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प्रयागराज: मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर लगा किडनी निकालने का आरोप, सीजेएम ने एसपी सिटी को सौंपी जांच

मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज प्रयागराज
मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज प्रयागराज

Prayagraj News: परिवार वालों ने इस मामले में डॉक्टर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने की मांग को लेकर कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया तो सीजेएम की अदालत ने एसपी सिटी को जांच सौंप दी.

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प्रयागराज. कोरोना महामारी (COVID Pandemic) के मुश्किल वक़्त में काम कर रहे डॉक्टरों को कोरोना योद्धा करार देकर उनका सम्मान और अभिनंदन किया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) के मेडिकल कॉलेज (Medical College) के तीन डॉक्टर्स पर एक बीमार युवक को कोरोना पॉजिटिव बताकर उसकी किडनी निकाल लेने का गंभीर आरोप लगा है. आरोप यह भी है कि किडनी निकाल लेने की वजह से ही युवक की मौत हो गईं. पोस्टमार्टम में सच्चाई सामने न आ सके, इसलिए मृतक को कोरोना पॉजिटिव बता दिया गया. परिवार वालों ने इस मामले में डॉक्टर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने की मांग को लेकर कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया तो सीजेएम की अदालत ने एसपी सिटी को जांच सौंप दी.

प्रिंसिपल ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

अदालत ने एसपी सिटी को पंद्रह दिनों में जांच पूरी कर 22 दिसम्बर को अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा है. अगर अदालत को लगेगा तो वह अगली सुनवाई पर सरकारी डॉक्टर्स के खिलाफ किडनी चोरी का केस दर्ज किये जाने का आदेश दे सकती है. वैसे इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपनी सफाई पेश की है. प्रिंसिपल डॉ एसपी सिंह इस मामले में खुद आगे आए और उन्होंने पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे बेबुनियाद करार दिया. उनका कहना है कि प्रयागराज में किडनी ट्रांसप्लांट की कोई सुविधा नहीं होने की वजह से यह मुमकिन ही नहीं है. बहरहाल मेडिकल कॉलेज के सरकारी डॉक्टर्स पर किडनी चोरी का आरोप लगने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है.



परिजनों का है ये आरोप
प्रयागराज के फूलपुर इलाके के रहने वाले मिथलेश कुमार ने सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दाखिल कर मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टर्स बी सिंह, पी गुप्ता और आर यादव के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज किये जाने का आदेश दिए जाने की गुहार लगाई. कहा कि उसके छोटे भाई पचीस साल के अखिलेश को सत्ताइस अगस्त को सांस लेने में दिक्कत होने के बाद मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया. चौबीस घंटे उसकी हालत स्थिर थी. अगले दिन उसे कोरोना पॉजिटिव बताकर आईसीयू में रखने की बात बताई गई. उनतीस अगस्त को बताया गया कि अखिलेश की मौत हो गई है. परिवार वालों ने दूर से अंतिम दर्शन कराने की अपील की तो उन्हें दिखा दिया गया. परिवार वालों का आरोप है कि अखिलेश का पूरा शरीर खून से लथपथ था. पेट और सीने के नीचे कई जगह कटने के निशान थे. परिवार वालों को आशंका है कि अखिलेश की किडनी निकाल ली गई, इसी वजह से उसकी मौत हो गई. इस मामले में अब अदालत को आगे फैसला लेना है.
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