस के लिए पहेली बनी है महंत नरेंद्र गिरि की मौत (File photo)

Mahant Narendra Giri death: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गि​रि की मौत यूपी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है. इस मामले में सुसाइड नोट में महंत ने मौत की वजह साफ तो कर दी है, लेकिन अब संपत्ति विवाद में सपा विधायक का नाम भी सामने आ गया है.

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लखनऊ. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (All India Akhara Parishad) के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ (Baghmbri Math) के प्रमुख महंत नरेंद्र गि​रि की मौत यूपी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है. यह घटना सूबे में सुर्खियां बनी है. सुसाइड नोट सामने आने के बाद महंत का चेला गिरफ्तार हो गया है, लेकिन कई और ऐसे राजदार हैं जो पूरे मामले को संदिग्ध बना रहे हैं. पुलिस एक एक कड़ी को जोड़कर आगे बढ़ रही है, हालांकि महंत नरेंद्र गिरि की मौत की असली वजह क्या है इस रहस्य से जांच के बाद ही पर्दा उठेगा. इतना तो तय है कि मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर की संपत्ति को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, उसने महंत नरेंद्र गिरि की जान ले ली.

दरअसल, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का हंड़िया के सपा विधायक से जमीन को लेकर विवाद हुआ था. यह विवाद 2012 में सपा नेता और हंडिया से विधायक रहे महेश नारायण सिंह से जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर हुआ था. फरवरी 2012 में महंत ने सपा नेता महेश नारायण सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरिनारायण सिंह व 50 अज्ञात के खिलाफ जार्ज टाउन में मुकदमा दर्ज कराया गया था. इस मामले में दूसरे पक्ष ने भी नरेंद्र गिरि, आनंद गिरि व दो अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

मठ की जमीन का कुछ हिस्सा महंत नरेंद्र गिरि ने बेच दिया था, ताकि जीर्ण शीर्ण हो चुके मठ का जीर्णोद्धार किया जा सके. बताया जा रहा है कि सपा विधायक महेश नारायण दबंगई के बल पर बगैर पूरा पैसा दिए जमीन लिखवाना चाह रहे थे. इसके लिए वह लगातार महंत नरेंद्र गिरि पर दबाव बना रहे थे. महंत नरेंद्र गिरी इस दबाव के आगे झुके नहीं और जमीन की रजिस्ट्री के लिए तैयार नहीं हुए.

जिसके बाद मठ में सपा विधायक असलहों के साथ पहुंचे थे काफी हो हंगामा भी हुआ था. बाद में पैसे देने के बाद ही महंत नरेंद्र ​गिरि ने जमीन की रजिस्ट्री की थी. मौजूदा समय में 7 बीघे जमीन की कीमत 40 करोड़ रुपये बताई जा रही हैं. इस जमीन बिक्री को लेकर भी समय समय पर महंत नरेंद्र गिरी पर आरोप लगते रहे हैं.

करोड़ों में है मठ की संपत्ति

मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर दोनों पंचायती अखाड़ा निरंजनी के तहत नहीं आते हैं, बल्कि सम्पत्ति मठ बाघंबरी गद्दी के अधीन आती है. मौजूदा समय में मठ की गद्दी में जहां महंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय संचालित हो रहा है, वहीं पर एक गौशाला के साथ ही कुंभ के दौरान यहां पर तीन मंजिला एक बड़ा भव्य गेस्ट हाउस भी बनाया गया है. कुल मिलाकर इस मठ और संस्कृत महाविद्यालय की संपत्ति करोड़ों में है, जिसको लेकर महंत नरेंद्र ​गिरि और स्वामी आनंद ​गिरि के बीच विवाद शुरू हो गया था.

महंत नरेंद्र गिरि केस की जांच के लिए DIG प्रयागराज ने SIT का गठन किया गया है. यूपी सरकार ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं.

