पुलिस भर्ती: HC ने पूछा- महिला अथ्यर्थी की डिलिवरी के बाद फिजिकल टेस्ट कराने का निर्देश क्यों न दिया जाए?

इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला. (File)

इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला. (File)

Prayagraj News: बुलंदशहर की मंजूषा कुमारी ने याचिका याचिका में बताया कि वह पुलिस भर्ती 2018 की लिखित परीक्षा में सफल हो चुकी है. 3 फरवरी 2019 को शारीरिक टेस्ट के लिए बुलाया गया. याची ने अर्जी दी कि वह गर्भवती है इसलिए डिलिवरी के बाद किसी भी तिथि पर टेस्ट ले लिया जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 8:00 AM IST
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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती-2018 (Police Recruitment-2018) की लिखित परीक्षा में सफल महिला अभ्यर्थी की याचिका पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में सुनवाई हुई. इस दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि डिलिवरी के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा कराने का निर्देश क्यों न दिया जाए? दरअसल परीक्षा में जिस समय शारीरिक टेस्ट हो रहा था, उस समय याची गर्भवती थी. अब अभ्यर्थी तरफ से शारीरिक दक्षता परीक्षा कराने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है.

15 फरवरी को राज्य सरकार को देना है जवाब

मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 15 फरवरी को जानकारी मांगी है. दरअसल मामला बुलंदशहर का है. यहां की मंजूषा कुमारी ने याचिका दाखिल की है. याचिका में मंजूषा ने बताया है कि वह पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में सफल हो चुकी है. याची को 3 फरवरी 2019 को शारीरिक टेस्ट के लिए बुलाया गया. याची ने अर्जी दी कि वह गर्भवती है इसलिए डिलिवरी के बाद किसी भी तिथि पर टेस्ट ले लिया जाए. लेकिन डिलेवरी होने के बाद उसे शारीरिक टेस्ट के लिए नहीं बुलाया जा रहा है.

जस्टिस राजीव जोशी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि डिलिवरी के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा कराने का निर्देश क्यों न दिया जाए? अब राज्य सरकार को 15 फरवरी को इस संबंध में जवाब देना है.
नौकरी में पति का जाति प्रमाणपत्र लगाने के मामले में याचिका

वहीं दूसरी तरफ 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित ओबीसी अभ्यर्थी की याचिका पर हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से जानकारी तलब की है. याची ने अपने पति की जाति का प्रमाण पत्र लगाने पर नियुक्ति से बाहर किए जाने के निर्णय को चुनौती दी है. याची मथुरा की सविता का कहना है कि उसके पति भी ओबीसी हैं, इसलिए उनकी जाति का प्रमाणपत्र लगाने से उसे आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है.

69 हजार सहायक अध्यापक में चयनित याची की 15 अप्रैल 2020 को काउंसलिंग हुई थी. याची को काउंसिलिंग में मथुरा का एक विद्यालय आवंटित कर दिया गया. 4 दिसंबर 2020 को जारी शासनादेश के क्लाज 3(2) का हवाला देते हुए याची की नियुक्ति निरस्त कर दी गई. जस्टिस अजय भनोट की एकल पीठ में याचिका पर सुनवाई हुई.
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