HC बार एसोसिएशन अध्यक्ष का UP के मुख्य सचिव को पत्र- वकील, मुंशी परिवार के लिए बनाएं क्वारेंटाइन सेंटर

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने यूपी के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने यूपी के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है.

Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेन्द्र नाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को पत्र लिखा है कि अगर सरकार सरकार वकीलों और मुंशी के परिवार के लिए क्वारेंटाइन सेंटर बनाती है तो एसोसिएशन दवा आदि की उपलब्धता मे सहयोग करने को तैयार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2021, 6:45 PM IST
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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (Allahabad High court Bar Associaton) के अध्यक्ष अमरेन्द्र नाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को पत्र लिखकर कोविड-19 (COVID-19) संक्रमित अधिवक्ताओं के लिए क्वारेन्टाइन सेन्टर बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि सरकार इस दिशा मे कार्य करती है तो एसोसिएशन दवा आदि की उपलब्धता मे सहयोग करने को तैयार है.

पत्र में बार अध्यक्ष ने कोरोना संक्रमण मे सरकार द्वारा उठाये कदमो की सराहना करते हुए कहा है कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आकर अधिवक्ता हाईकोर्ट मे विधि व्यवसाय के लिए प्रयागराज मे निवास कर रहे हैं. आपदा मे सहायता करना हमारा कर्तव्य है. अधिवक्ता व मुंशी परिवार के लिए अलग क्वारेन्टाइन सेन्टर बनाने में बार एसोसिएशन सहयोग करेगी.

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यहां क्वारेंटाइन सेंटर बनाने का सुझाव
उन्होंने सुझाव दिया है कि सीएबी इंटरमीडिएट कालेज व केपी कम्युनिटी सेन्टर को क्वारेन्टाइन सेन्टर बनाया जा सकता है. जो कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल प्रयागराज के नजदीक हैं. बता दें बिहार सरकार ने ऐसी ही व्यवस्था पटना के होटल पाटलिपुत्र में की है. मुख्य सचिव से अनुरोध किया गया है कि इस संबंध मे अधिसूचना जारी कर व्यवस्था करने की कार्यवाही की जाए.

हाईकोर्ट ने जारी की नई गाइडलाइन

बता दें कोरोना के प्रकोप को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की जिला अदालतों, अधिकरणों और पारिवार न्यायालयों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है. इसके तहत मुकदमों की सुनवाई अब सिर्फ वर्चुअल मोड से ही होगी. भौतिक रूप से उपस्थ्ति होकर कोई मुकदमा नहीं सुना जाएगा. हाईकोर्ट ने वकीलों और वादकारियों, स्टाम्प वेंडर, एडवोकेट और क्लर्क के अदालत परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी है. कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय यादव ने यह आदेश दिया है.



ये हैं निर्देश

हाईकोर्ट ने‌ निर्देश दिया है कि सिर्फ फ्रेश जमानत, ‌अग्रिम जमानत, ‌रिमांड और अति आवश्यक मुकदमे ही सुने जाएंगे. इसके लिए एक या दो से अधिक न्यायिक अधिकारियों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी. ड्यूटी रोटेशन के आधार पर लगाई जाएगी. मुकदमे सिर्फ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिला अदालत या न्यायिक अधिकारी के आवास से सुने जाएंगे. कर्मचारियों की ड्यूटी भी रोटेशन के आधार पर लगाई जाएगी. शेष मामलों के लिए पूर्व में जारी गाइडलाइन लागू रहेगी. इससे पूर्व हाईकोर्ट ने वर्चुअल और फिजिकल मोड से मुकदमों की सुनवाई की अनुमति दी थी. मगर संक्रमण की बढ़ती दर को देखते हुए इस आदेश को संशोधित कर दिया गया है. रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल आशीष कुमार श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी.
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