Mahant Narendra Giri Suicide: सपा प्रमुख अखिलेश यादव बोले- सरकार हाईकोर्ट के जजों से कराए महंत नरेंद्र गिरि के मौत की जांच

UP: सपा प्रमुख अखिलेश यादव बोले- जजों की निगरानी में हो जांच

Prayagraj News: प्रयागराज के बाघंबरी गद्दी व लेटे हनुमानजी के महंत आचार्य नरेंद्र गिरि का शव कल उनके आश्रम के कमरे में मिला था. बाघंबरी मठ में उनकी लाश फांसी के फंदे से लटकती मिली थी.

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लखनऊ. अखिल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri Death) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. उनका शव फंदे से लटका मिला है जिसे प्रयागराज स्थित गेस्ट हाउस से बरामद किया गया. इसी कड़ी में मंगलवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने ट्वीट कर न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, धर्म कर्म, अध्यात्म के प्रति जीवन समर्पित करने वाले महान संत नरेंद्र गिरी जी का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन, ह्रदय विदारक. हाई कोर्ट के सिटिंग जजों की निगरानी में पूरे घटनाक्रम की जांच करा सत्य सामने लाए सरकार.’

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले की कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी द्वारा जांच किये जाने की बात कही. महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध स्थिति में मौत के मामले में आज प्रयागराज पुलिस ने कई राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के साथ-साथ आधा दर्जन से ज्यादा व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया है. सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि के गनर से भी पूछताछ की जाएगी. महंत को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने किया ट्वीट

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने किया ट्वीट

प्रयागराज के बाघंबरी गद्दी व लेटे हनुमानजी के महंत आचार्य नरेंद्र गिरि का शव कल उनके आश्रम के कमरे में मिला था. बाघंबरी मठ में उनकी लाश फांसी के फंदे से लटकती मिली थी. संदिग्ध हालत में महंत की मौत के बाद पुलिस को 8 पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसके बाद कल देर रात ही उनके शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से हिरासत में लिया गया था. पुलिस के मुताबिक, महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि के ऊपर प्रताड़ना का आरोप लगाया था.

प्रयागराज: बाघम्बरी मठ से जुड़ी करोड़ों की संपत्ति से शुरू हुआ था विवाद! महंत नरेंद्र गिरि पर उठे थे सवाल?

Mahant Narendra Giri Death: बाघम्बरी मठ से जुड़ी करोड़ों की संपत्ति से शुरू हुआ था विवाद!

Mahant Narendra Giri News: बड़े हनुमान मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं‌ लेकिन खासतौर पर शनिवार और मंगलवार को मंदिर में श्रद्धालुओं का मेला लगता है. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से यहां पर लाखों का चढ़ावा भी चढ़ता है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत मामले में यूपी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है. हालांकि महंत नरेंद्र गिरि की मौत की असली वजह क्या है इस रहस्य से जांच के बाद ही पर्दा उठेगा. वहीं इतना तो तय है कि श्री मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर की संपत्ति को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था. उसने महंत नरेंद्र गिरि की जीवन लीला समाप्त कर दी.

दरअसल अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी का हंड़िया के सपा विधायक से जमीन को लेकर विवाद हुआ था. यह विवाद 2012 में सपा नेता और हंडिया से विधायक रहे महेश नारायण सिंह से जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर हुआ था. फरवरी 2012 में महंत ने सपा नेता महेश नारायण सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरिनारायण सिंह व 50 अज्ञात के खिलाफ जार्ज टाउन में मुकदमा दर्ज कराया गया था. दूसरे पक्ष ने भी नरेंद्र गिरि, आनंद गिरि व दो अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

ये रही विवाद की जड़
बता दें कि मठ की जमीन का कुछ हिस्सा महंत नरेंद्र गिरी ने बेच दिया था. ताकि जीर्ण शीर्ण हो चुके मठ का जीर्णोद्धार किया जा सके. लेकिन सपा विधायक महेश नारायण दबंगई के बल पर बगैर पूरा पैसा दिए जमीन लिखवाना चाह रहे थे. इसके लिए वह लगातार महंत नरेंद्र गिरि पर दबाव बना रहे थे. लेकिन महंत नरेंद्र गिरी इस दबाव के आगे झुके नहीं और जमीन की रजिस्ट्री के लिए तैयार नहीं हुए. जिसके बाद मठ में सपा विधायक असलहों के साथ पहुंचे थे काफी हो हंगामा भी हुआ था. बाद में पैसे देने के बाद ही महंत नरेंद्र गिरी ने जमीन की रजिस्ट्री की थी. मौजूदा समय में 7 बीघे जमीन की कीमत 40 करोड़ रुपये बताई जा रही हैं. इस जमीन बिक्री को लेकर भी समय समय पर महंत नरेंद्र गिरी पर आरोप लगते रहे हैं.

