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प्रयागराज: चमत्कारिक शिवलिंग जो बदलती है अपना आकार

प्रयाराज:- चमत्कारिक शिवलिंग जो बदलती है अपना आकार

चमत्कारिक शिवलिंग जो बदलती है अपना आकार. बमरौली से लगभग 10 किलोमीटर दूर मंदर मोड में स्थित है शिव का मंदिर, इस मंदिर में स्थित शिवलिंग क?

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मारे चारों तरफ कभी-कभी हम ऐसी घटनाओं का सामना करते हैं. जिनके होने की वजह हमें नहीं पता होती फिर भी एक बड़ा समूह उस पर विश्वास करता है. हमारा दिमाग सवाल पूछता है और दिल उस पर यकीन करने को कहता है. ऐसी ही एक कहानी है बमरौली के पास स्थित शिव मंदिर की है. लोगों में दृढ़ विश्वास है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग चमत्कारिक है जो वक्त के साथ बड़ी होती है क्योंकि उनके पूर्वजों के समय और आज के समय में शिवलिंग के आकार में बहुत परिवर्तन आया है. यह कहानी दूर-दूर के गांवों में फैली है, जो लोगों को शिव की आस्था में यहां खींच लाती है.

क्या है मंदिर की कहानी
आस-पास के गांव वालों के अनुसार मंदिर सैकड़ों साल पुरानी है. गांव के लोग बताते हैं कि शिवलिंग बहुत ही सूक्ष्म रूप में पास के स्थित 52 बीघे के तालाब में मिली, तो लोगों ने राजा को सूचना दी. राजा ने मंदिर बनाने की सोची और विधि विधान के साथ शिवलिंग को तालाब से निकलवाने लगे लेकिन वह शिवलिंग टस से मस ना हुई. भगवान से बहुत विनती करने पर अगले दिन शिवलिंग अपने आप मंदिर वाले स्थान पर मिली. फिर क्या था.. राजा टेकचंद ने भव्य मंदिर बनवा दिया लेकिन अभी और चमत्कार होना बाकी था.
लोगों ने देखा कि शिवलिंग धीरे-धीरे अपना आकार बदल रही है  फिर क्या था.. चमत्कार का यह सिलसिला चलता गया और मंदिर दूर-दूर तक लोकप्रिय हो गई. राजा टेकचंद के समय में बनाया गया मंदिर तो वक्त के साथ जर्जर हो गया. इसलिए अब मंदिर का नये सिरे से बनाया गया है.

शिव का रुप है अर्धनारीश्वर
अगर आप वर्तमान में शिवलिंग को देखेंगे तो अब यह विशालकाय हो गई है और बीचो-बीच से फट गई है.
गांव के पुजारी रमेश तिवारी कहते हैं कि अब शिव अपने अर्धनारीश्वर रूप में हैं. शिवलिंग का आगे का हिस्सा शिव का है और पिछला हिस्सा शक्ति का.

गांव वाले बताते हैं खुद को चमत्कार का प्रमाण
गांव के युवा और बुजुर्ग कहते हैं कि वह बचपन से मंदिर आते जाते हैं और शिवलिंग में होने वाले परिवर्तन के खुद साक्षी हैं. गांव के निवासी लालचंद ने हमें बताया कि जब वह 12 साल के थे तो अपने दोनों हाथ से शिवलिंग को समा लेते थे लेकिन अब ऐसा करने में सक्षम नहीं है क्योंकि आकार अधिक चौड़ा हो गया है.
ननकू कहते हैं कि जब वह 10 साल के थे तो शिवलिंग की लंबाई उनके बराबर थी और आज जब 19 साल के हैं तो भी शिवलिंग उनके आकार की है क्योंकि वक्त के साथ शिवलिंग भी बढ़ी और मैं भी. दिर के पुजारी कहते हैं कि मंदिर आसपास के 56 गांव की रक्षा करती है. और सभी इसके चमत्कार पर विश्वास करते हैं उन्हें कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं चाहिए इन लोगों की मंदिर में उपस्थिति और आंखों देखा अनुभव ही सर्वोच्च प्रमाण है.

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EXCLUSIVE: देखिए महंत नरेंद्र गिरी के सुसाइड के बाद का पहला VIDEO, अब खड़े हो रहे कई सवाल

महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड के ठीक बाद का वीडियो आया सामने

Mahant Narendra Giri Suicide Case: मठ के कर्मचारी सर्वेश द्विवेदी ने बताया है कि उन्होंने ही फांसी का फंदा काटा था. उससे ही तीन चार दिन पहले महंत नरेंद्र गिरि ने नायलान की रस्सी कपड़े सुखाने के लिए मंगाई थी.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड (Mahant Narendra Giri Suicide Case) करने के बाद का पहला वीडियो (Video) सामने आया है, जिसमें उन्हें फांसी के फंदे से नीचे उतार कर फर्श पर लेटाया गया है. वीडियो में साफ तौर पर नजर आ रहा है कि सबसे पहले आईजी रेंज प्रयागराज केपी सिंह मौके पर पहुंचे हैं और वह उनकी बॉडी को उतारने वाले लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं. लड़के उन्हें वीडियो में बता रहे हैं कि फंदे पर लटका देखकर वे घबरा गए और उन्होंने आनन फानन में रस्सी का फंदा काटकर नीचे उतारा कि हो सकता है कि उनकी सांसें चल रही हों.

मठ के कर्मचारी सर्वेश द्विवेदी ने बताया है कि उन्होंने ही फांसी का फंदा काटा था. उससे ही तीन चार दिन पहले महंत नरेंद्र गिरि ने नायलान की रस्सी कपड़े सुखाने के लिए मंगाई थी. कमरे में पंखा चलने को लेकर सर्वेश द्विवेदी का कहना है कि भीड़ में किसी का हाथ स्विच पर लगा हो और पंखा चल गया होगा. जानबूझकर किसी ने पंखा नहीं चलाया होगा.

वीडियो से खड़े हो रहे कई गंभीर सवाल
हालांकि इस वीडियो को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर जब सब लोग घबराए हुए थे तो यह वीडियो किसने बनाया? क्या यह वीडियो सही है या फिर इसमें कुछ एडिट किया गया है? पंखा किसने चलाया? शव को क्यों बगैर पुलिस की आये नीचे उतारा गया? इस वीडियो को देखने के बाद ऐसे तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं जिनके जवाब अब सीबीआई को तलाशने होंगे.

इस वीडियो के सामने आने के बाद सबसे पहले चश्मदीद सर्वेश द्विवेदी से भी न्यूज़18 से बातचीत की. उसने बताया कि भोजन के बाद महाराज जी कमरे में गए थे. इसके बाद पांच बजे ताज जब वो नीचे नहीं आए तो उन्हें फ़ोन किया गया जो बंद बता रहा था. सर्वेश दुबे ने बताया जब उनका फोन बंद आ रहा था तो हमने दरवाजे की कुंडी तोड़कर देखा तो वे पंखे से लटके मिले. सर्वेश ने बताया हमने आनन-फानन में चाकू मंगाया और रस्सी को काटकर शेव नीचे उतारा. रस्सी कितने टुकड़े में कांटा यह याद नहीं है. सर्वेश ने बताया कि हमें लग रहा था कि महाराज जी जिंदा होंगे, लेकिन जब कोई हलचल नहीं हुई तो हम ने पुलिस को फोन किया. 15 से 20 मिनट में पुलिस वहां आ गई फिर उसने पूरी कार्रवाई की.

Mahant Narendra Giri Death: शक के दायरे में सुरक्षा ड्यूटी में तैनात 11 पुलिसकर्मी, गिर सकती है गाज

महंत नरेंद्र  गिरि की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की वाई श्रेणी की सुरक्षा में तैनात सभी 11 पुलिसकर्मियों से पूछताछ होगी उनकी भूमिका की भी जांच होगी कि मौत के वक्त सभी पुलिसकर्मी कहां थे?

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil BHartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत के मामले में सीबीआई जांच (CBI Probe) की सिफारिश उत्तर प्रदेश सरकार ने कर दिया है. महंत नरेंद्र गिरि की मौत हत्या थी या आत्महत्या अब इसकी जांच सीबीआई करेगी. लेकिन महंत नरेंद्र गिरि की मौत के पीछे कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं, उसमें से एक यह है कि उन्हें सरकार की तरफ से वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी और उनके लिए 11 सुरक्षाकर्मी 24 घंटों तैनात रहते थे. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि अगर महंत नरेंद्र गिरि ने फांसी लगाई तो वे उस वक्त कहां थे.

