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UP News: कोरोना काल में बढ़ा मुकदमों का बोझ, इलाहाबाद हाईकोर्ट में 10 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग

कोरोना की वजह से इलाहाबाद हाई कोर्ट में बढ़ी पेंडिंग मुकदमों की संख्या

कोरोना की वजह से इलाहाबाद हाई कोर्ट में बढ़ी पेंडिंग मुकदमों की संख्या

Prayagraj News: इस साल कोरोना की सेकंड वेब में मुकदमों की सुनवाई न हो पाने के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में तीस हजार नये मुकदमों की सुनवाई भी पेंडिंग हो गयी है.

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प्रयागराज. एशिया की सबसे बड़ी अदालत इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में मुकदमों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है. कोरोना की वैश्विक महामारी (Corona Pandemic) ने निचली अदालतों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में मुकदमों का बोझ और बढ़ा दिया है. कोरोना काल में पिछले एक साल से ज्यादा समय से मुकदमों की नियमित सुनवाई न हो पाने के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में दस लाख से ज्यादा मुकदमे पेंडिग हो गये हैं. तो वहीं इस साल कोरोना की सेकंड वेब में मुकदमों की सुनवाई न हो पाने के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में तीस हजार नये मुकदमों की सुनवाई भी पेंडिंग हो गयी है. हांलाकि कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोरोना की नई गाइड लाइन के साथ 14 जुलाई से खुली अदालत में मुकदमों की सुनवाई शुरु कर दी गयी है, लेकिन हाईकोर्ट पर मुकदमों के बढ़े बोझ से जल्द मुकदमों के निस्तारण की बड़ी समस्या अदालतों के सामने खड़ी हो गयी है. वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधानपीठ और लखनऊ बेंच में स्वीकृत 160 पदों के सापेक्ष 94 जजों के ही कार्यरत होने से भी मुकदमों की सुनवाई को लेकर बड़ी चुनौती है.

कोरोना संक्रमण काल में पिछले डेढ़ सालों से इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमों की सुनवाई पर असर पड़ा है. हांलाकि कुछ समय तक हाईकोर्ट बंद रखने के बाद मुकदमों की वर्चुअल सुनवाई शुरु हुई, लेकिन वर्चुअल सुनवाई से मुकदमों के निस्तारण में तेजी नहीं लायी जा सकी. जिसके चलते हाईकोर्ट में विचाराधीन मुकदमों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. हाईकोर्ट की वेबसाइट पर एक मई 2021 तक मौजूद जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट की प्रधानपीठ 788399 और लखनऊ बेंच 224316 को मिलाकर पेंडिंग मुकदमों की संख्या 10,12,715 हो गई है. हजारों याचिकाओं का कार्यालय में अंबार लगा है, जिन्हें अभी पंजीकृत किया जाना बाकी है. विचाराधीन मुकदमों की संख्या में बढ़ोत्तरी का यह आलम तब है, जब दाखिले के समय ही कोर्ट द्वारा आधे से अधिक मुकदमे तत्काल निस्तारित कर दिए जा रहे हैं.

जजों की कमी भी बड़ी चुनौती
इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष 10 लाख से अधिक मुकदमों के बोझ से निपटने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है. जजों की नियुक्ति प्रक्रिया धीमी होने के कारण जजों की कमी भी मुकदमों के निस्तारण में बाधक बन रही है. मौजूदा समय में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत 160 पदों के सापेक्ष महज 94 जज ही कार्यरत हैं. यानी हाईकोर्ट में अभी 66 पद खाली हैं. हालांकि हाईकोर्ट कोलेजियम ने कुछ वकीलों का नाम जज के रूप में नियुक्ति के लिए केन्द्र सरकार के पास भेजे हैं, और जांच पूरी होने के बाद इन्हें सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की संस्तुति के लिए रखा जाएगा। इन नियुक्तियों के बाद स्थिति में सुधार दिखाई दे सकता है.
वहीं सीनियर एडवोकेट विजय गौतम के मुताबिक शासन के स्तर पर भी अधिकारी अगर कोर्ट के आदेशों का अनुपालन समय से करें तो मुकदमों की संख्या में कमी लायी जा सकती है. इसके साथ ही सरकारी वकील अगर समय से जवाब दाखिल करें तो भी मुकदमों के निस्तारण में तेजी आ सकती है. उनके मुताबिक कानून मंत्री और मुख्य सचिव इस संबन्ध में दिशा निर्देश जारी करें कि अदालतों से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी न हो. इससे भी मुकदमों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी.

विशेष प्रयास की जरुरत
वहीं कोरोना का संक्रमण शुरु होने के बाद 19 मार्च 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट पहली बार बंद कर दिया गया था. जिसके बाद संक्रमण कम होने पर हाईकोर्ट खुला, लेकिन कोरोना की सेकंड वेब आने के बाद एक बार फिर से हाईकोर्ट में मुकदमों की सुनवाई फिजकली नहीं हो पा रही थी, बल्कि वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिए वर्चुअली मुकदमे सुने जा रहे थे. कई बार वकीलों को लिंक न मिलने और नेटवर्क की समस्या के चलते भी मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पाई जिससे मुकदमों की पेंडेंसी लगातार बढ़ रही थी. हांलाकि कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद हाईकोर्ट बार एशोसिएशन की मांग पर कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने 14 जुलाई से मुकदमों की सुनवाई खुली अदालत में करने की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही अभी भी वर्चुअली मुकदमों की सुनवाई भी हो रही है. लेकिन मुकदमों का बोझ इतना बढ़ गया है कि इसे कम करने के लिए विशेष प्रयास की जरुरत है.

कोरोना ने बढ़ायी चुनौती
हांलाकि वर्ष 2017 से पहले विचाराधीन मुकदमों की संख्या में लगातार कमी आ रही थी. लेकिन कोरोना काल में आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए 10 लाख के पार हो गया. हाईकोर्ट बार एशोसिएशन के अध्यक्ष अमरेन्द्र नाथ सिंह के मुताबिक कोरोना की सेकंड वेब के दौरान अब तक तीस हजार नये मुकदमों का दाखिला हुआ है. जिससे भी मुकदमों की पेंडेंसी बढ़ी है. उनके मुताबिक केन्द्र की मोदी सरकार ने 2015 में मुकदमों की पेंडेंसी कम करने के लिए प्रयास शुरु किया था. लेकिन उसके ज्यादा अच्छे परिणाम नहीं आये हैं. हाईकोर्ट बार एशोसिएसन अध्यक्ष ने कहा है कि जजों और केन्द्र व राज्य सरकारों की ओर से ऐसे प्रयास होने चाहिए, ताकि पेंडिंग मुकदमों के बोझ को कम किया जा सके.

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