करोड़ों में है मठ की संपत्ति
श्री मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर दोनों पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के तहत नहीं आते हैं. बल्कि सम्पत्ति श्रु मठ बाघमबारी गद्दी के अधीन आती है. मौजूदा समय में श्री मठ की गद्दी में जहां श्री महंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय संचालित हो रहा है. वहीं यहां पर एक गौशाला के साथ ही कुंभ के दौरान यहां पर तीन मंजिला एक बड़ा भव्य गेस्ट हाउस भी बनाया गया है. कुल मिलाकर इस मठ और संस्कृत महाविद्यालय की संपत्ति करोड़ों में है. जिसको लेकर महंत नरेंद्र गिरी और स्वामी आनंद गिरी के बीच विवाद शुरू हो गया था.

बड़े हनुमान मंदिर के चढ़ावे को लेकर विवाद
बड़े हनुमान मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं‌ लेकिन खासतौर पर शनिवार और मंगलवार को मंदिर में श्रद्धालुओं का मेला लगता है. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से यहां पर लाखों का चढ़ावा भी चढ़ता है. जिसे दानपात्र खोलकर निकाला जाता है और उसी से मंदिर के पुजारियों को वेतन, पूजा-पाठ साफ सफाई का खर्च वाहन किया जाता है. बचे हुए पैसे को आश्रम के खर्चे में लिया जाता है.

प्रयागराज: महंत नरेंद्र गिरि को बाघम्बरी मठ में 23 सितंबर को दी जाएगी भू-समाधि

Prayagraj News: प्रयागराज में 20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि अपने बाघंबरी मठ में मृत पाए गए थे.  (File photo)

Prayagraj News: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविन्द्र पुरी ने बताया है कि महंत नरेंद्र गिरि को भू-समाधि 23 सितंबर 2021 (गुरुवार) को श्री बाघम्बरी मठ, प्रयागराज में दी जाएगी.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वर्गीय महंत नरेंद्र गिरि (Late Mahant Narendra Giri) को भू-समाधि 23 सितंबर 2021 को श्री बाघम्बरी मठ, प्रयागराज में दी जाएगी. इस बात की जानकारी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्री महंत हरि गिरि और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविन्द्र पुरी ने दिया.

बता दें इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले की कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी द्वारा जांच किये जाने की बात कही साथ ही बताया था कि पंचक होने की वजह से आज (मंगलवार) महंत नरेंद्र गिरी को समाधि नहीं दी जायेगी. बुधवार को 5 डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम होने के बाद मठ बाघम्बरी गद्दी में ही सनातन परम्परा के अनुसार महंत नरेंद्र गिरी को समाधि दी जाएगी.

इसी के हिसाब से अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविन्द्र पुरी ने बताया है कि महंत नरेंद्र गिरि को भू-समाधि 23 सितंबर 2021 (गुरुवार) को श्री बाघम्बरी मठ, प्रयागराज में दी जाएगी.

इससे पहले सीएम योगी ने कहा कि इस दुखद घटना से हम सभी दुखी हैं. कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था. पुलिस के चार बड़े अफसर मामले की जांच कर रहे हैं. घटना का पर्दाफाश होगा. जो भी जिम्मेदार होगा, उसे सजा मिलेगी. दोषियों को कठोर सजा मिलेगी. साथ ही सीएम योगी ने ये भी कहा कि नरेंद्र गिरी मौत मामले की जांच जारी है, इसलिए बेवजह की बयानबाजी से बचना चाहिए.

