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प्रयागराज: सरकारी स्कूल की ये टीचर बनी मिसाल, पीएम मोदी भी कर चुके हैं सलाम

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 5, 2019, 2:11 PM IST
प्रयागराज: सरकारी स्कूल की ये टीचर बनी मिसाल, पीएम मोदी भी कर चुके हैं सलाम
मिसाल बन चुकी हैं सरकारी प्राइमरी स्कूल की टीचर ममता मिश्रा

प्राइमरी स्कूल (primary school) की इस टीचर ने अपने संसाधनों से बनवाए स्मार्ट क्लास (smart class) साथ ही यूट्यूब( YouTube), ग्रीन बोर्ड (green board) और मोबाइल एप दीक्षा (diksha app) के जरिए बच्चों को डिजिटल एजुकेशन (digital education) दे रही हैं, पीएम मोदी (PM Modi) भी 'मन की बात' (Mann Ki Baat) में ममता मिश्रा की सराहना कर चुके हैं....

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प्रयागराज. वो कहते हैं कि एक चिराग पूरे अंधेरे को दूर नहीं कर सकता लेकिन अंधेरे से लड़ने का हौसला तो दे ही सकता है. कुछ ऐसी ही हौसला अफजाई करने वाली कहानी है जनपद के सरकारी स्कूल की एक टीचर की जिन्होंने अपने निजी संसाधनो से सरकारी स्कूल को कान्वेंट स्कूलों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया है. इनकी इस पहल को पीएम मोदी भी सलाम कर चुके हैं.

ये टीचर प्रयागराज जिले के यमुनापार इलाके में चाका ब्लाक के मॉडल प्राइमरी स्कूल तेदुंआवन में सहायक अध्याप​क के पद पर तैनात ममता मिश्रा हैं. इनकी नियुक्ति 2015 में दूसरे शिक्षकों की तरह ही हुई थी. लेकिन इन्होंने दूसरे शिक्षकों से अलग हटकर प्राइमरी में पढ़ने वाले बच्चों को कान्वेंट स्कूल के बच्चों की तरह ही डिजिटल तरीके से पढ़ने के लिए प्रेरित किया जिससे कि वो बदलते समय के साथ कदम से कदम मिला कर चल सकें. ममता अपने क्लास में आने वाले पहली कक्षा के बच्चों को घर में मोबाइल के जरिए पढ़ाई करने के गुर सिखा रही हैं.

'दीक्षा ऐप' के जरिए पढ़ाई के गुर
ममता क्लास में बच्चों को पढ़ाने के साथ ही उन्हें मोबाइल में 'दीक्षा ऐप' के जरिए पढ़ने के तरीके भी सिखा रही हैं. उनकी क्लास के बच्चे भी पढ़ाई की इस डिजिटल तकनीक को बखूबी सीख रहे हैं. सिर्फ इतना ही नहीं सहायक अध्यापक ममता मिश्रा ने अपनी सैलरी के पैसों से अपने क्लास के बच्चों के लिए डेस्क व बेंच भी मंगवाए. इस बारे में news 18 से बात करते हुए ममता मिश्रा कहती हैं कि जब तक उनके बच्चे दरी पर बैठते थे तो उन्हें कुर्सी पर बैठ कर उन्हें पढ़ाना अच्छा नहीं लगता था इसलिए बच्चों के डेस्क व बेंच के लिए पैसे जोड़ने तक वो भी बच्चों के साथ दरी पर बैठकर ही उन्हें पढ़ाती थीं. यही नहीं उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में अपनी कक्षा के साथ ही दूसरी कक्षाओं में भी ब्लैक बोर्ड की जगह ग्रीन बोर्ड लगवाएं हैं.

पीएम मोदी ने की तारीफ़
ममता ने अपने निजी संसाधनों से सरकारी प्राइमरी स्कूल को कान्वेंट स्कूल के बराबर ला खड़ा किया है. उनकी इस उपलब्धि की सराहना देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 'मन की बात' कार्यक्रम में कर चुके हैं. एक तरफ जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक आए दिन संसाधनों का ही रोना रोते रहते हैं वहीं ममता ऐसे लोगों के लिए मिसाल बन कर खड़ी हुई हैं. अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं.

टीचर ममता मिश्रा खेल-खेल में बचों को scince और maths के गुर सिखा देती हैं

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ऑन लाइन एजुकेशन
स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ ममता बच्चों को ऑन लाइन एजुकेशन भी दे रही हैं. वो बच्चों को खेल-खेल में गणित और विज्ञान की बारीकियां इतनी आसानी से सिखा देती हैं जिसे देख साथी अध्यापक और अभिभावक दोनों ही हैरान रह जाते हैं. ममता यू ट्यूब पर अपना चैनल भी चलाती हैं. जिस पर बच्चों को पढ़ाते हुए अब तक उन्होंने 487 वीडियो अपलोड किए हैं. उनके यू ट्यूब चैनल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंकित नाम से चलने वाले उनके इस चैनल को चार लाख 22 हजार से ज्यादा लोगों ने सब्सक्राइबर किया है.

प्यार करते हैं स्टूडेंट्स
ममता को उनकी क्लास के बच्चे बेहद प्यार करते हैं वो कहते हैं कि पहले उन्हें दरी पर बैठ कर पढ़ने में दिक्कत होती थी विशेषकर ठंड के दिनों में लेकिन उनकी फेवरेट टीचर ने उनके लिए फर्नीचर मंगा दिया. उनकी क्लास में पढ़ने वाले बच्चों से भी news 18 संवाददाता ने बात की तो हर्ष और आकांक्षा ने बताया कि पहले वो जमीन पर बिछी दरी पर बैठ कर पढ़ाई करते थे जिससे उन्हें बहुत दिक्कत होती. वो कहते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी सर्दियों में होती थी.

बच्चों को डिजिटल तरीके से ऑडियो विजुअल की मदद से होने वाली पढ़ाई भी खूब भा रही है. उनके क्लास के बच्चे बताते हैं कि कई बार जब उनके गरीब माता-पिता फीस नहीं दे पाते हैं या कापी पेंसिल नहीं खरीद पाते हैं तो उनकी प्यारी टीचर ममता मिश्रा उनकी जरुरत पूरी कर देती हैं. यही वजह है कि ममता मिश्रा के क्लास के बच्चे भी पढ़ने में अव्वल हैं. वहीं ममता के स्कूल के दूसरे टीचर्स भी उनकी कार्यशैली से बेहद खुश हैं और उनसे प्रेरणा ले रहे हैं.

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First published: November 5, 2019, 2:05 PM IST
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