लाइव टीवी

महिला आरक्षण के लिए प्रदेश के मूल नागरिक होने की अनिवार्यता असंवैधानिक: हाईकोर्ट

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 19, 2019, 8:48 AM IST
महिला आरक्षण के लिए प्रदेश के मूल नागरिक होने की अनिवार्यता असंवैधानिक: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट

उत्तराखंड की वर्षा सैनी सहित कई अन्य याचिकाओं को निस्तारित करते हुए जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र ने यह आदेश जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि पुनरीक्षित चयन सूची से बाहर हुए अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है इसलिए उन्हें सेवा से नहीं हटाया जायेगा.

  • Share this:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिलाओं को आरक्षण मामले में प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य करने के 9 जनवरी 2007 के शासनादेश के क्लाज 4 को असंवैधानिक घोषित कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि यह जन्म स्थान के आधार पर विभेद करने पर रोक लगाने वाले संविधान के अनुच्छेद 16 (3) व 16 (3) के विपरीत है. कोर्ट ने 2015 की अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 1377 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती की पुनरीक्षित चयन सूची 24 अगस्त 18 को वैध करार दिया है और कहा है कि इस सूची से बाहर पूर्व में चयनित 107 अभ्यर्थियों में से जिन्हें नियुक्ति दे दी गयी थी, उन्हें सेवा से बाहर न किया जाए. भर्ती पूरी करने के बाद इन्हें वरिष्ठता क्रम में नीचे रखते हुए भविष्य में खाली पदों पर समायोजित किया जाए.

उत्तराखंड की वर्षा सैनी सहित कई अन्य याचिकाओं को निस्तारित करते हुए जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र ने यह आदेश जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि पुनरीक्षित चयन सूची से बाहर हुए अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है इसलिए उन्हें सेवा से नहीं हटाया जायेगा. इसके अलावा कोर्ट ने आदेश दिया कि पुनरीक्षित चयन सूची के आधार पर भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाए. कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के बाहर दूसरे प्रदेशों की चयनित महिला अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है.

याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एन त्रिपाठी, ए.के मिश्र, राघवेन्द्र मिश्र आदि वकीलों ने बहस की. बता दें कि साल 2015 में 1377 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती की गयी जिसमें महिला अभ्यर्थियों को 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण दिया जाना है. महिलाओं के लिए आरक्षित 151 पदों पर केवल 75 लोगों का ही चयन किया गया. वहीं 79 पद खाली रह गए थे. चयन में क्षैतिज आरक्षण के नियम का पालन न करने की शिकायत की गई थी. 25 मई 2016 को घोषित परिणाम पर पुनर्विचार करते हुए पुनरीक्षित चयन सूची 28 अप्रैल 2018 को जारी की गयी.

इसमें पहले चयनित 107 अभ्यर्थी बाहर हो गए. इनमें से अधिकांश लोग नियुक्त हो चुके थे. इन लोगों ने निर्णय को कोर्ट में चुनौती दी. इसके अलावा महिला आरक्षण में प्रदेश के मूल निवासी न होने के आधार पर चयनित याची को नियुक्ति देने से इंकार कर दिया गया. इसको भी न्यायालय में चुनौती दी गयी. आयोग की तरफ से अधिवक्ता के एस.कुशवाहा ने बहस की.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

ये भी पढ़ें:

संभल: इंस्पेक्टर की पत्नी समेत तीन लोगों की गला रेत कर हत्यासुर्खियां: गुजरात और झारखंड के बाद योगी सरकार देगी गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण, संभल में ट्रिपल मर्डर

सपा-बसपा गठबंधन के बाद यूपी में ये है BJP की चुनौतियां!

लोकसभा चुनाव में वाराणसी से PM नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेगा 'मुर्दा'

मुलायम की छोटी बहू बोली- चाचा पहुंचाएंगे SP-BSP गठबंधन को नुकसान

 

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए इलाहाबाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 19, 2019, 8:48 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर