प्रयागराज: चार दिन बाद भी यूनाइटेड मेडिसिटी पर नहीं हुई कार्रवाई, IG बोले- पुलिस के हाथ बंधे

पैसे की मांग पूरी ना होने पर प्राइवेट अस्पताल ने 3 साल की बच्ची को फटे पेट किया बाहर

पैसे की मांग पूरी ना होने पर प्राइवेट अस्पताल ने 3 साल की बच्ची को फटे पेट किया बाहर

Prayagraj News: आईजी रेंज केपी सिंह के मुताबिक कार्रवाई को लेकर पुलिस के हाथ बंधे हैं. ऐसे मामलों में बगैर सीएमओ रिपोर्ट पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकती. तीन दिन से सीएमओ की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 9, 2021, 11:26 AM IST
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प्रयागराज. प्राइवेट हॉसिपिटल यूनाइटेड मेडिसिटी (United Medicity) में सर्जरी के बाद तीन साल की मासूम खुशी की मौत (Khushi Death Case) के मामले में मुकदमा दर्ज होने के 4 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. मृतक बच्ची के पिता ने इलाज में लापरवाही का मुकदमा दर्ज कराया है. कौशांबी के पिपरी थाने में डॉ अंकित गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज है. आईजी रेंज केपी सिंह के मुताबिक कार्रवाई को लेकर पुलिस के हाथ बंधे हैं. ऐसे मामलों में बगैर सीएमओ रिपोर्ट पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकती. तीन दिन से सीएमओ की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है. बता दें कि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने डीएम प्रयागराज से 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी.

गौरतलब है कि प्रयागराज के करेली इलाके के रहने वाले ब्रह्मदीन मिश्रा की 3 साल की बेटी को पेट में बीमारी थी. मां-बाप ने इलाज के लिए प्रयागराज के धूमनगंज के रावतपुर एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. कुछ दिन बाद बच्ची के पेट का ऑपरेशन किया गया और फिर दोबारा पेट का ऑपरेशन किया गया. बच्ची के पिता के मुताबिक इस ऑपरेशन का डेढ़ लाख रुपए ले लेने के बाद भी हॉस्पिटल प्रशासन ने पांच लाख की डिमांड की. जब रुपए नहीं दे पाए तो बच्चे सहित हॉस्पिटल प्रशासन ने परिवार को बाहर भेज दिया और कहा अब इसका इलाज यहां नहीं हो पाएगा.

ऑपरेशन के बाद टांका न लगाने का आरोप 

इसके बाद पिता अपनी बेटी को लेकर कई हॉस्पिटल तक गए. लेकिन सभी हॉस्पिटलों में बच्ची को लेने से मना कर दिया गया. कहा गया कि बच्ची की हालत बहुत क्रिटिकल है, वह नहीं बच पाएगी. बच्ची जिंदगी की जंग हार गई और उसने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया. मृतक बच्ची के पिता का आरोप है कि डॉक्टर्स ने बच्ची के ऑपरेशन के बाद सिलाई, टांका नहीं किया और परिवार को ऐसे ही सौंप दिया. इसी वजह से दूसरे हॉस्पिटल ने बच्ची को लेने से मना कर दिया. बाद में इलाज के अभाव में बच्ची ने दम तोड़ दिया.
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