बाहुबली विधायक के अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को लेकर घमासान, अपने ही चेयरमैन के खिलाफ HC पहुंचा प्रयागराज विकास प्राधिकरण

पीडीए के इतिहास में ये पहला मौका है जब प्राधिकरण ने अपने चेयरमैन के आदेश को चुनौती दी है.
पीडीए के इतिहास में ये पहला मौका है जब प्राधिकरण ने अपने चेयरमैन के आदेश को चुनौती दी है.

बीते 28 अक्टूबर को प्राधिकरण (Prayagraj Development Authority) की टीम विधायक विजय मिश्रा का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तोड़ने पहुंची थी. लेकिन कमिश्नर आर रमेश ने अंतिम समय में इस पर रोक लगा दी.

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प्रयागराज. आगरा जेल में बंद बाहुबली विधायक विजय मिश्रा (Vijay Mishra) के अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण को लेकर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (Prayagraj Development Authority) और कमिश्नर के बीच मतभेद का मामला अब हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है. पीडीए के इतिहास में ये पहला ऐसा मामला है जब प्राधिकरण ने अपने ही चेयरमैन के आदेश को चुनौती दी है. हाईकोर्ट 4 नवंबर को इस पर अपना फैसला दे सकता है.

प्रयागराज के अल्लापुर इलाके में विजय टॉवर नामक पांच मंजिला अवैध इमारत है. जिसको जमींदोज करने के लिए बीते 28 अक्टूबर को पहुंची पीडीए की टीम को उस वक्त बैरंग लौटना पड़ा था जब कमिश्नर आर रमेश ने ध्वस्तीकरण के आदेश पर ये कहकर रोक लगा दी इस मामले में कॉम्प्लेक्स के मालिक को अपनी बात रखने का एक और मौका मिलना चाहिए.

कमिश्नर ने अपने आदेश में विजय टॉवर के मालिक विधायक विजय मिश्रा को 2 नवंबर तक अपनी बात रखने और प्राधिकरण के जोनल अधिकारी को 6 नवंबर तक मामले में निर्णय लेने को कहा. लेकिन इससे पहले कि विजय मिश्रा की ओर से पीडीए को कोई प्रत्यावेदन  दिया जाता, पीडीए ने कमिश्नर के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी.



बता दें कि अपनी तरह का ये पहला ऐसा मामला है जिसमें प्राधिकरण ने अपने ही चेयरमैन के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी है. विजय मिश्रा का ये अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स उसकी सास इन्द्रकली देवी के नाम पर है. जिसमें 26 दुकानें और 8 फ्लैट्स हैं. जिन्हें पीडीए ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए पहले ही खाली करा दिया है.


विधायक विजय मिश्रा पर 76 से ज्यादा केस  

ज्ञानपुर के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा के खिलाफ 76 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें 24 मुकदमों का कोर्ट में ट्रायल भी चल रहा है. लेकिन विधायक विजय मिश्रा कानूनी दांव-पेंच में माहिर हैं.

कमिश्नर के इस आदेश ने जैसे योगी सरकार के अश्वमेघ का रथ रोक दिया है. इसके पहले प्राधिकरण अतीक अहमद के कई इमारतों को सीज और ध्वस्त कर चुका है. अतीक के अलावा प्रयागराज और सूबे में कई जिलों में माफियाओं और बड़े अपराधियों की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है. लेकिन विजय मिश्रा का मामला कानूनी दांव-पेंच में उलझता दिख रहा है. वहीं पीडीए ने अपने ही अध्यक्ष के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर लोगों को हैरान कर दिया है.

4 नवंबर को हाईकोर्ट सुना सकता है फैसला 

बहरहाल, पीडीए की अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट 4 नवंबर को अपना फैसला दे सकती है. लेकिन पूरी घटना बताती है कि कैसे कोई माफिया सिस्टम में अपनी पकड़ के चलते पूरे प्रशासन और प्राधिकरण को चकरघिन्नी बना देता है और प्राधिकरण अपने ही अध्यक्ष के आदेश के खिलाफ कोर्ट जाने तक को मजबूर हो जाता है.
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