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nand gopal nandi became a ray of hope for the residents of prayagraj naini industrial area may get sanjeevani

प्रयागराज में नैनी औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगी संजीवनी 200 यूनिट्स के शुरू होनें की जगी उम्मीद

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शहर में इन दिनों आम लोगों के बीच एक चर्चा आम हो गई है,यह चर्चा है नैनी के औद्योगिक क्षेत्र को लेकर.दरअसल प्रयागराज वासियों के बीच दम तोड़ चुके नैनी के औद्योगिक क्षेत्र को दोबारा से विकास के पंख लगने की उम्मीद जगी है.इस बार नंदी को औद्योगिक विकास का विभाग मिला है.ऐसे में उद

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    शहर में इन दिनों आम लोगों के बीच एक चर्चा आम हो गई है,यह चर्चा है नैनी के औद्योगिक क्षेत्र(Naini industrial area)को लेकर.दरअसल प्रयागराज वासियों के बीच दम तोड़ चुके नैनी के औद्योगिक क्षेत्र को दोबारा से विकास के पंख लगने की उम्मीद जगी है और यह उम्मीद लाज़मी भी है क्योंकि पिछले महीने मार्च में शहर दक्षिणी के विधायक नंद गोपाल गुप्ता योगी 2.0 की कैबिनेट में शामिल हुए हैं.ख़ास बात यह है कि उन्हें निर्यात प्रोत्साहन,निवेश प्रोत्साहन के साथ-साथ औद्योगिक विकास का भी जिम्मा मिला है.वर्षों से विकास की राह देख रहे नैनी को अब उम्मीद के पंख लग गए हैं.लोगों में उम्मीद जगी है कि कैबिनेट मंत्री नंदी अपने पिछले कार्यकाल के मुकाबले इस बार बेहतर काम करेंगे और इस क्षेत्र को दोबारा से इसकी पहचान दिला सकेंगे.हालांकि पिछले कार्यकाल में नंद गोपाल गुप्ता नंदी और सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने इस क्षेत्र के लिए काफी प्रयास किए पर परिणाम उत्साहजनक नहीं रहे लेकिन इस बार नंदी को औद्योगिक विकास का विभाग मिला है.ऐसे में उद्यमियों व्यापारियों के साथ आम लोगों के बीच उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं.

    पहले कहलाता था पूर्वांचल का औद्योगिक हब
    नैनी का औद्योगिक क्षेत्र पहले पूर्वांचल का औद्योगिक हब,पूरब का नोएडा जैसे कई कई नामों से जाना जाता था.इसकी देश दुनिया में अपनी पहचान थी.यह इलाहाबाद का आर्थिक केंद्र माना जाता था.एक समय यहां टीएसल,हिंदुस्तान केबल्स,स्वदेशी कॉटन मिल,लिपटन टी,शंकरगढ़ ग्लास फैक्ट्री, रिलायंस ऐसी दर्जनों फैक्ट्रियां थी.प्रयागराज स्थित यह क्षेत्र देश का पांचवा सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र हुआ करता था.1960 के दशक में नैनी इंडस्ट्रियल टाउनशिप तेजी से विकसित हुई थी.पिछले दो दशक में एक के बाद एक 20 बड़ी कंपनियां यहां बंद होती चली गई, जिससे उनसे जुड़ी 200 छोटी-बड़ी ईकाइयां भी बंद हो गई,लोग बेरोजगार हो गए और अपार संभावनाओं के बावजूद क्षेत्र की पहचान समाप्त हो गई. स्थानीय राजनीति,कुप्रबंधन,उपेक्षा का शिकार हुआ यह क्षेत्र अब इस उम्मीद में है कि इसे दोबारा संजीवनी मिलने की संभावना है.

    (रिपोर्ट- प्राची शर्मा, प्रयागराज)

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