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UP News: कोरोना काल में बढ़ा मुकदमों का बोझ, इलाहाबाद हाईकोर्ट में 10 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग

UP News: कोरोना काल में बढ़ा मुकदमों का बोझ, इलाहाबाद हाईकोर्ट में 10 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग

कोरोना की वजह से इलाहाबाद हाई कोर्ट में बढ़ी पेंडिंग मुकदमों की संख्या

Prayagraj News: इस साल कोरोना की सेकंड वेब में मुकदमों की सुनवाई न हो पाने के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में तीस हजार नये मुकदमों की सुनवाई भी पेंडिंग हो गयी है.

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प्रयागराज. एशिया की सबसे बड़ी अदालत इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में मुकदमों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है. कोरोना की वैश्विक महामारी (Corona Pandemic) ने निचली अदालतों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में मुकदमों का बोझ और बढ़ा दिया है. कोरोना काल में पिछले एक साल से ज्यादा समय से मुकदमों की नियमित सुनवाई न हो पाने के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में दस लाख से ज्यादा मुकदमे पेंडिग हो गये हैं. तो वहीं इस साल कोरोना की सेकंड वेब में मुकदमों की सुनवाई न हो पाने के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में तीस हजार नये मुकदमों की सुनवाई भी पेंडिंग हो गयी है. हांलाकि कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोरोना की नई गाइड लाइन के साथ 14 जुलाई से खुली अदालत में मुकदमों की सुनवाई शुरु कर दी गयी है, लेकिन हाईकोर्ट पर मुकदमों के बढ़े बोझ से जल्द मुकदमों के निस्तारण की बड़ी समस्या अदालतों के सामने खड़ी हो गयी है. वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधानपीठ और लखनऊ बेंच में स्वीकृत 160 पदों के सापेक्ष 94 जजों के ही कार्यरत होने से भी मुकदमों की सुनवाई को लेकर बड़ी चुनौती है.

कोरोना संक्रमण काल में पिछले डेढ़ सालों से इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमों की सुनवाई पर असर पड़ा है. हांलाकि कुछ समय तक हाईकोर्ट बंद रखने के बाद मुकदमों की वर्चुअल सुनवाई शुरु हुई, लेकिन वर्चुअल सुनवाई से मुकदमों के निस्तारण में तेजी नहीं लायी जा सकी. जिसके चलते हाईकोर्ट में विचाराधीन मुकदमों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. हाईकोर्ट की वेबसाइट पर एक मई 2021 तक मौजूद जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट की प्रधानपीठ 788399 और लखनऊ बेंच 224316 को मिलाकर पेंडिंग मुकदमों की संख्या 10,12,715 हो गई है. हजारों याचिकाओं का कार्यालय में अंबार लगा है, जिन्हें अभी पंजीकृत किया जाना बाकी है. विचाराधीन मुकदमों की संख्या में बढ़ोत्तरी का यह आलम तब है, जब दाखिले के समय ही कोर्ट द्वारा आधे से अधिक मुकदमे तत्काल निस्तारित कर दिए जा रहे हैं.

जजों की कमी भी बड़ी चुनौती
इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष 10 लाख से अधिक मुकदमों के बोझ से निपटने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है. जजों की नियुक्ति प्रक्रिया धीमी होने के कारण जजों की कमी भी मुकदमों के निस्तारण में बाधक बन रही है. मौजूदा समय में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत 160 पदों के सापेक्ष महज 94 जज ही कार्यरत हैं. यानी हाईकोर्ट में अभी 66 पद खाली हैं. हालांकि हाईकोर्ट कोलेजियम ने कुछ वकीलों का नाम जज के रूप में नियुक्ति के लिए केन्द्र सरकार के पास भेजे हैं, और जांच पूरी होने के बाद इन्हें सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की संस्तुति के लिए रखा जाएगा। इन नियुक्तियों के बाद स्थिति में सुधार दिखाई दे सकता है.
वहीं सीनियर एडवोकेट विजय गौतम के मुताबिक शासन के स्तर पर भी अधिकारी अगर कोर्ट के आदेशों का अनुपालन समय से करें तो मुकदमों की संख्या में कमी लायी जा सकती है. इसके साथ ही सरकारी वकील अगर समय से जवाब दाखिल करें तो भी मुकदमों के निस्तारण में तेजी आ सकती है. उनके मुताबिक कानून मंत्री और मुख्य सचिव इस संबन्ध में दिशा निर्देश जारी करें कि अदालतों से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी न हो. इससे भी मुकदमों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी.

