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Magha Purnima 2020: माघी पूर्णिमा में गंगा स्नान से होगा पुण्य, इस मुहूर्त में पूजा करने से सबसे अधिक लाभ

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 7, 2020, 2:25 PM IST
Magha Purnima 2020: माघी पूर्णिमा में गंगा स्नान से होगा पुण्य, इस मुहूर्त में पूजा करने से सबसे अधिक लाभ
माघ पूर्णिमा में शुभ मुहूर्त में पूजन विधि अनुसार करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है.

सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा (Magha Purnima) को मनाए जाने की परंपरा है. इस बार माघी पूर्णिमा के पर्व पर मघा नक्षत्र में चन्द्रमा (Moon) के होने और उसके ठीक सामने सूर्य के प्रकाशमान होने से महा माघी का फलदायी संयोग भी बन रहा है. इस दिन गंगा स्‍नान और दान करने से व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं.

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प्रयागराज. माघ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. इसे माघी पूर्णिमा के रूप में मनाए जाने की परम्परा है. इस बार माघ मास की पूर्णिमा 9 फरवरी को पड़ रही है. माघी पूर्णिमा (Magha Purnima) को माघ मेले का पांचवां प्रमुख स्नान पर्व भी होगा. इस बार माघी पूर्णिमा के पर्व पर मघा नक्षत्र में चन्द्रमा (Moon) के होने और उसके ठीक सामने सूर्य के प्रकाशमान होने से महा माघी का फलदायी संयोग भी बन रहा है. इस दिन गंगा स्नान (Ganga) और दान करने से व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं और दुखों से मुक्ति मिलती है. ऐसी मान्यता है कि माघी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और 33 कोटि देवी-देवता भी गंगा नदी में स्नान करने आते हैं. इसलिए जो भी माघ पूर्णिमा के मौके पर गंगा स्नान करता है, उसको सभी तरह के पुण्य लाभ मिलते हैं. माघ पूर्णिमा में शुभ मुहूर्त में पूजन विधि अनुसार करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है.

माघी पूर्णिमा पर विष्णुपूजा, तुलसी पूजा, दान समेत होते हैं कई विधान
पद्मपुराण के मुताबिक बाकी के महीनों में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं. माघ मास में स्नान के अलावा दान का विशेष महत्व है. दान में तिल-गुड़ और कंबल का विशेष पुण्य है. ज्योतिषाचार्य पंडित ब्रजेन्द्र मिश्रा के मुताबिक शनिवार की रात 12 बजकर 13 मिनट पर माघी पूर्णिमा लग रही है, जो रविवार रात्रि एक बजकर 14 मिनट तक रहेगी.

लेकिन श्रद्धालुओं के लिए सर्वाधिक लाभप्रद स्थिति रविवार की सुबह चार से अरुणोदय के काल में रहेगी. ऐसी भी मान्यता है कि जो पूरे माघ मास में संगम में स्नान नहीं कर पाते हैं. उन्हें माघी पूणिमा के स्नान से ही बराबर पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है.

ganga, माघ पूर्णिमा
माघी पूर्णिमा का स्नान 9 फरवरी को है.


माघ मास की त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा के स्नान को त्रिजटा स्नान भी कहा जाता है. त्रिजटा स्नान करने से श्रद्धालुओं को पूरे माघ मास में स्नान का पुण्य लाभ मिलता है. ऐसी मान्यता है कि माघी पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही एक मास तक संगम की रेती पर कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं का भी कल्पवास पूरा होता है. माघी पूर्णिमा का स्नान कर विसर्जन के बाद कल्पवासी अपने घरों को लौटते हैं. इस दौरान कल्पवासी विष्णु पूजा, तुलसी पूजा, पितरों का श्राद्ध, दान और कल्पवास का संकल्प पूरा होने पर शैय्या दान भी करते हैं.

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First published: February 7, 2020, 12:32 PM IST
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