COVID-19 के खिलाफ जंग में इलाहाबद के प्रोफेसरों ने तैयार किए चार नए उपकरण, जानें इनके उपयोग
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COVID-19 के खिलाफ जंग में इलाहाबद के प्रोफेसरों ने तैयार किए चार नए उपकरण, जानें इनके उपयोग
नए उपकरण को दिखाते मोतीलाल नेहरु नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर.

एमएनएनआईटी (MNNIT) के प्रोफेसरों ने वाइरोलाइजर,वाइरो शील्ड, स्टेरिलोबिन और डुओ पावर बनाया है. जिससे कोरोना वायरस को आसानी से डिसइन्फेक्ट किया जा सकता है.

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 प्रयागराज. कोरोना वायरस (Corona virus) के खतरे को कम करने के लिए मोतीलाल नेहरु नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNNIT) के प्रोफेसरों ने ऐसी तकनीक ईजाद की है जिसके जरिए कोविड-19 को डिसइन्फेक्ट किया जा सकता है. संस्थान के बायोटेक विभाग के पांच प्रोफेसरों डॉ एन.के.सिंह, डॉ अम्बर राय, डॉ समीर श्रीवास्तव, डॉ आशुतोष मणी, प्रोफेसर शिवेस शर्मा और सिविल इंजिनियर्स विभाग के एक प्रोफेसर डॉ वी.पी.सिंह (Professor Dr. V.P. Singh) ने मिलकर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राजीव त्रिपाठी के निर्देशन में चार उपकरण बनाये हैं. एमएनएनआईटी के प्रोफेसरों ने वाइरोलाइजर,वाइरो शील्ड, स्टेरिलोबिन और डुओ पावर बनाया है. जिससे कोरोना वायरस को आसानी से डिसइन्फेक्ट किया जा सकता है. ये सभी उपकरण बेहद कम लागत में यूवीसी तकनीक पर आधारित है.

वाइरोलाइजर में अल्ट्रा वायोलेट सी किरणों से कोरोना के वायरस को डिसइन्फेक्ट किया जाता है. इसमें संस्थान के प्रोफेसरों ने एक लकड़ी का बाक्स तैयार किया है जिसमें यूवीसी ट्यूब्स लगायी गई हैं. इसमें पांच मिनट से ज्यादा देर तक कोई भी फाइल, रुपये, पर्स आदि रखकर उसे आसानी से डिसइन्फेक्ट किया जा सकता है. संस्थान में इसका प्रयोग परीक्षाओं के समय छात्र-छात्राओं को प्रश्नपत्र और कापियों को देने में हो सकता है. इसके साथ ही संस्थान ने वाइरो शील्ड बनायी है, जिसकी लागत सिर्फ सात रुपये है. यह सीधे तौर पर कोरोना के संक्रमण से बचाव में मददगार है. इसमें एक मोटी पॉलीथीन शीट का प्रयोग किया गया है जो कि सीधे तौर पर कोरोना संक्रमित व्यक्ति से बचाव कर सकती है. इसके साथ ही तीसरा उपकरण डुओ पावर बनाया गया है जो कि लैमिनेशन मशीन से ही तैयार किया गया है. इसमें चेक, रुपये और कोई जरुरी कागजात को हीटिंग या फिर यूवीसी किरणों से डिसइन्फेक्ट किया जा सकता है.

यह उकरण एक डस्टबिन से तैयार किया गया है
इसके साथ ही संस्थान के प्रोफेसरों ने स्टेरिलोबिन भी तैयार किया है. यह उकरण एक डस्टबिन से तैयार किया गया है. जिसमें भी दो यूवीसी ट्यूब्स लगायी गई हैं. इस उकरण की खास बात यह है कि इसमें बगैर हाथों का प्रयोग किए हुए ही पैर से इसे खोला जा सकता है. इसमें पर्स के साथ ही घर के सामान और क्राकरी को भी पांच से दस मिनट कर रखकर डिसइन्फेक्ट किया जा सकता है. ये चारों उपकरण संस्थान में उपलब्ध संसाधनों से बेहद कम लागत में तैयार किए जाने का दावा किया जा रहा है. सभी उपकरण मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेशनल इनीशियेटिव फॉर डिजाइन इन्नोवेशन के तहत डिजाइन इन्नोवेशन सेन्टर एमएनएनआईटी द्वारा तैयार किया गया है. कोरोना के खतरे को कम करने के लिए एमएनएनआईटी द्वारा बनाए गए इन उपकरणों की चिकित्सक और हाईकोर्ट के जज भी डिमांड कर रहे हैं.
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