विशेष प्रयास की जरुरत
वहीं कोरोना का संक्रमण शुरु होने के बाद 19 मार्च 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट पहली बार बंद कर दिया गया था. जिसके बाद संक्रमण कम होने पर हाईकोर्ट खुला, लेकिन कोरोना की सेकंड वेब आने के बाद एक बार फिर से हाईकोर्ट में मुकदमों की सुनवाई फिजकली नहीं हो पा रही थी, बल्कि वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिए वर्चुअली मुकदमे सुने जा रहे थे. कई बार वकीलों को लिंक न मिलने और नेटवर्क की समस्या के चलते भी मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पाई जिससे मुकदमों की पेंडेंसी लगातार बढ़ रही थी. हांलाकि कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद हाईकोर्ट बार एशोसिएशन की मांग पर कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने 14 जुलाई से मुकदमों की सुनवाई खुली अदालत में करने की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही अभी भी वर्चुअली मुकदमों की सुनवाई भी हो रही है. लेकिन मुकदमों का बोझ इतना बढ़ गया है कि इसे कम करने के लिए विशेष प्रयास की जरुरत है.

कोरोना ने बढ़ायी चुनौती
हांलाकि वर्ष 2017 से पहले विचाराधीन मुकदमों की संख्या में लगातार कमी आ रही थी. लेकिन कोरोना काल में आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए 10 लाख के पार हो गया. हाईकोर्ट बार एशोसिएशन के अध्यक्ष अमरेन्द्र नाथ सिंह के मुताबिक कोरोना की सेकंड वेब के दौरान अब तक तीस हजार नये मुकदमों का दाखिला हुआ है. जिससे भी मुकदमों की पेंडेंसी बढ़ी है. उनके मुताबिक केन्द्र की मोदी सरकार ने 2015 में मुकदमों की पेंडेंसी कम करने के लिए प्रयास शुरु किया था. लेकिन उसके ज्यादा अच्छे परिणाम नहीं आये हैं. हाईकोर्ट बार एशोसिएसन अध्यक्ष ने कहा है कि जजों और केन्द्र व राज्य सरकारों की ओर से ऐसे प्रयास होने चाहिए, ताकि पेंडिंग मुकदमों के बोझ को कम किया जा सके.

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UPCET Answer Key 2021: यूपी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की आंसर-की जारी, ऐसे करें डाउनलोड

UPCET Answer Key 2021: यूपी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की आंसर-की जारी, ऐसे करें डाउनलोड

UPCET Answer Key 2021: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यूपी सीईटी 2021 की प्रोविजन आंसर-की जारी कर दी है. अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट  upcet.nta.nic.in पर इसे चेक कर सकते हैं.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 17, 2021, 09:19 IST
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 नई दिल्ली (UPCET Answer Key 2021). उत्तर प्रदेश कॉमन एंट्रेंस टेस्ट 2021 की प्रोविजनल आंसर-की (UPCET Answer Key 2021) जारी कर दी गई है. अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट upcet.nta.nic.in से इसे डाउनलोड कर सकते हैं. आंसर-की 16 सितंबर 2021 को जारी की गई है. आधिकारिक वेबसाइट पर आज यानी 17 सितंबर 2021 तक आंसर-की उपलब्ध रहेगी. इस परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से किया गया था.

बता दें कि परीक्षा एनटीए की ओर से 5 सितंबर 2021 और 6 सितंबर 2021 को आयोजित की गई थी. जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, जो अभ्यर्थी जारी प्रोविजनल आंसर-की से संतुष्ट नहीं हैं. वह अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं.इसके लिए अभ्यर्थी को प्रति प्रश्न 200 रुपए शुल्क देना होगा. प्रोविजनल आंसर-की पर प्राप्त आपत्तियों के निपटारे के बाद फाइलन आंसर-की जारी की जाएगी.  अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी एनटीए की हेल्पलाइन नंबर 011 4075 9000  पर संपर्क कर सकते हैं.

UPCET Answer Key 2021: ऐसे डाउनलोड करें आंसर-की 
सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट आधिकारिक वेबसाइट upcet.nta.nic.in पर जाएं.
होम पेज पर दिए गए  यूपीसीईटी 2021 आंसर-की के लिंक पर क्लिक करें.
यहां मांगी गई जानकारी को दर्ज कर सबमिट करें.
अब आंसर-की आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा.
उसे डाउनलोड करें.

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Allahabad HC का अहम फैसला, दूसरे धर्म में की है शादी तो वैवाहिक जीवन में परिजन भी नहीं दे सकते दखल

Allahabad HC का अहम फैसला, दूसरे धर्म में की है शादी तो वैवाहिक जीवन में परिजन भी नहीं दे सकते दखल

Allahabad High Court Decision: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है, ऐसे में कोई आपत्ति या फिर उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए दूसरे धर्म में शादी करने वाले युवाओं को बड़ी राहत दी है. एक याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो अलग-अलग धर्मों के बालिगों ने यदि शादी की है तो उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार उनके माता पिता को भी नहीं है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि कोई दूसरे धर्म में शादी करता है तो उनके वैवाहिक जीवन में कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता है साथ ही यदि वे पुलिस सुरक्षा की मांग करते हैं तो पुलिस को उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी होगी.

जानकारी के अनुसार शिफा हसन नामक एक मुस्लिम महिला ने एक हिंदू युवक से शादी की, जिसके बाद उसने जिलाधिकारी से हिंदू धर्म अपनाने की अनुमति मांगी. जिलाधिकारी ने इस संबंध में पुलिस थाने से रिपोर्ट की मांग की. इस पर पुलिस ने जानकारी दी कि युवक के पिता इस शादी से राजी नहीं हैं और दूसरी तरफ लड़की के परिजन भी इसके खिलाफ हैं.

