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धान की फसल चौपट, प्रयागराज के किसान परेशान, NGT की रोक के चलते नहीं जला पा रहे पराली​!

प्रयागराज के किसानों की धान की फसल मौसम की मार से बर्बाद हो गई है

प्रयागराज के किसानों की धान की फसल मौसम की मार से बर्बाद हो गई है

किसानों का कहना है कि बर्बाद फसल को काटने में जो मजदूरी खर्च होगी उससे धान की फसल में लगाई गई लागत भी नहीं निकलेगी ऐसे में बहुत से किसान इस फसल को खेतों में ही जला देना चाहतें हैं. लेकिन पराली जलाने पर NGT की रोक और राज्य सरकार की सख्ती के चलते किसान ऐसा नहीं कर पा रहे हैं और फसल काटने के लिए उनके पास पूंजी नहीं है.

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प्रयागराज. एक तरफ वायु प्रदूषण ने जहां आफत मचा रखी है. Smog ने दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR), हरियाणा (Haryana), पंजाब (Punjab) समेत उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अधिकतर जिलों को अपनी चपेट में ले रखा है. खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ने प्रदेश के कई जिलों में मेडिकल एमरजेंसी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. Smog की बहुत बड़ी वजह किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली को ठहराते हुए एनजीटी (NGT) ने इसके जलाने पर रोक लगा रखी है. लेकिन प्रयागराज जनपद के किसान मौसम की मार से खराब हो चुकी अपनी फसल को आग के हवाले कर देना चाहते हैं क्योंकि उनके पास इसे काटने के लिए पूंजी नहीं है.

चौपट फसल
दरअसल प्रयागराज जिले में धान की खेती के लिए मशहूर यमुनापार इलाके में इस साल हुई भारी बारिश ने किसानों की धान की फसल को चौपट कर दिया है. किसानों के मुताबिक भारी बारिश के चलते धान की फसल में कंडो नामक बीमारी लग गई जिसने 60 फीसदी फसल को बर्बाद कर दिया. वहीं ज्यादा दिनों तक खेतों में पानी भरा रहने से कई किसानों की फसल खेतों में ही गिर गई है. जिससे उत्पादन पर असर पड़ा है. धान का कटोरा कहे जाने वाले यमुनापार के किसान अब फसल तैयार होने के बाद उसे काटने को तैयार नहीं है.

news 18 से बातचीत में किसानों का कहना है कि इस बची-खुची फसल को काटने में जो मजदूरी खर्च होगी उससे अब तक धान की फसल में लगाई गई लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है. बहुत से किसान लागत न निकलती देख बर्बाद फसल को खेतों में ही जला देना चाहतें हैं लेकिन खेतों में पराली जलाने पर एनजीटी की रोक और राज्य सरकार की सख्ती के चलते किसान फसल को जला भी नहीं पा रहे हैं और उसे काटने के लिए उनके पास पूंजी नहीं है.

भुखमरी की नौबत
वहीं धान की फसल बर्बाद होने से बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लेकर धान की फसल लगाने वाले किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ जहां उनके द्वारा बैंकों से लिए गए कर्ज का बोझ बढ़ रहा है. वहीं फसल अच्छी न होने से अब उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति भी बिगड़ने की चिंता सता रही है. यमुनापार के चाका ब्लाक के तेंदुआवन गांव के किसान नवीन पाण्डेय के मुताबिक फसल चौपट होने से उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है. वहीं गांव के ही किसान बृजलाल ने सरकार से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है. जबकि बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लेकर धान लगाने वाले किसान सत्य नारायण का कहना है कि अगर सरकार की मदद नहीं मिली को किसान आत्महत्या जैसे कदम भी उठाने को मजबूर होंगे.

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