फ़िलहाल पुलिस ने उनकी सुरक्षा में लगे गनर अजय सिंह, मनीष शुक्ल समेत चार सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की है. बताया जा रहा है कि पुलिस अन्य सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ कर सकती है. महंत नरेंद्र गिरि की वाई श्रेणी की सुरक्षा में तैनात सभी 11 पुलिसकर्मियों से पूछताछ होगी उनकी भूमिका की भी जांच होगी कि मौत के वक्त सभी पुलिसकर्मी कहां थे? बता दें कुछ पुलिसकर्मी एस्कॉर्ट में तैनात होते हैं जबकि कुछ मौके पर सुरक्षा में रहते हैं. कुछ की तैनाती आश्रम के अंदर रहती है. अब यह भी जांच की जा रही है कि घटना के वक्त पुलिसकर्मी कहां थे.

हो सकती है कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक भूमिका संदिग्ध होने पर सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर लापरवाही बरतने के आरोप पर कार्रवाई भी हो सकती है. बता दें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार स्वामी आनंद गिरि ने भी उनकी सुरक्षा में तैनात गनर अजय सिंह और मनीष शुक्ल पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि गुरूजी आत्महत्या नहीं कर सकते. उनकी हत्या कर उन्हें फंसाया जा रहा है. इस पूरी साजिश में गनर अजय सिंह और मनीष शुक्ल शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा था कि महारज जी ने मनीष शुक्ल की शादी करवाई थी और पांच से सात करोड़ रुपये घर बनवाने के लिए भी दिया था.

महंत नरेंद्र गिरि ने ही 5-6 दिनों में लिखा सुसाइड नोट, अब बस फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

महंत नरेंद्र गिरि सुसाइड पर अखाड़ा परिषद को संदेह है.

Mahant Narendra Giri Suicide Case: सूत्रों के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या का मन बना चुके थे और उन्होंने 5-6 दिनों में उन्होंने धीरे-धीरे सुसाइड नोट लिखा, जिसमें कई सारी बातों का जिक्र किया.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है. पुलिस (Police) के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक जिस सुसाइड नोट को फर्जी बताया जा रहा है, उसे खुद महंत नरेंद्र गिरि ने ही लिखा है. सूत्रों के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या का मन बना चुके थे और उन्होंने 5-6 दिनों में उन्होंने धीरे-धीरे सुसाइड नोट लिखा, जिसमें कई सारी बातों का जिक्र किया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि अब सिर्फ फॉरेंसिक रिपोर्ट की औपचारिकता का ही इंतजार है. रिपोर्ट आते ही साफ हो जाएगा कि महंत नरेंद्र गिरि ने खुद ही सुसाइड नोट लिखा था.

गौरतलब है कि आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार स्वामी आनद गिरि के साथ ही अखाड़े से जुड़े कई साधु-संतों ने सुसाइड नोट पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि महंत नरेंद्र गिरि मुश्किल से अपने हस्ताक्षर कर पाते थे, ऐसे में सात पन्नों का सुसाइड नोट वे कैसे लिख सकते हैं? हालांकि पुलिस अपने स्तर से इस बात से संतुष्ट नजर आ रही है कि सुसाइड नोट की लिखावट महंत नरेंद्र गिरि की है और फॉरेंसिक रिपोर्ट आते ही इस बात की पुष्टि भी हो जाएगी.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फांसी लगाने से मौत की बात
बुधवार को महंत नरेंद्र गिरि का एसआरएन अस्पताल में पांच डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फांसी लगने की वजह से मौत की पुष्टि हुई. उनके गले पर वी का निशान मिला, जो कि फांसी लगने की पुष्टि करता है. हालांकि उनके विसरा को सुरक्षित रखा गया है. पोस्टमॉर्टम के बाद महंत नरेंद्र गिरि को संत परम्परा के मुताबिक श्री मठ बाघंबरी गद्दी में भू-समाधि दे दी गई. इस मौके पर देश भर के साधु-संत और अनुयायी उनके दर्शन के लिए उमड़े.

महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट विवाद पर मामा ने कहा- अनपढ़ नहीं थे, 10वीं तक की थी पढ़ाई

Prayagraj News: प्रयागराज में 20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि अपने बाघंबरी मठ में मृत पाए गए थे. (File photo)

Mahant Narendra Giri Death Case: उनके मामा प्रो महेश सिंह के मुताबिक नरेंद्र गिरि ने हाई स्कूल की परीक्षा उनके साथ ही रहकर पाप के स्कूल से की थी. जब वे इंटर की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनकी बैंक में नौकरी लगी और उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil BHartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के सुसाइड नोट को लेकर न्यूज़ 18 ने बड़ा खुलासा किया है. महंत नरेंद्र गिरि के मामा प्रो महेश सिंह ने कहा है कि महंत नरेंद्र गिरी पढ़े लिखे थे. वे पढ़ना-लिखना दोनों जानते थे. प्रो महेश सिंह के मुताबिक 1978 में सरयू प्रसाद इंटर कालेज आमीपुर गिर्दकोट हंड़िया प्रयागराज से उन्होंने 10वीं पास की थी. उनके मामा प्रो महेश सिंह के मुताबिक, नरेंद्र गिरि ने हाई स्कूल की परीक्षा उनके साथ ही रहकर स्कूल से की थी. जब वे इंटर की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनकी बैंक में नौकरी लगी और उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. उन्हें धार्मिक ग्रंथ भी पढ़ना आता था. वे रामायण भी पढ़ते थे.

न्यूज़18 से बातचीत में प्रो महेश सिंह ने कहा कि जो लोग कई दिन से कह रहे हैं कि उन्हें पढ़ना लिखना नहीं आता था वे सरासर गलत हैं. पिछले तीन दिनों से यह इसे सुनकर आहत हूं. उन्हें पढ़ना भी आता था और लिखना भी आता था. प्रो महेश सिंह ने कहा कि उनकी राइटिंग जरूर खराब थी. महेश सिंह ने कहा कि जो लोग उनके सुसाइड नोट पर सवाल खड़े कर रहे हैं उन्हें सच नहीं मालूम है. हालांकि उन्होंने कहा कि वे महंत नरेंद्र गिरी हैंड राइटिंग नहीं पहचानते.

2001 में उनके संन्यासी बनने की बात पता चली 
महेश सिंह ने कहा कि जब उनकी शादी की बात चल रही थी तो वे अचानक से गायब हो गए. इसके बाद 2001 कुंभ में प्रयागराज आए तो कहीं से मेरा नंबर लेकर मुझे फ़ोन किया और कहा मैं महंत नरेंद्र गिरि बोल रहा हूं. इस पर मैंने कहा कि मैं किसी नरेंद्र गिरि को नहीं जानता. फिर उन्होंने कहा कि मैं गुड्डू (बचपन का नाम) बोल रहा हूं.

इसके बाद नरेंद्र गिरि ने बताया कि उन्होंने संन्यास ले लिया है और संन्यासी आखिरी प्रक्रिया के लिए मां और नानी की भिक्षा जरूरी है. जिसके बाद मैंने घर का रास्ता बताया और वे आए थे. प्रोफेसर महेश सिंह ने बताया कि उनकी उनसे अक्सर बात होती रहती थी. अभी 14 सितंबर को ही मेरी पुस्तक का विमोचन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करवाने को लेकर हुई थी. उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरी समाजसेवी भी थे. वे गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए किताबें और फीस भी देते थे.

Mahant Narendra Giri Suicide: योगी सरकार ने की नरेंद्र गिरि मौत मामले में CBI जांच की सिफारिश

उत्तर प्रदेश सरकार ने अब महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश की है.

Mahant Narendra Giri Death: उत्तर प्रदेश के गृह मंत्रालय ने केंद्र सरकार को केंद्रीय जांच एजेंसी से मामले की पड़ताल करने को लेकर की सिफारिश, बुधवार को ही आई थी कि नरेंद्र गिरि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट.

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लखनऊ. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्‍थी सुलझाने के लिए अब योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है और निष्पक्ष जांच को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश की है.

गौरतलब है कि नरेंद्र गिरी की मौत के मामले में लगातार सवाल उठ रहे थे और कई राजनेताओं से लेकर संत समाज से जुड़े लोग भी इसे आत्महत्या का मामला मानने से इनकार कर रहे थे. साथ ही इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग कर रहे थे.

