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CAA हिंसा: आरोपियों का पोस्टर चस्पा करने पर HC में सुनवाई पूरी, सोमवार को आएगा फैसला

आरोपियों का पोस्टर चस्पा करने पर HC में सुनवाई पूरी. (फाइल फोटो)
आरोपियों का पोस्टर चस्पा करने पर HC में सुनवाई पूरी. (फाइल फोटो)

लखनऊ शहर में कई जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ के आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए डीएम अभिषेक प्रकाश और पुलिस कमिश्नर सुजीत पाण्डेय को तलब कर लिया था.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने राजधानी लखनऊ (Lucknow) में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुई हिंसा के आरोपियों के पोस्टर लगाने के मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद जजमेंट रिजर्व कर लिया है. चीफ जस्टिस की कोर्ट में लगभग एक घंटे तक मामले की सुनवाई चली. अदालत अब सोमवार दोपहर दो बजे ओपेन कोर्ट में अपना फैसला सुनाएगी. कोर्ट के निर्देश पर अदालत में पहुंचे महाधिवक्ता राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने सीएए के विरोध में हिंसा करने वाले लोगों के पोस्टर लगाए जाने और उन्हें वसूली नोटिस जारी किए जाने पर राज्य सरकार का अदालत में पक्ष रखा.

अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी के मुताबिक सुनवाई के दौरान कोर्ट का कोई ऑब्जर्वेशन नहीं था, लेकिन कोर्ट की ओर से पूछे गए सभी सवालों का सरकार की ओर से जबाव दिया गया है. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने जजमेंट रिजर्व कर लिया है. अब अदालत सोमवार दोपहर दो बजे अपना फैसला सुनायेगी.

दरअसल लखनऊ शहर में कई जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ के आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश और पुलिस कमिश्नर सुजीत पाण्डेय को तलब कर लिया था. रविवार को छुट्टी के बावजूद चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में मामले की सुबह दस बजे सुनवाई भी शुरु हुई, लेकिन यूपी के महाधिवक्ता राघवेन्द्र प्रताप सिंह के प्रयागराज न पहुंच पाने के चलते अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने कोर्ट से सरकार का पक्ष रखने के लिए समय मांगा. जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने तीन बजे तक के लिए मामले की सुनवाई टाल दी थी. दोपहर तीन बजे दोबारा मामले की सुनवाई शुरु हुई. जिसके बाद रजिस्ट्रार जनरल ने सरकारी वकीलों के अलावा प्राइवेट काउंसिल के अदालत में मौजूद न रहने का आदेश दिया. सरकारी वकीलों की मौजूदगी में चीफ जस्टिस कोर्ट में लगभग एक घंटे तक मामले में बहस चली. जिसमें कोर्ट के सवालों का महाधिवक्ता ने जवाब दिया. महाधिवक्ता ने याचिका को पोषणीय न बताते हुए खारिज करने की भी अदालत से मांग की. लेकिन शुरुआत ही मामले को लेकर सख्त कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना जजमेंट कर लिया है.



गौरतलब है कि सुबह दस बजे कोर्ट में जब मामले की सुनवाई शुरु हुई तब लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश और पुलिस कमिश्नकर सुजीत पाण्डेय के बजाय एडीएम ईस्ट और डीसीपी नॉर्थ कोर्ट में हुए पेश थे. उन्होंने कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए जानकारी दी. लेकिन कोर्ट ने एक बार फिर से शहर में जगह-जगह पोस्टर लगाए जाने पर नाराजगी जताई थी.
कोर्ट ने कहा था कि सड़कों पर किसी भी नागरिक का पोस्टर लगाया जाना नागरिकों के सम्मान, निजता और उनकी स्वतंत्रता के खिलाफ है. हाईकोर्ट ने कहा था कि पब्लिक प्लेस पर सम्बंधित व्यक्ति की अनुमति बिना उसका फोटो या पोस्टर लगाना गैरकानूनी है. यह राइट टू प्राइवेसी का भी उल्लंघन है. बता दें कि सीएए के विरोध में लखनऊ 19 दिसम्बर को ठाकुरगंज और कैसरबाग क्षेत्र में हुई हिंसा के आरोपियों के खिलाफ एडीएम सिटी पश्चिम की कोर्ट से वसूली आदेश जारी हुआ है.

ये है मामला
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लखनऊ 19 दिसम्बर को ठाकुरगंज और कैसरबाग क्षेत्र में हुई हिंसा के आरोपियों के खिलाफ एडीएम सिटी (पश्चिम) की कोर्ट से वसूली आदेश जारी हुआ है. मामले में जिलाधिकारी (लखनऊ) अभिषेक प्रकाश ने कहा कि हिंसा फैलाने वाले सभी जिम्‍मेदार लोगों के लखनऊ में पोस्टर व बैनर लगाए गए हैं. उन्होंने कहा सभी की संपत्ति की कुर्क की जाएगी. सभी चौराहों पर ये पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे उनके चेहरे बेनकाब हो सकें.

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