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डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने मायावती- अखिलेश पर किया पटलवार, बोले- ATS के ऑपरेशन को चुनावी चश्मे से न देखें

डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने मायावती- अखिलेश पर किया पटलवार (File photo)

डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने मायावती- अखिलेश पर किया पटलवार (File photo)

योगी सरकार (Yogi Government) की नई जनसंख्या नीति (Population Policy) को लेकर डिप्टी सीएम ने कहा है कि जनसंख्या विस्फोट एक गंभीर समस्या है. उन्होंने विपक्ष के विरोध को गलत बताया है.

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प्रयागराज. संगमनगरी प्रयागराज (Prayagraj) पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य(Keshav Prasad Maurya) ने लखनऊ में एटीएस (ATS) द्वारा अलकायदा के दो आतंकियों की गिरफ्तारी को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती के ट्वीट पर पलटवार किया है. डिप्टी सीएम ने कहा है कि आतंकवाद और देश की सुरक्षा के मामले में मायावती और अखिलेश यादव को तुष्टिकरण की राजनीति नहीं करनी चाहिए. डिप्टी सीएम ने कहा है कि मायावती और अखिलेश यादव इसे चुनावी चश्मे से कतई न देखें. उन्होंने कहा है कि सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई कर रही है. इस कार्रवाई को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए.

गौरतलब है कि मायावती ने ट्वीट कर अलकायदा के आतंकियों के पकड़े जाने को गंभीर मामला बताया था. उन्होंने आशंका जाहिर की थी कि चुनाव से पहले यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित हो सकती है. यह भी कहा था कि अगर आतंकियों के पकड़े जाने का मामला सही है तो यह गंभीर विषय है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सोमवार को प्रयागराज के नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ वीके सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे. उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्यों को उनके सफल कार्यकाल को लेकर बधाई दी.

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वहीं योगी सरकार की नई जनसंख्या नीति को लेकर डिप्टी सीएम ने कहा है कि जनसंख्या विस्फोट एक गंभीर समस्या है. उन्होंने विपक्ष के विरोध को गलत बताया है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कोशिश शुरू कर दी है. उन्होंने नई जनसंख्या नीति को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए कहा है कि विपक्षी को इसे चुनाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. डिप्टी सीएम ने कहा है कि प्रदेश में भाजपा की चुनी हुई सरकार है और उसके कार्यकाल के आखिरी दिन तक उन्हें फैसले लेने का भी पूरा अधिकार है.

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Mahant Death Case: मौत से पहले महंत नरेंद्र गिरि के फोन पर आए थे 35 कॉल, जांच के घेरे में हरिद्वार के 2 बिल्डर

Prayagraj: एसआईटी इन लोगों से जल्द करेगी पूछताछ

Mahant Narendra Giri Suicide: एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri Death Case) की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई के पास पहुंच चुकी है. इस मामले में शुक्रवार को एक नई जानकारी भी सामने आई है. सोमवार यानि जिस दिन महंत नरेंद्र गिरि की मौत हुई तब उनके फोन पर कुल 35 कॉल आई थी. इसमें से 18 पर उन्होंने बातचीत की थी. बातचीत करने वालों में हरिद्वार के कुछ लोग और 2 बिल्डर भी शामिल थे. फोन कॉल के बाद जांच एजेंसी हरिद्वार कनेक्शन की जांच करने में जुटी है. एसआईटी नरेंद्र गिरि के मोबाइल की सीडीआर निकालकर इन लोगों से भी पूछताछ करेगी. हरिद्वार से कॉल करने वालों का डिटेल खंगालने के लिए हरिद्वार पुलिस को भी जानकारी भेजी गई है.

सूत्रों के मुताबिक 13 सितंबर से पहले ही नरेंद्र गिरी को आपत्तिजनक वीडियो की जानकारी मिल गई थी. जिसके चलते मंहत नरेंद्र गिरि परेशान चल रहे थे. उधर, एसआईटी ने नरेंद्र गिरी की सुरक्षा में तैनात सिपाहियों की भी जांच शुरू कर दी है. 20 सितंबर को सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों की लोकेशन जांच टीम ने मंगी है. बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी जल्द एसआईटी सीबीआई के साथ साझा करेंगी.

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एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है. अभिषेक मिश्रा के घर और उसकी तस्वीरें न्‍यूज 18 के पास है जो यह बताती है कि वह कितना बड़ा आदमी बन चुका है. अब एसआईटी अभ‍िषेक के बारे में यह जानकारी जुटाने पर लगी है. महंत नरेंद्र गिरि के मामले में दो अन्य आरोपियों आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया और बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया. अदालत ने इन दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

महंत का गनर और हनुमान मंद‍िर का पंड‍ित कैसे कुछ सालों में बन गए करोड़पत‍ि? नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उठे कई सवाल


अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है.

Mahant Narendra Giri Suicide Case: महंत के मौत के पर्दे के पीछे की कहानी क्या है? इसकी जांच में लगी एसआईटी की टीम अब ऐसे कई लोगों की संपत्‍त‍ि खंगाल रही है.

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है. पर इस मामले में अब की जांच में सबसे बड़ी बात यह सामने आई है क‍ि कैसे महंत के साथ रहने वाला एक गनर अभिषेक मिश्रा और हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी ज‍िनकी सैलेरी महज 10 हज़ार रुपये प्रति माह थी. बीते कुछ सालों में करोड़पत‍ि बन गए. महंत के मौत के पर्दे के पीछे की कहानी क्या है? इसकी जांच में लगी एसआईटी की टीम अब ऐसे कई लोगों की संपत्‍त‍ि खंगाल रही है. एसआईटी इन तीनों के अलावा आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी के संदीप तिवारी और महंत नरेंद्र गिरी के सुरक्षाकर्म‍ियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है.

महज 10 हज़ार रुपये की सैलरी वाला पंड‍ित कैसे बना करोड़पत‍ि?
महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामले में एसआईटी की टीम आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी के आमदनी और प्रॉपर्टी के कागजात पुलिस खनगल रही है. किसके नाम कितनी प्रॉपर्टी है और आमदनी क्या है? बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी का सैलेरी महज 10 हज़ार रुपये प्रति माह है लेकिन उन्होंने नैनी शिव नगर में 3 बिस्सा की जमीन पर आलीशान मकान बनाया है. साथ में अपने पुस्तैनी मकान को भी बनवाया है. नैनी की आलीशान मकान की कीमत करोड़ों की है. आद्या प्रसाद तिवारी अपने पूरी परिवार के साथ नैनी के इस मकान में रहते थे. महंत नरेंद्र गिरी ने कथित सुसाइड नोट में आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे का भी नाम लिखा है. बताया जा रहा है कि बड़े हनुमान मंदिर के चढ़ावा को लेकर नाराज थे. महंत नरेंद्र गिरी, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी ने महंत नरेंद्र गिरी को हिसाब भी दिया था, जिसके बाद बड़े हनुमान मंदिर में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया. एसआईटी की टीम आद्या प्रसाद तिवारी के नैनी के इस मकान भी आई थी. पुलिस ने पूरे घर की तलाशी ली है.

आद्या प्रसाद तिवारी के बहू ममता तिवारी ने बताया है क‍ि उनके ससुर की सैलरी 10 हज़ार रुपये प्रति माह थी. यहां मकान बनवाया, गांव पर पुस्तैनी मकान बनवाया. पुलिस यहां आयी थी और पूरे घर की तलाशी ली ऊपर नीचे हर तरफ की. आद्या प्रसाद तिवारी के एक पडोसी महिला ने बताया क‍ि रात में पुलिस आई थी सिविल ड्रेस में और पूरे घर में तलाशी ली. वो अपने घर से देख रही थी.

महंत के गनर अभ‍िषेक पर एसआईटी की टेढ़ी न‍िगाहें
एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है. अभिषेक मिश्रा के घर और उसकी तस्वीरें न्‍यूज 18 के पास है जो यह बताती है कि वह कितना बड़ा आदमी बन चुका है. अब एसआईटी अभ‍िषेक के बारे में यह जानकारी जुटाने पर लगी है.
1. नरेंद्र गिरी का गनर अभिषेक मिश्रा करोड़पति कैसे बना ?
2. करोड़ों का घर और लग्जरी कार कहां से मिला ?
3. भक्तों के दान का पैसा क्या सेवादार के पास जाता है?
4. माथे पर टीका कलाई पर रक्षा और हाथ में हथियार?
5. जौनपुर का नया बाहुबली बनना चाहता है अभिषेक ?
6. चंद सालों में सड़कों से करोड़पति बनने का सच गाना अभिषेक की अलग कहानी है?
7. जौनपुर के शाहगंज तहसील और खुटहन थाना के विशनपुर गांव के लोगों से दुश्मनी लेता है अभिषेक!
8. अभिषेक के पिता एक पशु आहार का दुकान चलाते हैं बेटा अभिषेक मिश्रा का जलवा इतना है लाखों-करोड़ों नीचे बात नहीं करता है?
9. महंगी गाड़ियों के शौकीन और हथियारों का शौक …
10. 1 साल में 50 से 60 करोड़ की संपत्ति बना ली?
11. अभी कुछ दिनों पहले अभिषेक की शादी हुई, जिसमें नरेंद्र गिरी खुद आशीर्वाद देने पहुंचे.

जौनपुर में अभ‍िषेक की करोड़ों की संपत्‍त‍ि
जौनपुर जनपद के खुटहन थाना क्षेत्र के विशुनपुर गांव निवासी अभिषेक मिश्रा जो महंत नरेंद्र गिरी के गनर और परम भक्त बताए जाते है. अभिषेक के पिता गांव में पशु आहार की छोटी दुकान चलाते हैं, जबकि गांव में बड़ी हवेली बनी हुई है. छोटी दुकान, बड़े मकान के पीछे लेकर सवाल उठ रहे हैं. न्यूज़ 18 की टीम जब जौनपुर के खुटहन थाना क्षेत्र के बिसुनपुर गांव स्थित अभिषेक मिश्रा के आलीशान हवेली पर पहुंची हवेली की बड़ी सी गेट बंद मिला. हमें बताया गया कि अंदर कोई नहीं है परिवार के सभी लोग इन दोनों इलाहाबाद में है जब से महंत जी की मौत हुई है. हमारे कैमरे पर ग्रामीणों ने बताया कि महंत नरेंद्र गिरि पिछले 6 माह पहले इस हवेली पर आए थे अभिषेक मिश्रा के शादी समारोह कार्यक्रम में, ग्रामीणों की मानें तो चर्चा यहां तक है कि महंत जी ने ही यह हवेली बनवा कर अपने परम शिष्य अभिषेक मिश्रा को दिए हैं. फिलहाल परिवार के सभी लोग इलाहाबाद में है इलाहाबाद के आवास पर आवास पर है. अभिषेक मिश्रा के पिता सत्य प्रकाश मिश्रा जो गांव में ही छोटी सी दुकान पशु आहार की चलाते हैं.
जेल में क्‍या कर रहे हैं आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में आत्म हत्या के लिए उकसाने के आरोपियों को नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया है. नैनी सेंट्रल जेल में बंद आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को मामले की संवेदनशीलता के चलते अलग-अलग सुरक्षा सेल में रखा गया है. उन्हें सामान्य बंदियों से भी अलग रखा गया है. इनके लिए जो भी संवेदनशील बंदियों के लिए सुरक्षा इंतजाम होते हैं उसका प्रबंध किया गया है. इनके लिए जेल मुख्यालय, शासन के आदेशों और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन किया जा रहा है. नैनी सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक पी एन पांडेय के मुताबिक, जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अलर्ट कर दिया गया है. आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी दोनों संवेदनशील बंदी है. इसलिए इनसे मुलाकात, इनके जेल के अंदर मूवमेंट और खान पान पर नियमानुसार नजर रखी जा रही है.

वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक, आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी ने जेल में अब तक कोई डिमांड नहीं की है. उन्हें अंडर ट्रायल कैदियों के जो भी अधिकार हैं मिल रहे हैं. जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों की जो ड्यूटी है उसका भी जेल प्रशासन पालन कर रहा है. इसके साथ ही तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गुरुवार 23 सितंबर को कोर्ट ने नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया है. वहीं हम आपको बता दें कि आनंद गिरि ने सीजेएम कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से अर्जी दाखिल कर विशेष सुरक्षा दिए जाने की मांग की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने जेल मैनुअल और अन्य विधिक प्रावधानों के तहत का कार्रवाई का निर्देश दिया है. इसके साथ-साथ कोर्ट ने अगले आदेश तक वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी का भी आदेश दिया है. इस आदेश के तहत पांच अक्टूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी होगी. गौरतलब है कि कोर्ट में पेशी के दौरान आनन्द गिरि के साथ धक्का मुक्की हुई थी और मारपीट व दुर्व्यवहार भी किया गया था, जिसके चलते आनन्द गिरि ने पेशी के दौरान हमले की आशंका के चलते सुरक्षा की मांग की थी.

Mahant Narendra Giri Death Case: आनंद गिरि को नैनी जेल के हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया, जानें वजह

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को नैनी जेल के हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया (File photo)

Prayagraj News: वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक, आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी ने जेल में अब तक कोई डिमांड नहीं की है. उन्हें अंडर ट्रायल कैदियों के तहत सुविधाएं दी जा है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपियों को नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया है. नैनी सेंट्रल जेल में बंद आनंद गिरि (Anand Giri) और आद्या प्रसाद तिवारी (Aadya Prasad Tiwari) को मामले की संवेदनशीलता के चलते अलग-अलग सुरक्षा सेल में रखा गया है. उन्हें सामान्य बंदियों से भी अलग रखा गया है. इनके लिए जो भी संवेदनशील बंदियों के लिए सुरक्षा इंतजाम होते हैं उसका प्रबंध किया गया है. इनके लिए जेल मुख्यालय, शासन के आदेशों और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन किया जा रहा है.

नैनी सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय के मुताबिक जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अलर्ट कर दिया गया है. आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी दोनों संवेदनशील बंदी है. इसलिए इनसे मुलाकात, इनके जेल के अंदर मूवमेंट और खान पान पर नियमानुसार नजर रखी जा रही है. वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक, आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी ने जेल में अब तक कोई डिमांड नहीं की है. उन्हें अंडर ट्रायल कैदियों के तहत सुविधाएं दी जा है. जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों की जो ड्यूटी है उसका भी जेल प्रशासन पालन कर रहा है. इसके साथ ही तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गुरुवार 23 सितंबर को कोर्ट ने नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया है.

यह भी पढ़ें- महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला बाबा स्वीट शॉप अलवर का थैला, जानिए क्या है मिठाई कनेक्शन!

बता दें कि आनंद गिरि ने सीजेएम कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से अर्जी दाखिल कर विशेष सुरक्षा दिए जाने की मांग की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने जेल मैनुअल और अन्य विधिक प्रावधानों के तहत का कार्रवाई का निर्देश दिया है. इसके साथ-साथ कोर्ट ने अगले आदेश तक वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी का भी आदेश दिया है. इस आदेश के तहत पांच अक्टूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी होगी. गौरतलब है कि कोर्ट में पेशी के दौरान आनंद गिरि के साथ धक्का मुक्की हुई थी और मारपीट व दुर्व्यवहार भी किया गया था. जिसके चलते आनंद गिरि ने पेशी के दौरान हमले की आशंका के चलते सुरक्षा की मांग की थी.

UP News: प्रयागराज में डबल मर्डर से मचा हड़कंप, घर में सो रही मां-बेटी का बेरहमी से कत्ल

UP News: प्रयागराज में डबल मर्डर से मचा हड़कंप

Double Murder in Prayagraj: घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस के कई आला अफसर फिंगर प्रिंट-फारेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड के साथ मौके पर पहुंचे. हालांकि अभी तक कातिलों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका है.

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प्रयागराज. संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह डबल मर्डर (Double Murder) से आस-पास के इलाकों में सनसनी फैल गई. मां और बेटी की अज्ञात बदमाशों ने निर्मम हत्या कर दी. मां और बेटी के सिर और गले में गम्भीर चोट के निशान हैं. जानकारी के मुताबिक घर का सामान भी बिखरा हुआ मिला. पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला लूट और हत्या का लग रहा है. प्रयागराज में डबल मर्डर की घटना से इलाके में हड़ंकप मचा हुआ है. वहीं एक वर्ष के मासूम को हत्‍यारों ने सही सलामत छोड़ दिया.

