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अब अनुष्ठान से सुधरेगी देश की अर्थव्यवस्था, माघ मेले में एक माह तक चलेगा हवन-पूजन...
Allahabad News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 11, 2020, 6:18 PM IST
अब अनुष्ठान से सुधरेगी देश की अर्थव्यवस्था, माघ मेले में एक माह तक चलेगा हवन-पूजन...
माघ मेले में देश की समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिए मौनी बाबा के आश्रम में चल रहा अनुष्ठान

मौनी बाबा के मुताबिक अर्थव्यवस्था (Economy) की कमज़ोरी से देश में कोहराम मचा हुआ है, लोग काफ़ी परेशान हैं. ऐसे में यह साधु-संतों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह आगे आएं और सहायता करें...अनुष्ठान में भक्ति गीतों व भजनों के बीच आरती करते हुए देश से रूठी हुई देवी लक्ष्मी (Goddess Laxmi) से मानने की मनुहार भी की जाती है..

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प्रयागराज. तीर्थराज प्रयागराज (Pryagraj) के संगम तट (Sangam Nagari) पर चल रहे माघ मेले में आये साधु-संत सिर्फ धर्म-आध्यात्म, गंगा और राम मंदिर (Ram Temple) पर ही चर्चा नहीं कर रहे हैं. बल्कि देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था (Economy) और आतंकवाद (Terrorism) की समस्या से जूझ रहे देश के ताजा हालातों को लेकर भी खासे फिक्रमंद हैं. उन्होंने देश की गिरती अर्थव्यवस्था और वर्तमान दौर की अन्य समस्याओं को लेकर अनोखे अनुष्ठान शुरू किए हैं. News 18 ने इन संतों की विशेष पूजा-पाठ अनुष्ठान का जायजा लिया.

अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अनुष्ठान
देश की गिरती हुई जीडीपी, बढ़ती महंगाई और रोज़गार के घटते अवसरों को लेकर फिक्रमंद भगवाधारी अब इन्हें ठीक करने की आध्यात्मिक अलख जगा रहे हैं और पूजा अनुष्ठान कर रहे हैं. माघ मेले में देश की अर्थव्यवस्था के मजबूत होने की कामना के साथ विशेष अनुष्ठान किये जा रहे हैं. परमहंस आश्रम के महंत शिव योगी मौनी महाराज के शिविर में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर त्रिशूल पूजा की जा रही है. त्रिशूल पूजा के साथ ही विशेष हवन व आरती भी हो रही है. इन अनुष्ठानों के ज़रिए धन की देवी लक्ष्मी की आराधना कर उनसे देश व यहां के नागरिकों पर मेहरबान होने व कृपा बरसाने की गुहार लगाई जा रही है.

magh mela, sangam nagari
देश के लिए अनुष्ठान




जीडीपी बढ़ने और महंगाई घटने के साथ ही मंदी दूर होने व रोजगार के मौके बढ़ने की कामना के लिए माघ मेले के पहले दिन पौष पूर्णिमा से शुरू हुआ अनुष्ठान पूरे एक महीने तक चलेगा. अर्थव्यवस्था की मजबूती की खातिर मौनी बाबा के पंडाल में चौवन त्रिशूल को एक साथ रखकर उनकी दिन में तीन बार पूजा की जाती है. बता दें कि इन त्रिशूलों को खास लाल रंग में रंगा गया है. पूजा के दौरान मेवों व फलों की आहुतियां दी जाती हैं तो साथ ही हवन भी किया जाता है. इतना ही नहीं पूजा के अंत में भक्ति गीतों व भजनों के बीच आरती करते हुए देश से रूठी हुई देवी लक्ष्मी के मानने की मनुहार भी की जाती है. अर्थव्यवस्था के लिए होने वाले इस खास अनुष्ठान की अगुवाई खुद मौनी बाबा करते हैं, जबकि इसमें कई दूसरे संत-महात्मा, पुरोहित व उनके भक्त शामिल होते हैं.



देश में कोहराम मचा है: मौनी बाबा
मौनी बाबा ने News 18 से बातचीत में कहा कि अर्थव्यवस्था की कमज़ोरी से देश में कोहराम मचा हुआ है, लोग काफ़ी परेशान हैं. ऐसे में यह साधु-संतों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह देश के लिए और देशवासियों की मदद के लिए आगे आएं. उन्होंने बताया कि आतंकवाद के नाश के लिए काले और सुख-शान्ति के लिए पीले त्रिशूल की पूजा की जा रही है. वहीं आतंकवाद के समूल नाश के काले त्रिशूल, ज्ञान-विद्या और बुद्धि के लिए श्वेत त्रिशूल व पीले त्रिशूल की पूजा सुख-शान्ति एश्वर्य और विजय प्राप्ति की कामना को लेकर हो रही है. ये अनुष्ठान पूरे माघ मेले के दौरान इसी तरह से चलता रहेगा और महाशिवरात्रि के पर्व पर पूर्णाहुति के साथ यह सम्पन्न होगा.

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First published: January 11, 2020, 6:18 PM IST
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