तीन आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
नरेंद्र गिरि मौत के मामले में पुलिस ने अभी तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. नरेंद्र गिरि के मिले सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी को मौत का जिम्मेदार बताया गया था. सुसाइड नोट में लिखा गया था कि ये तीनों ब्लैकमेल कर रहे हैं और मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहे हैं. नरेंद्र गिरि ने तीनों को अपनी मौत का जिम्मेदार सुसाइड लैटर में बताया था जिसके आधार पर यूपी पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था.

नहीं मिले चोट के निशान
वहीं सीजेएम कोर्ट में पेश की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं उनकी मौत दम घुटने के कारण ही हुई है. रिपोर्ट में हैंगिंग की बात भी आई है. उनके गले पर वी शेप का निशान पाया गया है जो फंदा लगाने के कारण ही आता है. ऐसे में पुलिस कुछ हद तक स्पष्ट है कि नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है और उनकी मौत फंदे से लटकने के कारण ही हुई है.

समय भी चला पता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि की मौत दोपहर में 3 से साढ़े तीन बजे के बीच हुई है. इससे स्पष्ट है कि खाना खाने के बाद आराम करने गए नरेंद्र गिरि ने पहले वीडियो बनाया और उसके बाद सुसाइड नोट लिख कर आत्महत्या कर ली. काफी देर तक जब वे बाहर नहीं आए तो उनके शिष्यों ने दरवाजा तोड़कर देखा तो गिरि पंखे में रस्सी डालकर फंदे से लटके हुए थे. इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया. लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

Mahant Narendra Suicide: मरने से पहले महंत गिरि ने बनाया था Video, लिया था आनंद, आद्या और संदीप का नाम

महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में पुलिस अब तक तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.

Mahahnt Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरी ने फंदा लगाने से पहले अपने मोबाइल में एक वीडियो भी बनाया था. इस वीडियो में उन्होंने आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी का नाम लिया था. उन्होंने कहा कि इन्होंने मुझे आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया.

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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में बुधवार को बड़ा खुलासा हुआ. पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में महंत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ ही उनके मोबाइल में मिले एक वीडियो के बारे में भी जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि नरेंद्र गिरि ने मरने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था और इस वीडियो में उन्होंने तीनों आरोपियों आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी का नाम लिया था. उन्होंने वीडियो में कहा था कि इन लोगों ने मुझे आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया.
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब उस मोबाइल को सील कर दिया गया है और वीडियो पुलिस के पास सुरक्षित है क्योंकि वो एक अहम सबूत है.

नहीं मिले चोट के निशान
वहीं सीजेएम कोर्ट में पेश की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं उनकी मौत दम घुटने के कारण ही हुई है. रिपोर्ट में हैंगिंग की बात भी आई है. उनके गले पर वी शेप का निशान पाया गया है जो फंदा लगाने के कारण ही आता है. ऐसे में पुलिस कुछ हद तक स्पष्ट है कि नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है और उनकी मौत फंदे से लटकने के कारण ही हुई है.

समय भी चला पता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि की मौत दोपहर में 3 से साढ़े तीन बजे के बीच हुई है. इससे स्पष्ट है कि खाना खाने के बाद आराम करने गए नरेंद्र गिरि ने पहले वीडियो बनाया और उसके बाद सुसाइड नोट लिख कर आत्महत्या कर ली. काफी देर तक जब वे बाहर नहीं आए तो उनके शिष्यों ने दरवाजा तोड़कर देखा तो गिरि पंखे में रस्सी डालकर फंदे से लटके हुए थे. इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया. लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

संदीप तिवारी गिरफ्तार
वहीं बुधवार को ही यूपी पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले के तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गिरफ्तार कर लिया है. संदीप लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी का बेटा है. गौरतलब है कि पुलिस ने मामले में आनंद गिरि और आद्या तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी आनंद गिरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

Haridwar News: आनंद गिरि का आश्रम दूसरी बार हुआ सील, दर्ज हो सकती है FIR

अवैध निर्माण के चलते आनंद गिरि के हरिद्वार स्थित आश्रम को सील कर दिया गया है.

Uttarakhand News: अवैध निर्माण के चलते पहले भी रुड़की विकास प्राधिकरण ने मई में किया था सील, लेकिन नहीं रोका गया निर्माण कार्य, अब फिर कार्रवाई करते हुए कर दिया गया सील.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 20:01 IST
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हरिद्वार. महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपी आनंद गिरि की मुश्किलें कम नहीं होती दिख रही हैं. गिरफ्तारी के बाद आनंद गिरी पर एक और परेशानी आ गई है. आनंद गिरि का हरिद्वार स्थित आश्रम को सील कर दिया गया है. ये आश्रम श्यामपुर में स्थित है और इसको सील करने की ये दूसरी बार हुई कार्रवाई है. बताया जा रहा है कि ये कार्रवाई रुड़की प्राधिकरण ने की है. बताया जा रहा है कि इस आश्रम में अवैध निर्माण हो रहा था जिसकी शिकायत मिलने पर प्राधिकरण ने मई में इसे सील किया था. लेकिन बताया जा रहा है कि इसके बाद भी आश्रम में अवैध निर्माण को नहीं रोका गया और अंदर लगातार कंस्ट्रक्‍शन होता रहा.
इस बात की जानकारी मिलने पर रुड़की विकास प्राधिकरण ने इसे बुधवार को एक बार फिर सील कर दिया. वहीं अब बताया जा रहा है ‌कि आश्रम संचालक और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ अब प्राधिकरण एफआईआर भी दर्ज करवा सकता है.

संगठन से भी बाहर हुआ आनंद
वहीं नरेंद्र गिरी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी आनंद गिरी को अब युवा साधु संतों के संगठन युवा भारत साधु समाज ने भी अपने संगठन से निकाल दिया है. हरिद्वार स्थित गरीब दास आश्रम में बुधवार को बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक के दौरान संगठन ने कार्रवाई करते हुए आनंद गिरी को संगठने से निष्कासित कर दिया. आनंद गिरि संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर था, उसे इस पद से अब हटा दिया गया है.

14 दिन की न्यायिक हिरासत
वहीं महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में आरोपी आनंद गिरी को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया. गौरतलब है कि नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किया था.

Mahant Giri Suicide: महंत नरेंद्र आत्महत्या मामले में आनंद गिरि को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

महंत नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड लैटर में आनंद पर ब्लैकमेल करने और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का अरोप लगाया था.

Mahant Narendra Giri Death: हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया था आनंद गिरि को, महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड लैटर में आनंद गिरि पर लगाया था मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप.

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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में आरोपी आनंद गिरी की न्यायिक हिरासत को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया. आज सीजेएम कोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश हुई, जिसे सीजेएम हरेंद्र नाथ ने देखा. जानकारी के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की बात सामने आई है. अपराध की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया. आरोपी आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

5 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी. एसआईटी अध्यक्ष सीओ अजीत सिंह चौहान, विवेचक इंस्पेक्टर महेश सिंह समेत टीम कोर्ट में मौजूद रही. विवेचक ने कोर्ट में मृतक के दो मोबाइल, चाकू, नायलान की रस्सी और सुसाइड नोट पेश किया. साक्ष्यों को देखने के बाद सीजेएम के आदेश पर सील कर दिया गया. डीजीसी क्रिमिनल गुलाब चंद्र अग्रहरि ने ये जानकारी दी.

गौरतलब है कि नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किया था. आनंद गिरि उस दौरान अपने आश्रम में था और उत्तराखंड पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था. बाद में यूपी पुलिस की एक टीम ने पहुंच कर उसे गिरफ्तार कर यूपी लाई थी.

आनंद का आश्रम भी सील
वहीं हरिद्वार स्थित आनंद गिरि का आश्रम सील कर दिया गया है. श्यामपुर स्थित इस आश्रम पर ये दूसरी बार कार्रवाई हुई है. बताया जा रहा है कि रुड़की विकास प्राधिकरण ने ये सीलिंग की कार्रवाई की है. प्राधिकरण ने अवैध निर्माण के चलते मई में भी आश्रम को सील कर दिया था. इसके बावजूद यहां पर निर्माण कार्य चलता रहा. अब एक बार फिर आश्रम को सील कर दिया गया है. वहीं बताया जा रहा है कि नियमों के उल्लंघन पर अब एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है.

