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महंत नरेंद्र गिरि से पहले भी MP के इस संत की हत्या-आत्महत्या के बीच उलझ गई थी कहानी

महंत नरेंद्र गिरि से पहले भी भैय्यू जी महाराज की हत्या या आत्महत्या को लेकर लोग सवाल पूछ रहे थे.

महंत नरेंद्र गिरि से पहले भी भैय्यू जी महाराज की हत्या या आत्महत्या को लेकर लोग सवाल पूछ रहे थे.

Narendra Giri Death Case: महंत नरेंद्र गिरि की मौत पहला मामला नहीं है, जब देश में किसी संत की खुदकुशी पर सवाल उठे हों. तीन साल पहले भी एमपी के इंदौर में संत और कथावाचक भैय्यू जी महाराज की आत्महत्या को लेकर लोग इस तरह के ही सवाल पूछ रहे थे.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघम्बरी पीठ के महंत नरेंद्र गिरि (Narendra Giri Death) की हत्या या आत्महत्या की गुत्थी को सुलझाने में यूपी पुलिस का पूरा महकमा लगा हुआ है. पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में आत्महत्या की बात सामने आ रही है. नरेंद्र गिरि के करीबियों का कहना है कि वह कभी भी आत्महत्या नहीं कर सकते हैं. इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए. आपको बता दें कि यह देश में कोई पहला मामला नहीं है, जब किसी संत की खुदकुशी बताए जाने पर लोगों ने सवाल किया है. तीन साल पहले भी संत और कथावाचक भैय्यू जी महाराज की आत्महत्या को लेकर लोग इसी तरह के सवाल पूछ रहे थे. ऐसे में सवाल उठता है कि दूसरों को ज्ञान और सत्य का मार्ग दिखाने वाले ये साधु-संत खुद क्यों ऐसे मार्ग चुन लेते हैं, जिस पर चलने का लोगों को भी विश्वास नहीं होता है. क्यों संतों की हत्या और आत्महत्या के बीच कहानी उलझ कर रह जाती है?

बीते दो दिनों की तफ्तीश में यूपी पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में महंत नरेंद्र गिरि के एक शिष्य आनंद गिरि और बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी को गिरफ्तार किया है. इस पूरे मामले की तफ्तीश के लिए योगी सरकार ने एसआईटी का भी गठन कर दिया है. मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी ने भी महंत नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा था कि पूरे मामले में एक-एक राज का पर्दाफाश होगा.

प्रसिद्ध संत और कथावाचक भैय्यूजी महाराज ने भी इंदौर स्थित अपने घर में कथित रूप से गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी.

क्यों लोगों को संतों के सुसाइड पर विश्वास नहीं होता?
अयोध्या के पूर्व सांसद और संत रामविलास वेदांती ने महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग की है. राम विलास वेदांती ने कहा कि 12 पन्ने के सुसाइड नोट की भी जांच होनी चाहिए. दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. राम विलास वेदांती का बयान संत समाज बैठक करके आगे का निर्णय लेगा. अयोध्या के संत वेदांती का कहना है कि ऐसे संत नहीं थे जो आत्महत्या कर सकते थे. लिहाजा इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए जिससे दोषी बच ना सकें.

भैय्यू जी महाराज ने भी सुसाइड किया था?
गौरतलब है कि साल 2018 में ही प्रसिद्ध संत और कथावाचक भैय्यू जी महाराज ने भी इंदौर स्थित अपने घर में कथित रूप से गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी. भैय्यू जी तब तक देश के जाने माने संत और कथावाचक बन चुके थे. उनके निधन से भी देशभर में लोग चौंक गए थे. उनकी लाश के पास से ही पिस्टल और सुसाइड नोट बरामद किया गया था. इस मामले की भी सीबीआई से जांच कराने की मांग उठी थी. हालांकि, आज तक इस मौत की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है. इस घटना के सात महीने बाद भैय्यू जी महाराज के दो विश्वस्त सहयोगियों को एक युवती के साथ गिरफ्तार भी किया गया था. कहा जा रहा है कि भैय्यू जी महाराज के नजदीक रही युवती उन पर शादी के लिए कथित रूप से दबाव बना रही थी, जबकि अधेड़ उम्र के आध्यात्मिक गुरु पहले से शादीशुदा थे. उनकी आत्महत्या को लेकर भी परिवार वालों की तरफ से कई तरह के सवाल उठाए गए थे और उस वक्त कई तरह की थ्योरी भी सामने आई थी.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई आदमी आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो दिमाग से निकल जाता है कि वह साधु है संत.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई आदमी आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो दिमाग से निकल जाता है कि वह साधु है संत.

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई आदमी आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो दिमाग से निकल जाता है कि वह साधु है संत. दिमाग से यह भी निकल जाता है कि उसके मौत के बाद लोग उशके बारे में क्या सोचेंगे और क्या विचार रखेंगे? इस स्थिति को मनोचिकित्सक सुसाइडल आइडिएशन कहते हैं यानी लोगों के मनों में आत्महत्या का ख्याल आना शुरू हो जाता है. इसके लिए जरूरी नहीं है कि कोई एक ही वजह हो. कई वजहों से भी इंसान सुसाइड करने के बारे में सोचता है. विशेषज्ञों की राय में जब किसी शख्स को कोई दूसरा रास्ता नहीं मिलता है या यूं कहें कि किसी मुश्किल परिस्थिति से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता है तो वह शख्स अपना जीवन समाप्त कर लेता है या उसके बार में सोचने लगता है.

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सुसाइड की स्थिति आने पर मनुष्य क्या सोचता है?
दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ नवीन कुमार कहते हैं, ‘लोगों के मन में सुसाइड का विचार आना नेचुरल नहीं होता है. उस समय मनुष्य के मस्तिष्क में बायोन्यूरोलॉजिकल बदलावों के चलते लगने लगता है कि जीवन अब किसी काम का नहीं है. हमने जो अर्जित किया है, वह बेकार है. इसके बाद ही व्यक्तियों के मन में आत्महत्या करने का विचार पनपने लगता है. सुसाइड के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामले मानसिक विकार के चलते होते हैं. हालांकि, व्यक्ति के मन में नकारात्मक ख्यालों का आना नई बात नहीं है. कई बार ऐसे ख्याल कुछ ही पलों के लिए आते हैं, लेकिन कुछ लोगों में ये धीरे-धीरे बढ़ने लगता है.’

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