Prayagraj News: कोरोना काल में देवदूत बने डॉ राजीव सिंह, दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे

प्रयागराज के डॉ राजीव कोरोना मरीजों के लिए बने देवदूत

प्रयागराज के डॉ राजीव कोरोना मरीजों के लिए बने देवदूत

Prayagraj News: कोविड की इस महामारी के बीच डॉक्टर राजीव सिंह न केवल मरीजों का इलाज कर रहे हैं बल्कि कोविड-19 के संक्रमण से लड़ने की लोगों को हौसला भी दे रहे हैं और जागरूक भी कर रहे हैं.

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प्रयागराज. कोरोना काल (COVID-19) में धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों को लेकर भले ही सोशल मीडिया पर कई तरह के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इन सबके बीच प्रयागराज (Prayagraj) के एक डॉक्टर न केवल खुद कोविड पाजिटिव की होने के बावजूद अपने अस्पताल में आने वाले मरीजों का इलाज करते रहे हैं, बल्कि अपने पूरे स्टाफ का भी हौसला बढ़ा रहे हैं. दरअसल कोविड का जब संक्रमण बढ़ा तो डॉक्टर का पूरा परिवार भी महामारी के चपेट में आ गया था. नारायण स्वरुप अस्पताल के निदेशक डॉक्टर राजीव सिंह, उनकी पत्नी सोनिया सिंह के साथ ही 6 साल का बेटा और 10 साल की बेटी भी कोविड का शिकार हुई. लेकिन पॉजिटिव सोच और हिम्मत से उन्होंने कोविड को हरा दिया. कोविड की इस महामारी के बीच डॉक्टर राजीव सिंह न केवल मरीजों का इलाज कर रहे हैं बल्कि कोविड-19 के संक्रमण से लड़ने की लोगों को हौसला भी दे रहे हैं और जागरूक भी कर रहे हैं.

इन दिनों पूरा देश कोविड-19 की सेकेंड वेब के संक्रमण की मार को झेल रहा है. लेकिन इस संक्रमण से लोगों को बचाने का काम धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और मेडिकल टीमें कर रही हैं. हांलाकि मरीजों के इलाज के दौरान मेडिकल टीमों को भी कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है. इन सबके बीच उनके परिवार और निजी जीवन में भी इसका असर पड़ता है. कोरोना संकटकाल में डॉक्टर कई दिनों तक न ही अपने घर जा पाते हैं और न अपनों से मिल पाते हैं. आलम यह है कि डॉक्टर सिर्फ अपने परिवार से भी वीडियो कॉल पर ही बात कर पाते हैं. प्रयागराज के रहने वाले डॉ राजीव सिंह गोल्ड मेडलिस्ट है और उत्तर प्रदेश के गवर्नर से सम्मानित किए गए हैं. कोरोना काल में इनका अधिकतर समय हॉस्पिटल में ही बीतता है. कोविड मरीजों की तादाद बढ़ी तो उन्होंने नारायण स्वरुप हॉस्पिटल को कोविड हॉस्पिटल बना दिया। मरीजों के इलाज के दौरान डॉ राजीव की रिपोर्ट भी कोविड पॉजिटिव आई. इसके साथ ही इनका पूरा परिवार भी कोविड संक्रमित हो गया. डॉक्टर राजीव का 6 साल का बेटा, 10 साल की बेटी और परिवार के कई लोग संक्रमित हो गए. इस दौरान भी डॉक्टर राजीव अपने हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मदद से  देखते रहे और उनका इलाज करते रहे. हांलाकि इन्हें अपने परिवार से भी दूर रहना पड़ा और हॉस्पिटल के ही एक कमरे में 15 दिन आइसोलेट रहे.

डॉक्टर के सेवा भाव से मरीज भी अभिभूत

इस बीच उनके परिवार का भी स्वास्थ्य ठीक हो गया और सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई साथ में डॉक्टर भी निगेटिव हुए. इसी दौरान इनके बेटे का जन्मदिन था. हर साल वे जन्मदिन बहुत धूमधाम से मनाते थे. लेकिन इस साल कोविड-19 के संक्रमण के चलते बच्चे का जन्मदिन मनाने अपने घर भी नहीं जा सके. डॉ राजीव सिंह कोरोना के संक्रमण से उबरने के बाद फिर से उसी उत्साह के कोरोना मरीजों के इलाज में जुट गए हैं. कोविड मरीजों के इलाज के लिए इन्हें कोविड वार्ड में भी जाना पड़ता है. जिसके लिए पीपीई किट पहननी पड़ती है. तकरीबन 5 से 6 घंटे इस किट में गुजारना होता है. ऐसे समय जबकि कई लोगों का अपनों ने साथ छोड़ दिया है, डॉक्टर राजीव सिंह और उनकी पूरी टीम ऐसे कोविड मरीजों का सहारा बने हुए हैं और उनका इलाज कर रहे हैं. डॉ राजीव सिंह के अस्पताल में इलाज करा रहे कोविड मरीज आशीष त्रिपाठी भी डॉ राजीव सिंह और उनकी टीम के सेवा भाव से अब पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और उन्हें देवदूत बता रहे हैं. वहीं डॉक्टर राजीव सिंह न केवल खुद मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं बल्कि मुश्किल की इस घड़ी में अपनी टीम भी हौसला बढ़ा रहे हैं.

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