नरेंद्र गिरि को दी गई समाधि
वहीं बुधवार को ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघम्बरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्री मठ बाघंबरी गद्दी में उनके गुरु के बगल में भू-समाधि दे दी गई. महंत नरेंद्र गिरि पद्मासन मुद्रा में ब्रह्मलीन हुए. अब एक साल तक यह समाधि कच्ची ही रहेगी. इस पर शिवलिंग की स्थापना कर रोज पूजा अर्चना की जाएगी. इसके बाद समाधि को पक्का बनाया जाएगा.

आज गमगीन माहौल में महंत नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई. उन्हें पद्मासन मुद्रा में समाधि दी गई है. उन्हें योग की मुद्रा में बैठाया गया. इसके बाद मिट्टी, चंदन, इत्र डाला गया. यही नहीं गुलाब की पत्तियों से पूरे समाधि स्थल को भरा गया.

Mahant Narendra Suicide: आनंद और आद्या के बाद संदीप तिवारी को भी किया गिरफ्तार

महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में संदीप की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस को कुछ अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है.

Mahahnt Narendra Giri Death: आनंद गिरि और लेटे हनुमान जी मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी की गिरफ्तारी के बाद अब यूपी पुलिस ने तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गिरफ्तार कर लिया है. संदीप आद्या तिवारी का बेटा है.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के आत्महत्या मामले में अब यूपी पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले के तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गिरफ्तार कर लिया है. संदीप लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी का बेटा है. गौरतलब है कि पुलिस ने मामले में आनंद गिरि और आद्या तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. उल्लेखनीय है कि महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में खुद की मौत के लिए जिम्मेदार आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को बताया था.
नरेंद्र गिरि ने लिखा था कि तीनों उन्हें ब्लैकमेल करते हैं और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते हैं. साथ ही उन्होंने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से इन तीनों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की थी.

14 दिन की न्यायिक हिरासत में आनंद
वहीं महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में आरोपी आनंद गिरी की न्यायिक हिरासत को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया. गौरतलब है कि नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किया था.

संगठन से भी बाहर हुआ आनंद
वहीं नरेंद्र गिरी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी आनंद गिरी को अब युवा साधु संतों के संगठन युवा भारत साधु समाज ने भी अपने संगठन से निकाल दिया है. हरिद्वार स्थित गरीब दास आश्रम में बुधवार को बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक के दौरान संगठन ने कार्रवाई करते हुए आनंद गिरी को संगठने से निष्कासित कर दिया. आनंद गिरि संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर था, उसे इस पद से अब हटा दिया गया है.

UPMSCL Recruitment 2021: यूपी में स्नातक पास अभ्यर्थियों के लिए निकली है नौकरियां, जानें डिटेल

UPMSCL Recruitment 2021: पदों के लिए 30 सितंबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं.

UPMSCL Recruitment 2021: यूपी चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड ने विभिन्न पदों के लिए भर्तियां निकाली हैं. इन पदों के लिए अभ्यर्थी निर्धारित अंतिम तिथि तक आवेदन कर सकते हैं. अभ्यर्थियों का चयन इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 18:01 IST
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नई दिल्ली (UPMSCL Recruitment 2021). उत्तर प्रदेश चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड (Uttar Pradesh Medical Supplies Corporation Limited) ने फार्मासिस्ट सहित विभिन्न पदों पर भर्तियां (UPMSCL Recruitment 2021) निकाली हैं. इन पदों के लिए 6 सितंबर 2021 से आवेदन की प्रक्रिया जारी है. अभ्यर्थी इन पदों के लिए 30 सितंबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं.

अभ्यर्थी इस भर्ती से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन को देख सकते हैं. चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति प्रदेश के विभिन्न जिलों में रिक्त पदों पर की जाएगी.

UPMSCL Recruitment 2021: रिक्त पदों की संख्या
असिस्टेंट मैनेजर (वेयरहाउस) सप्लाई चेन – 3 पद
बायोमेडिकल इंजीनियर (क्वालिटी कंट्रोल) – 1 पद
पर्सनल असिस्टेंट (मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिशनल मैनेजिंग डायरेक्टर) – 2 पद
फार्मासिस्ट (ड्रग प्रोक्योरमेंट) – 2 पद
ऑफिस असिस्टेंट – 3 पद
कंपनी सचिव – 1
जनरल मैनेजर –  1
मैनेजर – 1
मैनेजर (एचआर) – 1
मैनेजर (लीगल) – 1

UPMSCL Recruitment 2021: शैक्षणिक योग्यता
कंपनी सचिव पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास सीएस की डिग्री होनी चाहिए. जनरल मैनेजर पद के लिए अभ्यर्थी के पास बीटेक की डिग्री होनी चाहिए. पर्सनल असिस्टेंट और ऑफिस असिस्टेंट पद के लिए अभ्यर्थी का कंप्यूटर स्ट्रीम में ग्रेजुएशन होना अनिवार्य हैं.

UPMSCL Recruitment 2021: आयु सीमा
इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी की उम्र 40 वर्ष से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए. अभ्यर्थियों के आयु गणना 31 जुलाई 2021 से की जाएगी.

UPMSCL Recruitment 2021: चयन प्रक्रिया
इन पदों पर अभ्यर्थियों का चयन इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा. अंतिम चयन इंटरव्यू के आधार पर तैयार की गई मेरिट लिस्ट के जरिए किया जाएगा.

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UPMSCL Recruitment 2021: इन तिथियों का रखें ध्यान
आवेदन शुरू होने की तिथि – 6 सितंबर 2021
आवेदन की अंतिम तिथि- 30 सितंबर 2021

यहां देखें नोटिफिकेशन

महंत नरेंद्र गिरि सुसाइड पर अखाड़ा परिषद को संदेह: अब संत करेंगे जांच, 16 दिन बाद फैसला

महंत नरेंद्र गिरि सुसाइड पर अखाड़ा परिषद को संदेह है.

Mahant Narendra Giri Death Investigation: महंत नरेंद्र गिरि की मौत को अखाड़ा परिषद भी संदिग्ध मानते हुए इसकी अपने स्तर से जांच शुरू करने जा रहा है. संतों की ओर से कहा गया है कि 16 दिन बाद सोलसी भंडारे का आयोजन किया जाएगा. भंडारे के बाद इस पर इस पर चर्चा की जाएगी.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परि​षद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) खुदकुशी मामले में अब अखाड़ा परिषद (Akhara Parishad) की ओर से बड़ा बयान सामने आया है. महंत नरेंद्र गिरि की मौत को अखाड़ा परिषद भी संदिग्ध मानते हुए इसकी अपने स्तर से जांच शुरू करने जा रहा है. संतों की ओर से कहा गया है कि 16 दिन बाद सोलसी भंडारे का आयोजन किया जाएगा. भंडारे के बाद इस पर इस पर चर्चा की जाएगी. अखाड़ा परिषद की ओर से कहा गया है कि 16 दिन बाद शायद सरकारी जांच से भी कुछ जानकारी सामने आ जाएगी.

महंत नरेंद्र गिरि का शव फंदे पर लटका मिलने और सुसाइड नोट सामने आने के बाद कई तरह के सवाल शुरू से ही उठते रहे हैं. पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को महंत नरेंद्र गिरि का भू समाधि दिए जाने के बाद भी तस्वीर साफ नहीं है. इसी बीच बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी घोषित करने पर फैसला भी टाल दिया गया है. इसको लेकर निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वरकी बैठक 25 सितंबर के बाद होगी, जिसमें मठ के उत्तराधिकारी का फैसला हो गा. निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वरों की बैठक में उत्तराधिकारी घोषित करने पर निर्णय किए जाने की बात कही गई है.

महंत नरेंद्र गिरि ने जो सुसाइड नोट छोड़ा है उसमें बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाने की बात लिखी गई. जबकि निरंजनी अखाड़े के सचिव रवीन्द्र पुरी ने सुसाइड लेटर को ही फर्जी बताया है.

महंत को दी गई अंतिम विदाई

गमगीन माहौल में महंत नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई. उन्हें पद्मासन मुद्रा में समाधि दी गई है. उन्हें योग की मुद्रा में बैठाया गया. इसके बाद मिट्टी, चंदन, इत्र डाला गया. यही नहीं गुलाब की पत्तियों से पूरे समाधि स्थल को भरा गया.

