650₹ की टिकट पर सूरत से प्रयागराज आए मजदूर, अफसरों ने नहीं दिया खाना और ये कहा...

सूरत से लौटे मजदूरों को प्रयागराज में बस का इंतजाम करने की जगह पैदल जाने को कह दिया.
सूरत से लौटे मजदूरों को प्रयागराज में बस का इंतजाम करने की जगह पैदल जाने को कह दिया.

मजदूर सूरत से 650 रुपये का टिकट खरीद कर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से प्रतापगढ़ पहुंचे और वहां से उन्हें यूपी रोडवेज की बसों से प्रयागराज (Prayagraj) लाया गया. चार दिन से भूखे मजदूरों को खाने पीने को कुछ भी नहीं दिया गया.

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प्रयागराज. योगी सरकार ने लॉकडाउन (Lockdown) में दूसरे राज्यों में फंसे यूपी के मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए महा आपरेशन शुरू किया है. अब तक प्रदेश में 56 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों (Labour Special Trains) से 66 हजार 649 श्रमिकों को योगी सरकार (Yogi Government) ने उनके घरों तक पहुंचाया है. अगले एक हफ्ते में 43 ट्रेनों से 51 हजार 600 श्रमिकों को अलग-अलग राज्यों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लाया जाना तय हुआ है. योगी सरकार की योजना कुल 99 ट्रेनों से एक लाख 18 हजार 249 श्रमिकों को प्रदेश में लेकर आने की है.

योगी सरकार के निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं अधिकारी
योगी सरकार ने अधिकारियों को ट्रेनों से आये मजदूरों के खाने पीने का पूरा इंतजाम करने और उन्हें उनके घरों तक पहुंचाने के लिए रोडवेज की बसों का इंतजाम करने का भी निर्देश दिया है. हालांकि ज्यादातर जगहों पर अधिकारी सीएम के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं. इसके चलते बाहरी राज्यों से आये बहुत से मजदूरों को पैदल ही अपने घरों को जाना पड़ रहा है.

मजदूरों ने सुनाई आपबीती
सूरत से प्रयागराज पहुंचे कुछ मजदूरों की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. प्रयागराज में सड़क पर पैदल अपना सामान लेकर घरों को जा रहे मजदूरों से जब न्यूज 18 की टीम ने बात की तो इन बेबस और लाचार मजदूरों का दर्द छलक उठा. ये मजदूर सूरत से 650 रुपये का टिकट खरीद कर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचे थे और वहां से उन्हें यूपी रोडवेज की बसों से प्रयागराज लाया गया. यहां पर इनका स्वास्थ्य परीक्षण तो किया गया, लेकिन खाने पीने को प्रशासन द्वारा कुछ भी नहीं दिया गया. और तो और इन मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए बसों का भी कोई इंतजाम प्रशासन के अधिकारियों ने नहीं किया. बल्कि उन्हें यह कहकर भगा दिया गया कि तीस किलोमीटर तो ही है पैदल चले जाओ. इसके बाद चार दिनों से भूखे प्यासे ये मजदूर पैदल ही अपने घर करछना के लिए निकल पड़े हैं.



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