लाइव टीवी

पीएम मोदी की पसंद ये संस्थान गाय के गोबर से बना रहा मॉस्किटो कोइल, अगरबत्ती और साबुन

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 4, 2019, 12:53 PM IST
पीएम मोदी की पसंद ये संस्थान गाय के गोबर से बना रहा मॉस्किटो कोइल, अगरबत्ती और साबुन
प्रयागराज के करीब स्थित बायोविद संस्थान में गाय के गोबर से तमाम जरूरी चीजों का निर्माण हो रहा है.

प्रयागराज (Prayagraj) शहर से 45 किलोमीटर दूर बायॉवेद इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में गाय के गोबर से मॉस्किटो कोइल, अगरबत्ती, साबुन, हवन सामग्री, गोबर की लकड़ी, एनर्जी केक, गमला जैसे तमाम रोज़मर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीज़ बनाई जा रही हैं. इस संस्थान में किसानों और कृषि में कॅरियर बनाने वाले छात्रों को ट्रेनिंग दी जाती है.

  • Share this:
प्रयागराज. अगर हम गाय के गोबर (Cow Dung) से बने मॉस्किटो कोइल (Mosquito Coil),  अगरबत्ती और साबुन (Soap) की बात करें तो आप को अटपटा ज़रूर लगेगा लेकिन ये सच है. प्रयागराज शहर से 45 किलोमीटर दूर स्थित बायॉवेद इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में गोबर से बने उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है. यहां मॉस्किटो कोइल, अगरबत्ती, साबुन, हवन सामग्री, गोबर की लकड़ी, एनर्जी केक, गमला जैसे तमाम रोज़मर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीज़ बनाई जा रही हैं. इस संस्थान में किसानों और कृषि में कॅरियर बनाने वाले छात्रों को ट्रेनिंग दी जाती है.

इस संस्थान की ख़ास बात ये है कि यहां गोबर से बनी जिन चीज़ों का निर्माण किया जाता है, उन्हें बनाने की मशीन बिना बिजली के चलती है. साथ ही इस संस्थान में लाख से बने सामान का भी निर्माण किया जाता है. बायॉवेद संस्थान ने किसानों और छात्रों को नयी सौगात दी है. ये संस्थान करीब 20 बीघे की एरिया में फैला हुआ है. गोबर से बनी चीज़ों को बनाने के लिए यहां भारी संख्या में गायों को रखा गया है. एक गौशाला बनाया गया है.

बिना बिजली के चलती हैं मशीनें

इस गौशाला की देखभाल के लिए कई लोगों को लगाया गया है. गौशाला के ठीक बगल एक बड़ा गड्ढे है, जिसमे गोबर को डंप किया जाता है. हर रोज़ भारी मात्रा में गोबर को इकठ्ठा किया जाता है. गड्ढे के बगल एक प्रयोगशाला लैब है, जहां गोबर के सामान बनाने की मशीनें लगाई गई हैं. लैब में जो मशीन लगी हैं, वो बिना बिजली के चलती हैं.

Prayagraj Cow dung2
गाय के गोबर से बनाई गई मॉस्किटो कोइल


छात्रों-किसानों को ट्रेनिंग दे रहा संस्थान

इस लैब में कई गांव से किसान और छात्र ट्रेनिंग लेते नजर आए. पर्यावरण को और स्वच्छ बनाने व गांव से पलायन कर रहे किसानों या कहे की गांव वालों और छात्रों को नया रोज़गार देने का अच्छा जरिया बन गया है. छात्रों का कहना है कि अब वो अपने पैर पर खड़े हो सकते हैं, खुद का रोज़गार भी कर सकते हैं. सरकार चाहे जितने भी दावे करे की गांव में बिजली की समस्या दूर हो गई है लेकिन हक़ीकत ये है की आज भी बिजली की समस्या बनी हुई है. इसी के चलते गांव के लोग शहर की ओर पलायन कर रहे हैं. गांव के लोग शहर की तरफ पलायन न करें इसीलिए किसानो को ट्रेनिंग दी जा रही है. युवाओं का कहना है कि कॉम्पिटिशन के युग में नौकरी बेहद मुश्किल है और इसी को ध्यान में रखते हुए वो भी इस संस्थान से जुड़ गए हैं. बेहद कम लागत में अधिक मुनाफा भी इससे हो सकेगा.
Loading...