सीएम ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरी का जाना संत समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है. उन्होंने कहा कि उनके निधन से बेहद दुखी हूं. संत समाज की ओर से श्रद्धांजलि देने आया हूं. इस दुखद घटना से हम सब व्यथित हैं. समाज और देश के हित में किए जाने वाले हर निर्णय में उनका सहयोग प्राप्त होता था. साथ ही यूपी सीएम तमाम साधु-संतों से भी बात कर हालात का संज्ञान लिया.

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की जांच CBI से कराने की तैयारी, योगी सरकार कर सकती है गृह मंत्रालय से सिफारिश

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश सरकार सीबीआई जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिख सकती है पत्र (File photo)

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरी की मौत से जुड़े मामले की जांच के लिए एक टीम का गठन कर दिया गया है. जिसे खुद ADG प्रेम प्रकाश और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एसपी सिंह मॉनिटरिंग कर रहे हैं.

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दिल्ली. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या (Narendra Giri Suicide Case) के मामले में पुलिस के जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है. निरंजनी अखाड़े के महंत और भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे नरेंद्र गिरी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई. मौत के मामले में तफ्तीश केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) से करवाने के लिए जल्द ही उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को खत लिखकर अनुशंसा कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, अगले दो दिनों के अंदर ही योगी सरकार इस मामले की सीबीआई जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख सकती है.

दरअसल जिस तरह से सोमवार 20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरी का शव उनके कमरे में भगवा रंग के धोती वाले फंदे से लटका हुआ पाया गया था. बाद में करीब 8 पन्नों का सुसाइड नोट भी बरामद हुआ. इसके बाद ये बातें सामने आई कि उन्होंने आत्महत्या की है, लेकिन एक संत की आत्महत्या करने का मामला किसी को विश्वास नहीं हो पा रहा है.

सुसाइड नोट पर उठ रहे हैं सवाल?
महंत नरेंद्र गिरी की मौत से जुड़े मामले की जांच के लिए एक टीम का गठन कर दिया गया है, जिसे खुद ADG प्रेम प्रकाश और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एसपी सिंह मॉनिटरिंग कर रहे हैं. क्योंकि कई डॉक्टरों के पैनल गठित कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा, उसके बाद ही मौत की असली वजह पता किया जा सकता. फिलहाल पुलिस की टीम महंत नरेंद्र गिरी के मोबाइल फोन को भी अपने कब्जे में लेकर तफ़्तीश कर रही है कि किन-किन लोगों से ज्यादा बातचीत होती थी और मौत के पहले आखि‍री के पांच दिनों के दौरान किन लोगों से ज्यादा बातचीत हुई है. आंनद गिरी और उनके गुरु महंत नरेंद्र गिरी के बीच तल्खी के मसले पर भी पुलिस की टीम आगे तफ्तीश कर रही है.

पंचक के कारण आज नहीं होगा पोस्टमार्टम
सूत्रों के मुताबिक हिन्दू धर्म और संतों की मान्यता और परंपरा के मुताबिक, मंगलवार 21 सितंबर को पंचक तिथि होने की वजह से महंत नरेंद्र गिरी का पोस्टमार्टम नहीं होगा. दरअसल धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती हिन्दू धर्म में पांच नक्षत्रों का एक समूह है. धनिष्ठा के प्रारंभ होने से लेकर रेवती नक्षत्र के अंत समय को पंचक कहते हैं. मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है. ये अशुभ होता है. इस पंचक में किसी भी तरह का काम अशुभ माना गया है. इसलिए महंत नरेंद्र गिरी का पोस्टमार्टम बुधवार को होने के बाद अंतिम संस्कार संतों की परंपरा के मुताबिक को सम्पन्न किया जाएगा.

