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Prayagraj News: योगी सरकार के 'लव जिहाद' कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टली

योगी सरकार के धर्मांतरण अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टाली
योगी सरकार के धर्मांतरण अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टाली

Prayagraj News: मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सभी याचिकाओं को स्थानान्तरित कर एक साथ सुने जाने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी है, जिसकी सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई होगी. इसलिए अर्जी तय होने तक सुनवाई स्थगित की जाए.

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प्रयागराज. यूपी में 'लव जिहाद' (Love Jihad) की घटनाओं को रोकने के लिए योगी सरकार (Yogi Government) द्वारा लाए गए धर्मांतरण अध्यादेश (Conversion Ordinance) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सुनवाई टाल दी है. सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के चलते हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है. कोर्ट अब दो फरवरी को धर्मांतरण अध्यादेश की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगी. मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सभी याचिकाओं को स्थानान्तरित कर एक साथ सुने जाने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी है, जिसकी सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई होगी. इसलिए अर्जी तय होने तक सुनवाई स्थगित की जाए. जिस आधार पर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित करने का आदेश देते हुए सुनवाई की अगली तारीख दो फरवरी नियत कर दी.

हालांकि इस आदेश के बाद ही यह पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अर्जी खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट से यूपी सरकार की अर्जी खारिज होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई का रास्ता अब साफ हो गया है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला देर से आने की वजह से आज की सुनवाई टालनी पड़ी. चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एसएस शमशेरी की डिवीजन बेंच मामले की सुनवाई कर रही है.

सरकार ने दाखिल किया है 102 पन्नों का जवाब 


गौरतलब है कि यूपी सरकार इससे पहले पांच जनवरी को अपना जवाब कोर्ट में दाखिल कर चुकी है. इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं की ओर से भी जवाब दाखिल किया जा चुका है. 102 पन्नों के जवाब में यूपी सरकार की ओर से अध्यादेश को जरूरी बताया गया है. राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि कई जगहों पर धर्मान्तरण की घटनाओं को लेकर क़ानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो गया था. क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह का अध्यादेश लाया जाना बेहद ज़रूरी था. सरकार के मुताबिक़ धर्मांतरण अध्यादेश से महिलाओं को सबसे ज़्यादा फायदा होगा और उनका उत्पीड़न नहीं हो सकेगा.

दाखिल हुई हैं चार याचिकाएं 


योगी सरकार 'लव जिहाद' की घटनाओं को रोकने के लिए जो अध्यादेश लाई थी, उसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार अलग अलग अर्जियां दाखिल की गई थीं. इनमे से एक अर्जी वकील सौरभ कुमार की थी तो दूसरी बदायूं के अजीत सिंह यादव, तीसरी रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी आनंद मालवीय और चौथी कानपुर के एक पीड़ित की तरफ से दाखिल की गई थी. सभी याचिकाओं में अध्यादेश को गैर ज़रूरी बताया गया. इन याचिकाओं में कहा गया कि यह सिर्फ सियासी फायदे के लिए है. इसमें एक वर्ग विशेष को निशाना बनाया जा सकता है. दलील यह भी दी गई कि अध्यादेश लोगों को संविधान से मिले मौलिक अधिकारों के खिलाफ है, इसलिए इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह भी कहा गया कि अध्यादेश किसी इमरजेंसी हालत में ही लाया जा सकता है, सामान्य परिस्थितियों में नहीं.
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