जान को खतरा
इसके बाद शिफ को अपनी और पति की जान को खतरा महसूस हुआ. इस संबंध में उसने कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की मांग की. इस पर कोर्ट ने किसी के हत्सक्षेप न करने और पुलिस की ओर से सुरक्षा प्रदान करवाए जाने के संबंध में आदेश पारित किया. कोर्ट ने इस दौरान साफ तौर पर कहा कि बालिग व्यक्ति को जीवन अपने तौर पर जीने का पूरा अधिकार है और उसमें किसी का भी हस्तक्षेप नहीं हो सकता है.

अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार
हाईकोर्ट ने शिफा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि एक बा‌लिग को अपनी पसंद के जीवनसाथी को चुनने का पूरा अधिकार है. ऐसे में उसकी पसंद या चुनाव पर कोई भी आपत्ति नहीं उठा सकता है और न ही शादी होने के बाद उनके वैवाहिक संबंधों पर किसी को भी आपत्ति करने का कोई अधिकार है. ये आदेश जस्टिस एमके गुप्ता और जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने दिया.

UP: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 71वां जन्मदिन आज, BJP करेगी 'सेवा एवं समर्पण' अभियान की शुरुआत

UP: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 71वां जन्मदिन आज, BJP करेगी 'सेवा एवं समर्पण' अभियान की शुरुआत

PM Modi Birthday: पीएम मोदी का 71वां जन्मदिन को प्रयागराज में खास तरीके से मनाने की तैयारी उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी और स्थनीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने की है.

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लखनऊ. पीएम मोदी के जन्मदिन (PM Modi’s Birthday) को खास बनाने के लिए बीजेपी ने खास तैयारी की है. इसी कड़ी में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का ‘सेवा एवं समर्पण’ अभियान की शुरुआत होगी. 7 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में भाजपा के कार्यकर्ता विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचकर लोगों से संपर्क व संवाद करेंगे और सेवा कार्य भी करेंगे. मोर्चों व प्रकोष्ठों के कार्यकर्ता भी इस अभियान में जुटेंगे.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने गुरुवार शाम पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्र अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों व जिला प्रभारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर सेवा एवं समर्पण अभियान की तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए. सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत 17 से 20 सितंबर तक स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा. चिकित्सा प्रकोष्ठ इसका समन्वय करेगा. युवा मोर्चा के कार्यकर्ता रक्तदान शिविर आयोजित करेंगे, जबकि अनुसूचित मोर्चा के कार्यकर्ता गरीब बस्तियों में फल व अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर सेवा कार्य करेंगे.

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उधर, पीएम मोदी का 71वां जन्मदिन को प्रयागराज में खास तरीके से मनाने की तैयारी उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी और स्थनीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने की है. इसे भव्य रूप देने के लिए तमिलनाडु की राजलक्ष्मी मंडा प्रधानमंत्री का कटआउट लगा करीब 9.5 टन वजन वाला ट्रक अपने हाथ से खींचेंगी. उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने बताया कि हम पीएम मोदी का 71वां जन्मदिन सेवा सप्ताह के रूप में मना रहे हैं.

पीएम के कटआउट को खींचेंगी राजलक्ष्मी
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह 71 किलो का केक काटकर इसका शुभारंभ करेंगे. उन्होंने बताया कि इसके बाद दोपहर तीन बजे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक बहन राजलक्ष्मी, प्रधानमंत्री का 71 फुट ऊंचा और 20 चौड़ा कटआउट एक ट्रक पर खड़ा करके लगभग 9.5 टन वजन का ट्रक वो खुद अपने हाथ से खींचकर इस कार्यक्रम को और भव्य रूप प्रदान करेंगी.

अधिवक्ता ने रोक लिया DGP मुकुल का रास्ता, कहा- आपके अधिकारी कुछ नहीं करते

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UP News: मैनपुरी में छात्रा की संदिग्‍ध मौत को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे मामले की सुनवाई में पहुंचे थे डीजीपी मुकुल गोयल, एक अधिवक्ता ने अपनी शिकायत दर्ज करवाने के लिए सुनवाई के बाद लौटते अधिकारी का बीच में रोका रास्ता.

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इलाहाबाद. मैनपुरी की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में चल रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई के लिए पहुंचे यूपी डीजीपी मुकुल गोयल को एक अधिवक्ता ने रास्ते में रोक लिया. इतना ही नहीं पहले अधिवक्ता ने डीजीपी को खरी खोटी सुनाई और उसके बाद अपनी परेशानी उनके सामने रखी. इस दौरान अधिवक्ता को रोकने की अन्य पुलिसकर्मियों ने काफी कोशिश की लेकिन वो नहीं माने.
जानकारी के अनुसार डीजीपी मुकुल गोयल कोर्ट रूम से सुनवाई के बाद बाहर निकल रहे थे इसी दौरान वहां पर मौजूद एक अधिवक्ता ने पीछे से उन्हें आवाज लगाई और कहा कि डीजीपी साहब मेरे घर पर पत्‍थर चल रहे हैं और यहां आपके अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं. आपको मेरी बात सुननी ही होगी.