हत्‍याकांड की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है. हालांकि अभी तक हत्‍यारों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका है. पुलिस की माने तो दोनों के सिर और गले पर धारदार हथियार से हमला किया गया है. बता दें कि जगदीशपुर मसनी गांव नवाबगंज थाना क्षेत्र में आता है. गांव के गोडवा बस्‍ती में गुरुवार की रात धारदार हथियार से गला काटकर दोनों की हत्या की गई. मृतक 37 वर्षीय अंजली सरोज व उसकी 8 वर्षीय पुत्री संजीवनी सरोज के गले और सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं.

जानकारी के मुताबिक मां-बेटी गुरुवार की रात में घर के बरामदे में सो रही थीं, तभी बदमाशों ने हमला कर दिया. दोहरे हत्याकांड की इस सनसनीखेज वारदात को किसने और क्यों अंजाम दिया है, फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है. सुबह घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस के कई आला अफसर फिंगर प्रिंट-फारेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड के साथ मौके पर पहुंचे. हालांकि अभी तक कातिलों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका है.

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं परीक्षा 2022 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है.

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है. साथ ही 9वीं व 11वीं में रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि भी आगे बढ़ाई गई है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 10:34 IST
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नई दिल्ली (UP Board Exam 2022).  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उत्तर प्रदेश में साल 2022 बोर्ड परीक्षा 10वीं और 12वीं के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को 10 दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है. अब 10वीं और 12वीं बोर्र परीक्षा के लिए विद्यार्थी 16 अक्टूबर 2021 तक परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं. वहीं कक्षा 9वीं और 11वीं में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर 2021 तक बढ़ा दी गई है.इस संबंध में बोर्ड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर नोटिफिकेशन भी जारी किया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना के कारण फीस नहीं जमा हो पाने के कारण एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की थी. छात्र लेट फीस 100 रुपए के साथ 19 अक्टूबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं.

बता दें कि पहले 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा 2022 के लिए फॉर्म भरने और कक्षा 9वीं व 11वीं में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर 2021निर्धारित की गई थी.

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बोर्ड सचिव  के अनुसार परीक्षा शुल्क को कोषागार में चालान के माध्यम से जमा करने की अंतिम तिथि को 22 सितंबर से बढ़ाकर 6 अक्टूबर 2021 कर दिया गया है. विलंब शुल्क के साथ फीस 13 अक्टूबर तक कोषागार में जमा होगी.

यहां देखें नोटिफिकेशन

महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला बाबा स्वीट शॉप अलवर का थैला, जानिए क्या है मिठाई कनेक्शन!

Prayagraj: महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला बाबा स्वीट शॉप अलवर का थैला

Mahant Narendra Giri News: सूत्रों के मुताबिक ऐसा लग रहा है मंहत से जल्द ही कोई शख्स अलवर से मिलने आया था. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के निवासी हैं.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के संदिग्ध मौत के बाद नए-नए खुलासे सामने आ रहे है. इसी कड़ी में शुक्रवार को पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से बाबा स्वीट शॉप अलवर का एक थैला बरामद किया है. बता दें कि राजस्थान के अलवर शहर का कलाकंद पूरे देश में मिठाई के लिए मशहूर है. जांच एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर अलवर का कौन शख्स मंहत नरेंद्र गिरि से मिलने आया था. क्या महंत नरेंद्र गिरि को पसंद थी कलाकंद की मिठाई. सूत्रों के मुताबिक ऐसा लग रहा है मंहत से जल्द ही कोई शख्स अलवर से मिलने आया था. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के निवासी हैं.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में आरोपी आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. महंत नरेंद्र गिरि के अन्य शिष्य की शिकायत पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ. हालांकि आनंद गिरि ने गिरफ्तारी से पहले ही अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है. अदालत ने इस मामले में दो अन्य आरोपियों-आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था.

कौन हैं आनंद गिरी
आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के निवासी हैं. उनका असली नाम अशोक है और उनके पिता का नाम रामेश्वर लाल चोटिया है. वो अपने चार भाइयों में सबसे छोटे हैं. दरअसल साल 1997 में आनंद 12 साल की उम्र में अपना घर छोड़कर हरिद्वार चले गए थे. हरिद्वार में उन्हें नरेंद्र गिरी मिले. मुलाकात होने पर नरेंद्र गिरि ने आनंद से पूछा कि तुम क्या चाहते हो? तो जवाब में आनंद ने कहा था कि वो पढ़ना चाहता है. इसलिए नरेंद्र गिरी ने आनंद को पढ़ाई करवाई और दीक्षा भी दी.

जाने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का अब क्यों नहीं होता प्रशासनिक सेवाओं में दबदबा

पूरब का ऑक्सफोर्ड इलाहाबाद यूनिवर्सिटी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 134 साल का इतिहास रहा है, इस दौरान विश्वविद्यालय से कई आईएएस और पीसीएस अफसर निकले जिन्होंने देश के लिए बहुत योगदान दिया है

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प्रयागराज का नाम आते ही यहां स्थित केंद्रीय इलाहाबाद विश्वविद्यालय का ख्याल भी अपने आप आ ही जाता है. यह दशको से प्रयागराज के गौरव का एक प्रमुख कारण है. प्रयागराज की शिक्षा का प्रमुख केंद्र होने के कारण यहां लोग दूर-दूर से अपना भविष्य संवारने आते हैं. अपने लगभग 133 साल के सफर में विश्वविद्यालय ने कई उपलब्धियां अपने नाम की. इसने देश की ऐसी कई शख्सियतों को संवारा जिन्होंने आगे चलकर देश की विकास यात्रा में अपना अहम योगदान दिया. फिर चाहे वह राजनीति का क्षेत्र हो, साहित्य का हो, न्याय व्यवस्था हो या फिर प्रशासनिक सेवा हो. अपने अनगिनत कीर्तिमान के चलते \’पूरब का ऑक्सफोर्ड\’ कहा जाता था.

लेकिन आज तस्वीर बदल गई है, उपलब्धियों पर धूल जमने लगी है. विश्वविद्यालय के भूतकाल और वर्तमान की स्थितियों पर विचार करें तो बहुत कुछ बदल गया है. इसी में से एक है यहां के छात्रों का प्रशासनिक सेवाओं में तुलनात्मक रूप से कम चयनित होना. जी हां.. एक समय था, जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रशासनिक सेवाओं में दबदबा हुआ करता था. परिणाम आने पर पता चलता था कि यहां के छात्रों का अधिक संख्या में चयन हुआ है. जिसके चलते इलाहाबाद विश्वविद्यालय को \’आईएएस-पीसीएस का गढ़\’ या फैक्ट्री कहा जाता था. यहां ऐसा माहौल हुआ करता था कि आधे से अधिक छात्र आईएएस पीसीएस बनने का सपना लेकर यहां आया करते थे, तंग-तंग गलियों के छोटे-छोटे से कमरे में रहकर, यहां शिक्षा लेकर सफल भी होते थे.ऐसे अनेकों उदाहरण है. अगर ज्यादा दूर ना जाए तो नृपेंद्र मिश्र (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव), ए.मी.सक्सेना (योजना आयोग के पूर्व सदस्य), विकास स्वरूप (प्रवक्ता विदेश मंत्रालय) जैसे कई नाम है.

पर अफसोस धीरे-धीरे हालात बदलने लगे और छात्र कम चयनित होने लगे, जिसके कई कारण हैं. यह क्रम 2011 से शुरू हुआ, जब केवल 7 छात्रों का चयन हुआ और धीरे-धीरे संख्या घटने ही लगी. ऐसा नहीं है कि अब यहां के छात्र-छात्राओं की आंखों में सपने नहीं है, या संकल्प नहीं है.. बस आज कुछ कसर छात्र-छात्राओं की तरफ से रह जाती है तो कुुुछ उदासीनता विश्वविद्यालय भी दिखाता है. अब छात्र-छात्राएं दिल्ली की तरफ रुख करते हैं. आपको बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय 2021 में लगातार तीसरी बार भी 200 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर है. जो यहां की शिक्षा व्यवस्था, माहौल,शोध आदि पर प्रश्नचिन्ह लगाता है.