इस दौरान बड़े-बड़े संतों ने अपनी अंतिम विदाई दी. पूरी वैदिक परंपरा और सनातन धर्म की परंपरा के मुताबिक उन्हें अंतिम विदाई दी गई. हालांकि अभी भी उनकी मौत की जांच लगातार चल रही है, कई किरदार सामने आए हैं. कई किरदार सामने आने बाकी हैं लेकिन इस बीच उनके भक्तों ने उनके शिष्यों ने और संतों ने उन्हें पूरी सनातन धर्म की परंपरा के साथ अंतिम विदाई दी.

महंत के शिष्य बलबीर गिरि, जिन्हें उन्होंने उत्तराधिकारी बनाया, वह भी इस दौरान मौजूद रहे. सभी संतों के चेहरों पर गम दिखा यही नहीं उनके मन में गुस्सा भी दिखाई दे रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? कई संतों का कहना था कि जो उनकी समाज के अगुआ थे, अपनी बातों को प्रखर तरीके से रखे थे. आखिर ऐसी घटना क्यों हुई?

UP Education News: यूपी में 8वीं कक्षा का हेडमास्टर बनने के लिए देनी होगी परीक्षा, जानें डिटेल

UP Education News: यूपी में 8वीं तक रिक्त हेडमास्टर के पदों को जल्द भरा जाएगा.

UP Education News: यूपी में जल्द ही प्राथमिक स्कूलों में हेडमास्टर के रिक्त पदों को भरा जाएगा. राज्य सरकार इस वर्ष के अंत तक इन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी करेगी.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 17:39 IST
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नई दिल्ली (UP Education News).  यूपी में कक्षा 8वीं का हेडमास्टर बनने के लिए अब नियुक्त सरकारी शिक्षकों को परीक्षा देनी होगी. प्रदेश में हजारों की संख्या में प्राथमिक और 8वीं तक के हेडमास्टरों के पद रिक्त हैं. इन रिक्त पदों को राज्य सरकार इस वर्ष तक भरेगी. वहीं कुछ रिक्त पदों पर निर्धारित किए गए मानकों के आधार पर पदोन्नति भी की जाएगी.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 1.59 लाख प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के 52,317 पद रिक्त हैं, इनमें 30,426 पद जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापकों के शामिल हैं.

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इस आधार पर भरे जाएंगे रिक्त पद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हेडमास्टरों के रिक्त पदों पर 40 फीसदी नियुक्ति विभागीय परीक्षा के जरिए की जाएगी, जबकि 60 फीसदी पदों पर निर्धारित किए गए मानकों के आधार पर पदोन्नति के जरिए भरा जाएगा. केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार के इस वर्ष के अंत तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया है. वहीं वार्षिक कार्य योजना की बैठक में केंद्र सरकार के प्रदेश सरकार ने लिखित रूप से आश्वासन दिया है कि वह इन रिक्त पदों को विभागीय परीक्षाओं व मानकों के आधार पर प्रोन्नति देकर प्राथमिकता के आधार पर भरेगा.

ब्रह्मलीन हुए महंत नरेंद्र गिरि, बाघम्बरी मठ में दी गई भू-समाधि, जानिए पूरा विधि-विधान

महंत नरेंद्र गिरी को दी गई अंतिम विदाई

Prayagraj News: बाघम्बरी मठ में महंत नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई. उन्हें पद्मासन मुद्रा में समाधि दी गई है. उन्हें योग की मुद्रा में बैठाया गया. इसके बाद मिट्टी, चंदन, इत्र डाला गया. यही नहीं गुलाब की पत्तियों से पूरे समाधि स्थल को भरा गया.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघम्बरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के पार्थिव शरीर को मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्री मठ बाघंबरी गद्दी में उनके गुरु के बगल में भू-समाधि दे दी गई. महंत नरेंद्र गिरि पद्मासन मुद्रा में ब्रह्मलीन हुए. अब एक साल तक यह समाधि कच्ची ही रहेगी. इस पर शिवलिंग की  स्थापना कर रोज पूजा अर्चना की जाएगी. इसके बाद समाधि को पक्का बनाया जाएगा.

आज गमगीन माहौल में महंत नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई. उन्हें पद्मासन मुद्रा में समाधि दी गई है. उन्हें योग की मुद्रा में बैठाया गया. इसके बाद मिट्टी, चंदन, इत्र डाला गया. यही नहीं गुलाब की पत्तियों से पूरे समाधि स्थल को भरा गया.

इस दौरान बड़े-बड़े संतों ने अपनी अंतिम विदाई दी. पूरी वैदिक परंपरा और सनातन धर्म की परंपरा के मुताबिक उन्हें अंतिम विदाई दी गई. हालांकि अभी भी उनकी मौत की जांच लगातार चल रही है, कई किरदार सामने आए हैं. कई किरदार सामने आने बाकी हैं लेकिन इस बीच उनके भक्तों ने उनके शिष्यों ने और संतों ने उन्हें पूरी सनातन धर्म की परंपरा के साथ अंतिम विदाई दी.

महंत के शिष्य बलबीर गिरि, जिन्हें उन्होंने उत्तराधिकारी बनाया, वह भी इस दौरान मौजूद रहे. सभी संतों के चेहरों पर गम दिखा यही नहीं उनके मन में गुस्सा भी दिखाई दे रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? कई संतों का कहना था कि जो उनकी समाज के अगुआ थे, अपनी बातों को प्रखर तरीके से रखे थे. आखिर ऐसी घटना क्यों हुई?

श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में उनके गुरु भगवान गिरी की समाधि के बगल में नींबू के पेड़ के नीचे उन्हें भू-समाधि दी गई. संत परम्परा के मुताबिक वैदिक मंत्रोचार और पूजन के साथ भू-समाधि की रस्में निभाई गर्इं. महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को पद्मासन की मुद्रा में विधि-विधान से पूजन के बाद समाधिस्थ किया गया. नम आंखों से शिष्यों, अनुयायियों और साधु संतों ने पुष्प वर्षा कर उन्हें अंतिम विदाई दी.

एक वर्ष तक नियमित पूजा अर्चना कर समाधि स्थल को जागृत किया जाएगा. इसके बाद यहां पर पक्की समाधि का निर्माण कर शिव‌लिंग और महंत नरेंद्र गिरि की भव्य प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी.

जानिए कब क्या हुआ

सुबह 7 बजे महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए शव वाहन में एसआरएन अस्पताल ले जाया गया.

पोस्टमार्टम के बाद दोबारा शव श्री मठ बाघम्बरी गद्दी लाया गया. जिसके बाद फूलों से सजे एक विशेष वाहन से शव यात्रा गाजे बाजे के साथ निकाली गई.

शव यात्रा संगम तट पर पहुंची, जहां पर त्रिवेणी के जल से उन्हें स्नान कराया गया.

इसके बाद पार्थिव शरीर बड़े हनुमान मंदिर लाया गया.

यहां पर विशेष विमान में ही आरती उतारी गई और मंदिर के जल का छिड़काव किया गया, जिसके बाद पार्थिव शरीर श्री मठ बाघम्बरी गद्दी लाया गया. जहां पर महंत नरेंद्र गिरि को ब्रह्मलीन होने पर समाधि दी गई.

इस मौके पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरी, निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मा चारी, निरंजनी अखाड़े के सचिव रवीन्द्र पुरी, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव यमुनापुरी, जूना अखाड़े के प्रवक्ता नारायण गिरी समेत कई अन्य अखाड़ों के महंत और श्री महंत मौजूद रहे. इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी महंत नरेंद्र गिरि ने अंतिम दर्शन किए.

क्‍या एक लड़की की फोटो रही नरेंद्र गिरि की आत्महत्या की वजह, पढ़िए सुसाइड नोट में आनंद गिरि पर लगाया क्या आरोप?

महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में स्वामी आनंद गिरि को मौत का जिम्मेदार ठहराया है.

Mahant Narendra Giri Suicide Note: महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में लिखा है कि 'हरिद्वार से सूचना मिली कि आनंद एक लड़की के साथ मेरा फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए फोटो वायरल करने वाला है. वह मुझे बदनाम कर देगा, मैं किस-किस को सफाई दूंगा. इससे बेहतर मर जाना है.'

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 17:05 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के सुसाइड नोट (Suicide Note) से इस बात का खुलासा हुआ है कि उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम इसलिए उठाया, क्योंकि उनका शिष्य स्वामी आनंद गिरि उनकी फाेटो के सााथ छेड़छाड़ कर एक लड़की के साथ जोड़कर उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था. महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैंने पूरा जीवन सम्मान से जिया है. अगर ये फोटो बाहर आ जाएगी तो मैं समाज में सम्मान से जी नहीं पाऊंगा. इससे बेहतर मर जाना है. सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि 13 सितंबर को भी खुदकुशी की कोशिश की थी.

