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हाईकोर्ट के फैसले से एक हुए सलमान और शिखा, SSP को निर्देश- दंपति को सुरक्षा मुहैया कराएं

इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट

आरोपी युवक सलमान उर्फ करन ने कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. इसमें उन्‍होंने बताया कि एटा चाइल्ड वेलफेयर कमिटी द्वारा उनकी पत्नी शिखा को जबरन उनसे अलग कर दिया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 9:12 AM IST
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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एटा के एक मुस्लिम युवक पर हिन्दू लड़की को अगवा करने और उसपर जबरन शादी का दबाव डालने के आरोप के एक मामले में अपना फैसला सुनाया है. युवती द्वारा खुद को वयस्‍क साबित करने के बाद कोर्ट ने जीने का अधिकार के संवैधानिक अधिकार के तहत दोनों को एक साथ रहने का अधिकार प्रदान किया. कोर्ट ने कहा कि लड़की बालिग है और वह जिस भी लड़के के साथ रहना चाहती है, इसका चुनाव वह खुद कर सकती है. यह उसका मौलिक अधिकार है.

दरअसल, आरोपी युवक सलमान उर्फ करन ने कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी जिसमें उसने बताया कि एटा चाइल्ड वेलफेयर कमिटी द्वारा उसकी पत्नी शिखा को जबरन उसके परिवार को सौंप दिया गया. जबकि इसमें उसकी पत्नी की कोई चाहत नहीं थी. जानकारी के मुताबिक हाल ही में जस्टिस पंकज नकवी और विवेक अग्रवाल की बेंच पर सुनवाई के दौरान लड़की ने अपने जन्म प्रमाण पत्र दाखिल करते हुए कहा था कि उसने सलमान से अपनी मर्जी से शादी की है. वहीं हाईकोर्ट ने प्रयागराज एसएसपी को निर्देश देते हुए कहा कि दंपति के घर पहुंचने तक उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई जाए.

इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिव‌र्तन (Love Jihad) निषेध अध्यादेश के तहत दर्ज मुकदमे में आरोपी हरिद्वार निवासी नदीम की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी तरह की उत्‍पीड़न वाली कार्रवाई भी नहीं करने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज नकवी एवं न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है. कोर्ट ने नए अध्यादेश की संवैधानिकता का मुद्दा मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश इस अध्यादेश के विरुद्ध दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं.



नदीम के खिलाफ मुजफ्फरनगर में नए अध्यादेश की धारा तीन व पांच के अलावा आईपीसी की धाराओं के तहत धमकी देने और आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा दर्ज कराया गया है. याची के खिलाफ मुज्जफरनगर के अक्षय कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई थी. उनका आरोप है कि नदीम ने धर्म परिवर्तन कराने की नीयत से उसकी पत्नी से अवैध संबंध बनाए और शादी करने के बहाने उस पर धर्म परिवर्तन का दवाब डाल रहा था. याची का कहना था कि वह एक गरीब मजदूर है तथा कुछ पैसों के लेनदेन के कारण उसे झूठे मुकदमे में फंसाया गया है.
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