लॉकडाउन में गंगा का पानी हुआ ज्यादा निर्मल, बीओडी का स्तर बेहतर, बढ़ा बैक्टीरिया ग्रोथ: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
Allahabad News in Hindi

लॉकडाउन में गंगा का पानी हुआ ज्यादा निर्मल, बीओडी का स्तर बेहतर, बढ़ा बैक्टीरिया ग्रोथ: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अनुसार गंगा के पानी में काफी सुधार देखने को मिल रहा है.

प्रदूषण कांट्रोल बोर्ड (Pollution Control Board) के रीजनल ऑफिसर जे.बी.सिंह के मुताबिक गंगा जल में डीओ यानि डिजाल्व ऑक्सीजन का लेवल 5 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा होना चाहिए, जो लॉकडाउन (Lockdown) में बढ़कर 9 और 10 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक पहुंच गया है. यही डीओ यानि डिजाल्व ऑक्सीजन पानी में रहने वाले जलीय जीव जंतुओ के जीवन के लिए बेहद जरूरी है.

  • Share this:
प्रयागराज. लॉकडाउन (Lockdown) से जहां एक ओर लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं पर्यावरण (Environment) के लिए यह लॉकडाउन (Lockdown) बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है. इसके चलते जहां वायुमंडल पहले से कहीं ज्यादा स्वच्छ नजर आ रहा है वहीं संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) में मोक्षदायिनी गंगा नदी (Ganga River) का पानी भी पहले से काफी स्वच्छ और निर्मल हुआ है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गंगा जल की करायी गई जांच में भी गंगा जल में शुद्ध होने की बात सामने आई है. लॉकडाउन में संगम आने वाले श्रद्धालु भी गंगा के इस निर्मल और अविरल स्वरूप को देखकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं.

गंगा की अविरलता और निर्मलता को देखकर श्रद्धालु भी उत्साहित

मोक्षदायिनी गंगा करोड़ों हिन्दुओं के आस्था का प्रतीक हैं इसलिये गंगा जल को हमेशा ही सनातन धर्म को मानने वाले शुद्ध ही मानते आये हैं. इसका प्रयोग पूजा-पाठ से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों में लोग करते हैं. लेकिन गंगा नदी में छोड़े जाने वाले टेनरियों के दूषित जल और बगैर ट्राटमेंट नालों के गंदे पानी वजह से गंगा नदी का पानी आचमन के योग्य नहीं रह गया था. हालांकि केन्द्र सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च करके गंगा को अविरल और निर्मल बनाने का अभियान भी शुरू किया. इसके साथ ही कुम्भ के दौरान भी नालों को टेप कर उन्हें ट्रीटमेंट के बाद गंगा में छोड़ा गया था. जिससे गंगा की स्थिति में सुधार हुआ था. लेकिन अब लॉकडाउन में फैक्ट्रियों और टेनरियों के पूरी तरह से बंद होने और दूषित जल गंगा में न छोड़े जाने से गंगा पहले से कहीं ज्यादा स्वच्छ और अविरल नजर आ रही है.



संगम आने वाले श्रद्धालु भी गंगा के इस स्वरुप को देखकर खासे उत्साहित हो रहे हैं. संगम आयीं अभिलाषा पाण्डेय और आकांक्षा का कहना है कि पहले जहां गंगा का जल इतना दूषित था कि आचमन करने का मन नहीं होता था. वहीं लॉकडाउन में अब यह जल इतना स्वच्छ नजर आ रहा है कि लोग आचमन के साथ इसका पान भी कर रहे हैं.



प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के क्या हैं दावे

गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर यूपी पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अपने दावे हैं. पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफीसर जे.बी.सिंह के मुताबिक लॉकडाउन के पहले कुम्भ और माघ मेले के दौरान गंगा जल की प्रतिदिन मानीटरिंग की जाती रही है. उस दौरान भी गंगा में डीओ यानि डिजाल्व ऑक्सीजन और बीओडी यानि बॉयो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड की स्थिति काफी बेहतर थी. लेकिन लाक डाउन में गंगाजल के पांच जगहों से सैंपल लेकर लैबोरेटरी में नियमित जांच करायी जा रही है.

गंगा में कोई गतिविधि न होने से जल की शुद्धता को लेकर फर्क पड़ा

ताजा जांच की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा में कोई गतिविधि न होने से जल की शुद्धता को लेकर फर्क पड़ा है. रीजनल ऑफीसर जे.बी.सिंह के मुताबिक गंगा जल में डीओ यानि डिजाल्व ऑक्सीजन का लेवल 5 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा होना चाहिए जो लॉकडाउन में बढ़कर 9 और 10 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक पहुंच गया है. यही डीओ यानि डिजाल्व ऑक्सीजन पानी में रहने वाले जलीय जीव जंतुओ के जीवन के लिए बेहद जरूरी है.

बीओडी का स्तर बेहतर, बढ़ा बैक्टीरिया ग्रोथ

वहीं बीओडी यानि बॉयो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड का लेवल तीन मिली ग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए. लॉकडाउन के पहले यह 2.8 या 2.9 मिली ग्राम प्रति लीटर हुआ करता था. लेकिन ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इसमें भी सुधार हुआ है और बीओडी 2.1 मिली ग्राम प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है. इसके साथ ही अन्य फिजिकल पैरामीटर पीएच वैल्यू और कलर की स्थिति भी पहले से बेहतर हुई है. इसके साथ ही गंगा के पानी में बैक्टीरिया ग्रोथ की स्थिति भी बेहतर हुई है.

ये भी पढ़ें:

प्रयागराज में कोरोना पॉजिटिव मां से नवजात को लेकर प्रतापगढ़ आया पिता संक्रमित

प्रवासी मजदूरों की आमद से UP में कोरोना का चढ़ा पारा, 1200 से ज़्यादा पॉजिटिव
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading