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रंग लाया खून से लिखा खत, नहीं बदलेगा इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी (फ़ाइल तस्वीर)
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी (फ़ाइल तस्वीर)

HRD मंत्रालय और यूपी सरकार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) का नाम बदलने को लेकर मांगी थी राय. यूनिवर्सिटी के कार्य परिषद के 15 में से 12 सदस्यों ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

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प्रयागराज. इलाहाबाद (Allahabad) जिले का नाम बदलने के बाद पूरब का ऑक्सफ़ोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) का नाम बदलने का प्रस्ताव खारिज हो गया है. कार्य परिषद की बैठक में 12 सदस्यों ने नाम न बदलने का प्रस्ताव दिया. बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर रजिस्टार प्रोफेसर एके शुक्ला ने सभी सदस्यों की राय मांगी थी. कार्य परिषद के 15 सदस्यों को ईमेल के जरिए नाम बदलने के मुद्दे पर उनसे दो दिनों में ईमेल के जरिये राय मांगी गई थी. इसके बाद 12 सदस्यों ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का विरोध किया. सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है.

गौरतलब है कि पूर्व उपाध्यक्ष आदिल हमजा ने नाम न बदलने को लेकर खून से लिखा पत्र लिखा था.  इसके लिए हाइकोर्ट में भी याचिका दाखिल करने की तैयारी थी. इस याचिका में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के नाम को न बदलने की मांग का उल्लेख किया गया था. सपा एमएलसी वासुदेव यादव ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को को नाम न बदलने को लेकर पत्र लिखा था.

यूपी सरकार की ओर से भी आया था प्रस्ताव



इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कार्य परिषद के 12 परिषदों ने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की कोई जरूरत नहीं है. कार्य परिषद के 15 में से 12 सदस्यों ने ही जवाब दिया और इन सभी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलने की संस्तुति की है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय को कार्य परिषद की राय से सोमवार को अवगत करा दिया गया. बता दें कि चार-पांच महीने पहले ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार और तत्कालीन मंडलायुक्त आशीष गोयल की ओर से विश्वविद्यालय को पत्र भेजा गया था. इसमें विश्वविद्यालय का नाम बदलकर प्रयागराज यूनिवर्सिटी करने के बारे में कार्य परिषद की राय के बारे में पूछा गया था.
135 साल पुरानी है यूनिवर्सिटी

बता दें कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम देश के नामचीन विश्वविद्यालयों की लिस्ट में रहा है. मुंबई, चेन्नई और कोलकाता यूनिवर्सिटी की तरह ही यह भी देश के पुराने और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक मानी जाती रही है. 23 सितंबर 1887 को इसकी स्थापना हुई थी. पूरब के ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इस विश्वविद्यालय में शिक्षा हासिल करने वालों में कई नामचीन हस्तियां शामिल हैं. कई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजनेता, सुप्रीम कोर्ट के जज, पत्रकार और नौकरशाह इस यूनिवर्सिटी से पढ़कर निकले हैं. पूर्व प्रधानमंत्री बीपी सिंह और चंद्रशेखर भी यहीं के छात्र रहे हैं.

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