पुलिस के पास मौजूद सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है क‍ि “आनंद गिरि के कारण आज मैं विचलित हो गया. हरिद्वार से सूचना मिली कि आनंद कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरा फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए फोटो वायरल करने वाला है. वह मुझे बदनाम करने जा रहा है. मैंने सोचा कि एक बार बदनाम हो गया तो कहां-कहां सफाई दूंगा. बदनाम हो गया तो जिस पद पर हूं उसकी गरिमा चली जाएगी. इससे अच्छा तो मर जाना ठीक है. मेरे मरने के बाद सच्चाई तो सामने आ ही जाएगी. आगे नरेंद्र गिरि ने लिखा कि मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज मैं कैसे रहूंगा, इससे अच्छा मर जाना ठीक रहेगा.

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सामने आया महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट

“13 सितंबर को ही करने वाला था आत्महत्या”
महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वे 13 सितंबर को ही आत्महत्या करने वाले थे. लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया. आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है, तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है. तीनों आरोपियों के नाम के साथ लिखा है कि मैं पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से प्रार्थना करता हूं कि इन तीनों के साथ कानूनी कार्रवाई की जाए, जिससे मेरी आत्मा को शांति मिल सके.

बलवीर गिरि को बनाया उत्तराधिकारी
महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में शिष्य बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाया है. महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि प्रिय बलवीर ‌गिरि मठ मंदिर की व्यवस्‍था का प्रयास करना, जिस तरह से मैं किया करता था. साथ ही उन्होंने अपने कुछ शिष्यों का ध्यान रखने की भी बात कही. इसके साथ उन्होंने महंत हरी गोविंद पुरी के लिए उन्होंने लिखा कि आप से निवेदन है कि मढ़ी का महंत बलवीर गिरि को ही बनाना. साथ ही महंत रविन्द्र पुरी जी के लिए उन्होंने लिखा कि आप ने हमेशा साथ दिया है, मेरे मरने के बाद भी मठ की गरिमा को बनाए रखना.

Mahant Giri Suicide: निरंजनी अखाड़े के सचिव रविंद्र ने सुसाइड लैटर को बताया फर्जी, बलवीर के उत्तराधिकारी बनने पर विवाद

निरंजनी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट फर्जी है. (फाइल फोटो)

Mahant Narendra Giri Death: पंच परमेश्वर की बैठक में नहीं हुआ महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी पर फैसला, अब 25 सितंबर के बाद होगी अगली बैठक.

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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या के मामले में बुधवार को नया मोड़ आ गया. प्रयागराज में हुई पंच परमेश्वर की बैठक में महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट को फर्जी करार दिया गया. इसके साथ ही उनके उत्तराधिकारी को घोषित करने की बात पर भी विवाद खड़ा हो गया. निरंजनी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी ने सुसाइड लैटर को फर्जी बताते हुए उत्तराधिकारी की घोषणा करने से मना कर दिया. अब संत बलवीर के उत्तराधिकारी बनने पर फैसला टल गया है. अब बैठक के लिए अगली तारीख 25 सितंबर घोषित की गई है. इसी दिन महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी पर फैसला होगा और घोषणा की जाएगी.
हालांकि रविंद्र पुरी ने बलवीर गिरि पर किसी भी तरह का कोई आरोप नहीं लगाया लेकिन उन्होंने सुसाइड लैटर की सत्यता पर सवाल उठाया. गौरलतब है कि बलवीर गिरि भी निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर के सदस्य हैं.

अखाड़ा परिषद भी कर रहा है जांच
इससे पहले अखाड़ा परिषद का एक बड़ा बयान आया है. महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जांच अब अखाड़ा परिषद भी कर रही है. अखाड़ा 16 दिन बाद सोलसी भंडारे का आयोजन करेगा. अखाड़ा परिषद के अनुसार उसके बाद ही जांच के बारे में बात करेंगे और मौत के संबंध में जानकारी भी देंगे. अखाड़ा परिषद का कहना है कि 16 दिन बाद सरकारी जांच के भी परिणाम सामने आने लगेंगे.

नरेंद्र गिरि को दी गई समाधि
वहीं बुधवार को ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघम्बरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्री मठ बाघंबरी गद्दी में उनके गुरु के बगल में भू-समाधि दे दी गई. महंत नरेंद्र गिरि पद्मासन मुद्रा में ब्रह्मलीन हुए. अब एक साल तक यह समाधि कच्ची ही रहेगी. इस पर शिवलिंग की स्थापना कर रोज पूजा अर्चना की जाएगी. इसके बाद समाधि को पक्का बनाया जाएगा.

आज गमगीन माहौल में महंत नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई. उन्हें पद्मासन मुद्रा में समाधि दी गई है. उन्हें योग की मुद्रा में बैठाया गया. इसके बाद मिट्टी, चंदन, इत्र डाला गया. यही नहीं गुलाब की पत्तियों से पूरे समाधि स्थल को भरा गया.

ब्रह्मलीन हुए महंत नरेंद्र गिरि, विधि-विधान के साथ बाघंबरी मठ में दी गई भू-समाधि

महंत नरेंद्र गिरि को आज दोपहर में दी जाएगी  समाधि

Narendra Giri Death Case: जानकारी के मुताबिक पोस्टमॉर्टम के बाद आज ही महंत नरेंद्र गिरि को मठ बाघंबरी गद्दी में ही भू-समाधी दी जाएगी. अपने सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि में लिखा है कि उन्हें उनके गुरु की समाधि के बगल में ही स्थित नींबू के पेड़ के पास समाधि दी जाए.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 16:03 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के शव का पोस्टमॉर्टम (Postmortem) बुधवार को सुबह आठ बजे एसआरएन हॉस्पिटल में शुरू हो गया. पांच डॉक्टरों का पैनल द्वारा शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है. पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही यह तय हो पाएगा कि महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की थी या हत्या कर उनके शव को फंदे से टांग दिया गया था. इस बीच आज ही अखाड़ा परिषद की बैठक भी होनी है जिसमें यह तय होगा कि महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी कौन होगा। महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट के मुताबिक उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है. मिल रही जानकारी के मुताबिक पोस्टमॉर्टम के बाद आज ही महंत नरेंद्र गिरि को मठ बाघंबरी गद्दी में ही भू-समाध‍ि दी जाएगी. अपने सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि में लिखा है कि उन्हें उनके गुरु की समाधि के बगल में ही स्थित नींबू के पेड़ के पास समाधि दी जाए. हालांकि पहले यह तय हुआ था कि महंत नरेंद्र गिरि को 23 सितंबर को समाधि दी जाएगी. लेकिन पोस्टमॉर्टम के बाद बॉडी को ज्यादा देर रखना उचित नहीं होता, लिहाजा उन्हें आज ही पूरे विधि विधान के साथ समाधि दी जाएगी. महंत नरेंद्र गिरी के समाधि कार्यक्रम के चलते शिक्षा विभाग ने बुधवार को स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया है.

महंत नरेंद्र गिरि से पहले भी MP के इस संत की हत्या-आत्महत्या के बीच उलझ गई थी कहानी

महंत नरेंद्र गिरि से पहले भी भैय्यू जी महाराज की हत्या या आत्महत्या को लेकर लोग सवाल पूछ रहे थे.

Narendra Giri Death Case: महंत नरेंद्र गिरि की मौत पहला मामला नहीं है, जब देश में किसी संत की खुदकुशी पर सवाल उठे हों. तीन साल पहले भी एमपी के इंदौर में संत और कथावाचक भैय्यू जी महाराज की आत्महत्या को लेकर लोग इस तरह के ही सवाल पूछ रहे थे.