गिरती साख का यह है प्रमुख कारण
विश्वविद्यालय अभी भी छात्रों की पसंद है लेकिन वक्त के साथ उसने कई स्तर पर खुद को अपडेट नहीं किया है. अब यहां के छात्रों का प्रशासनिक सेवा में अधिक संख्या में चयनित ना होने के कई कारण हैं.
पहला तो, सीसैट (CSAT) लागू होने के बाद से सिविल सेवा परीक्षा का कोर्स पूरी तरह से बदल गया है लेकिन विश्वविद्यालय में स्नातक का पाठ्यक्रम अभी भी पुराना है. पढ़ाई का माध्यम हिंदी होने के कारण भी परीक्षा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है.
इसके साथ ही विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में पहले शिक्षा का माहौल हुआ करता था लेकिन अब उद्दंडता और राजनीति ज्यादा देखने को मिलती है. विश्वविद्यालय मौजूदा समय शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है जिससे छात्र छात्राओं को सटीक मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है.

Mahant Death: क्या 'हनी ट्रैप' के शिकार हुए थे महंत नरेंद्र गिरि, SIT ने बरामद किया वीडियो

Mahant Death: क्या 'हनी ट्रैप' के शिकार हुए थे महंत नरेंद्र गिरि (File photo)

Mahant Narendra Giri Suicide Case: आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है, तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत मामले की जांच जल्द ही सीबीआई अपने हाथ में ले लेगी. इसी कड़ी में महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के पीछे हनी ट्रैप तो वजह नहीं है. सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान एसआईटी ने आनंद गिरि के ग्रुप से वीडियो बरामद किया है. इसी वीडियो को दिखाकर नरेंद्र गिरि को ब्लैक मेल किया जा रहा था. महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में भी इसका जिक्र किया है. पुलिस की जांच के मुताबिक मामला आत्महत्या का है, जबकि महंत के चाहने वालों के मुताबिक मामला साजिशन मौत का है, लेकिन सुसाइड लेटर के मुताबिक मामला एक महिला से जुड़ा दिखता है.

पुलिस के पास मौजूद सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है क‍ि “आनंद गिरि के कारण आज मैं विचलित हो गया. हरिद्वार से सूचना मिली कि आनंद कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरा फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए फोटो वायरल करने वाला है. वह मुझे बदनाम करने जा रहा है. मैंने सोचा कि एक बार बदनाम हो गया तो कहां-कहां सफाई दूंगा. बदनाम हो गया तो जिस पद पर हूं उसकी गरिमा चली जाएगी. इससे अच्छा तो मर जाना ठीक है. मेरे मरने के बाद सच्चाई तो सामने आ ही जाएगी. आगे नरेंद्र गिरि ने लिखा कि मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज मैं कैसे रहूंगा, इससे अच्छा मर जाना ठीक रहेगा.

“13 सितंबर को ही करने वाला था आत्महत्या”
महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वे 13 सितंबर को ही आत्महत्या करने वाले थे. लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया. आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है, तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है. तीनों आरोपियों के नाम के साथ लिखा है कि मैं पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से प्रार्थना करता हूं कि इन तीनों के साथ कानूनी कार्रवाई की जाए, जिससे मेरी आत्मा को शांति मिल सके.

महंत नरेंद्र ग‍िरी बेड पर स्टूल रखकर कैसे चढ़े, क्‍यों कमरे के बाहर का CCTV था खराब? CBI तलाश रही है इन 12 सवालों के जवाब

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है

Narendra Giri suicide Case: महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. जांच एजेंसी के सामने इस केस की जांच शुरू करने से पहले सीसीटीवी खराब, सुसाइड नोट और सूचना और एफआईआर में अंतर समेत इन 12 सवालों के जवाब तलाश रही है जो अभी तक की पुल‍िस जांच में अनसुलझे या अधूरे हैं.

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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की उत्तर प्रदेश सरकार की अनुशंसा को केन्‍द्र सरकार ने गुरुवार को स्‍वीकार कर ल‍िया है. अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी, पर जांच एजेंसी के सामने इस केस की जांच शुरू करने से पहले सीसीटीवी खराब, सुसाइड नोट और सूचना और एफआईआर में अंतर समेत इन 12 सवालों के जवाब तलाश रही है जो अभी तक की पुल‍िस जांच में अनसुलझे या अधूरे हैं. गौरतलब हैं कि महंत नरेंद्र गिरि सोमवार को अपने मठ के एक कमरे में मृत पाये गए थे. पुलिस के मुताबिक, गिरि ने कथित तौर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

सीबीआई ने जो जानकारी के तौर सवाल यूपी पुलिस से पूछे—-

पहला सवाल-
सूचना और एफआईआर में अंतर क्यों? अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत के बाद आधिकारिक सूचना दी गई कि दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे शिष्यों ने फांसी का फंदा काट कर शव नीचे उतारा, जबकि उनके शिष्य अमर गिरि ने एफआईआर दर्ज कराई है कि धक्का देकर दरवाजा खोला गया.

दूसरा सवाल-
भारी शरीर गठिया का रोग, फिर महंत नरेंद्र गिरि कैसे चढ़े? उनके लिए यह आसान नहीं था कि बेड पर स्टूल रखकर चढ़ जाएं. बिना किसी की मदद के उन्होंने पंखे से फांसी का फंदा लगाया. कैसे, अकेले ही सब कुछ किया और फांसी के फंदे पर झूलकर जान दे दी?

तीसरा सवाल-
पुलिस के आने से पहले शव क्यों उतारा गया? सबसे अहम सवाल यह है कि कमरे के अंदर संदिग्ध परिस्थिति में नरेंद्र गिरि की मौत हो गई. ऐसे में बिना पुलिस को बताए उनके शव को नीचे क्यों उतारा गया? फोन से संपर्क न होने पर उनके शिष्य परेशान थे. ऐसे में पुलिस के पहुंचने का इंतजार क्यों नहीं किया गया?

चौथा सवाल-
सुसाइड नोट को वसीयत की तरह क्यों लिखा गया? सुसाइड नोट को टुकड़ों में लिखा गया है.एक तरफ नरेंद्र गिरि ने अपनी मौत के लिए आनंद गिरि, मंदिर के पूर्व पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे को मौत के लिए जिम्मेदार बताया है. वहीं दूसरी ओर मठ की संपत्ति के लिए वसीयतनामा लिखा है. उनका नाम कई बार इस्तेमाल किया गया है.

पांचवां सवाल-
आत्महत्या उस कमरे में क्यों, जहां महंत कम रहते थे? नरेंद्र गिरि अपने विश्राम कक्ष में आराम करते थे. अतिथि गृह में वह तभी जाते थे जब कोई व्यक्ति बाहर से मिलने आता था. ऐसे में यह अहम सवाल है कि उन्होंने अपने एकांत कमरे को छोड़ कर बाहर बने अतिथि गृह में फांसी क्यों लगाई?

छठा सवाल-
कमरे के पास का सीसीटीवी कैमरा खराब क्यों? मठ बाघंबरी गद्दी परिसर की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाती है. नरेंद्र गिरि के एक करीबी ने आरोप लगाया कि उनके कमरे के पास लगा सीसीटीवी खराब क्यों था? क्या इसे साजिश के तहत खराब किया गया.

सातवां सवाल-
पहले भी कई आरोप लगे फिर इस आरोप पर ऐसा कदम क्यों? नरेंद्र गिरि पर कई बार संगीन आरोप लगे. प्रॉपर्टी के विवाद में पूर्व विधायक ने आरोप लगाया. नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि ने दो शिष्यों की हत्या का आरोप लगाया. इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि एक फर्जी आरोप में उन्होंने अपनी जान दे दी?

आठवां सवाल-
लिखने में हिचकते थे तो इतना बड़ा नोट कैसे लिखा? नरेंद्र गिरि से जुड़े संतों ने आरोप लगाया है कि वह अपना हस्ताक्षर करने में भी दस मिनट का समय लगाते थे. कोई भी काम होता था तो शिष्य ही लिखते थे. आखिर में वह हस्ताक्षर कर देते थे. ऐसे में सवाल उठना स्वभाविक है कि उन्होंने कब और कहां बैठकर 12 पेज लिख डाले?

नौवां सवाल-
कौन कह रहा था कि वीडियो वायरल होगा, उसका जिक्र क्यों नहीं? नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में लिखा है कि हरिद्वार के एक व्यक्ति ने बताया कि आनंद गिरि उनकी फोटो एक महिला के साथ गलत काम करते हुए बनाकर वायरल करने जा रहा है. सवाल यह है कि उस व्यक्ति का नाम सामने क्यों नहीं आया?

