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Pitru Paksha 2022: अगर प्रयागराज में करने आ रहे हैं पिंडदान तो नकली पंडों से रहें सावधान!

Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष 10 सितंबर से शुरू हो रहा है. इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से लोग पितरों की शांति के लिए ...अधिक पढ़ें

रिपोर्टर: योगेश मिश्रा

प्रयागराज. पितृपक्ष (Pitru Paksha 2022) शुरू होने वाले हैं और लोग अपने पितरों की शांति के लिए पिंडदान करते हैं. वहीं, देशभर के अलग-अलग राज्यों से प्रयागराज में अपने क्षेत्र के पुरोहितों के पास जाकर लोग अपने मृतक परिजनों का पिंडदान कर उनकी आत्मा की शांति के लिए आते हैं, लेकिन बहुत से लोग ठगी का शिकार भी हो जाते हैं. ऐसे ही ठगों से बचने के लिए हर पुरोहित की अपनी एक निशानी अर्थात झंडा होता है जिसकी वजह से लोग अपने असली पुरोहितों के पास पहुंच जाएं. बावजूद इसके कई बार रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप आदि जगहों पर धोखाधड़ी करने वाले नकली पुरोहित बनकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं.

न्यूज़ 18 लोकल की टीम से बात करते हुए प्रयागराज के पुरोहित ने बताया कि हर पुरोहित का अपना एक निश्चित क्षेत्र होता है, जहां के यजमान उनके पास पिंडदान के लिए आते हैं. पिंडदान की प्रथा आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है. लोग अपने मृतक परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान व पूजा-अर्चना करने अपने पुरोहितों के पास आते हैं.

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ऐसे बचें नकली पुरोहित से
पुरोहित राजेश कुमार भारद्वाज ने बताया कि लोगों को लूटने के लिए नकली पंडा अपने जाल में फंसाते हैं. इसके साथ उनको यह विश्वास दिलाते हैं कि वह उन्हीं के क्षेत्र के पुरोहित हैं, जिसकी वजह से लोगों को काफी नुकसान भी उठाना पड़ता है. साथ ही साथ जो असली पुरोहित हैं उनका भी नुकसान होता है. वहीं, अगर पिंडदान में खर्च होने वाली रकम की बात की जाए, तो अगर कोई अपने क्षेत्र के असली पुरोहित के पास पहुंचता है तो अपनी क्षमता अनुसार दान कर सकता है या दान की रकम बहुत ही मामूली जैसे 11 रुपए से भी पूजा करवा सकता है. अगर किसी यजमान के पास पैसे नहीं हैं, तो उनके असली पुरोहित उन्हें पैसे भी देते हैं और रहने की व्यवस्था भी अपने घर पर करते हैं.

वहीं, धोखाधड़ी करने वाले नकली पुरोहित लोगों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. उनकी जालसाजी की वजह से जहां एक तरफ लोगों को समस्याएं होती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पुरोहितों को भी नुकसान उठाना पड़ता है. पुरोहित भारद्वाज ने बताया कि ऐसे नक्कालों से बचने के लिए हर पुरोहित का अपना झंडा और निशान होता है, जिसे देखकर लोग पहचान जाते हैं कि उनके क्षेत्र का यह पुरोहित है और लोग लूट से बच जाते हैं. हालांकि बहुत से लोग जो अपने क्षेत्र के पुरोहितों की निशानी नहीं पहचानते, वह ठगी का शिकार भी हो जाते हैं.

पिंडदान करने आए व्यक्ति ने बताया कि कई बार लोगों के साथ जालसाजी होती है. वह अपने असली पुरोहित को पहचान नहीं पाते और किसी नकली पुरोहित या पंडा से पिंडदान करवाते हैं. इस दौरान नकली पंडा उनसे मन मांगी रकम लेता है और मजबूरन लोगों को वह रकम देनी भी पड़ती है, इसीलिए जब भी आप पिंडदान के लिए प्रयागराज जाएं तो अपने क्षेत्र के पुरोहित का निशान चिन्ह जरूर पता रखें. साथ ही साथ पुरोहित से आप अपने परिवार का इतिहास भी पता कर सकते हैं कि कितनी पीढ़ियों से वह पुरोहित और उनके पूर्वज आपके परिवार का पिंडदान करवा रहे हैं.

Tags: Allahabad news, Pitru Paksha, Prayagraj News

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