इलाहाबाद सीट: कांग्रेस के लिए 'सूखा कुआं' बना नेहरू का गृह जनपद, अमिताभ बच्चन थे आखिरी विजेता

इलाहाबाद लोकसभा सीट पर आखिरी बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में महानायक अमिताभ बच्चन ने विजय पताका फहराई थी. वो साल था 1984. लेकिन उसके बाद कभी पार्टी यहां दोबारा नहीं जीत पाई.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 11, 2019, 4:18 PM IST
इलाहाबाद सीट: कांग्रेस के लिए 'सूखा कुआं' बना नेहरू का गृह जनपद, अमिताभ बच्चन थे आखिरी विजेता
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए 1984 के लोकसभा चुनाव में आखिरी बार इलाहाबाद सीट से जीत हासिल हुई थी. बेहद धमाकेदार जीत. अमिताभ बच्चन अपने मित्र राजीव गांधी की खातिर राजनीति में आए थे और इलाहाबाद से सीट से चुनाव लड़ा था. अमिताभ के सामने थे पुराने कांग्रेसी लेकिन उस समय लोकदल के टिकट से खड़े हेमवती नंदन बहुगुणा. अमिताभ ने करीब एक लाख 87 हजार वोट से जीत हासिल की. लेकिन इसके बाद इस सीट पर कांग्रेस कभी दोबारा वापसी नहीं कर पाई. 1988 में जब इस सीट पर उपचुनाव हुए तो उस समय भ्रष्टाचार विरोधी चेहरे के रूप में उभरे वीपी सिंह ने कांग्रेस के सुनील शास्त्री ( पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे) को बुरी तरह हराया था.

उस चुनाव के बाद अगले चुनावों में इस सीट पर समाजवादियों का दबदबा रहा. 1996 में इस सीट पर बीजेपी के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी ने जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने 1998 और 1999 का चुनाव भी यहां से जीता. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मुरली मनोहर जोशी मानव संसाधन विकास मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे. 2004 के चुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी के टिकट पर खड़े हुए स्थानीय कद्दावर नेता रेवती रमण सिंह ने जीत हासिल की. 2009 में वो एक फिर जीते. फिर 2014 के चुनाव जब मोदी लहर चली तो यहां से बीजेपी के टिकट पर श्यामा चरण गुप्ता ने रेवती रमण सिंह को पटखनी दे दी. लेकिन इन चुनावों में कांग्रेस कभी भी चुनावी फ्रेम में नहीं आ पाई. न ही कभी कोई ऐसा उम्मीदवार खड़ा हुआ जिसने कोई सुर्खियां पैदा की हो.

'अटल, आडवाणी और मनोहर' की तिकड़ी में से एक मुरली मनोहर जोशी ने इलाहाबाद से सीट से तीन बार जीत हासिल की.


कौन हैं इस बार प्रत्याशी

भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर सबसे पहले अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी इस बार इलाहाबाद से बीजेपी उम्मीदवार हैं. रीता पहले इलाहाबाद शहर की मेयर भी रह चुकी हैं. रीता बहुगुणा जोशी ने लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद 2016 में बीजेपी ज्वाइन की थी. दूसरी तरफ गठबंधन की तरफ से अभी इस सीट पर कोई उम्मीदवार घोषित नहीं हुआ है. आम आदमी पार्टी ने यहां से किन्रर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी नाथ वाल्मीकि को उम्मीदवार बनाया है. महागठबंधन ने इस सीट पर राजेंद्र पटेल को उम्मीदवार बनाया है जबकि कांग्रेस ने योगेश शुक्ला को टिकट दिया है.

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इलाहाबाद युनिवर्सिटी और राजनीतिइलाहाबाद शहर छात्र राजनीति के लिए देश की सबसे उर्वरा जमीन कहा जाता है. देश के कई नामी राजनेताओं ने, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह और चंद्रशेखर शामिल हैं, इस युनिवर्सिटी से छात्र राजनीति की शुरुआत की. इस लोकसभा सीट पर इलाहाबाद युनिवर्सिटी का भी बेहद प्रभाव रहता है. विश्वविद्यालय से कई बड़े साहित्यकारों ने शिक्षा-दीक्षा पाई है.

त्रिवेणी का शहर

इलाहाबाद में इस साल आयोजित हुए दिव्य कुंभ की एक तस्वीर


हाल में योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया है. तीन धार्मिक नदियों का यहां पर संगम होता है जिस वजह से इलाहाबाद को प्रयागराज के नाम से पहले भी पुकारा जाता रहा है. इस साल की शुरुआत में यहा भव्य कुंभ मेले का आयोजन हुआ था.

क्या हैं जातीय समीकरण

इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं. ये सीटें हैं -मेजा, करछना, इलाहाबाद दक्षिण, बारा और कोरांव. 2011 की जनगणना के अनुसार इलाहाबाद जिले की आबादी 59,54,390 है.

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