सांसद अफजाल अंसारी ने हाईकोर्ट को लिखा पत्र, उठाया लाउडस्पीकर से अजान पर रोक का मामला
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सांसद अफजाल अंसारी ने हाईकोर्ट को लिखा पत्र, उठाया लाउडस्पीकर से अजान पर रोक का मामला
पीठ ने राज्य सरकार को नियुक्ति की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए.

गाजीपुर (Gazipur) से बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) ने रमजान (Ramadan) के पाक महीने में लाउडस्पीकर से मस्जिदों में अजान (Ajan in mosques) पर रोक लगाने के डीएम गाजीपुर के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है.

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इलाहाबाद. गाजीपुर (Gazipur) से बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) ने रमजान (Ramadan) के पाक महीने में लाउडस्पीकर से मस्जिदों में अजान (Ajan in mosques) पर रोक लगाने के डीएम गाजीपुर के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है. सांसद अफजाल अंसारी ने पत्र में कहा गया है कि डीएम का यह आदेश मौलिक अधिकारों का हनन है. सांसद ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी से देश की जनता परेशान है. गाजीपुर जिले का प्रत्येक नागरिक लॉकडाउन का पालन कर रहा है. लोग यहां अपने-अपने घरों में नमाज पढ़ रहे हैं. लेकिन डीएम गाजीपुर ने अपने मौखिक आदेश से जिले की मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अजान पर रोक लगा दी है, जो गलत है.

'प्रशासन नहीं दे रहा अजान की अनुमति'
उन्होंने कहा है कि वे गाजीपुर संसदीय सीट से निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान नई दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास में रह रहे हैं. उन्होंने पत्र के जरिए कोर्ट को बताया है कि उनके संसदीय क्षेत्र के लोगों ने उनसे यह शिकायत की है कि स्थानीय प्रशासन रमजान के दौरान मस्जिदों से अजान देने की अनुमति नहीं दे रहा है.

'रासुका के तहत कार्रवाई की दी जा रही धमकी'
उन्होंने आरोप लगाया है कि अजान देने पर प्रशासन की ओर से रासुका के तहत मुकदमा दर्ज करने की भी धमकी दी जा रही है. पत्र में कहा है कि जिले में ई मौलवियों के खिलाफ प्रशासन ने मुकदमे भी दर्ज करा दिये हैं. सांसद अफजाल अंसानी ने पत्र का संज्ञान लेकर हाईकोर्ट से उचित कार्रवाई व न्याय की मांग की है.



'नहीं सुन रहा प्रशासन'
बीएसपी सांसद ने कहा कि उन्होंने प्रशासन से इस मामले में बात करने की कोशिश की लेकिन प्रशासन उनकी बात को नहीं सुन रहा है. सांसद के अनुसार, वहां के लोग लॉकडाउन के दौरान अपने अपने घरों में नमाज पढ़ रहे हैं. दरअसल, लोगों का मानना है कि अजान का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज पढ़ने की जानकारी देने के अलावा इफ्तार के समय के बारे में जानकारी देना होता है. इस तरह के प्रतिबंध को मुस्लिम समाज के लोग मौलिक अधिकार का हनन मानते हैं.

 

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