इको फ्रेंडली फ्यूल स्टिक और एनर्जी केक की खोज

जीवन की इस जरूरत को भी बायोवेद ने अपने प्रयासों से पर्यावरण के अनुकूल बनाते हुए इको- फ्रेंडली फ्यूल स्टिक्स और एनर्जी केक की खोज की है. इस कृषि वैज्ञानिक ने गाय के गोबर से एक ऐसा इंधन तैयार किया है जो लकड़ी से कई गुना सस्ता और वातावरण में कम से कम या ये कहे की धुआं न के बराबर पैदा करने वाला है, जिसे एनर्जी केक बोला जाता है. ये एनर्जी केक खाना बनाने के इस्तमाल में आता है जो बिलकुल धुआं रहित है. इस धुआं रहित एनर्जी केक का इस्तेमाल करने से जहा वायु और नदियों का प्रदूषण कम होगा. वहीं गांव की बूढ़ी हो चुकी गायों से रोजगार का एक नया जरिया भी मिलेगा, जिससे ये जानवर भी बच सकेंगे.

कम धुआं और लकड़ी से किफायती हैं फ्यूल स्टिक्स 

गोबर से बनी इन फ्यूल स्टिक्स (गोबर की लकड़ी) जलाने में जहा लकड़ियों के जलाने की तुलना में न के बराबर महज 5 फीसदी ही धुआं होता है. इतना ही नहीं लकड़ी से आधे समय में ही ये गोबर से बनी फ्यूल स्टिक्स घर का खाना बना देती हैं. किफायत के हिसाब से भी ये लकड़ियों की तुलना में 50 फीसदी सस्ती पड़ती हैं.

Prayagraj Cow dung
गाय के गोबर से बनाया गया एनर्जी केक


अब ज़रा यह भी जानते चलिए की आखिर गाय की गोबर की ये फ्यूल स्टिक्स बनती कैसे हैं? और क्यों ये धुंआ रहित हैं? इसके बनाने के लिए सबसे पहले गाय के गोबर में खरपतवार और भूसे का बारीक पावडर मिलाते हैं और फिर उसे एक ऐसी मशीन से गुजरने देते है जो इसे खोखले पाइप की शक्ल में तब्दील कर देती है. इन्हें सुखाकर इनकी पैकिंग कर ली जाती है और तैयार हो जाती है काऊ डंग फ्यूल स्टिक्स. यह स्टिक्स अन्दर से खोखली होती हैं, जिससे इसमें ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाने की वजह से जलने पर यह धुआं नहीं देतीं. साथ ही इसका यह खोखलापन इसकी जलाने की ऊर्जा की शक्ति को भी दुगना कर देता है.

हवन सामग्री से लेकर गमला भी बनाया जा  रहा

इसी तरह मॉस्किटो कोइल, अगरबत्ती, साबुन, हवन सामग्री, गमला समेत कई सामान बनाये जा रहे हैं. इस संस्थान में पानी की व्यवस्था भी बिना बिजली के इस्तमाल के बिना की गई है. बैल के ज़रिये पानी को ज़मीन से निकला जाता है. दो बैल एक मशीन के ज़रिये जब घूमते हैं, तब दुसरे छोर से पानी निकलता है.
इस संस्थान में लाख से बने सामान का भी निर्माण किया जाता है. लाख एक प्रकार का कीड़ा होता है, जिसको इकठ्ठा कर प्रयोगशाला में ले जाकर कई सामान में इस्तमाल किया जाता है. गोबर से बने सामानो में लाख से कोटेड करके सामान की खूबसूरती बढ़ जाती है.

पीएम मोदी ने भी की है संस्थान की प्रशंसा

यहां के मैनेजर हिमांशु दि्ववेदी का कहना है कि गोबर से बनी चीज़ों की डिमांड भी अब धीरे-धीरे बढ़ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक इस संस्थान को एक पत्र देकर प्रशंसा की है, साथ ही हिमांशु दि्ववेदी का कहना है कि ये संस्थान 30 साल पुराना है और इस संस्थान से देश के कई ज़िलों से आये हज़ारों किसानों व छात्रों ने यहां अपने लिए एक नया रोज़गार को भी चुना है. लैब में गोबर से बने सामानों का फाइनल टच देकर सौन्दर्यकरण किया जाता है और उसके बाद संसथान में बने म्यूजियम या कहें की प्रदर्शनी हॉल में रखा जाता है, जहां कोई भी आकर खरीददारी कर सकता है.

ये भी पढ़ेंं:

मैनपुरी छात्रा की मौत: कांग्रेस ने योगी सरकार के सामने रखीं ये 4 मांग

CM योगी का खौफ! 'फूंक-फूंक' कर खेतों में पराली बुझाने में जुटे अफसर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए इलाहाबाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 4, 2019, 12:48 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...