आईजी-डीआईजी के रोकने पर भी नहीं रुके
इस दौरान अधिवक्ता को आईजी और डीआईजी ने रोकने का पूरा प्रयास किया लेकिन वे नहीं रुके. अधिवक्ता ने कहा कि आपको मेरी बात सुननी ही होगी. स्‍थानीय पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है, आईजी और डीआईजी को भी पत्र दिया लेकिन कोई नहीं सुनता. इस दौरान अन्य पुलिस अधिकारी व कर्मचारी अधिवक्ता को रोकते रहे लेकिन वो नहीं माना और डीआईजी के काफिले के साथ चल अपनी शिकायत करता रहा.

डीजीपी को आखिर रुकना पड़ा
वकील की परेशानी सुनने के लिए आखिर में डीजीपी मुकुल गोयल रुके और तसल्ली के साथ अधिवक्ता की शिकायत सुनी. इसके साथ ही उन्होंने अधिवक्ता को कार्रवाई करने की संबंध में संतुष्ट किया. गोयल ने तत्काल अधिकारियों को अधिवक्ता की शिकायत सुनने और उस पर तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया. इसके बाद अधिवक्ता शांत हुए और मुकुल गोयल जा सके.

मैनपुरी मामला: HC ने DGP को फिर फटकारा, कहा- सबको अपने कर्मों का फल यहीं भुगतना पड़ता है

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16 सितंबर 2019 को एक छात्रा जवाहर नवोदय स्कूल के हॉस्टल में फांसी पर लटकती मिली थी. गुरुवार को डीजीपी मुकुल गोयल इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि एसआईटी की नई जांच टीम गठित कर दी गई है. हाईकोर्ट ने एसआईटी को 6 हफ्ते में अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया है.

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प्रयागराज. मैनपुरी के जवाहर नवोदय विद्यालय की कक्षा 11 में पढ़ने वाली छात्रा की हॉस्टल में फांसी लगाने से मौत मामले में गुरुवार को डीजीपी मुकुल गोयल इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि एसआईटी की नई जांच टीम गठित कर दी गई है और इसमें अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है. हाईकोर्ट ने एसआईटी को 6 हफ्ते में अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि जांच में लापरवाही पर तत्कालीन एएसपी, डिप्टी एसपी व इंस्पेक्टर विवेचक को सस्पेंड कर दिया गया है. हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले में जांच से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन व कोर्ट को भी अवगत कराया जाये. हाईकोर्ट ने लड़की के माता-पिता को सुरक्षा मुहैया कराने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट को सरकार की ओर से बताया गया कि एडीजी कानून व्यवस्था की निगरानी में जांच पूरी की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति जिला जज मैनपुरी को भी भेजी जाये, जिसे वहां के सभी न्यायिक अधिकारियों को सर्कुलेट किया जाय.

हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि बलात्कार के मामले में दो माह में जांच पूरी करने को लेकर सर्कुलर जारी किया जाये और विवेचना पुलिस का प्रशिक्षण कराया जाये. डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि मैनपुरी के तत्कालीन रिटायर एसपी को सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान रोक दिया गया है. उन्हें केवल प्राविजनल पेंशन का भुगतान किया जा रहा है.

हाईकोर्ट ने डीजीपी समेत कोर्ट में पेश सभी पुलिस अधिकारियों की हाजिरी माफ कर दी है. लेकिन कोर्ट ने अधिकारियों के कोर्ट रूम से बाहर निकलने से पूर्व मार्मिक टिप्पणी भी की और कहा कि स्वर्ग कहीं और नहीं है. सबको अपने कर्मों का फल यहीं भुगतान पड़ता है. कोर्ट ने डीजीपी से यह भी कहा कि पुलिस को जांच के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है. अधिकांश जांच कॉन्सटेबिल करता है. दरोगा कभी-कभी जाता है.

बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैनपुरी में दो साल पहले जवाहर नवोदय विद्यालय में एक नाबालिग छात्रा की फांसी लगाकर आत्महत्या के मामले में सवालों का जवाब न दे पाने पर नाराजगी जताते हुए डीजीपी मुकुल गोयल को रोक लिया था. एक्टिंग चीफ जस्टिस एमएन भंडारी और जस्टिस एके ओझा के खंडपीठ ने डीजीपी के अलावा आईजी मोहित अग्रवाल व इस मामले में गठित एसआईटी के सदस्य पुलिस अधिकारियों को भी गुरुवार को फिर हाजिर होने का निर्देश दिया था.

