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काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद जमीन विवाद: ASI से सर्वे होगा या नहीं, हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट आज काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में सुना  सुना सकती है फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट आज काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में सुना सुना सकती है फैसला

Allahabad High Court News: वाराणसी के सीनियर डिवीजन सिविल जज ने एएसआई को सर्वेक्षण का आदेश दिया था. इस आदेश को मस्जिद की अंजुमन इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

  • News18Hindi
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प्रयागराज. वाराणसी स्थित स्वयं- भू भगवान विश्वेश्वर नाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद की जमीन विवाद (Kashi Vishwanath Temple- Gyanvapi Mosque Land Dispute) से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) गुरुवार को अपना फैसला सुनाएगा. मामला विवादित जमीन का सर्वेक्षण आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से कराए जाने को लेकर जुड़ा है. दरअसल, वाराणसी के सीनियर डिवीजन सिविल जज ने एएसआई को सर्वेक्षण का आदेश दिया था. इस आदेश को मस्जिद की अंजुमन इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

मस्जिद की इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने वाराणसी की अदालत के फैसले का विरोध करते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी, जिसमें कहा गया था कि इस विवाद से जुड़ा एक मामला पहले से ही हाईकोर्ट में पेंडिंग है. ऐसे में वाराणसी की अदालत को इस तरह का आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं है. यह गलत आदेश है और इसे रद्द कर देना चाहिए। लम्बी बहस के बाद कोर्ट ने 31अगस्त को फैसला सुरक्षित कर लिया था.  जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच दोपहर के वक्त अपना फैसला सुना सकती है. अदालत के फैसले से यह तय होगा कि वाराणसी सीनियर डिवीजन सिविल जज का आदेश सही है या नहीं।

मस्जिद पक्ष ने दी ये दलील
मस्जिद पक्षकार के अधिवक्ता एसएफए नकवी का कहना है की वाराणसी न्यायालय सिविल जज द्वारा 8 अप्रैल को पारित आदेश 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का खुले तौर पर उल्लंघन है. 1991 के पूजा स्थल अधिनियम के तहत उन्होने मंदिर पक्ष की याचिका को औचित्यहीन बताते हुए वाराणसी सिविल जज के 8 अप्रैल को पारित आदेश पर रोक लगाने की मांग की है. याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 के तहत 15 अगस्त 1947 के पहले के किसी भी धार्मिक प्लेस में कोई भी तब्दीली या फेरबदल नहीं किया जा सकता.

मंदिर पक्ष की ये है दलील
मंदिर पक्षकारों का कहना है कि 1664 में मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था जिसकी वास्तविकता जानने के लिए मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण कराना जरूरी है. मंदिर पक्ष का दावा है की मस्जिद परिसर की खुदाई के बाद मंदिर के अवशेषों पर तामीर मस्जिद के सबूत अवश्य मिलेंगें. इस लिए एएसआई सर्वेक्षण किया जाना बेहद जरूरी है. मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण से यह साफ हो सकेगा की मस्जिद जिस जगह तामीर हुई है वह जमीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई है या नहीं.

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