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नई दिल्ली. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघम्बरी पीठ के महंत नरेंद्र गिरि (Narendra Giri Death) की हत्या या आत्महत्या की गुत्थी को सुलझाने में यूपी पुलिस का पूरा महकमा लगा हुआ है. पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में आत्महत्या की बात सामने आ रही है. नरेंद्र गिरि के करीबियों का कहना है कि वह कभी भी आत्महत्या नहीं कर सकते हैं. इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए. आपको बता दें कि यह देश में कोई पहला मामला नहीं है, जब किसी संत की खुदकुशी बताए जाने पर लोगों ने सवाल किया है. तीन साल पहले भी संत और कथावाचक भैय्यू जी महाराज की आत्महत्या को लेकर लोग इसी तरह के सवाल पूछ रहे थे. ऐसे में सवाल उठता है कि दूसरों को ज्ञान और सत्य का मार्ग दिखाने वाले ये साधु-संत खुद क्यों ऐसे मार्ग चुन लेते हैं, जिस पर चलने का लोगों को भी विश्वास नहीं होता है. क्यों संतों की हत्या और आत्महत्या के बीच कहानी उलझ कर रह जाती है?

बीते दो दिनों की तफ्तीश में यूपी पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में महंत नरेंद्र गिरि के एक शिष्य आनंद गिरि और बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी को गिरफ्तार किया है. इस पूरे मामले की तफ्तीश के लिए योगी सरकार ने एसआईटी का भी गठन कर दिया है. मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी ने भी महंत नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा था कि पूरे मामले में एक-एक राज का पर्दाफाश होगा.

प्रसिद्ध संत और कथावाचक भैय्यूजी महाराज ने भी इंदौर स्थित अपने घर में कथित रूप से गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी.

क्यों लोगों को संतों के सुसाइड पर विश्वास नहीं होता?
अयोध्या के पूर्व सांसद और संत रामविलास वेदांती ने महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग की है. राम विलास वेदांती ने कहा कि 12 पन्ने के सुसाइड नोट की भी जांच होनी चाहिए. दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. राम विलास वेदांती का बयान संत समाज बैठक करके आगे का निर्णय लेगा. अयोध्या के संत वेदांती का कहना है कि ऐसे संत नहीं थे जो आत्महत्या कर सकते थे. लिहाजा इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए जिससे दोषी बच ना सकें.

भैय्यू जी महाराज ने भी सुसाइड किया था?
गौरतलब है कि साल 2018 में ही प्रसिद्ध संत और कथावाचक भैय्यू जी महाराज ने भी इंदौर स्थित अपने घर में कथित रूप से गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी. भैय्यू जी तब तक देश के जाने माने संत और कथावाचक बन चुके थे. उनके निधन से भी देशभर में लोग चौंक गए थे. उनकी लाश के पास से ही पिस्टल और सुसाइड नोट बरामद किया गया था. इस मामले की भी सीबीआई से जांच कराने की मांग उठी थी. हालांकि, आज तक इस मौत की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है. इस घटना के सात महीने बाद भैय्यू जी महाराज के दो विश्वस्त सहयोगियों को एक युवती के साथ गिरफ्तार भी किया गया था. कहा जा रहा है कि भैय्यू जी महाराज के नजदीक रही युवती उन पर शादी के लिए कथित रूप से दबाव बना रही थी, जबकि अधेड़ उम्र के आध्यात्मिक गुरु पहले से शादीशुदा थे. उनकी आत्महत्या को लेकर भी परिवार वालों की तरफ से कई तरह के सवाल उठाए गए थे और उस वक्त कई तरह की थ्योरी भी सामने आई थी.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई आदमी आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो दिमाग से निकल जाता है कि वह साधु है संत.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई आदमी आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो दिमाग से निकल जाता है कि वह साधु है संत.

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई आदमी आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो दिमाग से निकल जाता है कि वह साधु है संत. दिमाग से यह भी निकल जाता है कि उसके मौत के बाद लोग उशके बारे में क्या सोचेंगे और क्या विचार रखेंगे? इस स्थिति को मनोचिकित्सक सुसाइडल आइडिएशन कहते हैं यानी लोगों के मनों में आत्महत्या का ख्याल आना शुरू हो जाता है. इसके लिए जरूरी नहीं है कि कोई एक ही वजह हो. कई वजहों से भी इंसान सुसाइड करने के बारे में सोचता है. विशेषज्ञों की राय में जब किसी शख्स को कोई दूसरा रास्ता नहीं मिलता है या यूं कहें कि किसी मुश्किल परिस्थिति से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता है तो वह शख्स अपना जीवन समाप्त कर लेता है या उसके बार में सोचने लगता है.

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सुसाइड की स्थिति आने पर मनुष्य क्या सोचता है?
दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ नवीन कुमार कहते हैं, ‘लोगों के मन में सुसाइड का विचार आना नेचुरल नहीं होता है. उस समय मनुष्य के मस्तिष्क में बायोन्यूरोलॉजिकल बदलावों के चलते लगने लगता है कि जीवन अब किसी काम का नहीं है. हमने जो अर्जित किया है, वह बेकार है. इसके बाद ही व्यक्तियों के मन में आत्महत्या करने का विचार पनपने लगता है. सुसाइड के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामले मानसिक विकार के चलते होते हैं. हालांकि, व्यक्ति के मन में नकारात्मक ख्यालों का आना नई बात नहीं है. कई बार ऐसे ख्याल कुछ ही पलों के लिए आते हैं, लेकिन कुछ लोगों में ये धीरे-धीरे बढ़ने लगता है.’

Mahant Narendra Giri Postmortem Report: गले पर मिला V का निशान, दम घुटने से हुई मौत

सूत्रों के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि की मौत दम घुटने से हुई

Narendra Giri Death Case: सूत्रों के मुताबिक उनके गले पर 'V' का निशान मिला है. फ़िलहाल पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने उनका विसरा सुरक्षित रख लिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही एसआईटी अपनी जांच आगे बढ़ाएगी.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष  नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) में दावा किया गया है कि उनकी मौत दम घुटने से हुई. सूत्रों के मुताबिक उनके गले पर ‘V’ का निशान मिला है. फ़िलहाल पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने उनका विसरा सुरक्षित रख लिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही एसआईटी अपनी जांच आगे बढ़ाएगी. विवेचना में पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण साक्ष्य होगी. बता दें आज सुबह पांच डॉक्टरों की टीम ने एसआरएन अस्पताल में किया था. इस दौरान पूरे पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई गई थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सील बंद लिफाफे में संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया है.

गौरतलब है कि सोमवार शाम लगभग 5:30 बजे संदिग्ध परिस्थितियों में महंत नरेंद्र गिरी की मौत हो गई थी. महंत नरेंद्र गिरी अपने कमरे में फांसी के फंदे पर लटके पाए गए थे. जिसके बाद सबसे पहले उनके आत्महत्या किए जाने की पुष्टि आईजी के पी सिंह ने की थी. लेकिन इस मामले में एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जिसमें उनके पूर्व शिष्य स्वामी आनंद गिरी, बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया. इसी पत्र के आधार पर स्वामी आनंद गिरी को हरिद्वार से यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि आद्या प्रसाद तिवारी और  उनके बेटे संदीप तिवारी को श्री मठ बाघम्बरी गद्दी से ही गिरफ्तार किया गया.

SIT कर रही पूछताछ
तीनों  दोनों आरोपियों को पुलिस आज कोर्ट में पेश करेगी. गिरफ्तार स्वामी आनंद गिरि और बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी से एसआईटी ने कई घंटों से पूछताछ कर रही है. खबर है कि इस दौरान दोनों ने ही कोई राज़ नहीं उगला है. सुसाइड नोट में जिसका जिक्र आया, उस वीडियो की बात से भी दोनों ने इनकार किया. एसआईटी अभी भी दोनों से पूछताछ कर रही है. शाम चार बजे कोर्ट में दोनों आरोपियों को एसआईटी पेश करेगी. महंत नरेंद्र गिरि ने अपने कथित सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए मजबूर होने के पीछे शिष्य आनन्द गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी आरोपी बताया था.

सबसे पढ़े-लिखे साधुओं का अखाड़ा है निरंजनी, जिसके सचिव थे नरेंद्र गिरि

कैसा है निरंजनी अखाड़ा, कैसे काम करता है (फोटो - न्यूज 18)

महंत नरेंद्र गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष तो थे ही साथ ही निरंजनी अखाड़े के सचिव थे. ये अखाड़ा कई मायनों में दूसरे अखाड़ों से अलग और खास है. सबसे ज्यादा धनी होने के साथ इसके साथ सबसे ज्यादा पढ़े लिखे साधू जुड़े हैं. जानते हैं इस अखाड़े के बारे में

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 12:59 IST
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महंत नरेंद्र गिरि का अंतिम संस्कार प्रयाग में हो रहा है. उन्हें उनके गुरु के बगल में भू-समाधि दी जाएगी. वह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के तो अध्यक्ष थे ही साथ में निरंजनी अखाड़े के सचिव और प्रमुख की हैसियत रखने वाले भी. इस अखाड़े को सबसे धनी अखाड़ों में माना ही जाता है. साथ ही इसकी खासियत ये भी है कि इसमें खासे पढ़े लिखे साधु भी हैं. कुछ तो आईआईटी में पढ़े हुए हैं.

