IMA हड़ताल: प्रयागराज में मरीज परेशान, बोले- काली पट्टी बांधकर इलाज करें धरती के भगवान

मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवायें पूरी तरह से पटरी से उतरने लगी हैं और इसका सीधा असर मरीजों की सेहत पर पड़ रहा है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 17, 2019, 3:57 PM IST
IMA हड़ताल: प्रयागराज में मरीज परेशान, बोले- काली पट्टी बांधकर इलाज करें धरती के भगवान
मेडिकल कॉलेज में इन्तजार करते मरीज और उनके तीमारदार
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Updated: June 17, 2019, 3:57 PM IST
पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में प्रयागराज के मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी है. इस हड़ताल में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के शामिल होने से मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवायें पूरी तरह से पटरी से उतरने लगी हैं और इसका सीधा असर मरीजों की सेहत पर पड़ रहा है.

धरने पर बैठे डॉक्टर



पश्चिम बंगाल की घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेन्सी को छोड़कर अस्पताल की सभी सेवायें ठप कर दी है. पैथोलॉजी और दवा वितरण केन्द्र में भी ताले लटक रहे हैं. जूनियर डॉक्टर काली पट्टी बांधकर अस्पताल में रजिस्ट्रेशन बिल्डिंग के बाहर नारेबाजी कर धरना दे रहे हैं. हड़ताली जूनियर डॉक्टर अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग कर रहे हैं. वहीं जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल को इलाहाबाद मेडिकल एसोशिएसन ने भी अपना समर्थन दिया है. जिसके बाद शहर के निजी अस्पताल और नर्सिंग होम भी हड़ताल पर चले गए हैं.

बगैर इलाज वापस लौट रहे मरीज

डॉक्टरों की हड़ताल से प्रयागराज और आस-पास के जिलों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बगैर इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है. अस्पताल में इलाज के लिए आये कई मरीज ऐसे भी हैं जो कि बेहद गरीब हैं और निजी अस्पतालों में इलाज नहीं करा सकते हैं. ऐसे मरीज अस्पताल के वेटिंग हाल में ही डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं.

हड़ताल की वजह से परेशान मरीज


काली पट्टी बांधकर करें विरोध
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प्रतापगढ़ से अपनी बेटी के इलाज के लिए आए एक बुजुर्ग ने कहा कि उनकी बेटी प्रेग्नेंट हैं. दिखाने के लिए किराया भाड़ा खर्च करके आए हैं. अब बिना इलाज के ही वापस लौटना होगा. वहीं एक दूसरे शख्स ने कहा कि पत्नी को दिखाने आए थे, लेकिन हड़ताल की वजह से कोई भी देख नहीं रहा है. उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल की घटना से उनकी सहानुभूति तो डॉक्टरों के साथ है, लेकिन विरोध के लिए वे काली पट्टी बांधे और इलाज करें. मरीज को नहीं देखना उचित नहीं है.

हड़ताल खत्म होने का इन्तजार करते मरीज


(रिपोर्ट: सर्वेश दुबे)

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