Narendra Giri Death Mystery: जब गुरु नरेंद्र गिरि के पैर पकड़कर आनंद गिरि ने मांगी थी माफी, देखें Video

Prayagraj News: शिष्य आनंद गिरि का सामने आया Video

Mahant Narendra Giri Suicide Case: महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई. उनकी मौत के बाद उनके शिष्य एवं योगगुरु आनंद गिरि का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह पिछले दिनों हुए एक विवाद के बाद नरेन्द्र गिरि के पैर पकड़ कर माफी मांगते हुए नजर आ रहे हैं.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 14:32 IST
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प्रयागराज. निरंजनी अखाड़े के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनके शिष्य योगगुरु आनंद गिरि का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है. बता दें कि पिछले दिनों नरेंद्र गिरि का उनके शिष्य आनंद गिरि से विवाद हुआ था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद एक वीडियो जारी करके विवाद को खत्म बताया जा रहा था. वीडियो में खुद आनंद गिरि ने अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरी के पैर पकड़कर माफी भी मांगी थी.

दरअसल आनंद गिरि को हरिद्वार में संन्यास परंपरा के तोड़ने की वजह से पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की कार्यकारिणी ने निकाल दिया था. तब खुद महंत नरेंद्र गिरि का कहना था कि आनंद गिरि ने नासिक, उज्जैन, प्रयागराज और हरिद्वार कुम्भ में अपने पूरे परिवार को बुलाया था. जबकि अखाड़े की परंपरा के अनुसार परिवार से सम्बंध नहीं रखा जा सकता है. एक माह पहले दी गई चेतावनी के बाद भी जब ये नहीं माने तो महंत ने पहले बाघम्बरी मठ से हटाया उसके बाद अखाड़े से निष्कासन की कार्रवाई की गई थी.

आनंद गिरी ने गुरु के खिलाफ खोल दिया था मोर्चा

निरंजनी अखाड़े से निकाले जाने के बाद स्वामी आनंद गिरि ने अपने गुरु स्वामी नरेंद्र गिरि के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. इसके बाद 26 मई को एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें बकायदा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद को सुलझा हुआ बताया गया. गुरु और शिष्‍य में सुलह होने की बात भी कही गई. वीडियो में आनंद गिरि ने अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरी के पैर पकड़कर माफी भी मांगी थी.

शिष्य आनंद गिरि समेत 3 गिरफ्तार

बता दें कि महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई. उनका शव अल्लापुर में श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के कमरे में फंदे से लटका मिला. मामले में पुलिस ने उनके शिष्य योगगुरु आनंद गिरि, लेटे हुए हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है.

Narendra Giri Death: FIR से समझें कैसे हुई महंत नरेंद्र गिरि की मौत, आरोपी के कॉलम में सिर्फ आनंद गिरि का नाम

RIP Mahant Narendra Giri: आचार्य नरेंद्र गिरी की शव का आज कराया जाएगा पोस्टमॉर्टम.

Narendra Giri Suicide Case: आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. महंत नरेन्द्र गिरि के शव के पोस्टमॉर्टम से ही पता चलेगा कि उनकी मौत आत्महत्या है या हत्या.

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प्रयागराज/लखनऊ. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) आत्महत्या मामले में पहली एफआईआर प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाने में दर्ज की गई है. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य अमर गिरि पवन महाराज की तरफ से दर्ज करवाई गई. एफआईआर में सिर्फ उनके शिष्य आनंद गिरि को नामजद आरोपी बनाया गया है. आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया है और अब उन्हें सड़क मार्ग से प्रयागराज लाया जा रहा है. उधर बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.

एफआईआर के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि सोमवार दोपहर लगभग 12:30 बजे बाघम्बरी गद्दी के कक्ष में भोजन के बाद रोज की तरह विश्राम के लिए गए थे. रोज 3 बजे दोपहर में उनके चाय का समय होता था, लेकिन चाय के लिए उन्होंने पहले मना किया था और यह कहा था जब पीना होगा तो वह स्वयं सूचित करेंगे. शाम करीब 5 बजे तक कोई सूचना न मिलने पर उन्हें फोन किया गया. लेकिन महंत नरेंद्र गिरि का फोन बंद था. इसके बाद दरवाजा खटखटाया गया तो कोई आहट नहीं मिली. जिसके बाद सुमित तिवारी, सर्वेश कुमार द्विवेदी, धनंजय आदि ने धक्का देकर दरवाजा खोला. तब नरेन्द्र गिरि पंखे में रस्सी से लटकते हुए पाए गए.

