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    हाथरस कांड: हाईकोर्ट में लेटर पिटिशन पर कायम हुई PIL, आज हो सकती है सुनवाई

    हाथरस मामले में हाईकोर्ट आज कर सकता है सुनवाई
    हाथरस मामले में हाईकोर्ट आज कर सकता है सुनवाई

    गैंगरेप की शिकार दलित लड़की के परिजनों को मामले के ट्रायल तक सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की गई है. पत्र याचिका में कहा गया है कि हाथरस जिला और पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारियों कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए जो इस मामले की जांच को किसी भी तरह से प्रभावित कर सकते हैं.

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    प्रयागराज. हाथरस (Hathras) की निर्भया के साथ हुई दरिंदगी के बाद मौत के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर को पत्र याचिका भेजी गई है. हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी की ओर से भेजी गई पत्र याचिका पर जनहित याचिका कायम कर इलाहाबाद हाईकोर्ट आज मामले की सुनवाई कर सकती है. पत्र याचिका में पूरे मामले की ज्यूडीशियल इंक्वायरी की मांग की गई है. इसके साथ ही साथ मामले की जांच हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग में कराए जाने की भी मांग है.

    याचिका में की गई ये मांग

    गैंगरेप की शिकार दलित लड़की के परिजनों को मामले के ट्रायल तक सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की गई है. पत्र याचिका में कहा गया है कि हाथरस जिला और पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारियों कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए जो इस मामले की जांच को किसी भी तरह से प्रभावित कर सकते हैं.
    पत्र याचिका में परिजनों को बगैर विश्वास में लिए रात के अंधेरे में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार किए जाने पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. पत्र में कहा गया है जिस तरह से जल्दबाजी में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार किया गया है वह पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.




    हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी की ओर से चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर को भेजे गए लेटर पिटीशन में मामले को बेहद गंभीर व शर्मनाक बताते हुए इसे अर्जेन्ट बेसिस पर सुनने और कोई आदेश जारी किये जाने की गुहार लगाई गई है.

    जबरन अंतिम संस्कार पर भी उठे सवाल

    पत्र याचिका में कहा गया है कि हाथरस की निर्भया के साथ पहले तो दरिंदों ने हैवानियत कर उसे मौत के घाट उतारा. इसके बाद हाथरस के सरकारी अमले ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए रात के अंधेरे में जबरन अंतिम संस्कार कर दिया. इसमें परिवार वालों को भी शामिल नहीं होने दिया गया. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पत्र याचिका को हाईकोर्ट पीआईएल यानी जनहित याचिका के तौर पर मंज़ूर करते हुए यूपी सरकार से जवाब तलब कर सकता है. पीड़िता के साथ हैवानियत और उसकी मौत के मामले को लेकर पूरे प्रदेश के लोगों में उबाल है. पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरे प्रदेश में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. खास तौर पर रात के अंधेरे में शव का अंतिम संस्कार कराए जाने को लेकर भी लोग गुस्से में हैं. वहीं इस मामले में योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है इसके साथ ही साथ सीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीड़ित परिजनों से भी बातचीत की है. सीएम योगी ने पीड़ित परिजनों को मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. पीड़ित परिजनों को‌ शहर में एक आवास, एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी और मुआवजा देने का भी एलान कर दिया है.
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