कोर्ट ने कहा था कि मामले में न्यायालय द्वारा दिखाई गई गंभीरता और जांच के तरीके के साथ दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ निर्देश के बावजूद कोई अनुवर्ती कार्रवाई नहीं की गई है. बल्कि मामले की जानकारी डीजीपी को नहीं दी जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी और एसआईटी के सदस्य जांच करने में पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट करने के लिए अदालत में उपस्थित रहेंगे और आगे यह भी बताएंगे कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मैनपुरी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई उनकी सेवानिवृत्ति से लगभग छह महीने पहले पहले क्यों नहीं पूरी की जा सकी.

डीजीपी मुकुल गोयल से कोर्ट ने इस मामले से जुड़े कई सवाल किए थे. अभियुक्तों का बयान लेकर छोड़ देने और उनकी गिरफ्तारी नहीं करने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया था. सुनवाई की शुरुआत में छात्रा की फांसी के बाद हुए शव के पंचनामे की वीडियो रिकार्डिंग देखने के बाद कोर्ट ने डीजीपी से पूछा था कि किसी के भी खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होने पर पहला काम क्या करते हैं? डीजीपी ने जवाब दिया कि गिरफ्तारी. कोर्ट ने कहा था कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नाबालिग के कपड़ों पर सीमेन पाया गया है. उसके सिर पर चोट के निशान थे. इसके बाद भी तीन महीने में अभियुक्तों का केवल बयान ही लिया गया, ऐसा क्यों? इस पर डीजीपी मुकुल गोयल ने कहा कि फिर से एसआईटी गठित कर देते हैं.

गौरतलब है कि 16 सितंबर 2019 को 16 वर्षीय एक छात्रा अपने जवाहर नवोदय स्कूल में फांसी पर लटकती मिली थी. पुलिस ने शुरू में दावा किया था कि आत्महत्या का मामला है. दूसरी ओर उसकी मां ने आरोप लगाया था कि उसे परेशान किया गया, पीटा गया और जब वह मर गई तो उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया. घटना को लेकर छात्रों ने प्रोटेस्ट किया था. परिवार ने भी कई दिनों तक धरना दिया था. मृतका के पिता ने मुख्यमंत्री से जांच की गुहार लगाई तो एसआईटी ने जांच की गई. 24 अगस्त 2021 को एसआईटी ने केस डायरी हाईकोर्ट में पेश की थी. कोर्ट ने कहा कि छात्रा के पिता का बयान दर्ज नहीं किया जाना संदेह पैदा करता है.

इलाहाबाद HC का अहम फैसला- दूसरे धर्म में की है शादी तो वैवाहिक जीवन में परिजन भी नहीं कर सकते हस्तक्षेप

इलाहाबाद HC का अहम फैसला- दूसरे धर्म में की है शादी तो वैवाहिक जीवन में परिजन भी नहीं कर सकते हस्तक्षेप

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है, ऐसे में कोई आपत्ति या फिर उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला देते हुए दूसरे धर्म में शादी करने वाले युवाओं को बड़ी राहत दी है. एक याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो अलग अलग धर्मों के बालिगों ने यदि शादी की है तो उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार उनके माता पिता को भी नहीं है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि कोई दूसरे धर्म में शादी करता है तो उनके वैवाहिक जीवन में कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता है साथ ही यदि वे पुलिस सुरक्षा की मांग करते हैं तो पुलिस को उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी होगी.
जानकारी के अनुसार शिफा हसन नामक एक मुस्लिम महिला ने एक हिंदू युवक से शादी की. जिसके बाद उसने जिलाधिकारी से हिंदू धर्म अपनाने की अनुमति मांगी. जिलाधिकारी ने इस संबंध में पुलिस थाने से रिपोर्ट की मांग की. इस पर पुलिस ने जानकारी दी कि युवक के पिता इस शादी से राजी नहीं हैं और दूसरी तरफ लड़की के परिजन भी इसके खिलाफ हैं.

जान को खतरा
इसके बाद शिफ को अपनी और पति की जान को खतरा महसूस हुआ. इस संबंध में उसने कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की मांग की. इस पर कोर्ट ने किसी के हत्सक्षेप न करने और पुलिस की ओर से सुरक्षा प्रदान करवाए जाने के संबंध में आदेश पारित किया. कोर्ट ने इस दौरान साफ तौर पर कहा कि बालिग व्यक्ति को जीवन अपने तौर पर जीने का पूरा अधिकार है और उसमें किसी का भी हस्तक्षेप नहीं हो सकता है.

अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार
हाईकोर्ट ने शिफा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि एक बा‌लिग को अपनी पसंद के जीवनसाथी को चुनने का पूरा अधिकार है. ऐसे में उसकी पसंद या चुनाव पर कोई भी आपत्ति नहीं उठा सकता है. और न ही शादी होने के बाद उनके वैवाहिक संबंधों पर किसी को भी आपत्ति करने का कोई अधिकार है. ये आदेश जस्टिस एमके गुप्ता और जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने दिया.

