UPPSC PCS 2018: जानिए यूपी से ज्यादा क्यों बाहरी प्रदेशों के छात्रों का रहा दबदबा

जानिए यूपी से ज्यादा क्यों बाहरी प्रदेशों के छात्रों का रहा दबदबा (file photo)
जानिए यूपी से ज्यादा क्यों बाहरी प्रदेशों के छात्रों का रहा दबदबा (file photo)

प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय के मुताबित यूपी के ज्यादातर छात्रों (Students) का चयन प्रिंसिपल और सब रजिस्ट्रार जैसे पदों पर हुआ है.

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) की परीक्षाओं में यूपी के प्रतियोगी छात्रों का ही दबदबा रहता था. लेकिन यूपीपीएससी के 2018 के नतीजे सामने आने के बाद ऐसा लग रहा है कि अफसरशाही की नर्सरी सूख रही है. पीसीएस 2018 में प्रदेश से ज्यादा बाहरी प्रदेशों के अभ्यर्थियों का चयन यूपीपीसीएस में हुआ है. यह न केवल यूपी के अभ्यर्थियों के लिये खतरे की घंटी है. बल्कि सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्रों में इस रिजल्ट को लेकर नाराजगी भी है. प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मुताबिक यूपीपीसीएस की परीक्षा के पैटर्न में हुए बदलाव, स्केलिंग हटाये जाने और हिन्दी माध्यम को दरकिनार किए जाने से ही यूपी के अभ्यर्थियों का इस बार सेलेक्शन कम हुआ है.

सामने आई बड़ी वजह

उनके मुताबिक मुख्य परीक्षा में पहले दो पेपर होते थे और वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते थे. लेकिन बदलाव के बाद सामान्य अध्ययन के चार पेपर कर दिए गए और सब्जेक्टिव सवाल पूछे जाने लगे हैं. पहले मुख्य परीक्षा में दो वैकल्पिक विषय होते थे. लेकिन पीसीएस 2018 से एक वैकल्पिक विषय कर दिया गया. इंटरव्यू भी 200 अंको से घटाकर 100 अंक का कर दिया गया है. वहीं बदले पैटर्न में हुई परीक्षा में एनसीआर, हरियाणा, बिहार और उत्तराखंड के साथ ही तमिलनाडु के भी अभ्यर्थी अधिक चयनित हुए हैं.



इन राज्यों से चयनित हुए छात्र
प्रतियोगी छात्रों का साफ तौर पर आरोप है कि अंग्रेजी माध्यम और विज्ञान विषय वाले अभ्यर्थी ज्यादा चयनित हुए हैं. जबकि मानविकी विषयों के अभ्यर्थियों का सफलता प्रतिशत कम रहा है. प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की मानें तो इस बार दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के 200 से अधिक, राजस्थान से 40, तमिलनाडु से एक, उत्तराखण्ड के 20 और बिहार राज्य से 25 अभ्यर्थियों का चयन यूपीपीसीएस 2018 में हुआ है. हालांकि इसको लेकर आयोग ने कोई आंकड़े जारी नहीं किए हैं. प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति का दावा है कि यूपीपीसीएस 2018 के 976 पदों में से बाहरी राज्यों के लगभग 500 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं. जबकि यूपी के 460 के करीब अभ्यर्थी चयनित हो सके हैं.

बाहरी राज्यों को क्षैतिज आरक्षण का मिला लाभ

प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय के मुताबित यूपी के ज्यादातर छात्रों का चयन प्रिंसिपल और सब रजिस्ट्रार जैसे पदों पर हुआ है. जबकि बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी एसडीएम और डिप्टी एसपी के पदों पर चयनित हुए हैं. इस बार महिलाओं को 20 फीसदी मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण में भी बाहरी राज्यों की महिलाओं को लाभ दिया गया है. जिससे प्रदेश की हर वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है.

सीएम योगी को भेजा पत्र

प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षा में किए गए बदलाव को लेकर सीएम योगी को भी पत्र भेजा है. प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने 11 सूत्रीय मांग पत्र के जरिए सीएम योगी से मांग की है कि हिन्दी माध्यम से ही परीक्षायें करायी जायें और बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को रोका जाये. इसके साथ ही 20 फीसदी महिलाओं को मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण में भी प्रदेश की महिला को ही आरक्षण का लाभ दिया जाये.
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