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यदि शहर में है अपना मकान तो खाली करना पड़ सकता है किराए का घर

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 12, 2019, 12:08 PM IST
यदि शहर में है अपना मकान तो खाली करना पड़ सकता है किराए का घर
मकान मालिक- किराएदार विवाद में इलाहाबाद होईकोर्ट ने महत्‍वपूर्ण फैसला दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अहम आदेश देते हुए कहा है कि यदि किरायेदार का अपना मकान है तो उससे किराए का घर खाली कराया जा सकता है.

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प्रयागराज (Prayagraj): इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High court) अपने ने एक महत्वपूर्ण आदेश (Important Order) में कहा है कि यदि किरायेदार (Tenant) का शहर में अपना मकान है, तो मकान मालिक उससे किराये का मकान (Ranted house) खाली करा सकता है. किरायेदार इस आधार पर किराये का मकान छोड़ने से मना नहीं कर सकता है कि मकान मालिक (Land Lord) को उस मकान की आवश्यकता नहीं है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस एसपी केशरवानी Justice SP Kesharwani) की एकलपीठ ने यह आदेश मेरठ (Meerut) के मकान मालिक दीपक जैन (Deepak Jain) की याचिका पर दिया है.

दीपक जैन की याचिका पर बहस करने वाले अधिवक्‍ता आशीष कुमार सिंह के अुनसार, मेरठ के मकान मालिक दीपक जैन व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस एसपी केशरवानी की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है. उन्‍होंने बताया कि वेद प्रकाश अग्रवाल याची दीपक जैन के मकान में किराएदार थे. उनकी मृत्यु के बाद परिवार के अन्य सदस्य किराए के मकान में बतौर वारिस रहते रहे. मकान मालिक ने यह कहते हुए मकान खाली करने का नोटिस दिया कि किराएदार के पास शहर में पांच मकान हैं और मकान मालिक को अपने मकान की आवश्यकता है.

अधिवक्‍ता आशीष कुमार सिंह ने बताया कि किरायेदारों द्वारा मकान खाली न करने पर मकान मालिक दीपक जैन ने बेदखली वाद अदालत में दायर कर दिया. सुनवाई के बाद अपीलीय अदालत ने अपना फैसला याची के पक्ष में सुनाया, लेकिन अपीलीय अदालत ने यह कहते हुए किराएदार की बेदखली को गलत माना कि मकान मालिक के मकान में 25 कमरे हैं, इसलिए उसे और कमरों की जरूरत नहीं है.

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अपीलीय न्यायालय ने कानून के प्रावधानों के विपरीत आदेश दिया है. इन तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया गया कि किराएदार के पास उसी शहर में पांच मकान हैं. इसलिए मकान मालिक को किराए के मकान को खाली कराने का अधिकार है. कोर्ट ने अपीलीय अदालत के फैसले को रद्द करते हुए मूल वाद में जज ख़फ़ीफा के फैसले की पुष्टि कर दी है.

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First published: November 12, 2019, 12:06 PM IST
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