AU Admission 2021: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए ओपन हुई विंडो, इस डेट तक करें आवेदन

AU Admission 2021: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए ओपन हुई विंडो, इस डेट तक करें आवेदन

Allahabad University Admission 2021: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने के इच्छुक स्टूडेंट आधिकारिक वेबसाइट allduniv.ac.in पर विजिट करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. माना जा रहा है कि एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 16, 2021, 23:06 IST
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नई दिल्ली. Allahabad University Admission 2021: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में एडमीशन लेने की इच्छा रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएस, रिसर्च और अन्य कोर्सज में एडमिशन के लिए आवेदन विंडो खोल दी है. यह विंडो 3 अक्टूबर तक एक्टिव रहेगी. ऐसे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने के इच्छुक स्टूडेंट आधिकारिक वेबसाइट allduniv.ac.in पर विजिट करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. माना जा रहा है कि एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी.

हालांकि, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक बयान के मुताबिक प्रत्येक परीक्षा के लिए बाद में अलग से फाइनल डेट्स घोषित की जाएंगी. इसके साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने आवेदन करने वालों छात्रों से अनुरोध किया है कि आवेदन करने से पहले, छात्रों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे कार्यक्रमों के लिए एलिजिबल हों. यदि कोई अभ्यर्थी किसी भी कोर्स की स्टडी के लिए अयोग्य पाया जाता है, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी.

Allahabad University Admission 2021: देश के इन शहरों में होगी प्रवेश परीक्षा
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लिए प्रवेश परीक्षा देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित की जाएगी. इनमें पटना, भोपाल, नई दिल्ली, कोलकाता सहित बेंगलुरु, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं. वहीं उत्तर प्रदेश में प्रवेश परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बरेली और आजमगढ़ में आयोजित की जाएगी. खास बात यह है उत्तर प्रदेश, पटना, भोपाल और नई दिल्ली में परीक्षा केंद्रों को छोड़कर सभी केंद्रों में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा केवल ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी.

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हिंदी भाषा से जुड़े साहित्यकारों की कर्मस्थली रही है संगमनगरी

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प्रयागराज हमेशा से साहित्यिक आंदोलनों का केंद्र रहा है. जिसके चलते यहां ऐसे-ऐसे साहित्यकार हुए या यहां आकर रच-बस गए.

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अगर बात करें भाषा की तो भाषा के विकास में, उसे बढ़ावा देने में उससे संबंधित साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान होता है. हिंदी भाषा की विकास यात्रा में भी हिंदी साहित्य ने अहम भूमिका निभाई है. हिंदी साहित्य (hindi literature)वक्त की सीढ़ियां चढ़ता गया और समाज में उस पायदान पर पहुंचा जहां से लोग आज इसे गर्व के साथ पढ़ते हैं. लेकिन इन सभी के बीच उन सभी साहित्यकारों को भी याद करना चाहिए जो हिंदी भाषा की आत्मा है. ऐसे कई साहित्यकार हुए जिन्होंने हिंदी में अपनी गौरवशाली रचनाएं लिखी और समाज को आईना दिखाया. एक रोचक बात यह है कि 18वीं और 19वीं शताब्दी के अनेकों साहित्यकार संगम नगरी की पावन भूमि से जुड़े हैं. बेशक उनका जन्म यहां या कहीं और हुआ हो लेकिन उन सभी की कर्मस्थली प्रयागराज ही रही है.
गंगा जमुना तहजीब प्रेरणा रही है कई महान साहित्यकारों की. प्रयागराज साहित्यिक आंदोलनों का केंद्र भी रहा है. महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, रामकुमार वर्मा, प्रेमचंद, धर्मवीर भारती, नरेश मेहता जैसे कई नाम है जिन्होंने इस धरती को अपनी कर्मस्थली बनाया और समाज को अपनी रचनाओं के रूप में बहुत कुछ दे गए. इसलिए प्रयागराज प्रदेश की साहित्यिक राजधानी(literature capital) के रूप में भी जानी जाती है. संक्षेप में कहें तो प्रयागराज हिंदी भाषा के विकास यात्रा का साक्षी रहा है. यही वह स्थान है जहां हिंदी भाषा वक्त के साथ पली-बढ़ी. अगर यूं कहें कि इलाहाबादियत और हिंदी भाषा का गहरा नाता है तो यह गलत नहीं होगा.

इलाहाबाद संग्रहालय में संजोई गई है साहित्यकारों की यादें
प्रयागराज से हिंदी साहित्यकारों का गहरा नाता रहा. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, हिंदुस्तानी अकादमी जैसे कई स्थान हैं जहां महान साहित्यकारों ने काम किया और अपनी रचनाएं लिखी. इसी क्रम में इलाहाबाद संग्रहालय में मौजूद है-
सुमित्रानंदन पंत विथिका(sumitranandan pant gallery). जहां प्रयागराज से जुड़े और राष्ट्रीय स्तर के जाने-माने साहित्यकारों की व्यक्तिगत वस्तुएं, असली पांडुलिपि मौजूद हैं जो आज की पीढ़ी के लिए सुरक्षित की गई हैं. सुमित्रानंदन पंत ने अपनी सारी व्यक्तिगत वस्तुओं को म्यूजियम में दान दे दिया जिसके बाद सुमित्रानंदन पंत वीथिका की स्थापना हुई. इसमें सुमित्रानंदन पंत का ज्ञानपीठ पुरस्कार, ताम्रपत्र, चश्मा, कलाकृतियां आदि मौजूद है. छायावाद की स्तंभ कहें जाने वाली महादेवी वर्मा की लिखी पांडुलिपि,पत्र शामिल है. रामकुमार वर्मा का पद्म पुरस्कार, टाई  ,मुंशी प्रेमचंद की पर्सनल डायरी भी रखी गई है. ऐसे ही अन्य साहित्यकारों की कृतियां और समान म्यूजियम में संरक्षित हैं.