निरंजनी अखाड़े को हमेशा भारतीय धार्मिक क्षेत्र में परिपाटी स्थापित करने वाला माना गया. जब हरिद्वार कुंभ के दौरान कोविड का सबसे ज्यादा असर था. तब इस अखाड़े ने सबसे पहले इससे नाम वापस लेने की घोषणा करके राज्य सरकार को एक तरह से राहत दी. इसके बाद दूसरे अखाड़ों ने भी कुंभ से हटना शुरू किया।

इस अखाड़े का पूरा नाम श्री पंचायती तपोनिधि निरंजन अखाड़ा है. इसका मुख्य आश्रम मायापुर, हरिद्वार में स्थित है.अगर साधुओं की संख्या की बात की जाए तो निरंजनी अखाड़ा देश के सबसे बड़े और प्रमुख अखाड़ों में है. जूना अखाड़े के बाद उसे सबसे ताकतवर माना जाता है. वो देश के 13 प्रमुख अखाड़ों में एक है.

सबसे पढ़े लिखे साधू
इस अखाड़े में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे साधू हैं, जिसमें डॉक्टर, प्रोफेसर और प्रोफेशनल शामिल हैं. एक रिपोर्ट की मानें तो शैव परंपरा के निरंजनी अखाड़े के करीब 70 फीसदी साधु-संतों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है. इसमें संस्कृत के विद्वान और आचार्य भी हैं. निरंजनी अखाड़े की हमेशा एक अलग छवि रही है. जानते हैं निरंजनी अखाड़े के बारे में. जिसके बारे में कहा जाता है कि ये हजारों साल पुराना है.

हजारों साल पुराना इतिहास
निरंजनी अखाड़ा की स्थापना सन् 904 में विक्रम संवत 960 कार्तिक कृष्णपक्ष दिन सोमवार को गुजरात की मांडवी नाम की जगह पर हुई थी. महंत अजि गिरि, मौनी सरजूनाथ गिरि, पुरुषोत्तम गिरि, हरिशंकर गिरि, रणछोर भारती, जगजीवन भारती, अर्जुन भारती, जगन्नाथ पुरी, स्वभाव पुरी, कैलाश पुरी, खड्ग नारायण पुरी, स्वभाव पुरी ने मिलकर अखाड़ा की नींव रखी. अखाड़ा का मुख्यालय तीर्थराज प्रयाग में है. उज्जैन, हरिद्वार, त्रयंबकेश्वर व उदयपुर में अखाड़े के आश्रम हैं.

निरंजनी अखाड़े के पास कितनी संपत्ति
प्रयागराज और आसपास के इलाकों में निरंजनी अखाड़े के मठ, मंदिर और जमीन की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा की है, जबकि हरिद्वार और दूसरे राज्यों में संपत्ति की कीमत जोड़े तो वो हजार करोड़ के पार है. महंत नरेंद्र गिरि इसी अखाड़े के प्रमुख थे. निरंजनी के अखाड़े के पास प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन, मिर्जापुर, माउंटआबू, जयपुर, वाराणसी, नोएडा, वड़ोदरा में मठ और आश्रम हैं.

10,000 से ज्यादा नागा संन्यासी
फिलहाल इस अखाड़े में दस हजार से अधिक नागा संन्यासी हैं. जबकि महामंडलेश्वरों की संख्या 33 है. जबकि महंत व श्रीमहंत की संख्या एक हजार से अधिक है. वैसे निरंजनी अखाड़े ने भव्य पेशवाई के साथ कुंभ में अपनी शुरुआत की थी. इसमें कई रथ, हाथी और ऊंट शामिल हुए थे. करीब 50 रथों पर चांदी के सिंहासन पर आचार्य महामंडलेश्वर और महामंडलेश्वर विराजमान थे. बड़ी संख्या में नागा साधुओं ने भगवान शिव का तांडव किया था.

कौन बन सकता है महामंडलेश्वर
अखाड़े का महामंडलेश्वर बनने के लिए कोई निश्चित शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं होती है. इन अखाड़ों में महामंडलेश्वर बनने के लिए व्यक्ति में वैराग्य और संन्यास का होना सबसे जरूरी माना जाता है. महामंडलेश्वर का घर-परिवार और पारिवारिक संबंध नहीं होने चाहिए.
हालांकि इसके लिए आयु का कोई बंधन नहीं है लेकिन यह जरूरी होता है कि जिस व्यक्ति को यह पद मिले उसे संस्कृत, वेद-पुराणों का ज्ञान हो और वह कथा-प्रवचन दे सकता हो. कोई व्यक्ति या तो बचपन में अथवा जीवन के चौथे चरण यानी वानप्रस्थाश्रम में महामंडलेश्वर बन सकता है. लेकिन इसके लिए अखाड़ों में परीक्षा ली जाती है

विवादों में भी घिर चुका है अखाड़ा
कुछ सालों पहले डिस्कोथेक और बार संचालक रियल इस्टेट कारोबारी सचिन दत्ता को इस अखाड़े का महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि बनाया गया था. जिसके बाद निरंजनी अखाड़ा विवादों में घिर गया था.

Narendra Giri Death: आनंद गिरि और आद्या तिवारी से SIT ने घंटों पूछताछ की, आरोपियों ने नहीं उगले राज

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में प्रमुख आरोपी आनंद गिरि है.

महंत नरेंद्र गिरि की कथित आत्महत्या के मामले में सुसाइड नोट के आधार पर जांच कर रही एसआईटी अब भी दोनों मुख्य आरोपियों से पूछताछ कर रही है, लेकिन बड़ी खबर है कि आरोपी गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के मौत मामले में गिरफ्तार स्वामी आनंद गिरि और बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी से एसआईटी ने कई घंटों से पूछताछ कर रही है. खबर है कि इस दौरान दोनों ने ही कोई राज़ नहीं उगला है. सुसाइड नोट में जिसका जिक्र आया, उस वीडियो की बात से भी दोनों ने इनकार किया. एसआईटी अभी भी दोनों से पूछताछ कर रही है. शाम चार बजे कोर्ट में दोनों आरोपियों को एसआईटी पेश करेगी. महंत नरेंद्र गिरि ने अपने कथित सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए मजबूर होने के पीछे शिष्य आनन्द गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी आरोपी बताया था.

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में एसआईटी जांच से जुड़ी बड़ी खबर आ रही है कि पूछताछ में एसआईटी के सामने आनन्द गिरि गोलमोल जवाब देता रहा. यह भी जानकारी है कि बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी ने भी कोई राज नहीं उगले. महंत ने सुसाइड नोट में किसी महिला के साथ वीडियो बनाने का ज़िक्र किया था, लेकिन आनंद गिरि ने इस बारे में न तो कोई इकबालिया बयान दिया और न ही कोई सुराग बताया.

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कैसे लिये गए हिरासत में आरोपी?
उत्तराखंड स्थित हरिद्वार से आनंद गिरि को मंगलवार को यूपी पुलिस ने हिरासत में लिया था. एडीजी प्रशांत कुमार के मुताबिक आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किए जाने के बाद आनंद गिरि के खिलाफ कवायद की गई. इससे पहले सोमवार को इलाहाबाद स्थित बाघम्बरी मठ में महंत नरेंद्र गिरि मृत पाए गए थे. उनके शव के पास सात पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें तीन लोगों के नाम बतौर आरोपी खास तौर से दर्ज थे. कुमार ने कहा कि इस केस में सबूत जुटाए जा रहे हैं और इसी के लिए आनंद गिरि से पूछताछ की जा रही है.

ऐसे बनाई गई थी एसआईटी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) मामले की जांच के लिए डीआईजी, प्रयागराज ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन मंगलवार को किया था. डिप्टी एसपी अजीत सिंह चौहान को इसकी कमान सौंपी गई थी, जिसमें दो सीओ समेत इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर स्तर के 18 जांच अधिकारी शामिल किए गए. यह भी गौरतलब है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी आनंद गिरि को प्रयागराज ले आई थी और दो अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया था.

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