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प्रयागराज:-अद्भुत है संगम में पुण्य की एक डुबकी,सारे पापों से मिलती है मुक्ति

प्रयागराज:-अद्भुत है संगम में पुण्य की एक डुबकी,सारे पापों से मिलती है मुक्ति

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तीन नदियों के संगम स्थल का गौरव प्रयागराज को प्राप्त है. यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है जो बेहद पवित्र धार्मिक स्थान है.मान्यता है कि प्रयागनगरी भटके हुए को रास्ता दिखा देती है,अधर्मियों को धर्मात्मा बना देती है, और आत्मा को परमात्मा से जोड़ देती है.सदियों से यह शहर आस्था और धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है.

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    यूं तो अनेकों शहर मौजूद है भारत भूमि के पटल पर लेकिन तीर्थों के राजा प्रयाग की बात ही अलग है.यह शहर अपने आप में संपूर्ण है.इस पावन भूमि में धर्म और आस्था की जड़ें इतनी गहरी हैं इसके छांव तले जो भी आता है बस यही का हो जाता है.यह शहर मोक्ष,धर्म और अध्यात्म का केंद्रहै.मान्यता है कि प्रयागनगरी भटके हुए को रास्ता दिखा देती है,अधर्मियों को धर्मात्मा बना देती है, और आत्मा को परमात्मा से जोड़ देती है.सदियों से यह शहर आस्था और धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है.
    जी हां.. संगम में बहती त्रिवेणी बरसों से इसी आस्था का ही तो प्रतीक है. तीन नदियों के संगम स्थल का गौरव प्रयागराज को ही प्राप्त है. गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती इसी स्थान पर मिलती है और फिर आगे का सफर साथ तय करती हैं. संगम का विशाल क्षेत्र सालों से देश ही नहीं विदेश के लोगों को भी सनातन धर्म से जोड़ता रहा है. कुंभ, महाकुंभ के दौरान तो ऐसा लगता है जैसे सारी दुनिया कुंभनगरी ही आ गई हो. पवित्र त्रिवेणी संगम जीवन के हर एक पहलू पर अपनी अमिट छाप छोड़ता है.

    मोक्ष का रास्ता है त्रिवेणी संगम
    प्रयागराज हिंदू तीर्थयात्रियों का दूसरा घर माना जाता है. यह वही धरती है जहां पर हजारों साल पहले ऋषि-मुनियों ने मोक्ष प्राप्त किया.पुराणों में उल्लेख है कि संगम में लगाई गयी एक डुबकी व्यक्ति को सारे पापों से मुक्त करके उसे परमात्मा से जोड़ देती है. नासिक, उज्जैन, हरिद्वार के अलावा प्रयागराज भी वह स्थान है जहां हर 12 वर्ष में महाकुंभ और हर 6 वर्ष में कुंभ होता है.आस्था के इस पर्व में भक्तों का सैलाब उमड़ता है. विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और मोक्ष का रास्ता तैयार करते हैं.कुंभ के दौरान कुंभनगरी तंबूनगरी में तब्दील हो जाती है.जहां दूर-दूर से लोग आते हैं और यहां कल्पवास करते हैं. माना जाता है कि विभिन्न प्रकार के धार्मिक कर्मकांड संगम क्षेत्र में करने से वह अधिक फलित होते हैं.

    पर्यटकों की पहली पसंद है कुंभ नगरी
    त्याग राज में स्थित संगम क्षेत्र बेहद खूबसूरत है. शांत सा माहौल, ठंडा सा वातावरण,विशाल जल से भरा संगम का क्षेत्र, नाव का झुंड, मंदिर के घंटे,पूजा पाठ करते लोग यह दृश्य बेहद मनोरम होता है. आपको बता दें कि यह स्थान पर्यटकों की पहली पसंद है. हर मौसम में यहां लोग बड़ी संख्या में घूमने आते हैं, पिकनिक मनाते हैं. रेतीली भूमि में ऊंट की सवारी का मजा लेते हैं, नाव में बैठकर त्रिवेणी संगम के जल को माथे चढ़ाते हैं. संगम क्षेत्र प्रयागराज की पहचान है.

    हजारों की जीविका का कारण है संगम क्षेत्र
    सालों से यह क्षेत्र हजारों लोगों की जीविका का एक बड़ा कारण है. सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी इसी कारण संभव होती है. संगम क्षेत्र में लगभग 15 सालों से नाव चलाने वाले संजय निषाद कहते हैं कि गंगा मइया ही हमार पेट भरत हैं, हमार परिवार इही चलावत है. ऐसी अनेकों छोटी-छोटी दुकान है संगम क्षेत्र में सालों से लगी है जो वहां आने वाले पर्यटकों से चलती है.
    (रिपोर्ट-प्राची शर्मा)

    Tags: Prayagraj News

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