BHU के प्रोफेसर फिरोज खान के समर्थन में महंत नरेंद्र गिरी, धरना प्रदर्शन को बताया गलत

बड़े हनुमानजी मंदिर के महंत नरेंद्र गिरी अतिक्रमण हटाने के फैसले को चुनौती देंगे
बड़े हनुमानजी मंदिर के महंत नरेंद्र गिरी अतिक्रमण हटाने के फैसले को चुनौती देंगे

महंत नरेंद्र गिरी का कहना है कि पहले ऐसा होता था जब गुरुकुल परंपरा थी तब खास वर्ग के लोगों का चयन हुआ करता था, जो उचित भी था. लेकिन भारत आज 21वीं सदी में प्रवेश कर चुका है हर धर्म हर मजहब के लोग हर भाषा का ज्ञान रखते हैं और संवैधानिक उनका अधिकार भी है.

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प्रयागराज. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी  (Banaras Hindu University) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर साधू संतों की संस्था अखाड़ा परिषद खड़ा हो गया है. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों से अपील की है कि वह अपने प्रदर्शन को वापस लेकर विश्वविद्यालय हित में मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान के साथ कदम से कदम मिलाकर सहयोग करें. गौरतलब है कि फिरोज खान की नियुक्ति बीएचयू के संस्कृत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुई है. संस्कृत विभाग में मुस्लिम धर्म के व्यक्ति की नियुक्ति का छात्र विरोध कर रहे हैं.

महंत नरेंद्र गिरी का कहना है कि पहले ऐसा होता था जब गुरुकुल परंपरा थी तब खास वर्ग के लोगों का चयन हुआ करता था, जो उचित भी था. लेकिन भारत आज 21वीं सदी में प्रवेश कर चुका है हर धर्म हर मजहब के लोग हर भाषा का ज्ञान रखते हैं और संवैधानिक उनका अधिकार भी है. ऐसे में अगर मुस्लिम प्रोफेसर संस्कृत पढ़ा रहा है तो यह हमारे लिए और अच्छी बात है. हमें उनका विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि हमें उनका स्वागत करना चाहिए. क्योंकि एक मुस्लिम होकर संस्कृत भाषा का प्रोफेसर है, जो हमारे लिए और अच्छी बात है.

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते भर से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा लगातार संस्कृत विभाग के प्रोफेसर फिरोज खान का विरोध इसलिए किया जा रहा है कि वह मुस्लिम है. उनसे संस्कृत के बुनियादी ज्ञान हासिल करना मुश्किल है. इसके बाद से छात्र मुस्लिम प्रोफेसर कों हटाने की मांगों को लेकर लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने एतराज जताते हुए प्रदर्शन खत्म करने की अपील की है. उनका कहना है कि यह हमारे लिए अच्छी बात है की एक मुस्लिम संस्कृत प्रोफेसर है. हमें इसका विरोध नहीं बल्कि स्वागत करना चाहिए.



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