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कड़ा धाम मानिकपुर जहां स्थित है पूर्वांचल की कुलदेवी का भव्य मंदिर

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कड़े धाम मानिकपुर में विराजमान शीतला देवी

कड़े धाम मानिकपुर प्रयागराज से लगभग 70 किलोमीटर दूरी पर स्थित है.इस पवित्र स्थान की अपने आप में विशेष मान्यता है.51 शक्तिपीठों में से एक, कड़ा धाम वह स्थान है जहां माता सती का दाया हाथ गिरा था.माता का हाथ गिरने के कारण यह 'कर धाम' से प्रचलित हुआ, जो बाद में अपभ्रंश होकर 'कड़ा धाम ' हो गया.इन्हें  पूर्वांचल की कुलदेवी कहा जाता है.

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    देश के विभिन्न कोनों में देवी मां का पर्व नवरात्रि अपने-अपने तरीके से मनाया जा रहा है. ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित शक्तिपीठों में लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं तथा माता के जय-जयकारे लगा रहे है. ऐसा ही कुछ नजारा इन दिनों है.. \’कड़े धाम\’ मानिकपुर में देखने को मिल रहा है.जहां इन दिनों आस्था का सैलाब उमड़ रहा है.लोग हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके माता के दर्शन को पहुंच रहे हैं. कड़े धाम मानिकपुर प्रयागराज से लगभग 70 किलोमीटर दूरी पर स्थित है.इस पवित्र स्थान की अपने आप में विशेष मान्यता है.
    51 शक्तिपीठों में से एक, कड़ा धाम वह स्थान है जहां माता सती का दाया हाथ गिरा था.माता का हाथ गिरने के कारण यह \’कर धाम\’ से प्रचलित हुआ, जो बाद में अपभ्रंश होकर \’कड़ा धाम \’ हो गया. यहां माता शीतला देवी का स्थान है, इन्हें पूर्वांचल की कुलदेवी कहा जाता है , जिसके चलते यहां 12 महीने पूर्वांचल के सभी जिलों से श्रद्धालु भारी संख्या में आते हैं.मंदिर के पुरोहित डमरू लाल बताते हैं कि द्वापर युग में पांडु पुत्र युधिष्ठिर अपने वनवास के समय कड़ा धाम आए थे, उन्होंने शीतला देवी का मंदिर और महाकालेश्वर शिवलिंग की स्थापना की थी.
    मां शीतला करती हैं सबकी इच्छाएं पूर्ण
    यहां साल के 12 महीने लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं. इसके साथ ही साथ नवविवाहित जोड़े मां का आशीर्वाद लेने जरूर आते हैं .यहां साल भर शुक्रवार और सोमवार श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ होती है.इसके साथ ही साथ वर्तमान में नवरात्रि के दौरान यहां मेला लगा है, जहां पूर्वांचल जिले के साथ-साथ देश के अन्य कोने से भी लोग यहां आ रहे हैं.मंदिर में एक कुंड स्थित है, जिसमें
    श्रद्धालुओं द्वारा जल,दूध,फल या मेवे अर्पित करते हैं.उनका मानना है कि ऐसे करने से मां उनकी सभी इच्छाएं जरूर पूरी करती है.

    (रिपोर्ट- प्राची शर्मा)

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