दसवां सवाल-
सुसाइड नोट से इतर एफआईआर क्यों कराई गई? नरेंद्र गिरि की मौत के बाद ही सुसाइड नोट मिल गया. सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस अफसरों ने अपना बयान जारी किया. इसके बाद आधी रात को सुसाइड नोट से इतर जार्जटाउन थाने में सिर्फ आनंद गिरि के खिलाफ ही क्यों मुकदमा दर्ज कराया गया?

11वां सवाल
नरेंद्र गिरी की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी घटना के वक्त कहां थे. सभी के फोन के डिटेल्स और किसकी क्या लोकेशन थी? इसका भी जवाब लिया.

12वां सवाल
सीबीआई ने पूछा पिछले एक हफ्ते में कौन-कौन पुलिसकर्मी उनके साथ थे. किन-किन लोगों ने उनसे मुलाकात की मुलाकात के दौरान जो पुलिसकर्मी मौजूद थे क्या बातें हुई? इसके सवाल पूछे

सहायक अध्यापक भर्ती 2018: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, एक प्रश्न का विकल्प गलत

सहायक शिक्षक भर्ती 2018 को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला (File photo)

Assistant Teacher Recruitment 2018: हाईकोर्ट ने कहा है कि जो लोग पहले से चयनित हो चुके हैं और नियुक्ति पा चुके हैं उन पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. चयन व नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा 2018 (Assistant Teacher Recruitment 2018) में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर को गलत मानते हुए उसका एक अंक उन अभ्यर्थियों को देने का निर्देश दिया है. जिन्होंने हाईकोर्ट में अपील या याचिका दाखिल की है और जिनके एक ही अंक कम पड़ रहे हैं. याचिका में छह सवालों के उत्तर को लेकर चुनौती दी गई थी. इनका कहना है कि भर्ती प्राधिकारी ने जिन उत्तरों को सही माना है वह सही नहीं है. कोर्ट ने इनमें से सिर्फ एक प्रश्न संख्या 60 को लेकर की गई आपत्ति को ही सही माना. कोर्ट ने कहा है कि यदि एक अंक पाने के बाद अभ्यर्थी मेरिट में आ जाता है तो उसे नियुक्ति दी जाए.

अभिषेक श्रीवास्तव व दर्जनों अन्य की दाखिल विशेष अपीलों पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमए भंडारी और न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा की खंडपीठ ने आदेश दिया. एकल पीठ ने अभ्यर्थियों का दावा खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रणविजय सिंह केस में प्र‌तिप‌ादित विधि सिद्धांत के आलोक में मामले का परीक्षण किया. केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं के पुर्नपरीक्षण अथवा स्क्रूटनी मामले में अदालतों के अधिकार सीमित हैं. यदि भर्ती के नियमों में यह प्रविधान हैं तो यह अधिकार अभ्यर्थियों को देना चाहिए. यदि प्रविधान नहीं है तो अदालत पुर्नपरीक्षण अथवा स्क्रूटनी का आदेश दे सकती है. सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा है कि संदेह होने की दशा में संदेह का लाभ परीक्षा प्राधिकारी को मिलेगा न कि अभ्यर्थी को.

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अदालत ने सभी छह प्रश्नों का बारी बारी से परीक्षण किया. पांच प्रश्नों में अभ्यर्थी दावे को साबित नहीं कर सके. जबकि प्रश्न संख्या में 60 में विकल्प के रूप में दिए गए लेखक का नाम गलत होने के कारण कोर्ट ने इस प्रश्न का एक अंक समिति अभ्यर्थियों को देने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि जो लोग पहले से चयनित हो चुके हैं और नियुक्ति पा चुके हैं उन पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. चयन व नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए ज्यादा संख्या में अथवा सभी अभ्यर्थियों को अंक देने से पूरी प्रक्रिया अस्त व्यस्त हो जाएगी. लिहाजा लाभ सिर्फ उनको मिलेगा जिन्होंने याचिका दाखिल की है और जिनके एक अंक ही कम पड़ रहे हैं. यदि किसी के दो अंक कम हो रहे हैं तो उसको इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा.

Mahant Narendra Suicide: तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, तीनों आरोपियों को भेजा नैनी जेल

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया था और गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया.

Mahant Narendra Giri Death: संदीप तिवारी के वकील ने कोर्ट में जमानत अर्जी भी पेश की लेकिन कोर्ट ने फिलहाल उस पर कोई भी फैसला नहीं लिया है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्‍ध मौत के मामले में तीसरे आरोपी को भी एसआईटी ने सीजेएम कोर्ट में गुरुवार को पेश कर दिया. संदीप की बुधवार को ही गिरफ्तारी की गई थी. कोर्ट ने संदीप को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. गौरतलब है कि नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में आरोपी आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी तीनों को ही नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया है. महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में तीनों पर मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद यूपी पुलिस ने आनंद तिवारी को हरिद्वार से और आद्या व संदीप तिवारी को प्रयागराज से गिरफ्तार किया था.
वहीं गुरुवार को संदीप तिवारी की सीजेएम कोर्ट में पेशी के दौरान उसके वकील ने जमानत याचिका भी दाखिल की थी लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोपी के जमानत प्रार्थना पत्र में पर्याप्त आधार नहीं है, मामला सत्र न्यायालय की ओर से परीक्षण अपराध है. संदीप के वकील का तर्क था कि उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप आधारहीन और झूठ हैं. आरोप केवल रंजिश के चलते लगा दिए गए हैं ऐसे में उसके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है.

आनंद और आद्या को भी न्यायिक हिरासत
इससे पहले बुधवार को मामले में आरोपी आनंद गिरि और आद्या तिवारी को पहले ही कोर्ट में पेश किया जा चुका है. दोनों को भी कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

वहीं आरोपी आनंद गिरि ने अपने ऊपर खतरा बताते हुए प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है. अपने वकील की तरफ से कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर आनंद गिरि ने कहा है कि उनके ऊपर कल (बुधवार) कोर्ट में हमला हुआ था, जिसको देखते हुए जेल के अंदर और कोर्ट लाते वक्त भी उन पर हमला हो सकता है.

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, इलाहाबाद को दिए प्रार्थना पत्र में आनंद गिरि ने वकील के माध्यम से कहा है कि उन्हें और आद्या प्रसाद तिवारी को 22 सितंबर को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है. जब पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, तब न्यायालय के बाहर कुछ अराजक तत्वों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई और दुर्व्यवहार किया गया. उन्हें आशंका है कि जेल के अंदर और जेल से न्यायालय लाते समय उनके साथ प्राणघातक हमला व दुर्व्यवहार हो सकता है.

Mahant Death Case: आनंद गिरि और आद्या तिवारी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी पेशी: CJM कोर्ट

Mahant Narendra Giri Death: गिरफ्तार स्वामी आनंद गिरि ने न्यायालय से विशेष सुरक्षा की मांग की थी, जिस पर सीजेएम कोर्ट ने आदेश दिया है.

Prayagraj News: आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी की ओर से अर्जी दाखिल कर विशेष सुरक्षा की मांग की गई थी. सीजेएम कोर्ट ने जेल मैनुअल व अन्य विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया है.

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Mahant Narendra Giri Death Case) मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आनंद गिरि (Anand Giri) और आद्या प्रसाद तिवारी (Aadya Prasad Tiwari) ने अपने ऊपर जान का खतरा बताते हुए प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है. मामले में सीजेएम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी होगी. कोर्ट ने अगले आदेश तक वीडियो कान्फ्रेसिंग से पेशी का आदेश दिया है.

दरअसल आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी की ओर से अर्जी दाखिल कर विशेष सुरक्षा की मांग की गई थी. सीजेएम कोर्ट ने जेल मैनुअल व अन्य विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया है. आरोप है कि बुधवार को पेशी के दौरान आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी के साथ धक्का-मुक्की हुई थी. यही नहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि दोनों के साथ मारपीट करने की भी कोशिश हुई थी. सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें बमुश्किल कोर्ट परिसर से सुरक्षित निकाला था.