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महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामले में दर्ज हुई पहली FIR

FIR में आनंद गिरि पर परेशान करने का जिक्र

FIR में आगे लिखा हुआ है कि जीवन की संभावना को देखते हुए शिष्यों ने रस्सी काटकर नरेेन्द्र गिरि को नीचे उतारा, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थती. एफआईआर में जिक्र है कि महाराज पिछले कुछ महीने से आनंद गिरि को लेकर परेशान रहा करते थे. यह बात कभी-कभी वह स्वयं भी कहते थे कि आनंद गिरि हमें बहुत परेशान करता रहता है.

आज होगा पोस्टमॉर्टम

महंत नरेंद्र गिरी की मौत मामले में यह पहला कानूनी कदम है, जिसमें आनंद गिरि को आरोपी बनाया गया है. अब उनकी मौत हत्या थी या आत्महत्या, इसका पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा. फिलहाल डॉक्टरों के पैनल द्वारा उनका पोस्टमॉर्टम कराने की तैयारी की गई है. उसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए बाघंबरी पीठ मठ में रखा जाएगा. जानकारी के मुताबिक मठ में ही नरेंद्र गिरि को भू-समाधि दी जाएगी.

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विदा महंत नरेंद्र गिरी.

Narendra Giri Death Case: यह पहला मौका नहीं है जब किसी संत ने आत्महत्या की या उनकी हत्या की गयी या फिर हत्या की कोशिश की गई. अतीत को खंगालने पर पता चलता है कि पहले भी ऐसे कई मौके आये हैं जब ऐसी घटनाओं से देश भर में सन्नाटा पसर गया.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि की मौत (Narendra Giri Death) से संत समाज ही नहीं पूरा देश सन्न है. पुलिस (Police) की तफ्तीश में आत्महत्या (Suicide) की बात सामने आ रही है. हालांकि सभी ये जानकर हैरान हैं कि जो व्यक्ति समाज को दिशा दिखाता हो, वह आत्महत्या जैसी ओछी हरकत कैसे कर सकता है. एक संत आत्महत्या कैसे कर सकता है, सभी इसी सवाल का जवाब चाहते हैं. हालांकि पुलिस की तफ्तीश जारी है. जांच के बाद सभी तथ्य सामने आएंगे कि नरेंद्र गिरि की हत्या हुई या उन्होंने आत्महत्या की. अगर आत्महत्या की तो वो कौन सी वजह थी जिसने एक संत को भी तोड़ दिया.

लेकिन, यह पहला मौका नहीं है जब किसी संत ने आत्महत्या की या उनकी हत्या की गयी या फिर हत्या की कोशिश की गई. अतीत को खंगालने पर पता चलता है कि पहले भी ऐसे कई मौके आये हैं जब ऐसी घटनाओं से देश भर में सन्नाटा पसर गया. आइये जानते हैं कि उन पांच बड़े संतों के बारे में जिनकी मौत से पूरे देश में निराशा फैल गयी.

महंत नरेंद्र गिरि 
प्रयागराज के मठ बाघंबरी के गद्दीनशीन और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत से न सिर्फ पूरा संत समाज बल्कि पूरे देश में निराशा का माहौल है. नरेंद्र गिरि की लाश प्रयागराज में उनके मठ के ही एक कमरे में लटकती मिली. पहली नजर में पुलिस ने आत्महत्या करार दिया है लेकिन, हत्या की आशंका को सिरे से खारिज नहीं किया गया है. जांच चल रही है. संपत्ति के विवाद में उनकी जान जाने का अंदेशा जताया जा रहा है.

संत भय्यू जी महाराज
तीन साल पहले 2018 में भय्यू जी महाराज ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. भय्यू जी महाराज देश के जाने माने संत और कथावाचक थे. उनके निधन से भी देशभर में लोग चौंक गये थे. भय्यू जी महाराज एमपी सरकार में दर्जाधारी मंत्री थे. उनकी लाश के पास से ही पिस्टल और सुसाइड नोट बरामद किया गया था. इस मामले की भी सीबीआई से जांच कराने की मांग उठी थी.

