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    ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती विवि के कुलपति डॉ. माहरुख मिर्जा पर लगा साहित्यिक चोरी का आरोप, डीलिट की उपाधि छीनने की मांग

    डॉ माहरुख मिर्जा के खिलाफ नियुक्ति घोटाले में भी जांच चल रही है.
    डॉ माहरुख मिर्जा के खिलाफ नियुक्ति घोटाले में भी जांच चल रही है.

    प्रयागराज के अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सिंह ने राज्यपाल और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को पत्र लिख कर डॉ माहरुख मिर्चा (Dr. Mahrukh Mirza) पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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    प्रयागराज. ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (Khwaja Moinuddin Chishti Language University) के कुलपति डॉ. माहरुख मिर्जा (Dr. Mahrukh Mirza) के खिलाफ अभी नियुक्ति घोटाले की जांच की आंच कम भी नहीं हुई कि उनके खिलाफ डीलिट में दूसरे शोधार्थियों के शोध पत्रों की सामग्री चोरी कर अपने नाम से छपवाने का मामला सामने आया है. आरोप है कि डॉ माहरूख मिर्जा डीलिट की थीसिस, शोध पत्रों और हाल ही में छपी किताब में आधे से अधिक कन्टेन्ट पहले ही प्रकाशित हो चुकी पुस्तकों से चुराए गये हैं.

    प्रयागराज के अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सिंह ने राज्यपाल और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को पत्र लिख कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति से यूजीसी का कानून मानते हुए डॉ. माहरुख मिर्जा की डीलिट उपाधि छीनने की भी मांग की.

    संतोष सिंह ने बताया कि कुलपति डॉ. माहरुख मिर्जा ने अपनी पुस्तक 'आंत्रप्रिन्योरियल डिवेलपमेंट ऑफ विमिन  एंड एनजीओ-एमएफाईस' (आईएसबीएन 978-620-2-56581-3) में 57 फीसदी कंटेंट एक शोध पुस्तक से चोरी की है, जबकि लखनऊ विश्वविद्याल की ज़ेबुन निसा के साथ 2019 में प्रकाशित शोध पत्र 'सस्टेनेबल डिवेलवमेंट एंड जेंडर इक्वेलिटी: ए केस स्टडी ऑन रोल ऑफ एनजीओ का ज्यादातर कंटेंट संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से लिया है. 2019 में प्रकाशित शोध पत्र 'वन नेशन वन टैक्स (जीएसटी) एक्सप्लोरिंग द टेरेन' कॉन्टेंट ब्रिटेन के केशव भट्टराई द्वारा 2018 में प्रकाशित शोध पत्र से चोरी की गयी है. इसी प्रकार अन्य 5 शोधपत्रों में भी 50 प्रतिशत से अधिक कन्टेन्ट चोरी की गयी है.



    संतोष सिंह का कहना है कि डॉ.माहरुख मिर्जा का लिखा गया कोई भी शोध पत्र उनका मूल पत्र नहीं है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्चतर शिक्षा संस्थानों में अकादमिक सत्यनिष्ठा एवं साहित्यिक चोरी की रोकेथाम को प्रोत्साहन) विनियम, 2018 के अनुसार लेवल 3 का अपराध है. इस अपराध के लिए उन्होंने प्रो. मिर्जा की बर्खास्तगी की मांग की.
    गौरतलब है कि केएमसी भाषा विश्विद्यालय में अपने चहेतों को रेवड़ी की तरह असिस्टेंट प्रोफेसर का नियुक्ति पत्र बांटने वाले कुलपति माहरुख मिर्जा पर अपने कार्यकाल में जमकर वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ भ्रष्टाचार के आरोप उनके मातहत लगाते आए हैं. डॉ मिर्जा की शिया डिग्री कॉलेज की नौकरी को भी सेवा बर्खास्तगी की शिया कॉलेज की कार्रवाई पर लखनऊ विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति शैलेश शुक्ला मुहर लगा चुके है. साथ ही नियुक्तियों में जमकर भ्रष्टाचार करने के आरोप में राजभवन ने डॉ मिर्ज़ा को कार्यविरत्त कर लंबी छुट्टी पर भेज दिया है.
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