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योगी सरकार के नए कानून से अब लव जिहादियों खैर नहीं: अखाड़ा परिषद

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी (Mahant Narendra Giri) ने कहा कि जो मुस्लिम युवक, हिंदू बेटियों को गुमराह कर उनके शादी करते हैं और उनका जीवन बर्बाद कर देते हैं, नए कानून के बन जाने से उन्हें कठोर सजा मिलेगी.

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प्रयागराज. ‘लव जिहाद’ (Love Jihad) को लेकर जबरन धर्म परिवर्तन की बढ़ रही घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नए अध्यादेश को योगी सरकार (Yogi Government) के कैबिनेट (Cabinet) की मंजूरी मिल गई है. इस निर्णय का साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) ने स्वागत किया है. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी (Mahant Narendra Giri) ने कहा है कि आज का दिन संत महात्माओं और सनातन धर्मियों के लिए बड़े शुभ दिन है. उन्होंने कहा है कि जो मुस्लिम युवक, हिंदू बेटियों को गुमराह कर उनके शादी करते हैं और उनका जीवन बर्बाद कर देते हैं, नए कानून के बन जाने से उन्हें कठोर सजा मिलेगी. धर्म परिवर्तन कराने पर भी इस अध्यादेश के कानून बन जाने पर ऐसे लोगों को सबक मिलेगा.

जूना अखाड़े के स्वामी रवि शंकर ने भी अध्यादेश केा सही ठहराया

नये कानून में जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 6 माह से 10 साल की सजा का प्रावधान किए जाने और धर्म परिवर्तन करने पर इसकी सूचना पहले डीएम देने के प्रावधान को साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था ने सही ठहराया है. महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा है कि इस नये कानून के अस्तित्व में आ जाने से ‘लव जिहाद’ और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर भी रोक लगेगी. धर्मांतरण रोकने और लव जिहाद रोकने के लिए लाये जा रहे नए कानून से अब लव जिहादियों की यूपी में खैर नहीं है. जूना अखाड़े के संत और तक्षक तीर्थ के पीठाधीश्वर स्वामी रवि शंकर ने भी जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए लाये गए अध्यादेश को सही ठहराया है.



ये है अध्यादेश
गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’को मंजूरी दे दी गई है. यह अध्यादेश ऐसे धर्म परिवर्तन को एक अपराध की श्रेणी में लायेगा, जो लालच देकर या फिर बलपूर्वक, प्रलोभन या अन्य किसी तरह से या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए किया जा रहा हो. इस अध्यादेश में गलत तरीके से प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए मजबूर करने को गम्भीर अपराध मानते हुए सम्बन्धित अपराध गैर जमानतीय प्रकृति का माना जायेगा.

अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान

अध्यादेश में इस अभियोग को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में ट्रायल का प्राविधान किया गया है. इसके तहत उल्लंघन करने पर कम से कम 1 वर्ष अधिकतम 5 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है और जुर्माने की राशि 15,000 रुपए से कम नहीं होने का प्राविधान किया गया है, जबकि अवयस्क महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के सम्बन्ध में कारावास कम से कम 02 वर्ष अधिकतम 10 वर्ष तक का होगा और जुर्माने की राशि 25,000 रुपए से कम नहीं होगी.

सामूहिक धर्म परिवर्तन के सम्बन्ध में कारावास 3 वर्ष से कम नहीं

इसी तरह से सामूहिक धर्म परिवर्तन के सम्बन्ध में कारावास 03 वर्ष से कम नहीं होगी और अधिकतम 10 वर्ष तक हो सकेगा और जुर्माने की राशि 50,000 रुपए से कम नहीं होगी. नये अध्यादेश के मुताबिक धर्म परिवर्तन के लिए व्यक्ति को निश्चित प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को एक माह पूर्व इसकी सूचना देनी अनिवार्य होगी. नये अध्यादेश में इसका उल्लंघन किये जाने पर 6 माह से 3 वर्ष तक की सजा और जुर्माने की राशि 10,000 रुपए से कम की नहीं होने का प्राविधान किया गया है.
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