प्रयागराज के शोध छात्र जितेंद्र की नई तकनीक को PM मोदी ने सराहा, राष्‍ट्रपति करेंगे सम्‍मानित
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प्रयागराज के शोध छात्र जितेंद्र की नई तकनीक को PM मोदी ने सराहा, राष्‍ट्रपति करेंगे सम्‍मानित
प्रयागराज के शोध छात्र जितेंद्र की नई तकनीक को PM मोदी ने सराहा (file photo)

जितेंद्र के शोध को गांधीवादी यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन (ज्ञाति) अवार्ड (Award) 2020 के लिए चुना गया है. इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति सम्मानित करेंगे.

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प्रयागराज. एमएनएनआईटी (MNNIT) प्रयागराज के शोध छात्र जितेंद्र प्रसाद ने गंगा की मिट्टी से बिजली पैदा करने की नई तकनीक ईजाद कर संस्थान और देश का नाम रोशन किया है. उनकी इस उपलब्धि पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने "मन की बात" पर ट्वीट कर संस्थान के शोधार्थी को आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ाए गए कदम की सराहना की है. पीएम मोदी के ट्वीट के बाद संस्थान के प्रोफेसरों और छात्र-छात्राओं में खुशी की लहर है. कोरोना की महामारी की वजह से इन दिनों जितेंद्र प्रसाद अपने गृह जिले गाजीपुर में मौजूद हैं.

मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के होनहार शोधार्थी जितेंद्र प्रसाद ने गंगा नदी की मिट्टी से बिजली उत्पादन की तकनीक विकसित करने का कारनामा कर दिखाया है. उनकी इस कामयाबी पर राष्ट्रपति अवार्ड देकर उन्हें सम्मानित करेंगे. देश के 7 युवा इंजीनियरों में से मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान प्रयागराज के जितेंद्र प्रसाद को भी अहम स्थान मिला है. जितेंद्र प्रसाद को अभिनव शोध के लोए प्रतिष्ठित पुरस्कार गांधीवादी यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन (ज्ञाति) अवार्ड 2020 के लिए चुना गया है.

अवार्ड देकर राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित



यह पुरस्कार माननीय राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में दिया जाएगा. जितेंद्र प्रसाद प्रोफेसर रमेश कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में पीएचडी कर रहे हैं.
यह अवार्ड दूर दराज क्षेत्रो में प्रकाश के लिए गंगा नदी के मिट्टी से बिजली उत्पादन करने की तकनीक विकसित करने के लिये दिया जायेगा. इस तकनीकी से उन्होंने 12 वोल्ट की बैंट्री को चार्ज किया है और फिर इसे 230 वोल्ट की एसी. वोल्टेज मे बदल कर बिजली के बल्ब को 9 घंटे तक जलाया है.

14-14 घंटे कड़ी मेहनत का नतीजा

जितेंद्र प्रसाद ने लेबोरेट्री में 14-14 घंटे काम करके कड़ी मेहनत से 4 वर्षों में इस टेक्नोलॉजी को विकसित किया है. उनकी यह तकनीकी दूर-दराज के इलाकों को रोशन करने के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस, सैन्य वायरलेस को शक्ति का स्रोत प्रदान करेगी. यह नई तकनीक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक शक्ति स्रोत के रूप में भी सुविधा प्रदान करेगा, जहां पर पारंपरिक बिजली का उपलब्ध हो पाना असंभव है. इस तकनीकी से बिजली उत्पन्न करने में किसी तरह का प्रदूषण पैदा नहीं होता है. जितेन्द्र प्रसाद का यह अभिनव शोध भविष्य में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

साधारण परिवार में हुआ जन्म

बता दें कि जितेंद्र प्रसाद का जन्म गाजीपुर जिले के शक्करपुर गांव के एक छोटे परिवार में हुआ था. इनके पिता रामकृत प्रजापति सेतु निगम में इलेक्ट्रिशियन के पद से रिटायर्ड हैं और माता गृहणी है. अभी ये मोती लाल नेहरू राष्ट्रिय प्रौद्योगिकी संस्थान प्रयागराज से 2016 से पीएचडी. शोध कर रहे है.
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