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HC ने सरकारी नौकरी के अंतिम दिनों में जन्मतिथि विवाद सुनने से इंकार को माना गलत, एकलपीठ का आदेश रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बागपत में मजदूरों को बंधक बनाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है . (सांकेतिक तस्वीर)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बागपत में मजदूरों को बंधक बनाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है . (सांकेतिक तस्वीर)

चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने बदायूं (Badaun) के रणवीर की विशेष अपील पर सुनवाई के बाद ये आदेश दिया. उन्होंने कहा कि सेवा के अंतिम दिनों में जन्मतिथि विवाद सुनने से इंकार गलत है. याची जन्मतिथि सुधार की मांग उचित फोरम में उठा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 11, 2020, 11:41 AM IST
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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सरकारी सेवा के अंतिम दिनों में जन्मतिथि (Date Of Birth) सुधार की मांग में दाखिल याचिका (Petition) पर सुनवाई करते हुए मामले में एकल पीठ (Single Bench) का आदेश रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने सेवा के अंतिम दिनों में जन्मतिथि विवाद सुनने से इंकार को गलत माना है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याची को जन्मतिथि सुधार की मांग उचित फोरम में उठाने की छूट दी है.

बदायूं के रणवीर की विशेष अपील पर फैसला

बदायूं के रणवीर की विशेष अपील पर हाईकोर्ट ने ये आदेश दिया है. याची 25 जनवरी 1987 को बेलदार पद पर नियुक्त हुआ था. नवंबर 2011 में उसकी सेवा नियमित कर दी गई. इसी समय सेवा पंजिका में जन्मतिथि दर्ज की गई. इसी को लेकर पेंच फंस गया. याची का आरोप है कि उसकी जन्मतिथि 19 जनवरी 1965 है, जबकि गलती से सेवा पुस्तिका में 19 जनवरी 1960 दर्ज है.



याची जन्मतिथि सुधार की मांग उचित फोरम में उठा सकता है: HC
चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद ये आदेश दिया. उन्होंने कहा कि सेवा के अंतिम दिनों में जन्मतिथि विवाद सुनने से इंकार गलत है. याची जन्मतिथि सुधार की मांग उचित फोरम में उठा सकता है.

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