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नेहरू-गांधी खानदान के 'आनन्द भवन' को 4 करोड़ का नोटिस, कांग्रेस ने कर डाली ये मांग

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 18, 2019, 8:31 PM IST
नेहरू-गांधी खानदान के 'आनन्द भवन' को 4 करोड़ का नोटिस, कांग्रेस ने कर डाली ये मांग
देश की आजादी की लड़ाई का मुख्य केन्द्र रहा है आनन्द भवन.

प्रयागराज नगर निगम (Prayagraj Municipal Corporation) ने नेहरू-गांधी (Nehru-Gandhi) खानदान के पैतृक आवास आनन्द भवन (Anand Bhawan) को चार करोड़ 19 लाख के गृह कर (House Tax) के बकाए का नोटिस भेजा है. जबकि कांग्रेस ने आनन्द भवन को गृह कर का नोटिस भेजे जाने को लेकर सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है.

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प्रयागराज. देश की आजादी की लड़ाई का मुख्य केन्द्र रहे नेहरू-गांधी (Nehru-Gandhi) खानदान के पैतृक आवास आनन्द भवन (Anand Bhawan) को प्रयागराज नगर निगम (Prayagraj Municipal Corporation) ने चार करोड़ 19 लाख के गृह कर (House Tax) बकाए का नोटिस भेज दिया है. नगर निगम ने यह नोटिस इस भवन के कमर्शियल उपयोग किए जाने के आधार पर भेजे जाने की बात कह रहा है. दरअसल, जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड की ओर से आनन्द भवन में म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का संचालन होता है, जिसे देखने प्रति दिन हजारों लोग आते हैं और उनसे टिकट के पैसे भी ट्रस्ट वसूल करता है. जबकि कांग्रेस पार्टी ने आनन्द भवन को हाउस टैक्स का नोटिस भेजे जाने को लेकर सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है. कांग्रेस पार्टी ने साबरमती ट्रस्ट और संसद पर भी टैक्स लगाने की मांग कर दी है.

इस कारण खास है आनन्‍द भवन
नेहरू-गांधी खानदान के पैतृक आवास स्वराज भवन और आनन्द भवन को पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने 70 के दशक में राष्ट्र को समर्पित कर दिया था. बाद में इसके रखरखाव के लिए ट्रस्ट बनाया गया. आनन्द भवन और स्वराज भवन की जिम्मेदारी जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड को सौंपी गई है. जबकि स्वराज भवन में जहां बाल भवन बनाया गया. यही नहीं, आनन्द भवन में म्यूजियम और प्लेनेटोरियम संचालित हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचे हैं. इसके रखरखाव के लिए ही यहां आने वाले लोगों से प्रवेश शुल्क लिया जाता है. इसी आधार पर ही नगर निगम ने इस कमर्शियल गतिविधि मानते हुए हाउस टैक्स का नोटिस भेज दिया है.

नगर निगम ने कही ये बात

नगर निगम के मुताबिक, पहले आनन्द भवन का हाउस टैक्स जमा किया जाता था, लेकिन कई वर्षों से हाउस टैक्स अब जमा नहीं हो रहा है. इसी वजह से आनन्द भवन पर दो करोड़ 71 लाख 13 हजार 534 रुपए का हाउस टैक्स बकाया है. जबकि ब्याज समेत यह धनराशि चार करोड़ 19 लाख 57 हजार 495 रुपये हो गयी है. हाउस टैक्स का नोटिस भेजे जाने के बाद जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड के प्रशासनिक सचिव डॉ. एन. बाला कृष्णन ने आठ नवम्बर को मेयर को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि चैरिटेबल ट्रस्ट की गतिविधि कामर्शियल नहीं हो सकती है. उन्होंने हाउस टैक्स का मूल्यांकन गलत होने की बात कही है. वहीं नगर निगम की नोटिस के बाद कांग्रेस नेता बाबा अभय अवस्थी ने योगी सरकार पर हमला बोला है. इसे सियासी साजिश बताते हुए साबरमती ट्रस्ट और संसद पर भी टैक्स लगाने की मांग की है.

मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने बताई वजह
इस मामले को लेकर मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी का कहना है कि आनन्द भवन प्रबंधन ने बढ़ने वाले हाउस टैक्स पर कभी कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराई है. आनन्द भवन की ओर से आपत्ति न दर्ज कराए जाने से बकाया बढ़ता रहा. साथ ही मेयर का कहना है कि अगर आनन्द भवन प्रबंधन की ओर से कोई आपत्ति आती है तो उस पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा है कि स्वराज भवन पर लगने वाले नगर निगम का टैक्स विभाग ही बकायेदारों को नोटिस भेजता है. उनके मुताबिक, नगर निगम के बड़े बकायेदारों में आनन्द भवन भी शामिल है, इसलिए ये नोटिस भेजा गया है. हालांकि उन्होंने कहा है कि पहले 600 रुपए सालाना हाउस टैक्स लगता था, लेकिन इससे पहले आनन्द भवन की ओर से कभी आपत्ति नहीं दर्ज करायी गई थी. जबकि आनन्द भवन की ओर से कभी यह जानकारी नगर निगम को दी ही नहीं गई कि हम चैरिटेबल ट्रस्ट हैं और यह भवन राष्ट्र को समर्पित है. मेयर ने कहा है कि जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड के प्रशासनिक सचिव डॉ. एन. बाला कृष्णन ने पहली बार इस मामले में पत्र लिख कर गृह कर का मूल्यांकन गलत होने की बात कही है और पुर्नमूल्यांकन की भी मांग की है. यदि इस सम्बन्ध में जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड की ओर से कागजात मुहैया कराए जाते तो कार्यकारिणी में गृह कर कम करने करने पर विचार किया जाएगा.बहरहाल, नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके मिश्रा के मुताबिक 2003 से आनन्द भवन का गृह कर बकाया है. उन्होंने कहा है कि हर साल गृह कर बकाए का बिल भेजा जाता और ट्रस्ट की ओर से पार्ट पेमेन्ट भी किया जाता रहा है. उनके मुताबिक आनन्द भवन के पूरे परिसर को लेकर कर का निर्धारण किया जाता है. मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के मुताबिक आनन्द भवन पर अनावासीय कर निर्धारित किया गया है.

स्वतन्त्रता आन्दोलन का गवाह बना ये भवन
आपको बता दें कि आनन्द भवन 1920 से लगातार स्वतन्त्रता आन्दोलन की गतिविधियों का केन्द्र रहा. महात्मा गांधी के साथ ही कांग्रेस के नरम दल से जुड़े सभी बड़े नेताओं का यहां आना जाना रहा. जबकि 1928 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पूर्ण स्वतन्त्रता की घोषणा करने वाला भाषण आनन्द भवन में ही लिखा था. भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रारूप भी यहीं बना. विदेशी कपड़ों की होली भी यहीं जलाई गई. 1930 में इसे कांग्रेस का मुख्यालय बनाया गया, 1940 में यहां कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में महात्मा गांधी के साथ दूसरे बड़े नेता भी शामिल हुए थे. हालांकि स्वतन्त्रता मिलने के बाद कांग्रेस मुख्यालय 1948 में दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया. आनन्द भवन को इसके बाद जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड के हवाले कर दिया गया. स्वराज भवन में पंडित नेहरू की इच्छा से बाल भवन बनाया गया, जहां आज भी अनाथ बच्चों को रखा जाता है. जबकि आनन्द भवन को 16 नवम्बर 1969 को पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने राष्ट्र को समर्पित कर दिया और 1971 में इसे संग्रहालय बना दिया गया.

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First published: November 18, 2019, 7:03 PM IST
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