प्रयागराज गैंगरेप: लापरवाही बरतने वाले 2 DSP किए गए निलंबित, जानें क्‍या है पूरा मामला

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

गैंगरेप (Gang Rape) के इस मामले में हाईकोर्ट (HC) ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने पूछा कि पीड़िता ने जब 164 के तहत बयान में गैंगरेप की बात कही थी तो आरोपियों को किस आधार पर विवेचक ने क्लीन चिट दे दी?

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 9:25 AM IST
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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में गैंगरेप केस में लापरवाही बरतने के आरोप में दो पुलिस उपाधीक्षकों पर गाज गिरी है. शासन के निर्देश पर दोनों को निलंबित (Suspend) कर दिया गया है. निलंबित होने वाले अफसर हैं डीएसपी नवीन नायक और सच्चिदानंद त्रिपाठी. इस मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था.

दरअसल, मेजा क्षेत्र की एक युवती जनवरी 2020 में लापता हो गई थी. परिजनों ने मामले में गैंगरेप की एफआईआर दर्ज कराई थी. इस मामले में मेजा थाने के तत्कालीन प्रभारी संतोष द्विवेदी लापरवाही के आरोप में निलंबित किए गए थे. घटना के एक हफ्ते बाद पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर लिया था. इस मामले में एक युवक को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जेल भेज दिया गया था. वहीं, युवती दोबारा फिर घर से गायब गई थी, इस पर परिजनों ने मेजा थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया. एसएसआई ने जांच की और युवती को बरामद कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की.

हाईकोर्ट ने पूछा सवाल- कैसे दे दी क्लीनचिट?
इस बीच, परिजन हाईकोर्ट चले गए. मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई. कोर्ट ने पूछा कि पीड़िता ने जब 164 के बयान में गैंगरेप की बात कही थी तो आरोपियों को किस आधार पर विवेचक ने क्लीन चिट दे दी थी? हाईकोर्ट ने विवेचना में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया. विवेचक मुन्नालाल और मोहम्मद अजहर खान लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिए गए थे. अब इसी मामले में शासन के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षकों पर गाज गिरी है.
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