संत बाबा राम सिंह 
पंजाब के इस संत ने पिछले साल 2020 में खुद को गोली मार ली थी. वे तीन कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर सिंघु बार्डर पर हो रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल थे. उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था जिसमें किसानों की दुर्दशा से आहत होने और इसी के चलते खुदकुशी करने की बातें लिखी हुई थीं.

संत ज्ञानेश्वर की हुई थी हत्या 
साल 2006 में हुई संत ज्ञानेश्वर की हत्या से तो पूरा देश दहल गया था. प्रयागराज माघ मेले से अपने मठ लौट रहे संत ज्ञानेश्वर और उनके शिष्यों पर हंडिया इलाके में ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गयी थीं. संत समेत सात लोग मारे गये थे. हत्या का आरोप सुल्तानपुर के सोनू-मोनू भाईयों पर लगा. संत ज्ञानेश्वर पर सोनू-मोनू के पिता की हत्या का आरोप लगा था. मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.

दीनबंधु दास पर बम से हुआ था हमला
अयोध्या के हनुमानगढ़ी मदिर के गद्दीनशीन थे दीनबंधु दास. वैसे तो इन्होंने न आत्महत्या की और ना ही इनकी हत्या हुई थी लेकिन, मंदिर परिसर के भीतर ही इनकी हत्या का प्रयास हुआ था. बात साल 1989-90 की है. गद्दीनशीन दीनबंधु दास की गद्दी के नीचे ही किसी ने बम रख दिया था. उनके बैठते ही बम फट गया और दीनबंधु दास बुरी तरह घायल हो गये. हनुमानगढ़ी मंदिर में बम फटने की घटना से पूरा संत समाज हिल गया था. हालांकि दीनबंधु दास इलाज के बाद ठीक हो गये थे. बाद में इनकी स्वाभाविक मौत हुई.

जब महंत नरेंद्र गिरि ने अपने शिष्य आनंद गिरि को सिडनी भेजे थे 4 करोड़ रुपये, पढ़िए ये खबर

Mahant Narendra Giri Suicide Case: स्वामी आनंद गिरी का विवादों से रहा पुराना नाता (File photo)

Mahant Narendra Giri Death: नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में उनके शिष्य आनंद गिरि (45) के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया गया है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या (Narendra Giri Suicide Case) के मामले में पुलिस के जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है. स्वामी आनंद गिरी का विवादों से भी नाता रहा है. लेकिन उनके साथ सबसे बड़ा विवाद आस्ट्रेलिया में 2016 और 2018 के एक पुराने मामले में जुड़ा. जबकि अपनी दो महिला शिष्याओं के साथ मारपीट और अभद्रता के मामले में वर्ष 2019 में वे सुर्खियों में आये थे. इस मामले में उन्हें मई 2019 में आस्ट्रेलिया के सिडनी में जेल भी जाना पड़ा था.

हालांकि सितम्बर माह में सिडनी कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी करते हुए पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दे दिया था. जिसके बाद ही स्वामी आनंद गिरि की स्वदेश वापसी हो सकी थी. इस बारे में भी यह कहा जाता है कि उन्हें छुड़ाने के लिए महंत नरेंद्र गिरि ने यहां से 4 करोड़ रुपए भेजे थे. स्वामी आनंद गिरि पर ये भी आरोप लगा था कि बाघम्बरी गद्दी और मंदिर से अर्जित धन वे अपने परिजनों के लिए घर भेजते थे. इस प्रकरण की महंत नरेंद्र गिरी ने अखाड़े के पंच परमेश्वरों से जांच भी करायी थी. पंच परमेश्वरों की जांच में दोनों आरोप सही पाए जाने के बाद ये सख्त कार्रवाई की गई थी.

नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि के खिलाफ FIR दर्ज
नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में उनके शिष्य आनंद गिरि (45) के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया गया है. यह FIR लेटे हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक अमर गिरि की ओर से दर्ज करवाई गई है. इसमें आरोप हैं कि आनंद की प्रताड़ना की वजह से ही महंत नरेंद्र गिरि ने जान दी है.

