होम /न्यूज /उत्तर प्रदेश /Success Story: 40 हजार की नौकरी छोड़ खोली नूडल्स और चाय की दुकान, तीन महीने में बने लखपति

Success Story: 40 हजार की नौकरी छोड़ खोली नूडल्स और चाय की दुकान, तीन महीने में बने लखपति

सुधांशू ने महज 2 लाख में चलती फिरती दुकान बना ली है. उन्होंने इसके लिए ई रिक्शा खरीद कर दुकान के हिसाब से मोडिफाइड करवा ...अधिक पढ़ें

    प्रयागराज: जीवन की सबसे बड़ी बाधा है लोग क्या कहेंगे. इसे दूर करने में हम कितना कीमती समय गवां देते हैं. ये हमें बहुत देर में पता चलताहै.ये कहना है प्रयागराज के \” इंजीनियर भइया की चाय और मैगी \” वाले सुधांशु शुक्ला का.नोएडा स्थित एक फाइनेंस कंपनी में 40 हजार की नौकरी छोड़कर सुधांश ने चाय और मैगी की दुकान खोली है. खास बात यह है कि उनका व्यापार प्रगति पर है. दिन भर में दो से तीन हजार का धंधा बड़े आराम से कर लेते है. तीन महीने के भीतर ही वह लखपति बन चुके हैं.

    मूलतः सुल्तानपुर के सुधांशु वर्तमान में प्रयागराज के नैनी इलाके में किराए पर रहते हैं. सुधांशु ने बताया कि मेरे पिता सरकारी सेवा में है. हर माता पिता की तरह उनकी भी इच्छा थी कि मैं भी सरकारी सेवा में जाऊं, लेकिन मुझसे ये हो न सका. मैंने प्रयागराज के हंसवाहिनी कॉलेज से सिविल से डिप्लोमा पूरा किया. इसके बाद6 महीने का फाइनेंस एंड एकाउंट का शॉर्टटर्म कोर्स किया. फिर नोएडा स्थित एक निजी कंपनी में मेरी नौकरी लगी.

    कंपनी का टारगेट पूरा करने में चला जाता था समय
    हर महीने कंपनी काटारगेट पूरा करता था. एक दिन मैं कंपनी के मंथली टारगेट को सबमिट कर रहा था जो कि 9 लाख के आसपास था.. फिर मेरे दिमाग मे आया किइतनी मेहनत करने के बाद भी मुझे वो सैलरी नहीं मिल पा रही है. जिससे मैं खर्चाचलाने के अलावा भी सोच सकूं. उसी दिन से निर्णय लिया कि अपना बिजनेस शुरू करूंगा. दो साल तक नौकरी कर सेविंग किया फिर इसे छोड़कर धंधे पर लग गया.

    आपके शहर से (इलाहाबाद)

    इलाहाबाद
    इलाहाबाद

    ई-रिक्शा को किया मॉडिफाइड
    सुधांशू ने महज 2 लाख में चलती फिरती दुकान बना ली है. उन्होंने इसके लिए ई रिक्शा खरीद कर दुकान के हिसाब से मोडिफाइड करवाया. पूरे दुकान कोस्थापित करने में कुल 2 लाख का खर्च आया.

    दोस्ती काम आयी, खूब निभाया साथ
    सुधांशू ने बताया कि मेरे व्यापार को वाकई पटरी पर लाने वाले मेरे दोस्त ही हैं. शुरुआती दिनों में दोस्त लोग दुकान पर आते और चार पांच सौ का नाश्ता करते और मुझे भी जबरजस्ती खिलाते. खास बात ये कि बिल का पूरा भुगतान भी करते.सुधांशु का मानना है कि जीवन मे यदि आपको दाल रोटी से ऊपर उठना है तो आपको रिस्क लेना पड़ेगा. जीवन के कुछ साल तक \”आराम हराम है\” की प्रक्रिया को स्वीकारना होगा.

    Tags: Prayagraj News, Uttar pradesh news

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें