बसपा प्रत्याशी की याचिका पर स्वार सीट पर चुनाव के आदेश, बड़ा सवाल- क्या EC जाएगा सुप्रीम कोर्ट?

रामपुर की स्वार सीट से बसपा प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
रामपुर की स्वार सीट से बसपा प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश

रामपुर (Rampur) की स्वार सीट से बसपा के प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी ने याचिका दाखिल करके चुनाव कराने की मांग की थी. पूरी प्रक्रिया की इनसाइड स्टोरी दिलचस्प है.

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रामपुर. उत्तर प्रदेश रामपुर (Rampur) की स्वार विधानसभा सीट (Suar Assembly Seat) पर उपचुनाव (UP Assembly By Election) का रास्ता साफ होता दिख रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने चुनाव आयोग (Election Commission Of India) को निर्देश दिए हैं कि सीट पर तत्काल चुनाव की प्रक्रिया प्रारम्भ की जाए. दिलचस्प ये है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का ये फैसला सपा सांसद आजम खान या उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की याचिका पर नहीं हुआ है. स्वार सीट से बसपा के प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी ने याचिका दाखिल करके चुनाव कराने की मांग की थी. पूरी प्रक्रिया की इनसाइड स्टोरी भी दिलचस्प है. साथ ही ये सवाल भी पैदा हो गया है कि क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के बाद स्वार सीट पर चुनाव हो पाएगा?

हाईकोर्ट में दी गई ये दलीलें

स्वार नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन और उपचुनाव में बसपा के प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी ने 5 अक्टूबर को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके ये मांग की थी कि चुनाव जल्द से जल्द कराया जाए. क्योंकि सीट को खाली हुए 6 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. इस पर 21 और 22 अक्टूबर को सुनवाई हुई. शफीक अंसारी के वकील विक्रांत पांडेय ने दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत किसी सीट को 6 महीने से ज्यादा खाली नहीं छोड़ा जा सकता. इस पर चुनाव आयोग के वकील बीएन सिंह ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में पेण्डिंग है. अंसारी के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को स्टे नहीं दिया है. ऐसे में मामले के पेण्डिंग होने का कोई सवाल ही नहीं है.



चुनाव आयोग के वकील की दलील नहीं चली
बता दें कि 16 दिसम्बर 2019 को हाईकोर्ट ने ही स्वार के सपा विधायक और आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम की उम्मीद्वारी रद्द कर दी थी. इसके बाद 27 फरवरी को विधानसभा सचिवालय ने सीट खाली होने की घोषणा कर दी थी. हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील की दलील नहीं मानी और जल्द से जल्द स्वार सीट पर चुनाव कराने के निर्देश दिए.



हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करने का रास्ता है

अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या हाईकोर्ट के जल्द चुनाव कराने के निर्देश के बाद स्वार सीट पर चुनाव हो पायेगा? अंसारी के वकील ने कहा कि चुनाव आयोग के पास हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करने का रास्ता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट में दलीलें दी हैं, उससे साफ जाहिर है कि आयोग हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा. यदि ऐसा होता है तो रामपुर की स्वार सीट पर उपचुनाव का मामला एक बार फिर से टल सकता है.

अंसारी के वकील विक्रांत पांडेय ने बताया कि कोर्ट में जिरह के दौरान जब बेंच ने चुनाव आयोग के वकील से ये पूछा कि चुनाव कब करायेंगे? तो उन्होंने जवाब दिया था कि 5 साल बाद. ऐसे में स्वार सीट पर चुनाव जल्द हो जाए तो बड़ी बात होगी.

हालांकि दूसरी तरफ ये भी तर्क दिया जा रहा है कि चुनाव आयोग चुनाव कराने के लिए है न कि चुनाव होने से रोकने के लिए. स्वार सीट पर क्या होता है, ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा. बता दें कि अब्दुल्ला आजम की उम्र होने के कारण उनकी उम्मीद्वारी रद्द कर दी गई थी. इसी वजह से स्वार की सीट खाली चल रही है.
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