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क्या वाकई प्राइमरी स्कूलों में देश की युवा पीढ़ी का संवर रहा है बच्चों का भविष्य!

सरकारी

सरकारी स्कूलों मे पढ़ने वाले देश का भविष्य

शिक्षा सभी का मौलिक अधिकार है. बच्चे को बचपन में शिक्षा के प्रकाश से संवारा जाए तो वह देश के भविष्य को रोशन करते है. इसलिए जरूरी है कि बच्चों को उचित और संपूर्ण प्राथमिक शिक्षा दी जाए जो उनके लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा. समाज के हर तबके  का बच्चा शिक्षित हो इसके लिए आज सरकारी लगातार प्रयासरत हैं.

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    किसी ने खूब कहा है-शिक्षा जैसा कोई दान नहीं,शिक्षा से बड़ा कोई काम नहीं..शिक्षा से ही अज्ञान भागता,शिक्षा से ही तुम्हें सारा समाज पहचानता,जब शिक्षित होगी सारी बिरादरी तब ही मिटेगी दिक्कत सारी.शिक्षा सभी का मौलिक अधिकार है. बच्चे को बचपन में शिक्षा के प्रकाश से संवारा जाए तो वह देश के भविष्य को रोशन करते है. इसलिए जरूरी है कि बच्चों को उचित और संपूर्ण प्राथमिक शिक्षा दी जाए जो उनके लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा. समाज के हर तबके  का बच्चा शिक्षित हो इसके लिए आज सरकारी लगातार प्रयासरत हैं.
    हर एक बच्चा महंगे प्राइवेट स्कूलों में नहीं पढ़ सकता इसलिए आज लगभग 7 करोड बच्चे संपूर्ण देश में सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं. सरकारी दावा करती है कि वह सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जा रही है साथ ही उनका बेहतर भविष्य संवार रही हैं. लेकिन समय-समय पर ऐसे कई तथ्य और चिंताए सामने आती हैं जो यह बताती हैं कि पैसे तो खर्च होते हैं लेकिन शिक्षा का स्तर नीचे ही रहता है.
    न्यूज़ 18 लोकल की टीम जब सरकारी स्कूलों में पहुंची तो ऐसी कई समस्याएं देखने को मिली जिन पर चिंतन जरूरी है.


    मां-बाप की लापरवाही बच्चों में शिक्षा की रूचि खत्म कर रही

    प्राय देखा जाता है कि सरकारी स्कूलों में वही बच्चे पढ़ते हैं जिनके मां-बाप कम पढ़े लिखे होते हैं या मजदूरी करते हैं.ऐसे में शिक्षा के महत्व को नहीं समझते और छोटे-छोटे बच्चों से घर का भी काम करवाते हैं.जैसे बच्चे काम करने के बाद जब पढ़ाई करने बैठते हैं तो शारीरिक और मानसिक रूप से थके होने के कारण उनके अंदर शिक्षा के प्रति रुचि खत्म हो जाती है.ऐसे में स्कूल तो जाते है लेकिन उनके अंदर सीखने की ललक नहीं होती. कक्षा 5 में पढ़ने वाली राधा कहती है कि-\’हम स्कूल से घर जाइत हि तो माई के साथ काम करवावत हैं, काम करे के बाद हम तो थक जाइत हि ऐहे से नही पढ़ पावत हई. का करि माई के पास बहुतै काम रहत है\’.


    क्या ₹1050 में बच्चों की यूनिफार्म आ जाएगी

    शासन ने पहले बच्चों की यूनिफार्म की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन को दी थी, ऐसे में शिकायतें आती थी कि बच्चों को सही क्वालिटी के यूनिफार्म नहीं मिलती,जल्दी फट जाती है.अब सरकार सीधे बच्चों के माता पिता के खाते में पैसे भेजेगी. यह कीमत मात्र ₹1050 है.  ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन पैसों में कपड़े ,जूते, बैग , स्वेटर आ जाएगा? इस बात की कौन जिम्मेदारी लेगा कि पैसों का इस्तेमाल मां-बाप अपने बच्चों की यूनिफार्म के लिए ही करेगे.याद रखना चाहिए कि बच्चों में शिक्षा का भाव विकसित हो इसके लिए बेहद जरूरी है कि वह अनुशासन में रहे, यूनिफॉर्म पहनकर आएं .

    (रिपोर्ट – प्राची शर्मा)

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