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Prayagraj:-इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर बन गए हैं 'हरियाली गुरु' पर्यावरण सुरक्षा के लिए आज कर रहे हैं बेहतर काम

Prayagraj:-इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर बन गए हैं 'हरियाली गुरु' पर्यावरण सुरक्षा के लिए आज कर रहे हैं बेहतर काम

इलाहाबाद

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हरियाली गुरु प्रो.एन बी सिंह 

प्रयागराज के हरियाली गुरु, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बॉटनी डिपार्टमेंट(Botony department) में प्रोफेसर हैं.जिनका पूरा नाम प्रोफेसर एन बी सिंह ?

    प्रयागराज:- आज देश ही नहीं दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटना, पर्यावरण में संतुलन बनाए रखना.इसके लिए हर साल बड़े-बड़े मंचो पर वायदे किए जाते है, लक्ष्य निर्धारित किए जाते है लेकिन फिर भी जमीनी स्तर पर कोई खास बदलाव नजर नही आता.ऐसे मे जरूरी है कि हम सभी व्यक्तिगत रूप से पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियो को निभाए. पर सच तो यह है कि हम अपनी जिम्मेदारी निभाना तो दूर हम पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते ही नही.लेकिन आपको बता दे कि आज समाज में आशा की कई किरणे है जो समाज को रोशन कर रहीं हैं.ऐसी ही उम्मीद की एक किरण है प्रयागराज के हरियाली गुरु( Green Man). जी हां.. एक ऐसा गुरू जो शिष्यो/ युवाओ को प्रेरित कर रहा है, उन्हे जागरूक कर रहा है पर्यावरण के प्रति, अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति.

    लगभग 40 सालों से लगा रहे पेड़ और अब तक लगा चुके हैं 50 हजार से ज्यादा पौधे
    प्रयागराज के हरियाली गुरु, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बॉटनी डिपार्टमेंट(Botony department) में प्रोफेसर हैं.जिनका पूरा नाम प्रोफेसर एन बी सिंह है.हरियाली गुरु बचपन से ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहे हैं और कक्षा 3 से ही पेड़ पौधे लगाने का काम कर रहे हैं.लेकिन आज यह काम और बड़े स्तर पर कर रहे हैं.अपने साथ कई युवाओं और बुजुर्गों को भी जोड़ कर इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं.हरियाली गुरु की कोशिशों का ही नतीजा है कि आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय का कैंपस हरा भरा है, इलाहाबाद विश्वविद्यालय का कैंपस ही नहीं उन्होंने शहर के कई क्षेत्रों को हरा-भरा बनाया है.वह कहते हैं हर कोई पेड़ लगाता तो है लेकिन लगाकर भूल जाता है.हम पेड़ लगाएं और उसे बड़ा होने तक सुरक्षित भी रखें तभी पेड़ पर्यावरण में अपना योगदान दे सकता है.इसी के चलते हरियाली गुरु पेड़-पौधों को राखी बांधते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं.

    लाखों की कमाई.. पर चलते हैं साइकिल से, क्योंकि पर्यावरण को बचाने का है संकल्प
    सुल्तानपुर के एक छोटे से गांव बिकना से आने वाले हरियाली गुरु आज भी साइकिल से चलते हैं.कहने को तो लाखों की कमाई है पर कोई गाड़ी नहीं है इनके पास.वह हर जगह साइकिल से घूमते हैं, कपड़े और जूट के बैग का इस्तेमाल करते हैं, प्लास्टिक से कोसों दूर रहते हैं.ऐसा इसलिए क्योंकि वह पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की दिशा में अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहे हैं.हरियाली गुरु एक बड़ी ही प्यारी बात कहते हैं वह कहते हैं कि साइकिल चलाकर मैं 10 लड्डू आराम से खा सकता हूं लेकिन आप लोग गाड़ी चला कर शुगर की चाय भी नहीं पी सकते हैं.

    आज हरियाली गुरु की छोटी-छोटी कोशिशे शहर में बड़ा बदलाव लेकर आई है.शहर के कई हरे-भरे इलाके आज इनकी कोशिशो का ही परिणाम है.1965 से शुरू हुई यह कोशिश आज बड़े स्तर पर काम कर रही है.पहले यह अकेले थे लेकिन आज कई लोग इनसे जुड़ गए है और एक वैश्विक समस्या के निदान के लिए काम कर रहे है. सच मे आज देश ही नही दुनिया को भी हरियाली गुरु(Green man of Prayagraj) जैसे लोगो की जरूरत है.

    (रिपोर्ट- प्राची शर्मा,प्रयागराज)

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