प्रयागराज: ट्रेन से गायब हुआ शव रखा ताबूत, 16 घंटे बाद MP में मिला, जानिए कैसे?

प्रयागराज: ट्रेन से गायब हुआ शव रखा ताबूत, 16 घंटे बाद MP में मिला, जानिए कैसे?

Prayagraj News: प्रतापगढ़ की बुजुर्ग महिला सरवरी बेगम कैंसर से पीड़ित थीं. मुम्बई के टाटा हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. परिवारवालों शव को ताबूत में रखकर ट्रेन के ज़रिये प्रयागराज तक लाने और यहां से एम्बुलेंस से घर ले जाने का फैसला किया.

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इलाहाबाद. देश की लाइफलाइन कहे जाने वाले भारतीय रेलवे (Indian Railways) की बड़ी लापरवाही सामने आई है. रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से एक महिला का शव ताबूत के साथ चलती ट्रेन से गायब हो गया? उसे ढूंढ़ने में रेल अफसरों के पसीने छूट गए. मुम्बई से लेकर प्रयागराज तक मचे हड़कंप के बाद रेलवे ने करीब 16 घंटे बाद शव और ताबूत को ढूंढ निकाला और शव को परिजनों को सौंप दिया. इस दौरान परिवार वालों की सांस अटकी रही और मृतक महिला का संस्कार एक दिन बाद हो सका.

इस मामले में रेलवे के अधिकारी अपनी गलती मानने के बजाय दिमागी तौर पर बीमार किसी अंजान शख्स को दोषी बताकर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं.

ये है पूरा मामला

दरअसल पूरा मामला यूपी के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी इलाके का है. यहां की रहने वाली बुजुर्ग महिला सरवरी बेगम कैंसर की बीमारी से पीड़ित थीं. मुम्बई के टाटा हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था. तीन दिन पहले इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई. परिवार वालों शव को ताबूत में रखकर उसे ट्रेन के ज़रिये प्रयागराज तक लाने और यहां से एम्बुलेंस से घर ले जाने का फैसला किया. परिवार वालों ने लोकमान्य तिलक टर्मिनस से मडुवाडीह तक चलने वाली ट्रेन नंबर 12167 से अपना टिकट स्लीपर क्लास से बुक कराया, जबकि ताबूत को गार्ड के बगल एसएलआर यानी सामान रखने के कोच में बुक करा दिया. मुम्बई में परिवार वालों ने ताबूत को अपनी मौजूदगी में एसएलआर कोच में चढ़वाया.

ताबूत गायब मिला तो मचा हड़कंप

13 सितम्बर को रात करीब 11 बजे ट्रेन जब प्रयागराज के छिवकी स्टेशन पहुंची तो परिवार वाले ताबूत लेने के लिए एसएलआर कोच पहुंचे. वहां उन्हें बताया गया कि कोच में रखा ताबूत गायब हो गया है और संभवतः वह रास्ते में कहीं गिर गया है. परिवारवालों ने हंगामा शुरू किया तो मुम्बई से लेकर जबलपुर तक हड़कंप मचा. सभी जगह आरपीएफ को एलर्ट पर डाला गया.

ट्रैक किनारे क्षत-विक्षत हालत में मिला ताबूत और शव

अधिकारियों ने भी इस लापरवाही को गंभीरता से लिया. जिसके बाद शव और ताबूत मध्य प्रदेश के मैहर जिले में ट्रैक के किनारे की झाड़ियों में पड़ा हुआ मिला. ताबूत कई जगह से टूट गया था. इतना ही नहीं शव को भी नुकसान पहुंचा. बहरहाल ताबूत की मरम्मत कराकर उसे दूसरी ट्रेन से मंगलवार शाम करीब चार बजे प्रयागराज भेजा गया. यहां घंटों की औपचारिकता के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया. परिवार वाले देर रात शव लेकर प्रतापगढ़ पहुंचे. इस लापरवाही की वजह महिला के शव का अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर को हो सका.

