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इलाहाबाद HC का अहम फैसला- दूसरे धर्म में की है शादी तो वैवाहिक जीवन में परिजन भी नहीं कर सकते हस्तक्षेप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में स्पष्ट किया कि बालिग को अपनी पंसद का जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है. (फाइल फोटो)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में स्पष्ट किया कि बालिग को अपनी पंसद का जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है. (फाइल फोटो)

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है, ऐसे में कोई आपत्ति या फिर उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला देते हुए दूसरे धर्म में शादी करने वाले युवाओं को बड़ी राहत दी है. एक याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो अलग अलग धर्मों के बालिगों ने यदि शादी की है तो उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार उनके माता पिता को भी नहीं है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि कोई दूसरे धर्म में शादी करता है तो उनके वैवाहिक जीवन में कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता है साथ ही यदि वे पुलिस सुरक्षा की मांग करते हैं तो पुलिस को उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी होगी.
जानकारी के अनुसार शिफा हसन नामक एक मुस्लिम महिला ने एक हिंदू युवक से शादी की. जिसके बाद उसने जिलाधिकारी से हिंदू धर्म अपनाने की अनुमति मांगी. जिलाधिकारी ने इस संबंध में पुलिस थाने से रिपोर्ट की मांग की. इस पर पुलिस ने जानकारी दी कि युवक के पिता इस शादी से राजी नहीं हैं और दूसरी तरफ लड़की के परिजन भी इसके खिलाफ हैं.

जान को खतरा
इसके बाद शिफ को अपनी और पति की जान को खतरा महसूस हुआ. इस संबंध में उसने कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की मांग की. इस पर कोर्ट ने किसी के हत्सक्षेप न करने और पुलिस की ओर से सुरक्षा प्रदान करवाए जाने के संबंध में आदेश पारित किया. कोर्ट ने इस दौरान साफ तौर पर कहा कि बालिग व्यक्ति को जीवन अपने तौर पर जीने का पूरा अधिकार है और उसमें किसी का भी हस्तक्षेप नहीं हो सकता है.

अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार
हाईकोर्ट ने शिफा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि एक बा‌लिग को अपनी पसंद के जीवनसाथी को चुनने का पूरा अधिकार है. ऐसे में उसकी पसंद या चुनाव पर कोई भी आपत्ति नहीं उठा सकता है. और न ही शादी होने के बाद उनके वैवाहिक संबंधों पर किसी को भी आपत्ति करने का कोई अधिकार है. ये आदेश जस्टिस एमके गुप्ता और जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने दिया.

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