दरअसल मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, इलाहाबाद को दिए प्रार्थना पत्र में आनंद गिरि ने वकील के माध्यम से कहा है कि उन्हें और आद्या प्रसाद तिवारी को 22 सितंबर को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है. जब पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, तब न्यायालय के बाहर कुछ अराजक तत्वों द़वारा उनके साथ मारपीट की गई और दुर्व्यव्हार किया गया. उन्हें आशंका है कि जेल के अंदर और जेल से न्यायालय लाते समय उनके साथ प्राणघातक हमला व दुर्व्यवहार हो सकता है.

Mahant Death Case: आनंद गिरि ने खुद पर जानलेवा हमले का खतरा बताते हुए मांगी विशेष सुरक्षा

उन्होंने अपील की है कि न्याय के हित में आवश्यक है कि अधीक्षक, केंद्रीय कारागार, नैनी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, इलाहाबाद को आदेश दिया जाए कि वह आवेदक को जेल में विशेष सुरक्षा प्रदान करें और जेल से न्यायालय लाते समय व न्यायालय से जेल ले जाते समय विशेष सुरक्षा प्रदान करें.

बता दें महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में आरोपी आनंद गिरि की न्यायिक हिरासत को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

Narendra Giri Suicide: महंत नरेंद्र गिरी के सुसाइड के बाद का पहला VIDEO, खड़े हो रहे कई सवाल

महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड के ठीक बाद का वीडियो आया सामने

Mahant Narendra Giri Suicide Case: मठ के कर्मचारी सर्वेश द्विवेदी ने बताया है कि उन्होंने ही फांसी का फंदा काटा था. उससे ही तीन चार दिन पहले महंत नरेंद्र गिरि ने नायलान की रस्सी कपड़े सुखाने के लिए मंगाई थी.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड करने के बाद का पहला वीडियो (Video) सामने आया है, इसमें उन्हें फांसी के फंदे से नीचे उतार कर फर्श पर लिटाया गया है. वीडियो में साफ तौर पर नजर आ रहा है कि सबसे पहले आईजी रेंज प्रयागराज केपी सिंह मौके पर पहुंचे हैं और वे महंत की बॉडी को उतारने वाले लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं. लड़के उन्हें वीडियो में बता रहे हैं कि फंदे पर लटका देखकर वे घबरा गए और उन्होंने आनन फानन रस्सी का फंदा काटकर इसलिए नीचे उतारा कि हो सकता है कि उनकी सांसें चल रही हों.

मठ के कर्मचारी सर्वेश द्विवेदी ने बताया है कि उन्होंने ही फांसी का फंदा काटा था. उससे ही तीन चार दिन पहले महंत नरेंद्र गिरि ने नायलान की रस्सी कपड़े सुखाने के लिए मंगाई थी. कमरे में पंखा चलने को लेकर सर्वेश द्विवेदी का कहना है कि भीड़ में किसी का हाथ स्विच पर लगा हो और पंखा चल गया होगा. जानबूझकर किसी ने पंखा नहीं चलाया होगा.

वीडियो से खड़े हो रहे कई गंभीर सवाल

कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर जब सब लोग घबराए हुए थे तो यह वीडियो किसने बनाया? क्या यह वीडियो सही है या फिर इसमें कुछ एडिट किया गया है? पंखा किसने चलाया? पुलिस के आने से पहले शव को क्यों नीचे उतारा गया? ऐसे तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं जिनके जवाब अब सीबीआई को तलाशने होंगे.

इस वीडियो के सामने आने के बाद सबसे पहले चश्मदीद सर्वेश द्विवेदी से भी न्यूज़18 ने बातचीत की. उसने बताया कि भोजन के बाद महाराज जी कमरे में गए थे. पांच बजे ताज जब वो नीचे नहीं आए तो उन्हें फ़ोन किया गया जो बंद बता रहा था. सर्वेश दुबे ने बताया जब उनका फोन बंद आ रहा था तो हमने दरवाजे की कुंडी तोड़कर देखा तो वे पंखे से लटके मिले. सर्वेश ने बताया हमने आनन-फानन चाकू मंगाया और रस्सी को काटकर शेव नीचे उतारा. रस्सी को कितने टुकड़े में कांटा यह याद नहीं है. सर्वेश ने बताया कि हमें लग रहा था कि महाराज जी जिंदा होंगे, लेकिन जब कोई हलचल नहीं हुई तो हम ने पुलिस को फोन किया. 15 से 20 मिनट में पुलिस वहां आ गई फिर उसने पूरी कार्रवाई की.

Mahant Death Case: आनंद गिरि ने खुद पर जानलेवा हमले का खतरा बताते हुए मांगी विशेष सुरक्षा

Mahant Narendra Giri Death: गिरफ्तार स्वामी आनंद गिरि ने न्यायालय से विशेष सुरक्षा की मांग की है.

Prayagraj News: आनंद गिरि ने वकील के माध्यम से कहा है कि पेशी के समय न्यायालय के बाहर कुछ अराजक तत्वों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई और दुर्व्यवहार किया गया. आशंका है कि जेल के अंदर और जेल से न्यायालय लाते समय उनके साथ प्राणघातक हमला व दुर्व्यवहार हो सकता है.

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Mahant Narendra Giri Death ) मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आनंद गिरि (Anand Giri) ने अपने ऊपर खतरा बताते हुए प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है. अपने वकील की तरफ से कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर आनंद गिरि ने कहा है कि उनके ऊपर कल (बुधवार) कोर्ट में हमला हुआ था, जिसको देखते हुए जेल के अंदर और कोर्ट लाते वक्त भी उन पर हमला हो सकता है.

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, इलाहाबाद को दिए प्रार्थना पत्र में आनंद गिरि ने वकील के माध्यम से कहा है कि उन्हें और आद्या प्रसाद तिवारी को 22 सितंबर को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है. जब पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, तब न्यायालय के बाहर कुछ अराजक तत्वों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई और दुर्व्यवहार किया गया. उन्हें आशंका है कि जेल के अंदर और जेल से न्यायालय लाते समय उनके साथ प्राणघातक हमला व दुर्व्यवहार हो सकता है.

न्याय के हित में आवश्यक है कि अधीक्षक, केंद्रीय कारागार, नैनी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, इलाहाबाद को आदेश दिया जाए कि वह आवेदक को जेल में विशेष सुरक्षा प्रदान करें और जेल से न्यायालय लाते समय व न्यायालय से जेल ले जाते समय विशेष सुरक्षा प्रदान करें.

बता दें महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में आरोपी आनंद गिरि की न्यायिक हिरासत को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया. सीजेएम कोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश हुई, जिसे सीजेएम हरेंद्र नाथ ने देखा. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की बात सामने आई है. अपराध की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया. आरोपी आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी का प्रार्थनापत्र

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Prayagraj News: आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी का प्रार्थनापत्र

5 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी. एसआईटी अध्यक्ष सीओ अजीत सिंह चौहान, विवेचक इंस्पेक्टर महेश सिंह समेत टीम कोर्ट में मौजूद रही. विवेचक ने कोर्ट में मृतक के दो मोबाइल, चाकू, नायलान की रस्सी और सुसाइड नोट पेश किया. साक्ष्यों को देखने के बाद सीजेएम के आदेश पर सील कर दिया गया. डीजीसी क्रिमिनल गुलाब चंद्र अग्रहरि ने ये जानकारी दी.

गौरतलब है कि नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किया था. आनंद गिरि उस दौरान अपने आश्रम में था और उत्तराखंड पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था. बाद में यूपी पुलिस की एक टीम ने पहुंच कर उसे गिरफ्तार कर यूपी लाई थी.

Mahant Death: पंच परमेश्वरों की बैठक संपन्न, जानिए उत्तराधिकार पर क्या बोले कैलाशानंद?

Prayagraj News: आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में पंच परमेश्वरों के साथ बैठक की.

Prayagraj News: कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी को जो अच्छा लगा उन्होंने किया. योगी जी हमारी परंपराओं का ध्यान रखते हैं, हमारी मठ परंपराओं का भी ध्यान रखते हैं. मुझे लगता है कि इस जांच से अब दूध और पानी अलग-अलग हो जाना चाहिए.

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Mahant Narendra Giri Death) के बाद संत-समाज में काफी सरगर्मी है. आज निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में पंच परमेश्वरों के साथ बैठक की. बैठक के बाद कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया गया है क्योंकि जांच सीबीआई को सौंप दी गई है.

कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी जी को जो अच्छा लगा उन्होंने किया. योगी जी हमारी परंपराओं का ध्यान रखते हैं, हमारी मठ परंपराओं का भी ध्यान रखते हैं. मुझे लगता है कि इस जांच से अब दूध और पानी अलग-अलग हो जाना चाहिए. महंत नरेंद्र गिरि द्वारा वसीयत लिखे जाने के बारे में उन्होंने कहा है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरि महाराज जी कभी कोई पत्र नहीं लिखते थे. उन्होंने जो पत्र लिखा है, उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, तब बात सामने आएगी. उन्होंने कहा कि हो सकता है महाराज जी ने पत्र लिखा हो लेकिन कभी पत्र नहीं लिखते थे. अब पूरा घटनाक्रम सीबीआई को चला गया है.

महंत नरेंद्र गिरि की वसीयत को लेकर कहा उन्होंने कहा है कि कोई वसीयत सामने नहीं आई है. श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के निरंजनी अखाड़े से स्वतंत्र होने के सवाल पर कहा कि मठ का कोई विवाद नहीं है. आज से लगभग 15 साल पूर्व महंत यहां पर आये थे और मठ को लेकर कोई विवाद नहीं है और आगे भी कोई विवाद नहीं होगा. महंत नरेंद्र गिरि स्वतंत्र गद्दीपति अधिकारी थे. अगर महाराज के सुसाइड नोट सही होगा. महंत नरेंद्र गिरि की लिखावट सही होगी तो गद्दी को लेकर कोई विवाद नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि अगर वसीयत सही है, बलवीर गिरि को ही गद्दी देने की बात लिखी होगी तो उन्हें ही मिलेगी. उन्होंने कहा है कि बलवीर गिरि भी उनके अखाड़े का उनका शिष्य हैं इसलिए कोई अखाड़े का ही व्यक्ति इस गद्दी पर बैठेगा. उन्होंने कहा है कि उत्तराधिकार को लेकर कोई विवाद नहीं है. आगे भी नहीं होगा. सीबीआई जांच हो रही है. जांच के बाद ही उत्तराधिकार परंपराओं को ध्यान में रखकर आगे का कार्य करेंगे.

Allahabad University Recruitment: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कल से नॉन टीचिंग स्टाफ भर्ती प्रक्रिया होगी शुरू

Allahabad University Recruitment: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कल से नॉन टीचिंग स्टाफ भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी.

Allahabad University Recruitment: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नॉन टीचिंग स्टाफ भर्ती प्रक्रिया के लिए विस्तृत विज्ञापन और आवेदन फार्म कल यानी 24 सितंबर से विश्वविद्यालय की अधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे. इच्छुक अभ्यर्थी इन पदों पर भर्ती के लिए 23 अक्तूबर तय आवेदन कर सकते हैं.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 23, 2021, 15:04 IST
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नई दिल्ली. Allahabad University Recruitment: नौकरी की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इलाहाबाद से अच्छी खबर है. दरअसल, इलाहाबाद विश्वविद्यालय कल यानी 24 सितंबर से गैर शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है. इसके लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से संक्षिप्त विज्ञापन जारी कर गैर शैक्षणिक पदों की भर्ती प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई है.

इस बारे में इलाहाबाद विश्वविद्याल के रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ल ने बताया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विज्ञापन जारी करके विभिन्न गैर शैक्षणिक पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं. ऐसे में इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी विश्वद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट में विजिट करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

23 अक्टूबर है आवेदन करने की लास्ट डेट
बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नॉन टीचिंग स्टाफ भर्ती प्रक्रिया के लिए विस्तृत विज्ञापन और आवेदन फार्म कल यानी 24 सितंबर से विश्वविद्यालय की अधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे. इच्छुक अभ्यर्थी इन पदों पर भर्ती के लिए 23 अक्तूबर तय आवेदन कर सकते हैं.

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तो अनपढ़ नहीं थे महंत नरेंद्र गिरि? इस सर्टिफिकेट से पढ़िए कैसे प्रयागराज के कोऑपरेटिव बैंक में की थी नौकरी

महंत नरेंद्र गिरि की हाईस्कूल की ट्रांसफर सर्टिफिकेट आई सामने

Mahant Narendra Giri Suicide Case: ट्रांसफर सर्टिफिकेट में स्पष्ट है कि महंत नरेंद्र गिरि ने 1978 में हाईस्कूल की परीक्षा सेकेंड डिवीज़न में पास की थी. इतना ही नहीं उनके व्यवहार के बारे में भी लिखा है कि वे अच्छा था.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil BHartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के सुसाइड नोट को लेकर न्यूज़ 18 ने बड़ा खुलासा किया है. सोमवार को उनकी संदिग्ध परिस्थिति में मौत के बाद जो सवाल उठ रहे थे कि वे पढ़े लिखे नहीं थे अब उस पर विराम लग गए हैं. महंत नरेंद्र गिरि न सिर्फ हाईस्कूल पास थे बल्कि उन्होंने प्रयागराज के डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक में एक साल तक नौकरी भी की थी. महंत नरेंद्र गिरि का हाईस्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट सामने आया है.

ट्रांसफर सर्टिफिकेट में स्पष्ट है कि महंत नरेंद्र गिरि ने 1978 में हाईस्कूल की परीक्षा सेकेंड डिवीज़न में पास की थी. इतना ही नहीं उनके व्यवहार के बारे में भी लिखा है कि वे अच्छा था. महंत नरेंद्र गिरि के मामा प्रो महेश सिंह ने कहा है कि महंत नरेंद्र गिरी पढ़े लिखे थे. वे पढ़ना-लिखना दोनों जानते थे. प्रो महेश सिंह के मुताबिक 1978 में सरयू प्रसाद इंटर कालेज आमीपुर गिर्दकोट हंड़िया प्रयागराज से उन्होंने 10वीं पास की थी. उनके मामा प्रो महेश सिंह के मुताबिक, नरेंद्र गिरि ने हाई स्कूल की परीक्षा उनके साथ ही रहकर स्कूल से की थी. जब वे इंटर की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनकी बैंक में नौकरी लगी और उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. उन्हें धार्मिक ग्रंथ भी पढ़ना आता था. वे रामायण भी पढ़ते थे.

न्यूज़18 से बातचीत में प्रो महेश सिंह ने कहा कि जो लोग कई दिन से कह रहे हैं कि उन्हें पढ़ना लिखना नहीं आता था वे सरासर गलत हैं. पिछले तीन दिनों से यह इसे सुनकर आहत हूं. उन्हें पढ़ना भी आता था और लिखना भी आता था. प्रो महेश सिंह ने कहा कि उनकी राइटिंग जरूर खराब थी. महेश सिंह ने कहा कि जो लोग उनके सुसाइड नोट पर सवाल खड़े कर रहे हैं उन्हें सच नहीं मालूम है. हालांकि उन्होंने कहा कि वे महंत नरेंद्र गिरी हैंड राइटिंग नहीं पहचानते.

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महंत नरेंद्र गिरि का हाईस्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट

2001 में उनके संन्यासी बनने की बात पता चली 
महेश सिंह ने कहा कि जब उनकी शादी की बात चल रही थी तो वे अचानक से गायब हो गए. इसके बाद 2001 कुंभ में प्रयागराज आए तो कहीं से मेरा नंबर लेकर मुझे फ़ोन किया और कहा मैं महंत नरेंद्र गिरि बोल रहा हूं. इस पर मैंने कहा कि मैं किसी नरेंद्र गिरि को नहीं जानता. फिर उन्होंने कहा कि मैं गुड्डू (बचपन का नाम) बोल रहा हूं.

इसके बाद नरेंद्र गिरि ने बताया कि उन्होंने संन्यास ले लिया है और संन्यासी आखिरी प्रक्रिया के लिए मां और नानी की भिक्षा जरूरी है. जिसके बाद मैंने घर का रास्ता बताया और वे आए थे. प्रोफेसर महेश सिंह ने बताया कि उनकी उनसे अक्सर बात होती रहती थी. अभी 14 सितंबर को ही मेरी पुस्तक का विमोचन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करवाने को लेकर हुई थी. उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरी समाजसेवी भी थे. वे गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए किताबें और फीस भी देते थे.

