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HC ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह की 'Y' प्लस सुरक्षा वापस लेने पर सरकार से मांगा जवाब

धनंजय सिंह (File Photo)
धनंजय सिंह (File Photo)

याचिका की अगली सुनवाई 16 नवम्बर को होगी. यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सी डी सिंह की खंण्डपीठ ने धनन्जय सिंह की याचिका पर दिया है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह को मिली वाई प्लस सुरक्षा केंद्र सरकार द्वारा वापस लेने की वैधता की चुनौती याचिका पर जवाब तलब किया है. कोर्ट ने साथ ही केंद्र प राज्य सरकार से पूछा है कि व्यक्तिगत सुरक्षा देने की गाइडलाइन और मापदंड क्या हैं? याचिका की अगली सुनवाई 16 नवम्बर को होगी. यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सी डी सिंह की खंण्डपीठ ने धनन्जय सिंह की याचिका पर दिया है.

याचिका में 24 मई 18 के आदेश से वाई श्रेणी सुरक्षा वापस लेने की वैधता को चुनौती दी गयी है. याची का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जून 2017 में 12 राजनेताओं की सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया, किन्तु 28 अगस्त 2017 को प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा कि अभी अमल में न लाये, पुनर्विचार किया जा रहा है.

याची का कहना है कि प्रह्लाद गुप्ता ने जनहित याचिका दाखिल कर जून 2017 के पत्र के आधार पर याची की वाई श्रेणी सुरक्षा वापस लेने की मांग की. 23 मई 17 को कोर्ट ने 25 मई को पेश करने का आदेश दिया. इसी बीच सरकार ने 24 मई 2017 को याची की सुरक्षा वापस ले ली. याचिका में सुरक्षा जारी रखने का निर्देश देने की मांग की गई है.



इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की पत्नी कुसुम लता को 5 लाख के व्यक्तिगत मुचलके व इतनी ही राशि की प्रतिभूति पर अंतरिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने यह आदेश याची की अधिक उम्र व् किडनी ट्रांसप्लांट के कारण दिया है. साथ ही याची को सीबीआई कोर्ट, गाजियाबाद में चल रहे आपराधिक मुकदमे में सहयोग करने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने जमानत अर्जी को सुनवाई के लिए 19 नवम्बर को पेश करने को कहा है. इसके अलावा याची को कोर्ट में हाजिर रहने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर याची अगली तिथि पर कोर्ट में नहीं आती तो उसके खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जायेगी. यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति डी के सिंह की खंडपीठ ने दिया है. अर्जी पर अधिवक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी और सीबीआई अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने पक्ष रखा.

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