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17 साल की उम्र में कत्ल करने वाले अतीक अहमद ऐसे चढ़े सियासत की सीढ़ी

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 24, 2019, 2:43 PM IST
17 साल की उम्र में कत्ल करने वाले अतीक अहमद ऐसे चढ़े सियासत की सीढ़ी
अतीक अहमद (File Photo)

अतीक अहमद के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद जिले में ही दर्ज हुए. कानपुर में भी इनके खिलाफ पांच मामले थे, जिनमें वह बरी हो चुके हैं.

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देश की सियासत में कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने जुर्म की दुनिया से निकलकर राजनीति की गलियों में कदम रखा और वे राजनीति में आकर भी अपनी माफिया वाली छवि से बाहर नहीं निकल पाए. उन्हीं में से एक हैं गैंगस्‍टर से नेता बने जेल में बंद पूर्व सांसद अतीक अहमद, जिनकी मुश्किलें अब बढ़ सकती हैं. अतीक अहमद और उसके साथियों द्वारा कथित तौर पर एक कारोबारी के अपहरण और मारपीट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने सीबीआई से मामले की जांच करने को कहा है. मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने अतीक अहमद को उत्‍तर प्रदेश के जेल से गुजरात के जेल में भेजने का भी आदेश दिया है. आइए जानते हैं अतीक अहमद के बारे में, जो जेल में रहते हुए भी सुर्खियों में बने रहते हैं...

जन्म
गैंगस्‍टर से नेता पूर्व सांसद अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को श्रावस्ती जनपद में हुआ था. पढ़ाई लिखाई में उनकी कोई खास रूचि नहीं थी, इसलिए उन्होंने हाई स्कूल में फेल हो जाने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. कई माफियाओं की तरह ही अतीक अहमद ने भी जुर्म की दुनिया से सियासत की दुनिया का रुख किया था. पूर्वांचल और इलाहाबाद में सरकारी ठेकेदारी, खनन और उगाही के कई मामलों में उनका नाम आया.

17 साल की उम्र में कत्ल का इल्जाम

बात 1979 की है, जब 17 साल की उम्र में अतीक अहमद पर कत्ल का इल्जाम लगा था. उसके बाद अतीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. साल दर साल अतीक अहमद के खिलाफ पुलिस का 'डायरी' के पन्ने भरते जा रहे थे. 1992 में इलाहाबाद पुलिस ने अतीक अहमद का कच्चा चिट्ठा जारी किया था. जिसके मुताबिक, अतीक के खिलाफ 44 मामले दर्ज हो चुके थे. अतीक अहमद के खिलाफ उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कौशाम्बी, चित्रकूट, इलाहाबाद ही नहीं बल्कि बिहार राज्य में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली आदि के मामले दर्ज हैं. अतीक के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद जिले में ही दर्ज हुए. कानपुर में भी इनके खिलाफ पांच मामले थे, जिनमें वह बरी हो चुके हैं.

अतीक अहमद (File Photo)


राजनीति में पहला कदम
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जुर्म की दुनिया में तेजी से आगे बढ़े अतीक अहमद को समझ आ चुका था कि सत्ता की ताकत कितनी अहम होती है. इसके बाद अतीक अहमद ने राजनीति का रुख किया. वर्ष 1989 में पहली बार इलाहाबाद (पश्चिमी) विधानसभा सीट से अतीक अहमद ने चुनाव लड़ा और विधायक बने. इसके बाद 1991 और 1993 का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा और फिर विधायक बने. 1996 में इसी सीट पर अतीक को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया और वह फिर से विधायक चुने गए.

दल बदलते आगे बढ़े
अतीक अहमद को राजनीति रसूख भूख भाया. उनकी समझ में आ चुका था कि सत्ता में रहने वाली पार्टी के साथ रहने का कुछ लाभ भी है. लेकिन कुछ समय बाद कुछ ऐसा हुआ कि अतीक अहमद ने 1999 में सपा की 'साइकिल' छोड़कक पूर्वी यूपी में तेजी से बढ़ती पार्टी अपना दल का दामन थाम लिया. इसके बाद अतीक अहमद प्रतापगढ़ से चुनाव लड़े लेकिन इस बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा. इसके बाद 2002 में अपना दल से वो फिर चुनाव लड़े और फिर विधायक बन गए. 2003 में जब यूपी में सपा सरकार बनी तो अतीक ने फिर से मुलायम सिंह का हाथ पकड़ लिया. 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अतीक को फूलपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया और वह सांसद बन गए.

बसपा विधायक की हत्या का आरोप
अतीक अहमद 2004 के आम चुनाव में फूलपुर से सपा के टिकट सांसद बन गए. इसके बाद इलाहाबाद की पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी. सीट पर उपचुनाव हुआ. सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया था. बसपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ के सामने राजू पाल को खड़ा किया. चुनाव में राजू ने अशरफ को हरा दिया. उपचुनाव में जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने राजू पाल की कुछ महीने बाद 25 जनवरी, 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में सीधे तौर पर सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को आरोपी बनाया गया था.

अतीक अहमद (File Photo)


मायावती के सत्ता में आते ही हौसले हुए पस्त
उत्तर प्रदेश की सत्ता मई, 2007 में मायावती के हाथ आ गई. अतीक अहमद के हौसलें पस्त होने लगे. उनके खिलाफ एक के बाद एक मुकदमे दर्ज हो रहे थे. बसपा विधायक राजू पाल की हत्या में नामजद आरोपी होने के बाद भी अतीक सांसद बने रहे. इसकी वजह से चौतरफा आलोचनाओं का शिकार बनने के बाद मुलायम सिंह ने दिसम्बर 2007 में बाहुबली सांसद अतीक अहमद को पार्टी से बाहर कर दिया. अतीक अहमद ने राजू पाल हत्याकांड के गवाहों को डराने धमाके की कोशिश की. लेकिन मायावती के कुर्सी पर आ जाने की वजह से अतीक अहमद कामयाब नहीं हो सके. इसी दौरान अतीक अहमद भूमिगत हो गए.

दिल्ली में किया सरेंडर
सपा सांसद अतीक अहमद गिरफ्तारी का वारंट जारी होने के बाद से ही फरार चल रहे थे. उनके सिर पर इनाम भी घोषित किया जा चुका था. इसी दौरान अतीक ने खुद को दिल्ली में पुलिस के हवाले की करने की योजना बनाई. वांरट और इनाम जारी होने के 6 माह बाद दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा के अपार्टमेंट से उनकी गिरफ्तारी दिखाई थी. उस वक्त अतीक ने कहा था कि उन्हें यूपी की मुख्यमंत्री मायावती से जान का खतरा है.

नैनी जेल से गुजरात की जेल में ट्रांसफर करने का निर्देश
अतीक अहमद पर देवरिया जेल में बंद रहने के दौरान एक रियल एस्‍टेट कारोबारी को अगवा करवा कर उनके साथ मारपीट करने का आरोप है. इस मामले के सामने आने के बाद पूर्व सांसद को बरेली जेल स्‍थानांतरित कर दिया गया था. इसके बाद चुनावों को देखते हुए अतीक को एक बार फिर से दूसरे जेल में भेज दिया गया. इस बार अतीक अहमद को नैनी जेल भेज दिया गया. अब सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी का अपहरण करवाने के आरोपी अतीक अहमद को उत्‍तर प्रदेश से बाहर गुजरात के जेल में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है.

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First published: April 23, 2019, 5:21 PM IST
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