Narendra Giri Death: यूपी पुलिस स्वामी आनंद गिरि को लेकर पहुंची प्रयागराज

UP: महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में हिरासत में लिए गए स्वामी आनंद गिरि को प्रयागराज पुलिस लाइन में रखा गया है.

Prayagraj News: प्रयागराज में महंत आचार्य नरेंद्र गिरि का शव उनके आश्रम के कमरे में मिला था. महंत की मौत के बाद पुलिस को 8 पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला, जिसके बाद देर रात उनके शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से हिरासत में लिया गया.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 13:53 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत मामले में यूपी पुलिस ने जांच तेज कर दी है. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य रहे स्वामी आनंद गिरि (Swami Anand Giri) से जुड़ी बड़ी खबर आ रही है. पता चला है कि यूपी पुलिस स्वामी आनंद गिरि को लेकर प्रयागराज (Prayagraj) पहुंच गई है. आनंद गिरि को पुलिस लाइन में रखा गया है.

बता दें आनंद गिरि महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में नामजद हैं. सूत्रों के अनुसार पुलिस स्वामी आनंद गिरी से थोड़ी देर में पूछताछ करेगी. जार्जटाउन थाने में स्वामी आनंद गिरि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

पता चला है कि आनंद गिरि को पुलिस लाइन के क्राइम ब्रांच में रखा गया है. आज लखनऊ से उन्हें प्रयागराज पुलिस लाइन लाया गया. बता दें महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस को सुसाइट नोट मिला था, जिसमें आनंद गिरि का भी नाम था.

महंत गिरि की मौत के मामले में 6 लोग हिरासत में, गनर से होगी पूछताछ- सूत्र

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध स्थिति में मौत मामले में प्रयागराज पुलिस ने कई राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के साथ-साथ आधा दर्जन से ज्यादा व्यक्तियों को हिरासत में लिया है. इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी. उनके गनर से भी पूछताछ की जाएगी.

बता दें प्रयागराज के बाघंबरी गद्दी व लेटे हनुमानजी के महंत आचार्य नरेंद्र गिरि का शव कल उनके आश्रम के कमरे में मिला था. मठ में उनकी लाश फांसी के फंदे से लटकती मिली थी. संदिग्ध हालत में महंत की मौत के बाद पुलिस को 8 पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला, जिसके बाद देर रात ही उनके शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से हिरासत में लिया गया था. पुलिस के मुताबिक, महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि के ऊपर प्रताड़ना का आरोप लगाया था.

इनपुट: सर्वेश दुबे

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Mahant Narendra Giri Death Case: आईजी केपी सिंह के अनुसार महंत नरेंद्र गिरि का शव उनके शिष्यों ने छत से लटका पाया था. उस जगह से 7 से 8 पन्नों का एक कथित सुसाइड नोट भी मिला था.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 13:48 IST
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नई दिल्‍ली. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के निधन के बाद कई संत उनकी मौत के कारण पर सवाल उठा रहे हैं. साथ ही उनके कथित सुसाइड नोट की सच्‍चाई को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं. वहीं आईजी केपी सिंह के अनुसार महंत गिरि का शव उनके शिष्यों ने छत से लटका पाया था. उस जगह से 7 से 8 पन्नों का एक कथित सुसाइड नोट भी मिला था. इसमें लिखा गया था कि वह मानसिक रूप से परेशान हैं और अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं. पुलिस ने कहा कि उन्‍होंने लिखा था कि वह अपने एक शिष्य से परेशान थे.

पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है लेकिन पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. केपी सिंह ने कहा था कि अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के आने के बाद महंत के अंतिम संस्कार पर फैसला लिया जाएगा. इस बीच, कई संत और धार्मिक निकाय मृत्यु के कारण पर सवाल उठाते हुए सामने आए और महंत की मृत्यु से संबंधित अपना पक्ष रखा.

यहां कुछ दावे और पुलिस ने अब तक क्या कहा है इसके बारे में जानिये…

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