मामले में पल्ला झाड़ने की कोशिश

इस मामले में नार्थ सेंट्रल रेलवे जोन के सीपीआरओ डॉ शिवम शर्मा ने पहले तो इस मामले को दूसरे जोन का बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की. उन्हें जब यह याद दिलाया गया कि प्रयागराज छिंवकी स्टेशन, जहां शव उतरना था, वह इसी जोन में आता है, तब उन्होंने डैमेज कंट्रोल यानी शव के गिरने के बाद रेल महकमे द्वारा की गई कवायद के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जबलपुर के आरपीएफ अफसरों ने जानकारी दी है कि रास्ते में पागल सा दिखने वाला कोई शख्स ट्रेन के नजदीक आ गया था और उसने एसएलआर कोच की सील को तोड़ दिया था. इसी वजह से रास्ते में मैहर के पास ताबूत छिटककर गिर गया. जबकि नियम के मुताबिक जिस स्टेशन पर माल उतरता है वहां पर एस एल आर कोच को विधिवत सील किया जाता है.

इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सवाल को उन्होंने वेस्टर्न रेलवे पर छोड़ दिया. वहीं रेलवे की इस लापरवाही से मृतका के परिजनों में दुख के साथ गुस्सा भी है.

यहां मौजूद है दुर्लभ पुस्तकों तथा पांडुलिपियों का खजाना

यहां मौजूद है दुर्लभ पुस्तकों तथा पांडुलिपियों का खजाना

प्रयागराज स्थित हिन्दुस्तानी अकादमी लगातार हिन्दी भाषा को समृद्ध और लोकप्रिय करने का काम कर रही है.

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भारत विविधताओं का देश है, जहां अनेकों बोलियां और भाषाएं प्रचलित . लेकिन अगर हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी भाषा की बात करें तो यह कई राज्यों और स्थानों में प्रचलित . यह हमारी राजभाषा है . लेकिन वक्त बदल रहा है, वैश्वीकरण के दौर ने हिंदी भाषा को पीछे की ओर धकेला है. भौतिकवाद ने अंग्रेजी के महत्व को बढ़ा दिया है . ऐसे में जरूरी है अपनी पहचान, हिंदी भाषा को सुरक्षित रखना और उसे आगे बढ़ाना.
आज इसी दिशा में बहुत सारी सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थाएं काम कर रही है. प्रयागराज स्थित \’हिंदुस्तानी अकादमी\’ भी इसी दिशा में लगातार 9 दशकों से काम कर रही है. इसकी स्थापना लखनऊ में तत्कालीन गवर्नर मैरिस द्वारा 27 मार्च 1927 में की गई थी. तब से लेकर आज तक यह संस्था कई प्रकार से हिंदी भाषा को समृद्ध और लोकप्रिय बना रही है .यह हिंदी और हिंदुस्तानी भाषा की पांचवी महत्वपूर्ण संस्था है. वैसे तो प्रयागराज में कई संस्थाएं हैं लेकिन राज्य सरकार के भाषा विभाग के अंतर्गत आने वाली हिंदुस्तानी अकादमी कई आयामों पर उल्लेखनीय कार्य कर रही है जिससे हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके .

प्रकाशन: यह संस्था बेहद पुरानी और दुर्लभ पुस्तकों का प्रकाशन करती है ताकि हमारी पहचान हमारा साहित्य आज और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके.
अनुवाद: हिंदुस्तानी अकादमी विदेशी भाषाओं की साहित्यिक कृतियों का हिंदी में अनुवाद करती है. अकादमी के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने बताया कि लोगों की मांग और जरूरत के हिसाब से हम अन्य भाषा के साहित्य को भी हिंदी में अनुवाद कर आते हैं. जैसे हाल में ही थियोसॉफिकल सोसायटी द्वारा प्रकाशित सनातन धर्म की अंग्रेजी पुस्तिका को हिंदी में अनुवाद किया गया है.
• पुरुस्कार: संस्था लेखकों/ साहित्यकारों तथा उनकी रचनाओं को सम्मानित करके उन्हें अधिक काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है. यहां तीन राष्ट्रीय स्तर तथा लगभग 10 प्रादेशिक स्तर के पुरस्कार दिए जाते हैं . जिसमें राष्ट्रीय स्तर के गुरु गोरखनाथ शिखर सम्मान, गोस्वामी तुलसीदास सम्मान , संत कबीर दास सम्मान शामिल है.
• संगोष्ठी और व्याख्यान कराना: हिंदुस्तान अकादमी समय-समय पर भिन्न-भिन्न स्थानों पर संगोष्ठी तथा व्याख्यान का आयोजन कराती है ताकि साहित्यकार अपने विचार अपनी रचनाएं समाज तक पहुंचा सके और लोग उनसे कुछ सीख कर प्रेरित हो सके.

यहां मौजूद है दुर्लभ पुस्तकों तथा पांडुलिपियों का खजाना
हिंदुस्तानी अकादमी में मौजूद है एक बड़ा पुस्तकालय. जहां स्थित है बेहद प्राचीन पुस्तके, साहित्य रचनाएं और पांडुलिपियां. पुस्तकालय अध्यक्ष रतन पांडेय ने हमें बताया कि यहां लगभग 25000 पुस्तकों का भंडार है, जिसमें से 17000 हिंदी की पुस्तकें हैं .इसके साथ ही साथ 300 पांडुलिपियां भी हैं जिनका डिजिटलाइजेशन भी किया जा रहा है.आम लोग यहां आकर इन पुस्तकों को पढ़ भी सकते हैं.

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