महंत केस की जांच के लिए 5 सदस्यीय CBI टीम पहुंची प्रयागराज, केस टेकओवर की प्रक्रिया शुरू

Prayagraj News: प्रयागराज में 20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि अपने बाघंबरी मठ में मृत पाए गए थे.  (File photo)

Prayagraj News: महंत नरेंद्र गिरि केस हैंडओवर लेने से पहले सीबीआई की एक टीम केस की जानकारी ले रही है. सीबीआई की टीम में पांच सदस्य हैं. सीबीआई एफआईआर की कॉपी लेने के लिए पुलिसलाइन पहुंची है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 23, 2021, 14:29 IST
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लखनऊ. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Mahant Narendra Giri Death Case) मामले में योगी सरकार (Yogi Government) ने सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश कर दी है. उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश की है.

जानकारी के अनुसार सीबीआई की टीम प्रयागराज पहुंच गई है. सीबीआई की टीम में पांच सदस्य हैं. केस हैंडओवर लेने से पहले सीबीआई की एक टीम केस की जानकारी ले रही है. सीबीआई एफआईआर की कॉपी लेने के लिए पुलिसलाइन पहुंची है. पुलिस लाइन में एसआईटी टीम और प्रयागराज पुलिस के आलाधिकारी भी मौजूद हैं. जल्द ही सीबीआई केस को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू करेगी.

दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है और निष्पक्ष जांच को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश की है.

गौरतलब है कि नरेंद्र गिरी की मौत के मामले में लगातार सवाल उठ रहे हैं और कई राजनेताओं से लेकर संत-समाज से जुड़े लोग भी इसे आत्महत्या का मामला मानने से इनकार कर रहे हैं. पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठ रही थी.

अभी तक इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. दरअसल नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी को मौत का जिम्मेदार बताया गया था. उसमें लिखा था कि ये तीनों ब्लैकमेल कर रहे हैं और मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहे हैं. नरेंद्र गिरि ने तीनों को अपनी मौत का जिम्मेदार सुसाइड लेटर में बताया था, जिसके आधार पर यूपी पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था.

इससे पहले सीजेएम कोर्ट में पेश की गई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नरेंद्र गिरि के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं. उनकी मौत दम घुटने के कारण बताई गई है. रिपोर्ट में हैंगिंग की बात भी आई है. उनके गले पर वी शेप का निशान पाया गया है, जो फंदा लगाने के कारण ही आता है. ऐसे में पुलिस कुछ हद तक स्पष्ट है कि नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है और उनकी मौत फंदे से लटकने के कारण ही हुई है.

दोपहर 3 से साढ़े तीन बजे के बीच हुई मौत: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि की मौत दोपहर में 3 से साढ़े तीन बजे के बीच हुई है. इससे स्पष्ट है कि खाना खाने के बाद आराम करने गए नरेंद्र गिरि ने पहले वीडियो बनाया और उसके बाद सुसाइड नोट लिख कर आत्महत्या कर ली. काफी देर तक जब वे बाहर नहीं आए तो उनके शिष्यों ने दरवाजा तोड़कर देखा तो गिरि पंखे में रस्सी डालकर फंदे से लटके हुए थे. इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया. लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

इनपुट: सर्वेश दुबे

Exclusive: महंत नरेंद्र ग‍िर‍ि की डेड बॉडी पंखे से नीचे उतारने वाला चश्‍मदीद पहली बार आया सामने, उसने बताया...

महंत नरेंद्र ग‍िर‍ि की फाइल फोटो

Mahant Narendra Giri Death Case: चश्‍मदीद सर्वेश ने बताया क‍ि हमें लग रहा था कि महाराज जी जिंदा होंगे लेकिन जब कोई हलचल नहीं हुई तो हमने पुलिस को फोन किया. उसके 15 से 20 मिनट में पुलिस वहां आ गई और फिर उसने पूरी कार्रवाई की.

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महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड केस में पहली बार वह चश्‍मदीद सामने आया है, ज‍िसने डेड बॉडी को पंखे से नीचे उतारा था. न्‍यूज 18 से बातचीत के दौरान चश्‍मदीद सर्वेश ने बताया क‍ि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का जब फोन बंद आ रहा था, तो मैंने दरवाजे की कुंडी तोड़ दी. जब दरवाजा खुला तो मैंने देखा क‍ि महंत जी पंखे से लटके हुए थे. इसके बाद हमने आनन-फानन में चाकू मंगाया और रस्सी को काटकर उनके शव को नीचे उतारा.

सर्वेश ने बताया क‍ि हमें लग रहा था कि महाराज जी जिंदा होंगे लेकिन जब कोई हलचल नहीं हुई तो हमने पुलिस को फोन किया. उसके 15 से 20 मिनट में पुलिस वहां आ गई और फिर उसने पूरी कार्रवाई की. सर्वेश ने बताया कि महंत जी ने ज‍िस कमरे में सुसाइड क‍िया था वह उस कमरे में परमानेंट नहीं रहते थे. जब भी वह आते थे तो वहां बैठते थे विश्राम करते थे उस दिन भी यही हुआ हम लोगों ने फोन किया तो उनका फोन बंद था फिर दरवाजे की कुंडी तोड़ी गई.

नरेंद्र ग‍िरी ने आत्‍महत्‍या वाले द‍िन की थी सतुआ बाबा से बात
वहीं सूत्रों के हवाले से पता चला है क‍ि महंत नरेन्द्र गिरि ने मौत वाले दिन संत सतुआ बाबा से बात की थी. सतुआ बाबा से उन्होंने बहुत कुछ बातें भी शेयर की थी, लेकिन सतुआ बाबा अभी तक किसी के सामने नहीं आए हैं. सतुआ बाबा ने पुलिस से सभी बातों को साझा किया है, जिसकी पड़ताल पुलिस और एसआईटी कर रही है. पुलिस के पास नरेंद्र गिरी के नंबर की सारी कॉल डिटेल भी मौजूद है, जिसकी जांच हो रही है.

Mahant Narendra Giri Death: शक के दायरे में सुरक्षा ड्यूटी में तैनात 11 पुलिसकर्मी, गिर सकती है गाज

महंत नरेंद्र  गिरि की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की वाई श्रेणी की सुरक्षा में तैनात सभी 11 पुलिसकर्मियों से पूछताछ होगी उनकी भूमिका की भी जांच होगी कि मौत के वक्त सभी पुलिसकर्मी कहां थे?

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil BHartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत के मामले में सीबीआई जांच (CBI Probe) की सिफारिश उत्तर प्रदेश सरकार ने कर दिया है. महंत नरेंद्र गिरि की मौत हत्या थी या आत्महत्या अब इसकी जांच सीबीआई करेगी. लेकिन महंत नरेंद्र गिरि की मौत के पीछे कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं, उसमें से एक यह है कि उन्हें सरकार की तरफ से वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी और उनके लिए 11 सुरक्षाकर्मी 24 घंटों तैनात रहते थे. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि अगर महंत नरेंद्र गिरि ने फांसी लगाई तो वे उस वक्त कहां थे.

फ़िलहाल पुलिस ने उनकी सुरक्षा में लगे गनर अजय सिंह, मनीष शुक्ल समेत चार सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की है. बताया जा रहा है कि पुलिस अन्य सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ कर सकती है. महंत नरेंद्र गिरि की वाई श्रेणी की सुरक्षा में तैनात सभी 11 पुलिसकर्मियों से पूछताछ होगी उनकी भूमिका की भी जांच होगी कि मौत के वक्त सभी पुलिसकर्मी कहां थे? बता दें कुछ पुलिसकर्मी एस्कॉर्ट में तैनात होते हैं जबकि कुछ मौके पर सुरक्षा में रहते हैं. कुछ की तैनाती आश्रम के अंदर रहती है. अब यह भी जांच की जा रही है कि घटना के वक्त पुलिसकर्मी कहां थे.

हो सकती है कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक भूमिका संदिग्ध होने पर सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर लापरवाही बरतने के आरोप पर कार्रवाई भी हो सकती है. बता दें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार स्वामी आनंद गिरि ने भी उनकी सुरक्षा में तैनात गनर अजय सिंह और मनीष शुक्ल पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि गुरूजी आत्महत्या नहीं कर सकते. उनकी हत्या कर उन्हें फंसाया जा रहा है. इस पूरी साजिश में गनर अजय सिंह और मनीष शुक्ल शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा था कि महारज जी ने मनीष शुक्ल की शादी करवाई थी और पांच से सात करोड़ रुपये घर बनवाने के लिए भी दिया था.

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